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अद्यतन सामयिक घटनाओं को नियमित रूप से पढ़ें (Read updated Current affairs regularly)

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Relevant & Updated Current Affairs (अद्यतन सामयिकी)

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देश की श‍िक्षा नीति में 34 साल बाद नये बदलाव किए गए हैं. 29.07.2020 को इस नई श‍िक्षानीति को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी. नई शिक्षा नीति (New Education Policy) के तहत बोर्ड परीक्षा (Board Exams) को सरल बनाने, पाठ्यक्रम का बोझ कम करने के साथ ही बचपन की देखभाल और शिक्षा पर जोर देते हुए स्कूल पाठ्यक्रम के 10+2 ढांचे में बदलाव किया गया है.

नई श‍िक्षा नीति में स्कूल के बस्ते, प्री प्राइमरी क्लासेस से लेकर बोर्ड परीक्षाओं, रिपोर्ट कार्ड, यूजी एडमिशन के तरीके, एमफिल तक बहुत कुछ बदला है. यहां जानें आख‍िर न्यू एजुकेशन पॉलिसी में इतने सालों बाद क्या बदला है.

इस नीति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा के साथ कृषि शिक्षा, कानूनी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और तकनीकी शिक्षा जैसी व्यावसायिक शिक्षाओं को इसके दायरे में लाया गया है. इसका मुख्य उद्देश्य है कि छात्रों को पढ़ाई के साथ साथ किसी लाइफ स्‍क‍िल से सीधा जोड़ना.

अभी तक आप आर्ट, म्यूजिक, क्राफ्ट, स्पोर्ट्स, योग आदि को सहायक पाठ्यक्रम (co curricular) या अतिरिक्त पाठ्यक्रम (extra curricular) एक्ट‍िविटी के तौर पर पढ़ते आए हैं. अब ये मुख्य पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगे, इन्हें एक्स्ट्रा करिकुलर एक्ट‍िविटी भर नहीं कहा जाएगा.

अभी तक शादी होने या किसी के बीमार होने पर किसी की पढ़ाई बीच में छूट जाती थी. अब ये व्यवस्था है कि अगर किसी कारण से पढ़ाई बीच सेमेस्टर में छूट जाती है तो इसे मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम के तहत आपको लाभ मिलेगा. मतलब अगर आपने एक साल पढ़ाई की है तो सर्टिफिकेट, दो साल की है तो डिप्लोमा मिलेगा. तीन या चार साल के बाद डिग्री दी जाएगी.

सरकार ने तय किया है कि अब सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का कुल 6 फीसदी शिक्षा पर खर्च होगा. फिलहाल भारत की जीडीपी का 4.43% हिस्सा शिक्षा पर खर्च होता है. वहीं मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर अब शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है. ये भी बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव है.

आयोग ने शिक्षकों के प्रशिक्षण पर खास जोर दिया है. जाहिर है कि एक अच्छा टीचर ही एक बेहतर स्टूडेंट तैयार करता है. इसलिए व्यापक सुधार के लिए शिक्षक प्रशिक्षण और सभी शिक्षा कार्यक्रमों को विश्वविद्यालयों या कॉलेजों के स्तर पर शामिल करने की सिफारिश की गई है.

सरकार अब न्यू नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क तैयार करेगी. इसमें ईसीई, स्कूल, टीचर्स और एडल्ट एजुकेशन को जोड़ा जाएगा. बोर्ड एग्जाम को भाग में बांटा जाएगा. अब दो बोर्ड परीक्षाओं को तनाव को कम करने के लिए बोर्ड तीन बार भी परीक्षा करा सकता है.

इसके अलावा अब बच्चों के रिपोर्ट कार्ड में लाइफ स्किल्स को जोड़ा जाएगा.जैसे कि आपने अगर स्कूल में कुछ रोजगारपरक सीखा है तो इसे आपके रिपोर्ट कार्ड में जगह मिलेगी. जिससे बच्चों में लाइफ स्किल्स का भी विकास हो सकेगा. अभी तक रिपोर्ट कार्ड में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था.

सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक हर बच्चे के लिए शिक्षा सुनिश्चित की जाए. इसके लिए एनरोलमेंट को 100 फीसदी तक लाने का लक्ष्य है. इसके अलावा स्कूली शिक्षा के निकलने के बाद हर बच्चे के पास लाइफ स्किल भी होगी. जिससे वो जिस क्षेत्र में काम शुरू करना चाहे, तो वो आसानी से कर सकता है.

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए कॉमन एंट्रेंस एग्जाम का ऑफर दिया जाएगा. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुसार, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (National Education Policy, NEP) को अब देश भर के विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित करने के लिए एडिशनल चार्ज दिया जाएगा. जिसमें वह हायर एजुकेशन के लिए आम यानी कॉमन एंट्रेंस परीक्षा का आयोजन कर सकता है.

NTA पहले से ही ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम JEE Main, मेडिकल प्रवेश परीक्षा - NEET, UGC NET, दिल्ली विश्वविद्यालय (DUET), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNUEE) जैसे केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित करता है.

पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान पद्धतियों को शामिल करने, 'राष्ट्रीय शिक्षा आयोग' का गठन करने और प्राइवेट स्कूलों को मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने से रोकने की सिफारिश की गई है. ये राष्ट्रीय श‍िक्षा आयोग भारत की प्राचीन ज्ञान पद्धतियों को समग्रता के साथ श‍िक्षा से जोड़ने का काम करेगा.

रिसर्च में जाने वालों के लिए भी नई व्यवस्था की गई है. उनके लिए 4 साल के डिग्री प्रोग्राम का विकल्प दिया जाएगा. यानी तीन साल डिग्री के साथ एक साल एमए करके एम फिल की जरूरत नहीं होगी. इसके बाद सीधे पीएचडी में जा सकते हैं. इसका मतलब ये हुआ कि सरकार ने नई श‍िक्षा नीति में अब एमफिल को पूरी तरह खत्म करने की बात कही है.

मल्टीपल डिसिप्लनरी एजुकेशन में अब आप किसी एक स्ट्रीम के अलावा दूसरा सब्जेक्ट भी ले सकते हैं. यानी अगर आप इंजीनियरिंग कर रहे हैं और आपको म्यूजिक का भी शौक है तो आप उस विषय को भी साथ में पढ़ सकते हैं. अब स्ट्रीम के अनुसार सब्जेक्ट लेने पर जोर नहीं होगा. पहले जैसे स्ट्रीम के अनुसार सब्जेक्ट का चुनाव करना होता था, अब उसमें भी बदलाव आएगा.

प्राथमिक स्तर पर शिक्षा में बहुभाषिकता को प्राथमिकता के साथ शामिल करने और ऐसे भाषा शिक्षकों की उपलब्धता को महत्व दिया दिया गया है जो बच्चों के घर की भाषा समझते हों. यह समस्या राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राज्यों में दिखाई देती है. इसलिए पहली से पांचवीं तक जहां तक संभव हो मातृभाषा का इस्तेमाल शिक्षण के माध्यम के रूप में किया जाए. जहां घर और स्कूल की भाषा अलग-अलग है, वहां दो भाषाओं के इस्तेमाल का सुझाव दिया गया है.

लड़कियों की शिक्षा जारी रहे इसके लिए उनको भावनात्मक रूप से सुरक्षित वातावरण देने का सुझाव दिया गया है. इसके लिए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय का विस्तार 12वीं तक करने का सुझाव नई शिक्षा नीति-2019 में है.

U.S. की NSF (नेशनल साइंस फाउंडेशन) की तर्ज पर सरकार NRF (नेशनल रिसर्च फाउंडेशन) ला रही है. इसमें न केवल साइंस बल्कि सोशल साइंस भी शामिल होगा. ये बड़े प्रोजेक्ट्स की फाइनेंसिंग करेगा. ये शिक्षा के साथ रिसर्च में युवाओं को आगे आने में मदद करेगा.

पहली व दूसरी कक्षा में भाषा व गणित पर काम करने पर जोर देने की बात नई शिक्षा नीति में शामिल है. इसके साथ ही चौथी व पांचवीं के बच्चों के साथ लेखन कौशल पर काम करने पर भी ध्यान देने की बात कही गई है. इसके  लिए भाषा सप्ताह, गणित सप्ताह व भाषा मेला या गणित मेला जैसे आयोजन होंगे.

इसमें पुस्तकालयों को जीवंत बनाने और अन्य एक्ट‍िविटी को कराने पर ध्यान देने की बात कही गई है. जैसे बच्चे स्टोरी टेलिंग, रंगमंच, ग्रुप स्टडी, पोस्टर और डिस्प्ले से भी सीखें. बच्चों को किताबों के अलावा दूसरे माध्यमों से सिखाने पर जोर है, ये बच्चों के बस्ते का बोझ कम करने के उद्देश्य से भी जरूरी माना गया है.

अर्ली चाइल्डहुड केयर एवं एजुकेशन के लिए करिकुलम एनसीईआरटी द्वारा तैयार होगा. इसे 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए डेव‍लप किया जाएगा. इसमें बुनियादी शिक्षा (6 से 9 वर्ष के लिए) के लिए फाउंडेशनल लिट्रेसी एवं न्यूमेरेसी पर नेशनल मिशन शुरू किया जाएगा.

इसके लिए राष्ट्रीय श‍िक्षा नीति में गिफ्टेड चिल्ड्रेन एवं गर्ल चाइल्ड के लिए विशेष प्रावधान किया गया है. इसके अलावा पॉलिसी में कक्षा 6 के बाद से ही वोकेशनल स्टडी को जोड़ा जाएगा.

शिक्षकों के सपोर्ट के लिए टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने की बात भी नई शिक्षा नीति में शामिल है. इसके लिए कंप्यूटर, लैपटॉप व फोन इत्यादि के जरिए विभिन्न ऐप का इस्तेमाल करके शिक्षण को रोचक बनाने की बात कही गई है.

64वीं संयुक्त मुख्य प्रतियोगिता परीक्षा का रिजल्ट 15 जुलाई तक निकलेगा. बीपीएससी के परीक्षा नियंत्रक अमरेंद्र कुमार ने रविवार को बताया कि 64वीं बीपीएससी मुख्य परीक्षा के उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन तेजी से हो रहा है और 15 जुलाई तक इसे पूरा कर मुख्य परीक्षा का रिजल्ट प्रकाशित कर दिये जाने की उम्मीद है. वहीं, 65वीं संयुक्त मुख्य प्रतियोगिता परीक्षा का आयोजन जुलाई के अंत तक होगा. परीक्षा नियंत्रक ने बताया कि इस दिशा में आयोग ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. यदि सरकार के द्वारा उनको सेंटर उपलब्ध करा दिया जायेगा, तो वे जुलाई के अंत तक परीक्षा ले लेंगे.

66वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा की अधियाचना अब तक नहीं आयी है. अमरेंद्र कुमार ने बताया कि इसके आने के बाद ही इस परीक्षा की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. विदित हो कि इस परीक्षा से संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का सिलेबस बदलने वाला है और इसे यूपीएससी के पैटर्न पर पूरी तरह आधारित किया जाना है. लिहाजा छात्र इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि एमएसएमई यानी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग की परिभाषा बदल दी गई है. इसमें निवेश की लिमिट में बदलाव किया गया है. 1 करोड़ निवेश या 10 करोड़ टर्नओवर पर सूक्ष्म उद्योग का दर्जा दिया जाएगा.

इसी तरह 10 करोड़ निवेश या 50 करोड़ टर्नओवर पर लघु उद्योग का दर्जा दिया जाएगा. वहीं 20 करोड़ निवेश या 100 करोड़ टर्नओवर पर मध्यम उद्योग का दर्जा होगा.निर्मला सीतारमण ने बताया कि मौजूदा दौर में ट्रेड फेयर संभव नहीं है.

200 करोड़ तक का टेंडर ग्‍लोबल नहीं होगा. यह एमएसएमई के लिए बड़ा कदम है. इसके अलावा एमएसएमई को ई-मार्केट से जोड़ा जाएगा. सरकार एमएसएमई के बाकी पेंमेंट 45 दिनों के अंदर करेगी.

वित्त मंत्री के मुताबिक 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज में से 3 लाख करोड़ एमएसएमई यानी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग को जाएंगे. इनको बिना गारंटी लोन मिलेगा. इसकी समयसीमा 4 साल की होगी. इन्‍हें 12 महीने की छूट मिलेगी. ये ऑफर 31 अक्‍टूबर 2020 तक के लिए है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने  कोरोना वायरस को महामारी (pandemic) घोषित कर दिया गया है.

भारत में कोरोना वायरस से पीड़ितों की संख्या 73 हो गई है. पीड़ित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. इस वायरस के चलते भारत सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए दुनिया के सभी देशों के लिए जारी वीजा को रद्द कर दिया है. ये वीजा अभी 15 अप्रैल तक के लिए रद्द कर दिया गया है. जिसका मतलब ये है कि दुनिया का कोई भी नागरिक कोरोना वायरस की वजह से भारत में नहीं आ पाएगा. सिर्फ डिप्लोमेट्स को इस फैसले में छूट है.

मेडिकल साइंस की भाषा में पैनडेमिक बीमारी के ऐसे हालात को कहा जाता है. जिसकी वजह से दुनियाभर में एक ही समय पर बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हो जाते हैं. साल 2009 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने  स्वाइन फ्लू (swine flu H1N1) को महामारी घोषित कर दिया था.  जिसकी वजह से कई लोगों की जान गई थी.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने आज अपना चौथा पूर्ण बजट पेश किया। वित्त वर्ष 2020-21 के बजट प्रस्तावों व विनियोग विधेयक सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश का 5,12,860.72 करोड़ का बजट किया पेश किया। पिछले वित्तीय वर्ष 2019-20 के मुकाबले इस बार 33 हजार 159 करोड़ रुपये ज्यादा का बजट पेश हुआ। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने पिछले साल के मुकाबले इस बार 6.50 फीसदी से ज्यादा का बजट पेश किया।

उत्तर प्रदेश बजट 2020-21 में ये रहा खास

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और वित्त मंत्री सुरेश खन्ना उत्तर प्रदेश का बजट पेश करने विधानसभा पहुंचे।

  • मुख्यमंत्री किसान दुर्घटना कल्याण बीमा के नाम से नई योजना 500 करोड़ आवंटित

  • जीएसटी और वैट से 91568 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान

  • आबकारी से 37500, स्टांप एवं पंजीयन से 23197 और वाहन कर से 8650 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का लक्ष्य

  • गांवों में जल जीवन मिशन को 3000 करोड़ रुपये आवंटित

  • अटल आवासीय विद्यालय के लिए 270 करोड़ रुपये और केजीएमयू को 919 करोड़ रुपये

  • मुख्यमंत्री शिक्षुता प्रोत्साहन योजना के लिए 100 करोड़ रुपये। इसके तहत युवाओं को प्रशिक्षण के दौरान 2500का स्टाइपेंड

  • युवाओं को अपना कारोबार शुरू करने के लिए युवा हब योजना

  • गंगा एक्सप्रेस वे के लिए 2000 करोड़ रुपये

  • वाराणसी में सांस्कृतिक केंद्र के लिए 180 करोड़, काशी विश्वनाथ मंदिर विस्तारीकरण के लिए 200 करोड़, वैदिक विज्ञान केंद्र के लिए 18 करोड़

  • अयोध्या में पर्यटन और संस्कृति की योजनाओं के लिए 95 करोड़ और गोरखपुर में रामगढ़ ताल वाटर स्पोर्ट्स के लिए 25 करोड़

  • कन्या सुमंगला योजना के लिए 1200 करोड़

  • पीडब्लूडी पूर्वांचल निधि में 300 और बुंदेलखंड निधि में 210 करोड़ आवंटित

  • दिल्ली से मेरठ के बीच रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के लिए 900 करोड़ आवंटित

  • आगरा मेट्रो के लिए 286 करोड़, जबकि कानपुर मेट्रो के लिए 358 करोड़ आवंटित

  • गोरखपुर और अन्य शहरों में मेट्रो प्रस्ताव तैयार किये जा रहे हैं इनके लिए 200 करोड़ आवंटित

  • ग्रामीण जलापूर्ति कार्यक्रमों के लिए 3000 करोड़ आवंटित

  • बुंदेलखंड विंध्य के गुडवत्ता प्रभावित गांवों में पाइप पेयजल योजना के लिए 3300 करोड़ आवंटित

  • अयोध्या में एयरपोर्ट निर्माण के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।

  • काम करने वाली महिलाओं को रात के 10 बजे से सुबह 6 बजे तक घर पहुंचाने के लिए 112 नंबर पर सिर्फ कॉल करना पड़ता है। पुलिस इसके बाद उन्हें घर पहुंचाएगी। इन पीआरवी वैन में महिला सिपाही भी होती है : सुरेश खन्ना

  • लखनऊ और नोएडा में साइबर क्राइम थाने काम कर रहे हैं। राज्य में 16 और साइबर थाने बनाए जाएंगे : सुरेश खन्ना

  • मेरठ से प्रयागराज तक देश के सबसे लंबे गंगा एक्सप्रेस वे का निर्माण कराया जाएगा वहीं, नोएडा के जेवर में ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट के लिए 2 हजार रुपये आवंटित होंगे : सुरेश खन्ना

  • 1 ट्रिलियन डॉलर की ईकोनॉमी का लक्ष्य रखा गया : सुरेश खन्ना

  • वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि केंद्र सरकार के नीति आयोग के गठन से विकास हुआ है। नीति आयोग की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में राज्य नीति आयोग का गठन होगा।

  • विधानसभा में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने 5 लाख 860 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। वित्त मंत्री ने कहा उत्तर प्रदेश भगवान बुद्ध, भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण की भूमि है।

  • कांग्रेस के विधायक काली पट्टी बांध कर विधानसभा पहुंचे।

केंद्र सरकार, असम सरकार और बोडो समूहों – जिसमें चरमपंथी गुट नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (NDFB) के सभी गुट शामिल हैं – ने शांति और विकास के लिए बोडोलैंड समझौते पर हस्ताक्षर किए। 

फिलहाल क्या समझौता हुआ है?

बोडोलैंड को अब तक आधिकारिक तौर पर बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (बीटीसी) कहा जाता है। नए समझौते के लागू होने के बाद इसका नाम बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन (बीटीआर) हो जाएगा। बीटीआर को अधिक अधिकार दिए जाएंगे। बीटीसी की मौजूजा 40 सीटों को बढ़ाकर 60 कर दिया जाएगा और इलाके में कई नए जिलों का गठन होगा। गृह विभाग को छोड़ अन्य विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार बीटीआर के पास रहेंगे।

समझौते में कहा गया है, “असम राज्य की क्षेत्रीय अखंडता को अक्षुण्ण रखते हुए उनकी मांगों के लिए एक व्यापक और अंतिम समाधान के लिए बोडो संगठनों के साथ बातचीत की गई।”

बीटीसी क्या थी ?यह संविधान की छठी अनुसूची के तहत एक स्वायत्त निकाय थी। पहले दो बोडो समझौते हुए हैं। दूसरे समझौते के बाद बीटीसी का गठन हुआ। 1987 से ABSU के नेतृत्व वाला जो आंदोलन शुरू हुआ था, वह 1993 में बोडो समझौते के बाद समाप्त हुआ। इस समझौते ने बोडोलैंड स्वायत्त परिषद (BAC) का मार्ग प्रशस्त किया, लेकिन ABSU ने अपना समझौता वापस ले लिया और एक अलग राज्य की अपनी मांग शुरू की। 2003 में दूसरे बोडो समझौते पर चरमपंथी समूह बोडो लिबरेशन टाइगर फोर्स (BLTF), केंद्र सरकार और राज्य ने हस्ताक्षर किए थे। इसके चलते बीटीसी हुई थी।

बोडो मुद्दे का इतिहास

असम में अधिसूचित अनुसूचित जनजातियों में बोडो एक बड़ा समुदाय है। असम की आबादी का 5 से 6 प्रतिशत हिस्सा बोडो का है। बोडो राज्य बनाने की पहली संगठित मांग 1967-68 में असम के राजनीतिक दल प्लेन्स ट्राइबल काउंसिल के बैनर तले की गई थी। 1985 में असम आंदोलन का समापन असम समझौते में हुआ। इस समझौते को बोडो समुदाय के कई लोगों ने असमिया भाषी समुदाय के हितों पर ध्यान केंद्रित करने के रूप में देखा।
1987 में उपेंद्र नाथ ब्रह्मा के नेतृत्व में ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (ABSU) ने बोडो राज्य की मांग को फिर से उठाया। अक्टूबर 1986 में रंजन दायमरी के नेतृत्व में सशस्त्र समूह बोडो सिक्योरिटी फोर्स का गठन हुआ। बाद में इसका नाम बदलकर एनडीएफबी कर दिया गया और बाद में यह कई गुटों में बंट गया।
27 जनवरी 2020 को केंद्र सरकार, असम सरकार और एनडीएफबी ने समझौते पर हस्ताक्षर किया। समझौते के ज्ञापन में कहा गया है, ” सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन्स के तहत सभी एनएफडीबी गुट हिंसा का रास्ता छोड़ देंगे, अपने हथियार सरेंडर कर देंगे और इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के एक महीने के भीतर अपने हथियारबंद संगठनों को समाप्त कर देंगे।”

मिशन इंद्रधनुष अभियान को भारत सरकार के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी बच्चों को टीकाकरण के अंतर्गत लाने के लिये "'मिशन इंद्रधनुष'" को सुशासन दिवस के अवसर पर 25 दिसंबर 2014 प्रारंभ किया गया था ' इंद्रधनुष के सात रंगों को प्रदर्शित करने वाला मिशन इंद्रधनुष का उद्देश्य उन बच्चों का 2020 तक टीकाकरण करना है जिन्हें टीके नहीं लगे हैं या डिफ्थेरिया, बलगम, टिटनस ,पोलियो, तपेदिक, खसरा तथा हेपिटाइटिस-बी को रोकने जैसे सात टीके आंशिक रूप  से लगे हैं।

पहले चरण में देश में 221 जिलों की पहचान की है, जिसमें 50 प्रतिशत बच्चों को टीके नहीं लगे हैं या उन्हें आंशिक रूप से टीके लगाए गए हैं। इन जिलों को नियमित रूप से टीकाकरण की स्थिति सुधारने के लिए लक्ष्य बनाया जाएगा। मंत्रालय का कहना है कि 201 जिलों में से 82 जिले केवल चार राज्य-उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश तथा राजस्थान से हैं और चार राज्यों के 42 जिलों में 25 प्रतिशत बच्चों को टीके नहीं लगाए गए हैं या उन्हें आंशिक रूप से टीके लगाए गए हैं।

 

भारत में टीकों से वंचित या आंशिक टीकाकरण वाले करीब 25 प्रतिशत बच्चे इन चार राज्यों के 82 जिलों में हैं। देश में नियमित टीकाकरण कवरेज में सुधार के लिए इन जिलों में गहन प्रयास किए जाएंगे। इस कार्यक्रम का अंतिम लक्ष्य भारत में सभी बच्चों और गर्भवती महिलाओं को ऐसी बीमारियों से सुरक्षित करना है जिनसे बचाव संभव है।

विशेष ध्यान वाले क्षेत्र

मिशन इंद्रधनुष के तहत पहले चरण में 201 जिलों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का लक्ष्य तय किया है तथा 2015 में दूसरे चरण में 297 जिलों को लक्ष्य बनाया गया है। मिशन के पहले चरण का कार्यान्वयन 201 उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में 7 अप्रैल,2015 पर विश्व स्वास्थ्य दिवस से प्रारंभ हुआ।

वाली बस्तियों पर ध्यान दिया जाएगा। इन क्षेत्रों में भौगोलिक, जनांकिकीय, जातीय और संचालन संबंधी अन्य चुनौतियों के कारण कम टीके लगाए जा सके हैं। प्रमाणों से पता चलता है कि अधिकतर टीकाकरण से वंचित और आंशिक टीकाकृत बच्चे इन्हीं क्षेत्रों में हैं।

विशेष टीकाकरण अभियानों के जरिए निम्नलिखित क्षेत्रों को लक्ष्य बनाया जाएगा:

पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम के जरिए उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान की गई। इन क्षेत्रों में ऐसी आबादी रहती है

  1. प्रवासियों की शहरी झुग्गी बस्तियां

  2. घुमंतू प्रजातियां

  3. भट्टा मजदूर

  4. निर्माण स्थल

  5. अन्य प्रवासी ( मछुआरों के गांव, दूसरी जगह रहने वाली आबादी के नदी तटीय क्षेत्र इत्यादि) तथा

  6. अल्प सेवा पहुंच वाले और दूर दराज के क्षेत्र ( वन क्षेत्र में रहने वाली और आदिवासी आबादी इत्यादि)

  7. निम्न नियमित टीकाकरण वाले क्षेत्र (खसरे वाले क्षेत्र / टीका निवारक रोग प्रकोप वाले क्षेत्र)

  8. खाली पड़े उप-केंद्र वाले क्षेत्र: तीन महीनों से अधिक समय से कोई एएनएम तैनात नहीं

  9. नियमित टीकाकरण से अछूते रह गए क्षेत्र: एएनएम लंबी छुट्टी पर या ऐसा ही कोई अन्य कारण

  10. छोटे गांव, बस्तियों, आरआई सत्रों के लिए अन्य गांव के साथ जोड़े गए धनिस या पुरबास

रोगों की पहचान

मिशन इंद्रधनुष के लिए सात बीमारियों डिप्थीरिया, काली खांसी, टेटनस, पोलियो, टीबी (क्षय रोग), खसरा और हेपेटाइटिस-बी रोगों की पहचान की गई है।

कार्यक्रम के लक्ष्य

मंत्रालय का कहना है कि प्रतिवर्ष पांच प्रतिशत और उससे अधिक बच्चों को टीकाकरण कवरेज में शामिल करने की प्रक्रिया तेज करने के लिए तथा 2020 तक संपूर्ण कवरेज के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मिशन को अपनाया गया है। योजना के अनुसार प्रणालीबद्ध टीकाकरण अभियान पुराने अभियान के जरिए चलाया जाएगा, जिसका लक्ष्य उन बच्चों को कवर करना है जो टीकाकरण से वंचित रह गए हैं। ऐसा लक्षित है कि मिशन इंद्रधनुष के अंतर्गत जनवरी तथा जून 2015 के बीच चार विशेष टीकाकरण अभियान चलाए जाएंगे। इसकी व्यापक नीति होगी और अभियानों की निगरानी की जाएगी। मिशन की नीति बनाने और उसे लागू करने में पोलियो कार्यक्रम के कार्यान्वयन की सफलता से सीख ली जाएगी। पहले चरण में 201 जिले कवर किए जाएंगे और 2015 में दूसरे चरण में 297 जिलों को लक्ष्य बनाया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्रालय ने विभिन्न महत्वपूर्ण संगठनों को भी इसमें भागीदारी दी है निर्धारित है कि  विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ, रोटरी इंटरनेशनल तथा अन्य दाता सहयोगी मंत्रालय को तकनीकी समर्थन देंगे। मास मीडिया, अंतर-वैयक्तिक संचार, निगरानी की मजबूत व्यवस्था, योजना मूल्यांकन मिशन इंद्रधनुष के महत्वपूर्ण घटक हैं।

धानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के सभी घरों तक बिजली पहुंचाने के लिए 'सौभाग्य' योजना की शुरुआत की है. नरेंद्र मोदी ने जनसंघ नेता दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर इस महत्वपूर्ण योजना की घोषणा की है. सौभाग्य का मतलब 'सहज बिजली हर घर योजना' है. इसके तहत साल 2019 तक हर गांव, हर शहर के हर घर तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. मोदी की मंशा है कि 31 मार्च 2019 तक इसे पूरा किया जाय.

इस योजना के तहत साल 2011 के सामाजिक आर्थिक और जाति जनगणना में दर्ज गरीबों को बिजली का कनेक्शन फ्री दिया जाएगा. जिन लोगों का नाम इस जनगणना में नहीं है वह भी 500 रुपये का भुगतान कर बिजली का कनेक्शन हासिल कर सकेंगे. इस राशि को 10 बराबर किस्तों में बिजली के बिलों के रूप में वसूला जाएगा.

सौभाग्य योजना के तहत सुदूर व दुर्गम क्षेत्रों में बिजली से वंचित लोगों को मोदी सरकार बैटरी बैंक उपलब्ध कराएगी. इसके तहत 200 से 300 डब्ल्यूपी का सोलर पावर पैक दिया जायेगा, जिसमें पांच एलईडी लाइट, एक पंखा, एक पावर प्लग काम कर पायेगा. इस पैक के लिए 5 साल की मेंटेनेंस की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. सौभाग्य योजना के तहत सबको बिजली उपलब्ध कराने की इस पहल में बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान व पूर्वोत्तर राज्य शामिल हैं.

हर साल प्राकृतिक आपदा के चलते भारत में किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है. बाढ़, आंधी, ओले और तेज बारिश से उनकी फसल खराब हो जाती है. उन्हें ऐसे संकट से राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) शुरू की है. इसे 13 जनवरी 2016 को शुरू किया गया था.

इसके तहत किसानों को खरीफ की फसल के लिये 2 फीसदी प्रीमियम और रबी की फसल के लिये 1.5% प्रीमियम का भुगतान करना पड़ता है.

PMFBY में प्राकृतिक आपदाओं के कारण खराब हुई फसल के मामले में बीमा प्रीमियम को बहुत कम रखा गया है. इससे PMFBY तक हर किसान की पहुंच बनाने में मदद मिली है.

PMFBY योजना वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए भी बीमा सुरक्षा प्रदान करती है. इसमें हालांकि किसानों को 5% प्रीमियम का भुगतान करना पड़ता है.

भारतीय कृषि बीमा कंपनी (एआईसी या AIC) इस योजना को चलाती है.

योजना के उद्देश्य

  1. प्राकृतिक आपदा, कीड़े और रोग की वजह से सरकार द्वारा अधिसूचित फसल में से किसी नुकसान की स्थिति में किसानों को बीमा कवर और वित्तीय सहायता देना.

  2. किसानों की खेती में रुचि बनाये रखने के प्रयास एवं उन्हें स्थायी आमदनी उपलब्ध कराना.

  3. किसानों को कृषि में इन्नोवेशन एवं आधुनिक पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना.

  4. कृषि क्षेत्र में ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करना.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार, (1 फरवरी 2020) को प्रधानमंत्री कृषि ऊर्जा सुरक्षा उत्थान महाभियान (पीएम कुसुम) के विस्तार की घोषणा की। इस योजना के तहत 20 लाख किसानों को सोलर पंप लगाने में मदद की जाएगी।

वित्त मंत्री ने 2020-21 का बजट पेश करते हुए कहा कि 15 लाख किसानों को ग्रिड से जुड़े सोलर पंप लगाने के लिए धन मुहैया कराया जाएगा। किसान इन सोलर पंपों से बनने वाली अतिरिक्त बिजली की आपूर्ति ग्रिड को भी कर सकेंगे। मोदी सरकार ने पिछले कार्यकाल में फरवरी 2019 में पीएम कुसुम योजना की शुरुआत की थी, जिसके लिए 34,422 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था। 

सीतारमण ने लोकसभा में कहा कि इस योजना से किसानों की डीजल और केरोसिन तेल पर निर्भरता घटी है और वे सौर ऊर्जा से जुड़े हैं। इस योजना से किसान सौर ऊर्जा उत्पादन करने और उसे ग्रिड को बेचने में सक्षम हुए हैं। उन्होंने कहा कि किसान अपनी बंजर जमीन पर सौर ऊर्जा पैदा कर आमदनी भी कमा सकेंगे। 

पीएम कुसुम योजना के तीन घटक हैं- 10,000 मेगावाट क्षमता के ग्रिड से जुड़े विकेंद्रीकृत नवीकरणीय बिजली संयंत्र, 17.50 लाख ग्रिड से पृथक सौर बिजली कृषि पंप और ग्रिड से जुड़े हुए 10 लाख सौर बिजली कृषि पंपों का सोलराइजेशन।

योजना के तहत इन तीनों घटकों को मिलाकर 2022 तक कुल 25,750 मेगावाट सौर क्षमता तैयार करने की योजना है। 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को अपना दूसरा बजट पेश करते हुए अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए एक तरफ उदारीकरण को बढ़ावा देने पर जोर दिया, वहीं दूसरी तरफ लोगों के जीवन को आसान बनाने के लिए कई उपायों की घोषणा की। इनकम टैक्स, शिक्षा, स्वास्थ्य से लेकर बैंक में जमा आपके पैसों की गारंटी सहित कई मोर्चों पर निर्मला सीतारमण ने बड़े ऐलान किए हैं। 

1. व्यक्तिगत वित्त

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स ऐक्ट के कुछ सेक्शंस के तहत टैक्स छूट नहीं लेने पर एक नए टैक्स स्लैब और नए टैक्स रेट से टैक्स देने का विकल्प ऑफर किया है। यह ऑफर उन लोगों के लिए फायदेमंद साबित होगा, जो अपनी कमाई का ज्यादा हिस्सा निवेश नहीं कर पाते हैं। नई व्यवस्था के तहत आप चाहें तो नया टैक्स स्लैब अपना सकते हैं या फिर पुरानी व्यवस्था के तहत ही टैक्स दे सकते हैं। नई और पुरानी दोनों ही व्यवस्था के तहत 5 लाख रुपये तक की आमदनी पर कोई टैक्स नहीं देना होगा।

नए विकल्प के तहत 5 से 7.5 लाख रुपये तक की आय पर 10%, 7.5 से 10 लाख रुपये तक की आमदनी पर 15%, 10-12.5 लाख रुपये तक की आय पर 20% और 12.5 से 15 लाख रुपये तक की आमदनी पर 25 पर्सेंट टैक्स देना होगा। कम दर से टैक्स देने के लिए आपको सभी तरह की छूट से मोह त्यागना होगा।

इसके साथ ही, हाउजिंग लोन के ब्याज भुगतान पर मिलने वाली 3.5 लाख रुपये तक के टैक्स छूट को 31 मार्च 2021 तक के लिए बढ़ा दिया है। पिछले बजट में निर्मला सीतारमण ने हाउजिंग लोन के ब्याज पर टैक्स छूट सीमा को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 3.5 लाख रुपये कर दिया गया था। मोदी सरकार ने जुलाई 2014 में अपने पहले बजट में इसे 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये किया था।

2. रक्षा

बजट 2020 में रक्षा बजट में 6% की बढ़ोतरी की गई। यह अब 3.37 लाख करोड़ हो गया है। पिछले साल तक यह 3.18 लाख करोड़ रुपये था। वहीं रक्षा क्षेत्र में दी जानेवाली पेंशन को जोड़ लें तो यह 4.7 लाख करोड़ हो गया है। इस बार रक्षा क्षेत्र का पेंशन बजट 1.33 लाख करोड़ रुपये है। पिछले साल 1.17 लाख करोड़ रुपये दिए गए थे। हथियारों की खरीद और आधुनिकीकरण के लिए 1,10,734 करोड़ दिए गए हैं।

3. शिक्षा

शिक्षा क्षेत्र के लिए भी वित्त मंत्री ने कई ऐलान किए हैं। इस बजट में शिक्षा के लिए 99,300 करोड़ रुपये शिक्षा के लिए और 3,000 करोड़ स्किल डिवेलपमेंट के लिए आवंटित किए गए हैं। वित्त मंत्री ने जल्द नई शिक्षा नीति की घोषणा करने की बात कही। उन्होंने कहा कि मार्च 2021 तक 150 उच्च शिक्षण संस्थान शुरू हो जाएंगे। इन संस्थानों में स्किल्ड प्रशिक्षण दिया जाएगा। क्वॉलिटी एजुकेशन के लिए डिग्री लेवल ऑनलाइन स्कीम शुरू करने के साथ नैशनल पुलिस यूनिवर्सिटी और नैशनल फरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी का भी प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा, डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए हर जिला अस्पताल के साथ मेडिकल कॉलेज बनेगा।

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4. स्वास्थ्य 

इस बार के बजट में भी स्वास्थ्य क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि 69 हजार करोड़ रुपये हेल्थ सेक्टर के लिए प्रस्तावित है। इसमें पीएम जन आरोग्य योजना का 6,400 करोड़ रुपये भी शामिल हैं। पीएम जन आरोग्य योजना के तहत 20 हजार से ज्यादा अस्पताल पैनल में हैं और इसे बढ़ाने की योजना है। मिशन इंद्रधनुष का दायरा बढ़ाकर इनमें 12 बीमारियां और जोड़ दी गई हैं। इसमें पांच नए वैक्सीन जोड़ दिए गए हैं। इस वर्ष 2020-21 में स्वच्छ भारत अभियान के लिए 12,300 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं। हर घर तक पाइप से पानी पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन पर काम चल रहा है, जिसे 3.6 लाख करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं।

5. इन्फ्रास्ट्रक्चर

इन्फास्ट्रक्चर पर अगले पांच साल में 100 लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा। देशभर में राजमार्गों का जाल फैलाने के लिए 1.7 लाख करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। हाउसिंग, स्वच्छ पानी, हेल्थकेयर, शिक्षण संस्थान, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, वेयरहाउसिंग, सिंचाई जैसे क्षेत्रों में निवेश किए जाएंगे। सिंगल विंडो ई-लॉजिस्टिक मार्केट बनेगा। 2,500 किलोमीटर एक्सप्रेस हाईवे, 9,000 किलोमीटर इकनॉमिक कॉरिडोर, 2000 किलोमीटर स्ट्रेटिजिक हाईवे बनेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि 6,000 किलोमीटर हाइवे 2024 से बनेंगे। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे, चेन्नै-बेंगलुरु एक्सप्रेस जल्द बनकर तैयार होगा।

6. रेलवे

केंद्रीय बजट में रेलवे को 70,000 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता आवंटित की गई है तथा वर्ष के दौरान रेलवे के लिए कुल 1.61 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का प्रावधान किया गया है। जल्द खराब होने वाले कृषि उत्पादों के लिए राष्ट्रीय शीत आपूर्ति श्रृंखला के विकास की योजना के तहत निजी सरकारी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल में किसान रेल चलाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का चुनिंदा मेल एक्सप्रेस और मालगाड़ियों के जरिए जल्द खराब होने वाले सामान की ढुलाई के लिए रेफ्रिजरेटेड पार्सल वैन का भी प्रस्ताव है।

7. गांव एवं किसान

किसानों तथा ग्रामीण भारत के लिए 2.83 लाख करोड़ रुपये का बजट प्रवाधान किया गया है, जबकि अगले साल 15 लाख करोड़ रुपये का कृषि ऋण देने का लक्ष्य है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने प्रधानमंत्री आवास बीमा योजना के तहत 6.11 करोड़ किसानों का बीमा कराया है और उनकी सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने पर कायम है। उन्होंने कहा कि सरकार सस्टेनेबल क्रॉपिंग पैटर्न पर काम कर रहे हैं और केंद्र का दलहन पर खास फोकस है। इसके अलावा, पीएम कुसुम स्कीम के जरिए 20 लाख किसानों को सोलर पंप मुहैया करवाए जाएंगे और 100 सूखाग्रस्त जिलों के विकास पर काम होगा।

8. कॉर्पोरेट

बजट के बड़े ऐलानों में डिविडेंड डिस्ट्रिब्यूशन टैक्स (DDT) को खत्मा भी रहा। केंद्र के इस कदम से कंपनियों ने राहत की सांस ली है। सरकार के इस फैसले से सरकारी खजाने पर 25,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि अब सीधे डिविडेंड हासिल करने वाले पर टैक्स लगेगा।

9. पर्यटन

बजट में संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बड़ी घोषणाएं की गई। वित्त मंत्री ने कारोबारी वर्ष 2020-21 में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 2,500 करोड़ रुपये के खर्च का प्रावधान रखा है। सरकार पांच पुरातात्विक स्थलों का कायाकल्प करेगी। ये पुरातात्विक स्थान राखीगढ़ी (हरियाणा), हस्तिनापुर (यूपी), शिवसागर (असम), धोलावीरा (गुजरात) और आदिचेल्लनूर (तमिलनाडु) होंगे। इन सभी जगहों पर म्यूजियम बनेंगे, जिससे यहां टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। सरकार संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एक डीम्ड यूनिवर्सिटी भी खोलेगी।

10. दूरसंचार

केंद्र सरकार गांव-गांव ब्रॉडबैंड पहुंचाने की योजना भारत नेट (भारत ब्रॉडबैंक नेटवर्क लिमिटेड) का आगे और विस्तार करने वाली है। अगले वित्त वर्ष में इसके लिए 6,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

वर्ष 2019-2020 का इकोनॉमिक सर्वे या आर्थ‍िक सर्वेक्षण संसद में पेश कर दिया गया है. इस सर्वे रिपोर्ट में देश की अर्थव्‍यवस्‍था को लेकर कई अहम आंकड़े पेश किए गए हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2020-21 में GDP ग्रोथ रेट 6-6.5 फीसदी के बीच रहेगी.

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जीडीपी ग्रोथ रेट को लेकर सरकार का ये अनुमान चालू वित्त वर्ष के मुकाबले 0.5 से 1 फीसदी तक अधिक है. बता दें कि सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट के अनुमान को 5 फीसदी पर रखा है.आर्थिक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक राजकोषीय ग्रोथ 5 फीसदी रहने का अनुमान है.

  1. क्रूड की कीमतों में राहत से चालू खाता घाटा कम हुआ. वर्ष 2019-20 की प्रथम छमाही में आयात में कमी आई जो निर्यात में कमी से कहीं अधिक है.

  2. मुद्रास्फीति की दर अप्रैल 2019 में 3.2 फीसदी से तेजी से गिरकर दिसंबर, 2019 में 2.6 फीसदी पर आ गई.

  3. आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि वर्ष 2019-20 की दूसरी छमाही में आर्थिक विकास की गति तेज होने में 10 क्षेत्रों का प्रमुख योगदान रहा है. 

  4. सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है कि FY 2020-2025 के बीच सरकार इंफ्रा सेक्‍टर में 102 लाख करोड़ का निवेश करेगी.

  5. सर्वे रिपोर्ट में सलाह दी गई है कि अगले तीन साल में इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर 1.4 ट्रिलियन डॉलर यानी 100 लाख करोड़ के निवेश की जरुरत है ताकि इकोनॉमी की ग्रोथ में यह बाधा न बने. 

  6. साल 2014 से ही महंगाई निरंतर घटती जा रही है.2014-19 के दौरान अधिकतर आवश्‍यक खाद्य पदार्थों की कीमतों में उतार-चढ़ाव में उल्‍लेखनीय कमी आई है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत की विशाल अर्थव्यवस्था की ग्रोथ के लिए एक कुशल बैंकिंग क्षेत्र की आवश्यकता है.

  7. आर्थिक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक भारत को 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए व्यापार अनुकूल नीति को प्रोत्साहन देना अहम है. इसके साथ ही ‘एसेम्बल इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड’ को ‘मेक इन इंडिया’ से जोड़ने का सुझाव दिया गया है. इससे भारत के निर्यात बाजार का हिस्सा 2025 तक लगभग 3.5 प्रतिशत तथा 2030 तक 6 प्रतिशत तक बढ़ सकता है.

  8. सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है कि औद्योगिक क्षेत्र का प्रदर्शन वर्ष 2017-18 की तुलना में वर्ष 2018-19 में सुधरा है. हालांकि, राष्‍ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) द्वारा अनुमानित सकल घरेलू उत्‍पाद के अनुसार वर्ष 2018-19 की पहली छमाही में 8.2 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2019-20 की पहली छमाही (एच1) (अप्रैल-सितम्‍बर) में औद्योगिक क्षेत्र का सकल मूल्‍यवर्धन 1.6 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया.

  9. औद्योगिक क्षेत्र में कम वृद्धि की मुख्‍य वजह विनिर्माण क्षेत्र है, जिसमें वर्ष 2019-20 की पहली छमाही में 0.2 प्रतिशत की नकारात्‍मक वृद्धि दर्ज की गई. यहां बता दें कि सकल मूल्‍यवर्धन अर्थशास्त्र में, किसी भी क्षेत्र, उद्योग, अर्थव्यवस्था या व्यावसायिक क्षेत्र में उत्पादित माल व सेवाओं के मूल्य की माप है.

  10. औद्योगिक उत्‍पादन सूचकांक (आईआईपी) में वर्ष 2017-18 में 4.4 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2018-19 में 3.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. मौजूदा वर्ष 2019-20 (अप्रैल-नवम्‍बर) के दौरान पिछले वर्ष की इसी अवधि में 5 फीसदी की तुलना में आईआईपी में महज 0.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

  11. साल 2018-19  के दौरान भारतीय रेलवे ने 120 करोड़ टन माल ढुलाई की और यह चौथा सबसे बड़ा माल वाहक बना.इसी तरह रेलवे 840 करोड़ यात्रियों की बदौलत दुनिया का सबसे बड़ा यात्री वाहक बना है.

2019 की सर्वे रिपोर्ट में क्‍या था?

बीते साल सर्वे रिपोर्ट में बताया गया था कि जीडीपी की वृद्धि दर वर्ष 2017-18 में 7.2 फीसदी की जगह वर्ष 2018-19 में 6.8 फीसदी रही. वहीं अच्छी विनिर्माण और निर्माण गतिविधि के कारण 2018-19 में औद्योगिक वृद्धि में भी तेजी आई थी. साल 2017-18 में ये दर 5.9 फीसदी था जो 2018-19 में 6.9 फीसदी बताया गया था. राजकोषीय घाटा 2017-18 में जीडीपी के 3.5 फीसदी से घटकर 2018-19 में 3.4 फीसदी रह गया.

साल 2019 के सर्वे रिपोर्ट की मुताबिक भारतीय मुद्रा के संदर्भ में रुपये के अवमूल्यन के कारण जहां 2018-19 के दौरान निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई, वहीं आयात में कमी आई. हालांकि, एक साल पहले के मुकाबले विदेशी मुद्रा भंडार कम हुआ है. साल 2017-18 में विदेशी मुद्रा भंडार 424 बिलियन डॉलर था जो 2018-19 में 412.9 बिलियन डॉलर रह गया.

बीते साल के आर्थिक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक 2018-19 में महंगाई की दर 3.4 फीसदी तक सीमित रही. सेवा क्षेत्र (निर्माण को छोड़कर) की वृद्धि दर 2017-18 के 8.1 फीसदी से मामूली रूप से गिरकर 2018-19 में 7.5 प्रतिशत पर आ गई. रिपोर्ट के मुताबिक खाद्यान्न उत्‍पादन भी एक साल पहले की तुलना में कम हो गया. 2017-18 में उत्‍पादन 285 मिलियन टन रहा जो 2018-19 में 283.4 मिलियन टन रहने का अनुमान जताया गया.

क्‍या होता है आर्थिक सर्वे?

वित्त मंत्रालय की इस आधिकारिक सर्वे रिपोर्ट में देश के आर्थिक विकास का सालाना लेखाजोखा होता है. आर्थिक सर्वे को वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार और उनकी टीम तैयार करती है. इस रिपोर्ट से पता चलता है कि बीते साल आर्थिक मोर्चे पर देश का क्‍या हाल रहा. इसके अलावा सर्वे रिपोर्ट में ये भी बताया जाता है कि अर्थव्यवस्था में किस तरह की संभावनाएं मौजूद हैं.

आसान भाषा में समझें तो वित्त मंत्रालय की इस रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था की पूरी तस्वीर देखी जा सकती है. आमतौर पर आर्थिक सर्वे के जरिए सरकार को अहम सुझाव दिए जाते हैं. हालांकि, इसकी सिफारिशें सरकार लागू करे, यह ​अनिवार्य नहीं होता है. बता दें कि देश में पहली बार आर्थिक सर्वे 1950-51 में जारी किया गया था और वित्त मंत्रालय की वेबसाइट पर 1957-58 से आगे के दस्तावेज भी मौजूद हैं.

लगभग 25 साल पुराने ब्रू-शरणार्थियों के संकट का अंत हुआ है. समझौते के तहत अब उनके लिए गरिमापूर्ण जीवन जीने का रास्ते खुल गए हैं. 2020 का नया दशक ब्रू-शरणार्थियों समुदाय के जीवन में एक नई आशा और उम्मीद की किरण लेकर आया है.

करीब 34,000 ब्रू-शरणार्थियों को त्रिपुरा में बसाया जाएगा.

71वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम के जरिए देश को संबोधित किया. उन्होंने कहा 'आज गणतंत्र-दिवस के पावन अवसर पर मुझे 'गगनयान' के बारे में बताते हुए खुशी हो रही है. 2022 में हमारी आजादी के 75 साल पूरे होने वाले हैं और उस मौके पर हमें 'गगनयान मिशन' के साथ एक भारतवासी को अंतरिक्ष में ले जाने के अपने संकल्प को सिद्ध करना है.'

पीएम ने आगे कहा कि 'गगनयान  मिशन' 21वीं सदी में साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत की एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगा. नए भारत के लिए ये एक 'मील का पत्थर' साबित होगा. पीएम ने कहा कि इस मिशन में Astronaut यानी अंतरिक्ष यात्री के लिए 4 उम्मीदवारों का चयन कर लिया गया है. ये चारों भारतीय वायुसेना के पायलट हैं.

भारतीय अंतरिक्ष यान कार्यक्रम गगनयान के अंतर्गत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो ) अंतरिक्ष की स्थिति को बेहतर तरीके से समझने के लिए ह्यूमैनोयड मॉडल (मानव की तरह दिखने वाला ) भेजने की योजना बना रहा है. इस ह्यूमनॉयड को इसरो ने ‘व्योम मित्र’ नाम दिया है. बताया जा रहा है कि इसे 2022 में गगनयान मिशन से पहले रवाना किया जाएगा.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख के. सिवन ने बुधवार को कहा कि दिसंबर 2021 में भारत के प्रथम मानवयुक्त अंतरिक्षयान ‘गगनयान’ के प्रक्षेपण के मद्देनजर इसरो दिसंबर 2020 और जून 2021 में दो मानवरहित मिशनों का प्रक्षेपण करेगा. व्योममित्र उसी का हिस्सा है.

इसरो के वैज्ञानिक सैम दयाल ने कहा, यह एक इंसान की तरह काम करेगा और हमें वहां की जानकारियां मुहैया कराएगा. फिलहाल इसरो एक प्रयोग के रूप में इस व्योम मित्र का उपयोग कर रहा है.’

‘मानव अंतरिक्षयान और खोज: वर्तमान चुनौतियां तथा भविष्य घटनाक्रम’ पर विचार गोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सिवन ने कहा कि ‘गगनयान’ मिशन का उद्देश्य न केवल अंतरिक्ष में भारत का पहला मानवयान भेजना है, बल्कि ‘निरंतर अंतरिक्ष मानव उपस्थिति’ के लिए नया अंतरिक्ष केंद्र स्थापित करना भी है.

उन्होंने कहा, ‘हम तीन चरणों में यह सब कर रहे हैं. दिसंबर 2020 और जून 2021 में दो मानवरहित मिशन और उसके बाद दिसंबर 2021 में मानवयुक्त अंतरिक्ष यान.’

नए अंतरिक्ष केंद्र के संबंध में इसरो ने भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए बेंगलुरु के पास अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया है.

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी, नासा और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियों तथा उद्यमों से बात कर रही है कि कैसे वह मानवयुक्त अंतरिक्षयान पर साथ मिलकर काम कर सकती है और कैसे उनके अनुभव से सीखा जा सकता है.

‘गगनयान’ इसरो के अंतर-ग्रहीय मिशन के दीर्घकालिक लक्ष्य में भी मदद करेगा. इसरो प्रमुख ने कहा, ‘अंतर-ग्रहीय मिशन दीर्घकालिक एजेंडे में शामिल है.’

‘गगनयान’ मिशन पर सिवन ने कहा कि अंतरिक्ष एजेंसी ने महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों जैसे कि निचली कक्षा के लिए 10 टन की पेलोड क्षमता वाला संचालनात्मक लॉंचर पहले ही विकसित कर लिया है और इसका प्रदर्शन किया है.

उन्होंने कहा, ‘केवल मानव जीवन विज्ञान और जीवन रक्षा प्रणाली जैसे तत्व की कमी है जिसे अब हम विकसित कर रहे हैं.’

सिवन ने कहा कि इसरो ने ‘गगनयान’ कार्यक्रम के लिए कई राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं, अकादमिक संस्थानों, डीआरडीओ प्रयोगशालाओं, भारतीय वायुसेना, सीएसआईआर प्रयोगशालाओं को पक्षकार बनाया है.

सिवन ने कहा कि भारत में जल्द ही सामान्य रूप से अंतरिक्ष उड़ान प्रशिक्षण शुरू होगा. इसमें कई सिमुलेटर और अन्य उपकरणों के इस्तेमाल के साथ मिशन से जुड़ा विशिष्ट प्रशिक्षण दिया जाएगा.

भारत आज अपना 71वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. इस मौक़े पर ब्राज़ील के राष्ट्रपति ज़ायर बोलसोनारो भारत के मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद होंगे.

बोलसोनारो की यह पहली भारत यात्रा है. गणतंत्र दिवस से पूर्व भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राज़ील के राष्ट्रपति बोलसोनारो ने एक-दूसरे से मुलाक़ात की. दोनों नेताओं के बीच 15 समझौते हुए. ये समझौते स्वास्थ्य, जैव ऊर्जा सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, भू-गर्भ और खनिज संसाधनों सहित अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हुए.

ब्राज़ील के राष्ट्रपति बोलसोनारो की गिनती अति दक्षिणपंथी नेता के तौर पर की जाती है. उन्हें ब्राज़ील का ट्रंप भी कहा जाता है.

बीते दिनों बोलसोनारो काफी चर्चा में भी रहे. अमेज़न के वर्षा वनों में लगी भयानक आग के लिए एक बड़ा वर्ग उन्हें ज़िम्मेदार मानता है. इस वर्ग का मानना है कि बोलसोनारो की नीतियां अमेज़न के वर्षा वन में लगी आग के लिए ज़िम्मेदार थीं और उन्होंने समय पर और कारगर कार्रवाई भी नहीं की.

64 साल के ज़ायर बोलसोनारो अपने बयानों को लेकर विवादों में रहते हैं. वे गर्भपात, नस्ल, शरणार्थी और समलैंगिकता को लेकर भड़काऊ बयान दे चुके हैं.

बोलसोनारो पूर्व सेना प्रमुख रह चुके हैं और वे ख़ुद की छवि ब्राजील के हितों के रक्षक के तौर पर पेश करते हैं.

महिला विरोधी बयान देने वाले बोलसोनारो ने जब चुनाव के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी तो उनके विरोध में कई रैलियां की गईं. अक्टूबर साल 2018 में आए नतीजों ने उन्हें शीर्ष पद पर बिठा दिया.

उनकी जीत ब्राज़ील में आए दक्षिणपंथी रुझान को भी दर्शाती है. ब्राज़ील 1964 से 1985 तक सैन्य शासन में रहा है.

कुछ मीडिया के जानकार उन्हें 'ट्रंप ऑफ ट्रॉपिक्स' यानी ब्राज़ील का ट्रंप कहते हैं. उनके चुनाव और सोशल मीडिया प्रचार की तुलना ट्रंप के चुनावी प्रचारों से की गई थी. बोलसोनारो के प्रतिद्वंदी रहे सिराओ गोमेज़ उन्हें 'ब्राज़ील का हिटलर' भी कह चुके हैं.

साल 2014 में रियो डी जेनेरियो से बतौर कांग्रेस उम्मीदवार उन्हें सबसे ज़्यादा वोट मिले थे. ख़ास बात ये है कि इस दौरान भी उन्होंने कई भड़काऊ बयानों से सुर्ख़ियां बटोरी थीं.

साल 2016 में जब तत्कालीन राष्ट्रपति डिल्मा रोसेफ़ पर चल रहे महाअभियोग के दौरान कांग्रेस सदस्यों द्वारा मतदान किए जा रहे थे उस वक़्त बोलसानरो ने दिवंगत नेता कर्नल एलबर्टो उस्तरा को अपना वोट दिया था. एलबर्टो ब्राज़ील के बेहद विवादित नेता हैं. जिन पर देश में सेना की तानाशाही के दौरान कैदियों को प्रताड़ित करने का आरोप है.

इसी साल उन्होंने अपनी सहयोगी पर बेहद विवादित और अपमानजनक बयान दिया. उन्होंने कहा, ''वह महिला इस लायक नहीं है कि उसका बलात्कार किया जाए, वह बेहद बदसूरत और मेरे 'टाइप' की नहीं है.

बीते कुछ सालों में उन्होंने अपने सीमा से जुड़े प्रस्तावों को और बढ़ाया है. इसके साथ ही वे आम लोगों की सुरक्षा और क़ानून-व्यवस्था की बात करते हैं. ब्राज़ील में बढ़ते अपराध के बीच उनकी ये बातें उन्हें आम मतदाताओं के बीच लोकप्रिय बनाने का एक बड़ा कारण मानी गईं.

11 सितंबर 2018 को उन्होंने ट्वीट किया, ''सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है, ये बेहद ज़रूरी है. लोग रोज़गार चाहते हैं, शिक्षा चाहते हैं. लेकिन नौकरियों का कोई मतलब नहीं होगा यदि वो घरों को आएं और रास्ते में ही लूट लिए जाएं तो. यदि ड्रग्स की तस्करी स्कूलों में होगी तो शिक्षा का कोई मतलब नहीं होगा.''

साल 2011 में प्लेब्यॉय को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, ''मैं अपने बेटे को एक समलैंगिक होने से बेहतर एक सड़क हादसे में मरते देखना चाहूंगा.''

साल 2018 जून में एक टीवी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, ''राजनीतिक रूप से सही होना वामपंथियों का काम है. मुझ पर हमेशा सबसे ज़्यादा हमले होते रहे हैं.''

ब्राज़ील के कई नौजवानों को उनकी भाषाशैली रिझाती है तो कई को उनके सोशल मीडिया पर कही जाने वाली बातें लुभाती हैं. हालांकि कई ऐसे लोग भी हैं जो समलैंगिकता पर उनके विचारों पर असहमति दर्शाते हैं.

भारत और ब्राजील के बीच शनिवार को 15 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। ब्राजील के राष्ट्रपति जे एम बोलसोनारो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बातचीत के बाद ये करार किए गए। दोनों देशों के बीच ऊर्जा और व्यापार एवं निवेश से लेकर साइबर सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को लेकर करार हुए हैं। भारत एवं ब्राजील ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने वाली एक कार्ययोजना का भी अनावरण किया। बोलसोनारो भारत के 71वें गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि हैं। वह शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंचे। यह भारत की उनकी पहली यात्रा है।

भारत की आर्थिक वृद्धि की राह में ब्राजील को मूल्यवान साझीदार करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ''भारत की आपकी इस यात्रा से भारत और ब्राजील के बीच के द्विपक्षीय संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है। भौगोलिक दूरियां होने के बावजूद कई वैश्विक मुद्दों पर दोनों देशों के विचार एक जैसे हैं।''

मोदी ने कहा, ''हम अपनी रक्षा औद्योगिक साझेदारी को मजबूत बनाने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।'' उन्होंने कहा कि ब्राजील से निवेश को बढ़ावा देने के लिए हमने जरूरी कानूनी ढांचे को मजबूत बनाया है। 

बोलसोनारो ने इस मौके पर कहा कि दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े 15 समझौतों पर हस्ताक्षर के साथ पहले से मजबूत रिश्तों को और मजबूती दी है। हाल के कुछ वर्षों में दक्षिण अमेरिका के सबसे बड़े देश ब्राजील के साथ भारत के संबंधों में काफी मजबूती आई है। ब्राजील की आबादी 21 करोड़ है और वहां की इकोनॉमी 1.8 ट्रिलियन डॉलर की है। 

2018 के आंकड़ों के मुताबिक ब्राजील में भारतीय निवेश तकरीबन छह अरब डॉलर का था जबकि भारत में ब्राजील का निवेश एक अरब डॉलर के आसपास बैठता है। ब्राजील ने भारत में मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल, आईटी, माइनिंग, एनर्जी और बॉयोफ्यूल में निवेश किया है। 

विश्व आर्थिक मंच की 50वीं सालाना बैठक दावोस में 20 जनवरी 2020 से शुरू होकर 24 जनवरी 2020 तक है। सामाजिक बदलाव के मामले में 82 देशों की सूची में भारत का 76वां स्थान रहा है। विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की ओर से तैयार इस सूचकांक में डेनमार्क पहले स्थान पर है। यह रिपोर्ट विश्व आर्थिक मंच की 50वीं सालाना बैठक से पहले जारी की गई है।

डब्ल्यूईएफ ने कहा कि सामाजिक बदलाव में 10 फीसद वृद्धि से सामाजिक एकता को लाभ होगा और वैश्विक अर्थव्यवस्था 2030 तक करीब पांच फीसद बढ़ सकती है। लेकिन, कुछ अर्थव्यवस्थाओं में ही सामाजिक परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए सही परिस्थितियां हैं।

रैंकिंग के लिए देशों को पांच कसौटियां पर परखा गया है, जिसके 10 आधार स्तंभ शामिल हैं। ये कसौटियां स्वास्थ्य, शिक्षा (पहुंच, गुणवत्ता एवं समानता), प्रौद्योगिकी, कामकाज (अवसर, वेतन, काम करने की स्थिति) और संरक्षण एवं संस्थान (सामाजिक संरक्षण तथा समावेशी संस्थान) हैं। यह दर्शाता है कि उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा और आजीवन शिक्षा का सामाजिक बदलाव में सबसे बड़ा योगदान है।

आजीवन शिक्षा के मामले में भारत 41वें और कामकाज की परिस्थिति के स्तर पर 53वें पायदान पर है। भारत को जिन क्षेत्र में बहुत सुधार करने की जरूरत है, उनमें सामाजिक सुरक्षा (76वें) और उचित वेतन वितरण (79वें) शामिल हैं। रिपोर्ट में शीर्ष पांच देशों में डेनमार्क, नॉर्वे, फिनलैंड, स्वीडन और आइसलैंड हैं।

विश्व आर्थिक फोरम स्विट्ज़रलैंड में स्थित एक गैर-लाभकारी संस्था है। इसका मुख्यालय जिनेवा में है। स्विस अधिकारीयों द्वारा इसे एक निजी-सार्वजनिक सहयोग के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है। इसका मिशन विश्व के व्यवसाय, राजनीति, शैक्षिक और अन्य क्षेत्रों में अग्रणी लोगों को एक साथ ला कर वैशविक, क्षेत्रीय और औद्योगिक दिशा तय करना है।

इस संस्था की सदस्यता अनेक स्तर पर होती है और ये स्तर उनकी संस्था के कार्य कलापों में सहभागिता पर निर्भर करती है। सदस्यता के लिए वह कंपनी जाते हैं जो विश्व भर में अपने उद्योग में अग्रणी होते हैं अथवा किसी भौगोलिक क्षेत्र के प्रगति में अहम भूमिका निभा रहे होते हैं। कुछ विकसित अर्थव्यवस्था में कार्यरत होते हैं या फिर विकसशील अर्थव्यवस्था में।

इस फोरम की सर्वाधिक चर्चित घटना वार्षिक शीतकालीन बैठक में होती है जिसका आयोजन दावोस नामक स्थान पर किया जाता है। इस आयोजन में भागीदारिता सिर्फ निमंत्रण से होती है और इसकी ख़ास बात यह है की इस छोटे शहर में भागिदार अनौपचारिक परस्पर बातचीत में अनेक समस्याओं का समाधान निकला जाता है। इस बैठक में लगभग २,५०० लोग भाग लेते हैं जिसमें विश्व जगत के, अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिज्ञ, गिने चुने बुद्धिजीवी और पत्रकार प्रमुख होते हैं। इसमें उन विषयों पर चर्चा होती है जिस पर विश्व समुदाय की चिंतन अत्यावश्यक मानी जाती है।

चीन में कोरोना वायरस (China coronavirus) के प्रकोप से मरने वालों की संख्या छह हो गई है। चीन के नेशनल हेल्थ कमीशन (एनएचसी) ने 21.01.20 तक 291 मामलों की पुष्टि की थी। हुबेई प्रांत की राजधानी हुवान के मेयर झोउ जियानवांग ने छह मौतों की पुष्टि करते हुए 258 लोगों को इससे संक्रमित बताया है। एनएचसी के मुताबिक सोमवार शाम तक दक्षिणी प्रांत गुआंगडोंग में पांच, राजधानी बीजिंग में पांच और शंघाई में दो मामलों की पुष्टि हुई है।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने रहस्यमयी वायरस के लोगों के बीच तेजी से फैलने की आशंका जताते हुए कहा है कि अब तक 15 चिकित्सा कर्मचारी इससे संक्रमित हो चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अंतरराष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने पर विचार के लिए 22.01.20 को बैठक बुलाई है।

इसी तरह के एक वायरस से 2002 में सार्स (एसएआरएस) संबंधी बीमारी फैली थी। चीन के दक्षिणी इलाके से शुरू हुई इस बीमारी की चपेट में आकर दो दर्जन देशों के 800 लोगों की मौत हो गई थी।

21.01.20 को देश के अन्य भागों में भी इस वायरस के फैलने का पता चला।

पिछली बार SARS की वजह से 800 लोगों की मौत हुई थी. ऐसे में दुनिया भर में इसे लेकर चिंता है. भारत में इसे लेकर एडवायजरी जारी की गई है. कोरोना वायरस को लेकर जारी चिंता के बीच भारत समेत दुनियाभर के हवाईअड्डों पर चीन से आने वाले यात्रियों की जांच के लिए इंतजाम किए जा रहे हैं. भारत में भी सात हवाई अड्डों पर चीन से आने वाले यात्रियों की जांच के लिए व्यवस्था की गई है.

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक दिल्ली, मुंबई और कोलकाता समेत सात हवाईअड्डों पर थर्मल स्क्रीनिंग के जरिये यात्रियों की जांच हो रही है.

दरअसल कोरोना वायरस (सीओवी) विषाणुओं के बृहत परिवार का सदस्य है, जिसकी वजह से सामान्य सर्दी से लेकर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम जैसी बीमारियां हो रही हैं, लेकिन अब तक चीन में छह लोगों की जान ले चुका यह विषाणु कुछ अलग तरह का है जिसे पहले नहीं देखा गया था. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा कि नए सीओवी की प्रजाति के लक्षण दिसंबर में वुहान में दिखने शुरू हुए थे और अबतक 300 से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं. इससे ग्रस्त लोगों में सांस से जुड़ी समस्याएं, बुखार, खांसी आदि हैं. ज्यादा गंभीर मामलों में संक्रमण की वजह से निमोनिया, सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम, गुर्दे खराब होना और मौत तक हो सकती है.

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक सीओवी विषाणुओं के ज्यादा बड़ी प्रजाति है, जिसकी वजह से सामान्य सर्दी से लेकर मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (एमईआरएस-सीओवी) और सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (एसएआरएस-सीओवी) जैसी गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं.

पूर्व जनरल बिपिन रावत को भारत का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) बनाया गया है. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ; प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री के लिए महत्वपूर्ण रक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर भारत सरकार के सलाहकार के रूप में कार्य करेगा. CDS; परमाणु मुद्दों पर प्रधानमंत्री के सैन्य सलाहकार के रूप में भी काम करेगा. सीडीएस का पद 'फोर स्टार' जनरल के समकक्ष होगा और सभी सेनाओं के प्रमुखों में सबसे ऊपर होगा जबकि रिटायरमेंट की उम्र 65 वर्ष होगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लालकिले की प्राचीर से जब थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच तालमेल सुनिश्चित करने और उन्हें प्रभावी नेतृत्व देने के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के पद का एलान किया था, तभी से सबकी निगाहें इस बात पर थीं कि इस पद पर पहला मौका किसे मिलेगा।

भारत में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के पीछे का इतिहास (History behind the CDS post)

भारत में यह पहली बार नहीं है कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) का पद सृजित हो रहा है. वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के बाद भी भारत में एक चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद को बनाने की पहल K. सुब्रह्मण्यम समिति की सिफारिस के आधार पर की गयी थी. लेकिन राजनीतिक असहमति और आशंकाओं के कारण यह आगे नहीं बढ़ सकी थी.

नरेश चंद्र समिति ने 2012 में चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (COSC) के एक स्थायी चेयरमैन की नियुक्ति की सिफारिश की थी और वर्तमान में यही काम कर रही है.

कौन है चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ? (About Chief of Defence Staff)

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद का मतलब होगा कि प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री के लिए महत्वपूर्ण रक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर सरकार के सलाहकार के रूप में केवल एक व्यक्ति कार्य करेगा. सीडीएस परमाणु मुद्दों पर प्रधानमंत्री के सैन्य सलाहकार के रूप में भी काम करेगा.

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का कार्य होगा कि वह सेना के तीनों अंगों के बीच दीर्घकालिक नियोजन, प्रशिक्षण, खरीद और परिवहन के कार्यों के लिए समन्वयक (Coordinator) का कार्य करेगा.

जैसा कि हम जानते हैं कि रक्षा क्षेत्र का बजट बढ़ता जा रहा इसलिए संसाधनों पर तनाव साल दर साल बढ़ता जा रहा है. अब सीमित संसाधनों के उपयोग को सुनिश्चित करके तीनों सेना के अंगों के बीच समन्वय को बढ़ाना समय की आवश्यकता है.

यहां उल्लेख करने योग्य बात यह है कि सभी प्रमुख देशों, विशेष रूप से परमाणु हथियार संपन्न देशों में एक चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जरूर है.

CDS के प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं (Functions of CDS)

CDS के चयन से पहले, तीनों सेना प्रमुखों में सबसे सीनियर चीफ ही, चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष (COSC) के रूप में कार्य करता था. COSC की भूमिका अतिरिक्त होती है और कार्यकाल बहुत छोटा रहता है. CDS के मुख्य कार्य इस प्रकार हैं.

1. वह तीनों सेनाओं के मामलों पर रक्षा मंत्री के प्रधान सैन्य सलाहकार के रूप में कार्य करेंगे.
2. परमाणु कमान प्राधिकरण के सैन्य सलाहकार के रूप में कार्य करेंगे.
3. सीडीएस, किसी भी सैन्य कमांड का प्रयोग नहीं करेगा,और इस मामले में नियम पूर्ववत ही रहेंगे.
4. सीडीएस, रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद के सदस्य होंगे.
5. वह चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के स्थायी अध्यक्ष होंगे.
6. सैन्य मामलों के विभाग के प्रमुख के रूप में भी कार्य करेंगे.

अतः भारत के पडोसी देशों की नीति को देखते भारतीय सेना के तीनों विंगों के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के पद की शीघ्र आवश्यकता थी. उम्मीद है कि अब सीमित रक्षा संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा  और किसी भी युद्ध जैसी स्थिति के दौरान देश की सुरक्षा की जा सकेगी.

किन-किन देशों में चीफ़ ऑफ़ डिफेन्स स्टाफ (CDS) का पद होता है?

1. चीफ ऑफ़ डिफेन्स स्टाफ; इटली: (The Chief of the Defence Staff)
इटली का चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, इटैलियन आर्म्ड फोर्सेज के सर्वोच्च पद को बताता है. यह पद 4 मई 1925 को बनाया गया था और पिएत्रो बडोग्लियो इस पर बैठने वाले पहले व्यक्ति थे जबकि वर्तमान में इस पद पर एयर स्क्वाड्रन जनरल एंज़ो वेकेइरेल्ली हैं.

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2. दा चीफ ऑफ़ स्टाफ ऑफ़ दा अर्मीज (C.E.M.A.), फ्रांस (The Chief of Staff of the Armies)
C.E.M.A; फ्रेंच गणराज्य की सेनाओं के कर्मचारी मुख्यालय का प्रमुख होता है. C.E.M.A. फ्रांसीसी सशस्त्र बलों के उपयोग के लिए जिम्मेदार प्रमुख वरिष्ठ सैन्य अधिकारी है. यह पद 28 अप्रैल 1948 को बनाया गया था और अभी यह पद जनरल फ्रांकोइस लेकोइंट्रे संभाल रहे हैं. यह देश के रक्षा मंत्री को रिपोर्ट करता है.

3. दा चीफ ऑफ़ दा जनरल स्टाफ; चीन (The Chief of the General Staff; China)
चीफ ऑफ जनरल स्टाफ ताइवान में रिपब्लिक ऑफ चाइना सशस्त्र बलों का प्रमुख है. यह पद 23 मई 1946 को बनाया गया था और वर्तमान में यह जनरल शेन यी-मिंग के पास है. इस पद पर बैठने वाला व्यक्ति सीधे रक्षा मंत्री; को रिपोर्ट करता है.

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4. दा चीफ ऑफ़ डिफेन्स स्टाफ, स्पेन (The Chief of the Defence Staff)

यह स्पेनिश सशस्त्र बलों में सर्वोच्च रैंकिंग वाला सैन्य अधिकारी है. यह; रक्षा मंत्री, प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय रक्षा परिषद और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख सैन्य सलाहकार के तौर पर काम करता हैं.

5. दा चीफ ऑफ़ दा डिफेन्स स्टाफ, यूनाइटेड किंगडम (The Chief of the Defence Staff)
जैसा कि हम जानते हैं कि भारत के ऊपर ब्रिटेन ने कई वर्षों तक शासन किया था और उनके शासन के चिन्ह आज भी भारत की कई संस्थाओं, मिलिट्री और पुलिस में मौजूद हैं.

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यूनाइटेड किंगडम में; दा चीफ ऑफ़ दा डिफेन्स स्टाफ, ब्रिटिश सशस्त्र बलों का पेशेवर प्रमुख होता है. चीफ ऑफ़ दा डिफेन्स स्टाफ; ब्रिटेन में रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री के लिए सबसे वरिष्ठ सैन्य सलाहकार भी होता है.

6. चीफ ऑफ़ डिफेन्स स्टाफ, कनाडा (Chief of the Defence Staff)
चीफ ऑफ डिफेंस; स्टाफ कनाडाई सशस्त्र बलों का दूसरा सबसे वरिष्ठ सदस्य है. शीर्ष पद कमांडर-इन-चीफ के पास होता है.
सीडीएस का पद, कनाडाई सशस्त्र बलों की तीनों मुख्य शाखाओं में से एक वरिष्ठ सदस्य के पास होता है. वर्तमान में सीडीएस के पद पर जोनाथन वेंस (17 जुलाई 2015 से) हैं जो कि कमांडर-इन-चीफ को रिपोर्ट करते हैं.

7. चीफ ऑफ स्टाफ, ज्वाइंट स्टाफ; जापान  (Chief of Staff, Joint Staff)

चीफ ऑफ स्टाफ, ज्वाइंट स्टाफ; जापान में सर्वोच्च श्रेणी का सैन्य अधिकारी और जापान सेल्फ डिफेंस फोर्सेज (JSDF) के ऑपरेशनल अथॉरिटी (कमांड) का प्रमुख होता है.

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चीफ ऑफ स्टाफ; जापान सेल्फ डिफेंस फोर्सेस के सभी मामलों पर रक्षा मंत्री की सहायता करता है और प्रधानमंत्री के निर्देशों के साथ रक्षा मंत्री के आदेशों को क्रियान्वित करता है.

यह पद 1 जुलाई 1954 को बनाया गया था और जनरल काजी यामाजाकी वर्तमान चीफ ऑफ स्टाफ, ज्वाइंट स्टाफ हैं जो कि रक्षा मंत्री को रिपोर्ट करते हैं.

तो यह थी दुनिया के विभिन्न देशों में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की सूची. इस पद को अलग अलग देशों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है. भारत में इस पद का सृजन यूनाइटेड किंगडम के पद से प्रेरित है. मुझे उम्मीद है कि भारत में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद का सृजन भारतीय रक्षा बलों की क्षमताओं को और मजबूत करेगा.

बेहतर नीति निर्माण के लिए बेस ईयर में संशोधन अनिवार्य है. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव पर नजर रखी जा सके और उन वृहद आर्थिक संकेतकों में सुधार या अपडेट किया जा सके जो कि देश के आर्थिक प्रदर्शन को दर्शाते हैं. भारत के पूर्व मुख्य सांख्य‍िकीविद टीसीए अनंत ने सबसे पहले जनवरी 2018 में इसकी बात की थी. 

इसमें किस तरह का बदलाव हो सकता है इसके बारे में विस्तार से कार्यक्रम क्रियान्वयन एवं सांख्यिकीय मंत्रालय (MoSPI) ने 8 मई, 2019 को एक नोट जारी कर बताया है.

इस नोट में कहा गया है कि 2011-12 सीरीज को अपनाने के मामले में भारत अब संयुक्त राष्ट्र द्वारा वि‍कसित 2008 सिस्टम ऑफ नेशनल एकाउंट्स (2008 SNA) जैसे नवीनतम अंतरराष्ट्रीय मानक को अपनाने की तरफ बढ़ रहा है, जो कि 1993 के एसएनए का अपडेट है. 2011-12 के सीरीज में डेटा स्रोतों के बदलावों को शामिल किया गया, कवरेज का विस्तार किया गया और नए मानक के मुताबिक प्रक्रियाओं में सुधार किया गया, लेकिन इसमें और सुधार की जरूरत है, खासकर एमसीए 21 डेटाबेस की खामियों को दूर करने के लिए, जिसके द्वारा कॉरपोरेट सेक्टर के उत्पादन को आंका जाता है, और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में बदलाव के लिए.

इस नोट में यह भी कहा गया है कि भारत ने अब आईएमएफ के विशेष डेटा प्रसार मानक (SDDS) को भी अपनाया है. इसमें यह कहा गया है कि नए कीमत सूचकांक का विकास कर जीडीपी अनुमानों में ‘दोहरे अपस्फीतिकारक (डबल डीफ्लेटर)’ को अपनाया जाए. भारत फिलहाल सिंगल डिफ्लेटर (जैसे CPI, WPI या अन्य) का इस्तेमाल करता है, जबकि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, मेक्सिको और ब्राजील ने अब डबल डिफ्लेटर को अपना लिया है, जिसमें आउटपुट और इनपुट के लिए अलग-अलग डिफ्लेटर का इस्तेमाल किया जाता है.

बेस में बदलाव की अवध‍ि 10 से 5 साल की गई

बेस ईयर में बदलाव के लिए कोई तय मानक नहीं है. साल 2007-10 के दौरान भारत के पहले मुख्य सांख्यिकीविद (CSI) और 2013-16 में नेशनल स्टैटिस्टिकल कमीशन (NSC) के चेयरमैन रहे प्रणब सेन का कहना है कि 2008 एसएनए में यह सिफारिश की गई है कि विकासशील देश को हर 5 साल पर अपने बेस ईयर में बदलाव करना चाहिए ता‍कि अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव का सही आकलन किया जा सके. उन्होंने कहा, ‘बदलाव कितनी जल्दी होगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि अर्थव्यवस्था में किस तेजी से संरचनात्मक बदलाव हो रहे हैं. यदि कोई अर्थव्यवस्था स्थिर है तो लंबे समय तक बेस ईयर में बदलाव की जरूरत नहीं है. इसके बारे में फिर सोच-समझ कर निर्णय लेना होगा.’

भारत ने जब साल 1948-49 में नेशनल एकाउंट्स सीरीज की शुरुआत की तो संशोधन हर 10 साल में होते थे, जो संयोग से जनगणना के समय ही होता था, क्योंकि जनगणना से कामगारों का सही आंकड़ा मिल जाता था. यह चलन 1980-81 तक जारी रहा.

इसके बाद साल 1993-94 से भारत ने हर पांच साल पर होने वाले रोजगार और बेरोजगारी के सर्वे के नतीजों के आधार पर बेस ईयर में बदलाव शुरू किया.

हालांकि यह परंपरा भी 2009-10 में टूट गई, क्योंकि 2008 की वैश्विक मंदी की वजह से यह कोई ‘सामान्य साल’ नहीं था. इसलिए अगला बेस ईयर 2011-12 तय किया गया. इसके बाद फिर बेस ईयर में 2016-17 में बदलाव किया जाना चाहिए था, लेकिन तब बदलाव नहीं हुआ और ऐसा क्यों नहीं हुआ इसके बारे में जानकारी सामने नहीं आई. 2017-18 पर हम खास जोर इसलिए दे रहे हैं, क्योंकि पिछले दौर का रोजगार सर्वे (PLFS) और कंज्यूमर व्यय सर्वे 2017-18 में किया गया था. 

साल 2017-18 का रोजगार सर्वे (PLFS) आ चुका है और पहले इससे इंकार करने के बाद आखि‍र 2019 के चुनाव के बाद जारी कर दिया गया. इसमें यह दिखाया गया है कि बेरोजगारी की दर पिछले 45 साल में सबसे ज्यादा (6.1%) है. उपभोक्ता व्यय सर्वे अभी तक जारी नहीं किया गया है.

कारपोरेट कार्य मंत्रालय ने ई-प्रशासन पहल के अधीन कई कदम उठाए हैं। इसका एक मात्र उद्देश्‍य हित धारकों की डाटाबेस तक पहुंच को सुविधा जनक बनाना है, जो उनके लिए अपना कारोबार और बढ़ाने के लिए अत्‍यधिक महत्‍वपूर्ण होगा। यह डाटाबेस खास कर हित धारकों द्वारा कारपोरेट जगत को स्‍वीकृत और जारी अग्रिम राशि के प्रति शुल्‍क के सृजन से संबंधित है। 

एमसीए और एमसीए-21 पोर्टल का पुनर्निर्माण

  • पुनर्निर्मित पोर्टल एमसीए-21 पहली बार खोलने वाले उपयोगकर्ता के लिए अधिक हितैषी और व्‍याख्‍यात्‍मक है।

  • पोर्टल एमसीए-21 का अत्‍यधिक प्रयोग में आने वाली कार्यात्मकताओं से सम्‍बन्धित अनुभागों को परिभाषित किया है और उपयोगकर्ता की सहायता के लिए विस्‍तृत उपाय-वार प्रक्रिया परिभाषित की गई है।

  • एमसीए-21 पोर्टल की कार्यात्‍मकताओं से सुपरिचित उपयोगकर्ताओं को सभी अनुभागों के अंदर त्‍वरित संपर्क प्रदान किया गया है।

  • निवेशकों के हितों की सुरक्षा को ध्‍यान में रखते हुए 'निवेशक सेवा' नामक एक विशेष व्‍यवस्‍था भी की गई है।

  • इस व्‍यवस्‍था में निवेश शिक्षा संरक्षण कोष (आईईपीएफ) जैसी सभी सम्‍बद्ध वेबसाइटों के साथ संपर्क है, जो निवेशकों के हितों की सुरक्षा में सहायता करता है।

समूचे भारत के लिए इलेक्‍ट्रोनिक स्‍टैम्पिंग का अधिदेश

  • एमसीए-21 प्रणाली के जरिये ई-स्‍टैम्पिंग की व्‍यवस्‍था सभी राज्‍यों और संघ शासित प्रदेशों के लिए अधिदेश कर दी गई है।

प्रकिया द्वारा सीधे (एसटीपी) मोड के अधीन विशिष्‍ट ई-फॉर्मों को संसाधित करना। यह कंपनी रजिस्‍ट्रार के उपयोगिता द्वारा संसाधित नहीं किया जाएगा।

  • शेयरों के आबंटन की वापसी से संबंधित फॉर्म-2 और फॉर्म-3

  • किसी मौजूदा कंपनी द्वारा पंजीकृत कार्यालय में परिवर्तन के लिए फॉर्म-18

  • किसी मौजूदा कंपनी द्वारा निदेशक आदि में परिवर्तन संबंधी ब्‍योरे के लिए फॉर्म-32

  • शुल्‍क (देरी के लिए क्षमा को छोड़कर अन्‍य मामले) के संबंध में फॉर्म-8 और 17

  • किसी नयी कंपनी द्वारा नाम उपलब्‍ध कराने के लिए फॉर्म-1ए (इसमें नाम उपलब्‍ध कराने से सम्‍बन्धित दिशा-निर्देश भी शामिल हैं)

  • विशिष्‍ट कंपनियों को निष्क्रिय कंपनियां अंकित करना और उनके ई-फाइलिंग पर रोक  लगाना

  • जिन कंपनियों ने अपनी वार्षिक रिटर्न और बेलेंसशीट लगातार तीन वर्ष तक जमा नहीं कराई उन कंपनियों को एक अलग वर्ग-डोरमेंट (निष्क्रिय) कंपनियां अंकित किया गया है। इस प्रकार की कंपनियों को अपना ई-फाइलिंग जमा करने से रोक दिया जाता है, जब तक कि वे फाइलिंग में दोष को दूर नहीं कर लेतीं।

विशिष्‍ट कंपनियों को दोषी कंपनियां अंकित करना और उनके ई-फाइलिंग पर रोक लगाना

  • जिन कंपनियों ने अपनी वार्षिक रिटर्न और/या बेलेंस‍शीट एक वर्ष या अधिक अवधि के लिए जमा नहीं की उन्‍हें दोषी कंपनियां अंकित किया गया है। इस प्रकार की कंपनियों और उनके निदेशकों को ई-फाइलिंग से रोक दिया जाता है, जब तक कि वे रिटर्न फाइल करने में दोष को दूर नहीं कर लेते।

शिकायत पर नजर रखने की विस्‍तृत व्‍यवस्‍था का कार्यान्‍वयन

  • एमसीए-21 हित धारकों के लिए एमसीए-21 प्रणाली में शिकायत पर नजर रखने की एक विस्‍तृत प्रणाली लागू की गई है। उपयोगकर्ता उसी के जरिये शिकायतें, मामले, प्रश्‍न, सुझाव दे सकते हैं और उन्‍हें उसके लिए एक विशिष्‍ट संदर्भ टिकट दिया जाता है। वे संदर्भ टिकट का प्रयोग करके शिकायत की पूर्ति की स्थिति जान सकते हैं।

प्रणाली के अधीन प्रमाण पत्रों पर डिजिटल हस्‍ताक्षर

  • पहले की व्‍यवस्‍था के अनुसार कंपनी रजिस्‍ट्रार के अधिकारी विभिन्‍न प्रमाण पत्रों पर हस्‍ताक्षर करके उसे कंपनी को डाक द्वारा भेजते थे। अब एमसीए-21 प्रणाली के अधीन विभिन्‍न प्रमाण पत्रों पर डिजिटल हस्‍ताक्षर की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसमें अब हाथ से कोई काम नहीं किया जाता और फिर डिजिटल तरीके से हस्‍ताक्षरित प्रमाण पत्रों को ई-मेल के जरिये कंपनी को भेजा जाता है और पुष्टि के लिए एमसीए-21 एफओ पोर्टल को भी उपलब्‍ध कराया जाता है।

डायरेक्‍टर आइडेंटिफिकेशन नम्‍बर (डीआईएन) के आबंटन की प्रक्रिया को कागज-मुक्‍त और ऑन-लाइन बनाया गया, और डीआईएन-डीपीआईएन को जोड़ा गया

  • एमसीए द्वारा डीआईएन के आबंटन की प्रक्रिया को पूरी तरह कागज-मुक्‍त बना दिया गया है। यह स्‍थूल रूप में सबूत दाखिल करने की आवश्‍यकता को समाप्‍त करने के लिए किया गया है और इसके स्‍थान पर इसे स्‍वयं डीआईएन आवेदन को स्‍कैन किया जा सकता है। इसके अलावा सभी भारतीय निदेशकों के लिए आयकर पैन उपलब्‍ध करना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही कार्यरत व्यवसायी के प्रमाण पत्र पर आधारित व्‍यवस्‍था द्वारा डीआईएन आवेदन-पत्र को संसाधित किया जाता है।

  • कंपनी अधिनियम के अधीन डीआईएन के आबंटन और एलएलपी अधिनियम के तहत डीपीआईएन के आबंटन के लिए एमसीए के पास अलग- अलग व्‍यवस्‍थाएं हैं। अब एमसीए ने दोनों व्‍यवस्‍थाओं को जोड़ कर डीआईएन के रूप में एक-समान पहचान बना दी है।

अन्य सरकारी विभागों के साथ समन्वय-आयकर और ट्रेडमार्क
संयुक्त सेवाओं के कार्यान्वयन की प्रक्रिया में विभिन्न विभागों के साथ समन्वय किया गया-

  • निदेशकों आदि के विवरणों का सत्यापन करने के लिए आयकर प्रणाली के साथ उनके अपने-अपने आयकर पैन ब्यौरे को जोड़ना।

  • आंतरिक (कंपनी रजिस्ट्रार के कार्यालय) और बाहरी हितधारकों (कंपनी, व्यावसायी) के टीएमआर डाटा बेस पर ढूंढने की सुविधा प्रदान करने के लिए ट्रेडमार्क प्रणाली के साथ जोड़ना।

कारपोरेट खाते खोलने के लिए बैंकों के साथ समन्वय

  • विभिन्न बैंकों के साथ समन्वय की प्रक्रिया में एमसीए ने कारपोरेटों के लिए एमसीए-21 प्रणाली के जरिये बैंक खाता खोलने के लिए एक सुविधा शुरू की है। कंपनी को एमसी प्रणाली पर इलैक्ट्रोनिक फार्म और कुछ ब्यौरे भरने होते हैं, कंपनी के बारे में दस्तावेज संबद्ध बैंक को एमसीए -21 प्रणाली के जरिये भेजें जाते हैं।

अदायगियां करने के लिए एनईएफटी विकल्प की शुरूआत

  • पहले एमसीए-21 अदायगियां क्रेडिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग और स्थूल चालान के जरिये करने की अनुमति थी। इंटरनेट बैंकिंग केवल पांच बैंकों तक सीमित है। अदायगी प्रक्रिया में होने वाली देरी से उत्पन्न असुविधा को समाप्त करने के लिए एमसीए ने एमसीए फीस की अदायगी एनईएफटी अर्थात राष्ट्रीय इलैक्ट्रोनिक कोष हस्तांतरण मोड के जरिये शुरू किया है। इस विकल्प के जरिये हितधारक एससीए-21 फीस की अदायगी किसी भी बैंक के जरिये, जो एनईएफटी की अनुमति देता हो, कर सकते हैं।

स्थूल चालान मोड के जरिये अदायगी पर रोक

  • स्कूल विकल्प (बैंक की खिड़की पर चालान के जरिये अदायगी) के जरिये एमसीए-21 की विभिन्न सेवाओं के लिए अदायगी की सुविधा पर, पचास हजार रुपये के समकक्ष अथवा उससे अधिक राशि के मामले में रोक लगा दी गई है।

विशिष्ठ वर्ग की कंपनियों द्वारा वित्तीय विवरण दाखिल करने के लिए एक्सबीआरएल लागू-

  • विशिष्ठ वर्ग की कंपनियों द्वारा एक्सटेंसीबल बिजनेस रिपोर्टिंग लैंग्वेज (एक्सबीआरएल) द्वारा वित्तीय विवरण दाखिल करना एमसीए-21 प्रणाली में कार्यान्वित किया गया है। इस प्रणाली में वित्तीय विवरणों को एमसीए एक्सबीआरएल टेक्सोनोमी के साथ जोड़ना होता है। एमसीए-21 प्रणाली ने हितधारकों को एक्सबीआरएल दस्तावेज दाखिल करने से पहले सत्यापित करने के लिए एक सुविधा प्रदान की है। इसके अतिरिक्त एक्सबीआरएल दस्तावेजों को पढ़ने वाली मशीन एमसीए -21 प्रणाली के जरिये दस्तावेजों को मनुष्य द्वारा पढ़े जाने योग्य बना देती है।

त्वरित कार्यात्मकता का चिन्ह

  • पहले एमसीए प्रयोगकर्ता द्वारा किसी कार्य वस्तु को संसाधित करने में उस कार्य वस्तु को तात्कालिक चिन्हित करने की सुविधा थी और वह इसे एफआईएफओ प्रक्रिया द्वारा करता था। तथापि अधिक पारदर्शिता लाने के लिए यह कार्यात्मकता रोक दी गयी है। अब कार्य वस्तु उनके द्वारा भरे जाने के क्रम से संसाधित की जाए

वापसी प्रक्रिया की शुरूआत

  • किसी हितधारक द्वारा एमसीए-21 की विभिन्न सेवाओं का लाभ उठाने के लिए गलती से दी गई फीस की वापसी के लिए एमसीए-21 में पहले कोई व्यवस्था नहीं की। मंत्रालय ने अब विशिष्ट सेवाओं के लिए अदा की गई वैधानिक फीस को वापस करने का निर्णय लिया है। हितधारक द्वारा रिफंड के लिए नया ई-फार्म भरना होगा  और उनकी संसाधित होने पर रिफंड का अनुरोध स्वीकार या अस्वीकार किया जाएगा।

  • एमसीए -21 की फीस का रिफंड जिन मामलों में उपलब्ध है वे हैं : (क) बहुअदायगियां का फार्म एक और पांच (ख) गलत अदागियां और (ग) ज्यादा अदायगी।

  • रिफंड प्रक्रिया विशिष्ट सेवाओं/ई फार्म जैसे दस्तावेजों का सार्वजनिक निरीक्षण, सत्यापित प्रतियों का अनुरोध हस्तांतरण दस्तावेजों के लिए अदायगी, स्टाम्प ड्यूटी फीस (डी श्रंखला एसआरएन), आईईपीएफ अदायगी, एसटीपी फार्म, डीआईएन ई फार्म आदि पर लागू नहीं होती।

स्वीडन की रहने वाली 16 वर्षीय ग्रेटा टुनबर्ग के ‘फ्राइडे फॉर फ्यूचर’ अभियान के पक्ष में लाखों लोग आ चुके हैं। वह तब चर्चा में आई थीं जब अगस्त, 2018 में हर शुक्रवार स्वीडन की संसद के बाहर धरना देना शुरू कर दिया था। वह हाथों में एक तख्ती लेकर वहां रहती थीं, जिस पर लिखा होता था जलवायु की खातिर स्कूल की हड़ताल। 

ग्रेटा टुनबर्ग पूरी दुनिया के लिए पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की आइकॉन बन गई हैं. 16 साल की टुनबर्ग के नेतृत्व में 150 से अधिक देशों में हजारों लाखों बच्चों ने सड़क पर उतरकर जलवायु परिवर्तन की नजरअंदाजी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. स्वीडन की टुनबर्ग ने साल भर पहले जलवायु परिवर्तन की लड़ाई अकेले शुरू की थी. ‘फ्राइडे फॉर फ्यूचर’ नाम से शुरू मुहीम में उनके साथ लाखों पर्यावरण प्रेमी जुड़ चुके हैं.

जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा टुनबर्ग ने मंगलवार (29/10/2019) को एक पर्यावरण पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि जलवायु अभियान में आवश्यकता इस बात की है कि सत्ता में बैठे लोग पुरस्कार देने के बजाए विज्ञान का अनुसरण प्रारंभ करें।  अंतर संसदीय सहयोग के लिए क्षेत्रीय संस्था नॉर्डिक परिषद की ओर से स्टॉकहोम में आयोजित समारोह में ग्रेटा टुनबर्ग को इस सम्मान के लिए चुना गया। ग्रेटा टुनबर्ग के प्रयासों के लिए उन्हें स्वीडन और नॉर्वे दोनों की ओर से नामित किया गया था। उन्होंने संगठन का सालाना पर्यावरण पुरस्कार जीता था।

पुरस्कार की घोषणा के बाद थनबर्ग के एक प्रतिनिधि ने दर्शकों को बताया कि वह यह पुरस्कार और 52,000 डॉलर (36, 85,917 रुपये) की राशि स्वीकार नहीं करेंगी। उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपने इस फैसले को साझा किया।

ग्रेटा टुनबर्ग ने यह सम्मान देने के लिए नॉर्डिक परिषद का आभार व्यक्त किया, लेकिन जलवायु से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात पर कायम नहीं रहने के लिए नॉर्डिक देशों की आलोचना भी की। एक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि जलवायु अभियान को और पुरस्कारों की आवश्यकता नहीं है। जरूरत इस बात की है कि सत्ता में बैठे लोग वर्तमान में उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ विज्ञान का अनुसरण करना शुरू कर दें।

राजा लेशेम्बा सनाजाओबा का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हुए मणिपुर के दो असंतुष्ट नेताओं ने मंगलवार (29/10/2019) को ब्रिटेन में निर्वासन में मणिपुर सरकार की शुरुआत की घोषणा कर सियासी खलबची मचा दी। हालांकि राजा लेशेम्बा ने इसकी कड़ी निंदा की है। लंदन में एक संवाददाता सम्मेलन में याम्बेन बिरेन ने मणिपुर स्टेट काउंसिल का मुख्यमंत्री और नरेंगबाम समरजीत ने मणिपुर स्टेट काउंसिल का रक्षा और विदेश मंत्री होने का दावा किया।

उन्होंने कहा कि वे मणिपुर के महाराजा की ओर से बोल रहे हैं और औपचारिक तौर पर निर्वासन में मणिपुर स्टेट काउंसिल की सरकार शुरू कर रहे हैं। बिरेन और समरजीत ने इस दौरान दस्तावेज भी पेश किए जिनमें यह दिखाया गया कि इस साल अगस्त में उन्हें राजनीतिक रूप से ब्रिटेन में शरण मिली है।

इस दावे पर मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने कहा कि सरकार ने इसे बेहद गंभीरता से लिया है और राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ने का मामला दर्ज किया गया है। ये मामला स्पेशल क्राइम ब्रांच को सौंपा गया है। जांच के बाद ये मामला एनआईए को सौंपा जाएगा क्योंकि वे विदेश से काम कर रहे हैं।

वहीं राजा लेशेम्बा ने कहा कि मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं। ये बहुत हैरान करने वाला है कि उन्होंने मेरा नाम इसमें घसीटा। इससे समाज में नकारात्मकता फैलेगी।

यूरोपीय संघ (EU) प्रतिनिधिमंडल के कश्मीर दौरे को लेकर यूरोप के एक गैर सरकारी संगठन (NGO) का  नाम सुर्खियों में है. कथित तौर पर वूमेन’स इकोनॉमिक एंड सोशल थिंक टैंक (WESTT) नाम के NGO ने इस अनौपचारिक दौरे के लिए इंतजाम किए. WESTT छह साल पुराना एनजीओ है जिसे 19 सितंबर 2013 को रजिस्टर्ड किया गया. ‘थिंक टैंक एंड रिसर्च इंस्टीट्यूशन्स’ की EU रजिस्ट्रेशन कैटेगरी की धारा 4 के तहत ये रजिस्ट्रेशन हुआ. सोशल मीडिया की अटकलों के विपरीत WESTT को किसी सरकारी संस्था (भारतीय या यूरोपीय) से फंडिंग के तौर पर मोटी रकम नहीं मिली. EU रिकॉर्ड्स के मुताबिक एनजीओ को बीते वित्त वर्ष में कुल 24,000 पौंड (करीब 18,83,376 रुपये) का कुल फंड मिला. WESTT को ये फंड सालाना डोनेशन के तौर पर मिला. EU रिकॉर्ड्स से ये भी संकेत मिला कि एनजीओ को पूरे साल में एक ही डोनर मिला.

WESTT एनजीओ दरअसल यूनाइटेड किंगडम स्थित माडी ग्रुप की कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ी गतिविधि है.

माडी ग्रुप के जरिए WESTT को यूनाइटेड किंगडम स्थित उद्यमी माडी शर्मा उर्फ मधु शर्मा संचालित करती हैं. एनजीओ के दावे के मुताबिक कम से कम 14 देशों में उसके सदस्य या प्रतिनिधि मौजूद हैं. ये देश हैं- बेल्जियम, क्रोएशिया, फ्रांस, लिथुआनिया, पोलैंड, यूनाइटेड किंगडम, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, चीन, भारत, नेपाल, नॉर्थ मेसेडोनिया, पाकिस्तान और तुर्की.

रिकॉर्ड्स के मुताबिक संगठन के पास कामकाज के लिए 5 लोगों की टीम है. इनमें से सिर्फ एक शख्स ही पूर्णकालिक है बाकी सभी सदस्य वॉलन्टियर आधार पर विश्व के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रहे हैं.

माडी ग्रुप की आधिकारिक वेबसाइट में इस ग्रुप में “I3I” नाम की बिजनेस ब्रोकरेज कंपनी को भी शामिल बताया गया है, जो ग्लोबल कॉरपोरेट कंपनियों के लिए बिजनेस टू बिजनेस या सरकार से संपर्क का दावा करती है. ये संपर्क परिचय, इंटेलीजेंस या इनोवेशन के जरिए कराया जाता है.

कॉरपोरेट फाइलिंग्स के मुताबिक यूनाइटेड किंगडम स्थित ‘I3I यूके लिमिटेड’ को एजाज अकबर नाम के भारतीय डायरेक्टर संचालित करते हैं. माडी ग्रुप की ‘माडी मैग्नीशियम’ के नाम से एक कंसल्टेंसी फर्म भी है. इसके अलावा ग्रुप की एक आयात/निर्यात कंपनी, एक टूर कंपनी और एक बैक ऑफिस रिसोर्स सॉल्यूशन कंपनी भी है. ग्रुप की ओर से ‘एक्स्ट्राऑर्डनरी एजुकेशन’ नाम से गैर मुनाफा आधार पर एक और संगठन चलाया जाता है जो शिक्षा के क्षेत्र में काम करता है.

यह जगह सीरिया में हैं। इसका नाम है बारिशा। यह एक गांव है जो तुर्की की सीमा से कोई दस किमी की दूरी पर था। वहीं सीरिया की राजधानी अलेप्‍पो से इसकी दूरी करीब 90 किमी थी। अलेप्‍पो से यदि सड़क से यह दूरी तय की जाए तो करीब दो घंटे का समय लगता है। वहीं सीरिया के ही इदलिब से यह 32 किमी की दूरी पर स्थित है। बगदादी की मौत के बाद यह पूरा इलाका सुर्खियों में आ गया है। 

बारिशा गांव (Barisha or Baricha Village) हरेम जिले में आता है जिस पर सीरिया के इदलिब प्रांत (Idlib Government) की हुकूमत चलती है। बारिशा अ'ला' पहाडि़यों (A'La' Mountain) के बीच बसा एक छोटा सा गांव है। आपको जानकर हैरत होगी कि यहां फैली खामोशी की बदौलत इस इलाके को मृत शहर या डेड सिटी (Dead Cities) भी कहा जाता है। सीरिया के सेंट्रल ब्‍यूरो ऑफ स्‍टेटिस्‍टक्‍स (Syria Central Bureau of Statistics) के आंकड़ों के मुताबिक 2004 में इसकी आबादी महज 1143 थी। आपको बता दें कि यह गांव सीरिया के उस प्राचीन इतिहास का हिस्‍सा है जिसका संबंध बीजांटिन पीरियड (Byzantine period) से है। यह रोमन साम्राज्‍य की याद दिलाता है। इस काल के यहां पर अब भी कई अवशेष मौजूद हैं।  

इस पूरे इलाके की खासियत है कि यहां पर छोटी-छोटी कई गुफाएं मौजूद हैं, जो बेहद प्राचीन हैं। यही वह है कि बगदादी अपने छिपने के लिए मुफीद जगह मानता था। इसके अलावा यहां पर कई सुरंग भी हैं जो आतंकियों ने अपने लिए तैयार की हुई हैं। यह इलाका आईएस का गढ़ होने के साथ आतंकियों को ट्रेनिंग वाला इलाका भी था। यहां से ही आईएस के आतंकी तैयार होकर दूसरी जगहों पर भेजे जाते थे और वो अपने खूनी खेल को अंजाम देते थे।  

ऑस्ट्रेलिया में एक अभूतपूर्व घटना में सोमवार सुबह देश के अखबारों का पहला पन्ना काला छापा गया। अखबारों ने देश में मीडिया पर लगाम लगाने की कोशिशों का विरोध करने के लिए ये कदम उठाया है।

अखबारों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया सरकार का सख्त कानून उन्हें लोगों तक जानकारियां ला पाने से रोक रहा है।अखबारों ने पन्ने काले रखने का ये तरीका इस साल जून में ऑस्ट्रेलिया के एक बड़े मीडिया समूह ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (एबीसी) के मुख्यालय और एक पत्रकार के घर पर छापे मारने की घटना को लेकर जारी विरोध के तहत उठाया।

ये छापे व्हिसलब्लोअर्स से लीक हुई जानकारियों के आधार पर प्रकाशित किए गए कुछ लेखों के बाद मारे गए थे। अखबारों के इस अभियान - राइट टू नो कोएलिशन - का कई टीवी, रेडियो और ऑनलाइन समूह भी समर्थन कर रहे हैं। ये अभियान चलाने वालों का कहना है कि पिछले दो दशकों में ऑस्ट्रेलिया में ऐसे सख्त सुरक्षा कानून लाए गए हैं जिससे खोजी पत्रकारिता को खतरा पहुंच रहा है।

पिछले साल नए कानूनों लाए गए जिसके बाद मीडिया संगठन पत्रकारों और व्हिसलब्लोअर्स को संवेदनशील मामलों की रिपोर्टिंग में छूट दिए जाने के लिए अभियान चला रहे हैं।

अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) को अब भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान 'दादा साहेब फाल्के अवार्ड (Dada Saheb Phalke Award)' से सम्मानित किया जाएगा. इस बात की जानकारी खुद पर्यावरण, वन एवं जलवायु मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दी है.

'लेजेंड अमिताभ बच्चन जिन्होंने दो पीढ़ियों का मनोरंजन किया है, उन्हें बाबा साहब फाल्के के लिए चुना गया है. पूरा देश और अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय इस बात से काफी खुश है.

इस पुरस्कार को बॉलीवुड इंडस्ट्री का सबसे बड़ा पुरस्कार माना जाता है। इससे पहले बॉलीवुड और कला की दुनिया से जुड़े 65 हस्तियों को यह पुरस्कार मिल चुका है। आखिरी बार यह पुरस्कार साल 2017 में अभिनेता विनोद खन्ना को दिया गया था।

इससे पहले साल 2016 में कसीनथुनी विश्वनाथ को, 2015 में मनोज कुमार को, 2014 में शशि कपूर को, 2013 में गुलजार को, 2012 में प्राण को, 2011 में सौमित्र चटर्जी को, 2010 में के बालाचंदर और 2009 में डी रामानायडू को यह पुरस्कार मिल चुका है। इसके अलावा मन्ना डे, वीके मूर्ती, देव आनंद, यश चोपड़ा को भी इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

भारतीय सिनेमा के पितामह कहे जाने वाले दादा साहब फाल्के के नाम पर सिनेमा जगत का यह सर्वोच्च पुरस्कार दिया जाता है। यह पुरस्कार देने की शुरुआत साल 1969 में हुई थी। यह सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा स्थापित संगठन फिल्म महोत्सव निदेशालय द्वारा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में प्रतिवर्ष प्रस्तुत किया जाता है। 

यह पुरस्कार भारतीय सिनेमा और उसके विकास के लिए उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को दिया जाता है। इस पुरस्कार से सम्मानित होने वाले विजेता को दस लाख रुपए नगद और स्वर्ण कमल पदक व एक शाल प्रदान की जाती है। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के लिए आयोजित 17वें समारोह में पहली बार यह सम्मान अभिनेत्री देविका रानी को प्रदान किया गया था।

मुस्लिम महिलाओं से एक साथ तीन तलाक को अपराध करार देने वाले ऐतिहासिक विधेयक को बुधवार देर रात राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपनी मंजूरी दे दी। राष्‍ट्रपति के इस विधेयक पर हस्‍ताक्षर करने के साथ ही मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक अब कानून बन गया है। इस कानून को 19 सितंबर 2018 से लागू माना जाएगा। इससे पहले मंगलवार को राज्यसभा ने मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक को अपनी स्‍वीकृति दी थी। 

संसद के उच्च सदन राज्‍यसभा में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक के पक्ष में 99 वोट पड़े, जबकि 84 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया था। बीएसपी, पीडीपी, टीआरएस, जेडीयू, एआईएडीएमके और टीडीपी जैसे कई दलों के वोटिंग में हिस्सा न लेने के चलते सरकार को यह बिल पास कराने में आसानी हुई। बिल की मंजूरी से विपक्ष की कमजोर रणनीति भी उजागर हुई। इस विधेयक का तीखा विरोध करने वाली कांग्रेस कई अहम दलों को अपने साथ बनाए रखने में असफल रही। 

राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद इस कानून ने अब तीन तलाक को लेकर 21 फरवरी को जारी किए गए मौजूदा अध्यादेश की जगह ले ली है। इससे पहले बिल को सेलेक्ट कमिटी के पास भेजने का प्रस्ताव भी 100 के मुकाबले 84 वोटों से गिर गया था। इस बिल को मंजूरी के साथ ही सरकार ने साबित किया कि उसकी फील्डिंग उच्च सदन में खासी मजबूत थी। बिल का विरोध करने वाले जेडीयू, टीआरएस, बीएसपी और पीडीपी जैसे कई दलों ने मतदान में हिस्सा ही नहीं लिया। राज्यसभा में यह बिल पास होना सरकार के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है क्योंकि उच्च सदन में अल्पमत में होने के चलते उसके लिए इस बिल को पास कराना मुश्किल था। 

कब दर्ज होगा 3 तलाक का केस 

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के मुताबिक यह अपराध संज्ञेय (इसमें पुलिस सीधे गिरफ्तार कर सकती है) तभी होगा, जब महिला खुद शिकायत करेगी। इसके साथ ही खून या शादी के रिश्ते वाले सदस्यों के पास भी केस दर्ज करने का अधिकार रहेगा। पड़ोसी या कोई अनजान शख्स इस मामले में केस दर्ज नहीं कर सकता है। 

समझौते कि लिए क्या है शर्त 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह बिल महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए है। कानून में समझौते के विकल्प को भी रखा गया है। पत्नी की पहल पर ही समझौता हो सकता है, लेकिन मैजिस्ट्रेट के द्वारा उचित शर्तों के साथ। 

जमानत के लिए क्या है शर्त 

कानून के तहत मैजिस्ट्रेट इसमें जमानत दे सकता है, लेकिन पत्नी का पक्ष सुनने के बाद। केंद्रीय मंत्री ने कहा, यह पति-पत्नी के बीच का निजी मामला है। पत्नी ने गुहार लगाई है, इसलिए उसका पक्ष सुना जाना जरूरी होगा। 

गुजारे के लिए क्या है प्रावधान 

तीन तलाक पर कानून में छोटे बच्चों की कस्टडी मां को दिए जाने का प्रावधान है। पत्नी और बच्चे के भरण-पोषण का अधिकार मैजिस्ट्रेट तय करेंगे, जिसे पति को देना होगा। 

भारत जनसंख्या के मामले में विश्व में चीन के बाद दूसरे नंबर पर है। संयुक्त राष्ट्र में अर्थव्यवस्था और सामाजिक मामलों के विभाग (यूएन-डीईएसए) ने सोमवार को एक रिपोर्ट जारी की। इसके मुताबिक, 2027 तक भारत की आबादी चीन से ज्यादा हो जाएगी। वर्तमान में भारत की जनसंख्या करीब 1.36 अरब और चीन की 1.42 अरब है। रिपोर्ट में संभावना जताई गई है कि 2050 तक भारत 164 करोड़ जनसंख्या के साथ टॉप पर पहुंच जाएगा।

सदी के अंत तक चरम पर होगी विश्व की जनसंख्या 

रिपोर्ट में कहा गया है कि 21वीं सदी के अंत तक दुनिया की आबादी सबसे ज्यादा लगभग 11 अरब तक पहुंच जाएगी। 2050 तक विश्व की कुल आबादी की आधी जनसंख्या सिर्फ 9 देशों में होगी। इनमें भारत, नाइजीरिया, पाकिस्तान, कांगो, इथियोपिया, तंजानिया, इंडोनेशिया, मिस्र और अमेरिका शामिल हैं। इन देशों को संभावित जनसंख्या वृद्धि के घटते क्रम में रखा गया है। 

 संयुक्त राष्ट्र के अध्ययन के मुताबिक, अगले 30 साल में दुनिया की आबादी करीब 2 अरब बढ़कर 9.7 अरब होने की संभावना है। वर्तमान में विश्व की आबादी 7.7 अरब है। सदी के अंत तक यह आबादी अपने चरम पर करीब 10.9 अरब होगी। 

 संयुक्त राष्ट्र विभाग के डायरेक्टर जॉन विल्मोथ ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ताजा अध्ययन में पाया गया कि दुनिया की आबादी तेजी से बढ़ रही है। पिछले 69 साल में दुनिया की आबादी तीन गुना बढ़ी है। जॉन ने कहा कि रिपोर्ट से हटकर हमारा अनुमान है कि 2050 तक विश्व की आबादी 10.1 अरब और 2100 के अंत तक 12.7 अरब हो सकती है। 

 अगले 30 साल में भारत की जनसंख्या में 27.3 करोड़ की वृद्धि हो सकती है। इस हिसाब से 2050 तक भारत की कुल आबादी 164 करोड़ होने का अनुमान है। इस सदी के अंत तक भारत की 1.5 अरब, चीन की 1.1 अरब, नाइजीरिया की 73.3 करोड़, अमेरिका की 43.4 करोड़ और पाक की 40.3 करोड़ जनसंख्या हो जाएगी।

भारत के पी.एस.एल.वी.-सी45 ने एमिसैट तथा 28 अन्‍तर्राष्‍ट्रीय ग्राहक उपग्रहों को उनकी निर्दिष्‍ट कक्षाओं में सफलतापूर्वक अंत:क्षेपित किया।

सतीश धवन अं‍तरिक्ष केन्‍द्र शार, श्री‍हरिकोटा के द्वितीय प्रमोचन पैड से 1 अप्रैल 2019 को प्रात: 9:27 बजे (भारतीय मान‍क समयानुसार) पी.एस.एल.वी.-सी45 ने अपनी 47वीं उड़ान भरी। चार स्‍ट्रैपआन मोटरों के साथ पी.एस.एल.वी. के नये रूपांतर पी.एस.एल.वी.-क्‍यू.एल. का यह पहला मिशन था।

उड़ान भरने के करीब 17 मिनट 12 सेकेण्‍ड बाद एमिसैट 748 किमी. ऊँचाई की वांछित सूर्य तुल्‍यकाली ध्रुवीय कक्षा में सफलतापूर्वक स्‍थापित किया गया।

एमिसैट से अलग होने के बाद 504 किमी. ऊँची सूर्य तुल्‍यकाली कक्षा में 28 अंतर्राष्‍ट्रीय ग्राहक उपग्रहों को सटीक ढंग से स्‍थापित करने के लिए राकेट के चतुर्थ चरण के इंजनों को दो बार रीस्‍टार्ट किया गया। उड़ान के 1 घंटा 55 मिनट बाद अंतिम ग्राहक उपग्रह निर्दिष्‍ट कक्षा में स्‍थापित किया गया।

उड़ान के लगभग तीन घंटे बाद राकेट के चौथे चरण को उसके तीन नीतभारों के साथ प्रयोगों को संपन्‍न करने हेतु कक्षीय प्‍लेटफार्म के रूप में स्‍थापित करने के लिए दो रीस्‍टार्ट के बाद 485 किमी. ऊँची निम्‍न वृत्‍तीय कक्षा में स्‍थापित किया गया। पी.एस.4 नीतभार इस प्रकार है: इसरो की स्‍वचालित पहचान प्रणाली, ऐमसैट की स्‍वचालित पैकेट पुनरावृत्ति प्रणाली, आयनमंडलीय अध्‍ययन हेतु भारतीय अं‍तरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्‍थान का भारत एवं उन्‍नत मंदक विभव विश्‍लेषक।    

एमिसैट

एमिसैट उपग्रह, जो इसरो के लघु उपग्रह-2 बस के आधार पर निर्मित है जिसका वजन लगभग 436 कि.ग्रा. है। पी.एस.एल.वी.-सी45 द्वारा 01 अप्रैल, 2019 को यह उपग्रह 748 कि.मी. की ऊँचाई पर अपनी निर्धारित सूर्य-तुल्‍यकाली ध्रुवीय कक्षा में सफलतापूर्वक स्‍थापित किया गया। इस उपग्रह का उद्देश्‍य विद्युत चुम्‍बकीय स्‍पैक्‍ट्रम का मापन करना है।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों ने लोगों से वादा किया है कि भीषण आग का शिकार हुए ऐतिहासिक नोट्रे डेम कैथेड्रल को 5 साल के अंदर और भी ज्यादा खूबसूरती के साथ दोबारा बनवाया जाएगा. 

मैक्रों ने देशवासियों को संबोधित करते हुए एलान किया कि इस आपदा ने देश को एकजुटता दिखाने का मौका दिया है. फ्रांस के गृह उपमंत्री लॉरेंट ननेज़ ने अग्निशमन कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने इमारत के ढांचे को बचाने के लिए अपनी जान खतरे में डाली.

ऐतिहासिक नोट्रे डेम कैथेड्रल का होगा पुनर्निर्माण: इमानुएल मैक्रौं

इस बीच नोट्रे डेम कैथेड्रल के पुनर्निमाण के लिए लोगों ने करोड़ों यूरो देने का वादा किया है. इस आग में 850 साल पुराने कैथेड्रल की छत को नुकसान हुआ है. आग के कारणों का अब तक पता नहीं चला है.

चक्रवात केनथ ने फ्रांस के द्वीप समूह मैयट में तबाही मचाई, तूफान के चलते भारी बारिश के साथ तेज़ हवाएं भी चल रही हैं। आज तूफान केनथ के मोज़ाम्बिक पहुंचने की संभावना है।

चक्रवात केनथ ने फ्रांस के द्वीप समूह मैयट में मचाई तबाही

हिन्द महासागर में फ्रांस के द्वीप समूह मैयट में कल चक्रवात केनथ ने भारी तबाही मचाई, जिसकी वजह से भारी बारिश हुई और तेज हवाएं चली। तेज चक्रवात के कारण लोगों को अपने घरों को छोड़कर स्थानीय स्कूलों में लगाए शिविरों में शरण लेनी पड़ी। चक्रवात केनथ के आज द्वीपसमूह के उत्तर से गुजरने की संभावना है, जिसकी वजह से बारिश हो सकती है और आंधी आने का अनुमान है।

इस उष्णकटिबंधीय तूफान के आज मोजाम्बिक के तट पर पहुंचने की उम्मीद है। मोजाम्बिक में एक महीने पहले भीषण तूफान आया था जिससे मोजाम्बिक समुद्र तटीय शहर बियरा काफी तबाह हो गया था और सैंकड़ो लोग मारे गए थे। मौसम विभाग ने कहा है कि चक्रवात कनेथ से भारी बारिश हो सकती है तेज हवाएं चल सकती है और समुद्र में कई मीटर उंची लहरें उठ सकती है। 

आयुष्मान भारत योजना (ABY) की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2018 में की थी। इसे पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जयंती पर 25 सितंबर से देशभर में लागू कर दिया गया है. आयुष्मान भारत योजना (ABY) को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) भी कहा जाता है. यह वास्तव में देश के गरीब लोगों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम है. PMJAY के तहत देश के 10 करोड़ परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा मिल रहा है. सरकार ABY के माध्यम से गरीब, उपेक्षित परिवार और शहरी गरीब लोगों के परिवारों को स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराना चाहती है. आयुष्मान भारत योजना (ABY) में शामिल होने के लिए परिवार के आकार और उम्र का कोई बंधन नहीं है.

आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य बीमा का लाभ लेने वालों की संख्या 20 लाख के पार निकल गयी है। कुल मिलाकर अब तक 3.07 करोड़ लाभार्थियों को योजना के तहत ई-कार्ड जारी किये गये हैं। योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2018 में की थी। इसमें 10.74 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर उपलब्ध कराया जाता है। योजना के तहत 15,400 अस्पताल को जोड़ा गया है। इसमें से 50 प्रतिशत निजी अस्पताल हैं।

सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) 2011 के हिसाब से ग्रामीण इलाके के 8.03 करोड़ परिवार और शहरी इलाके के 2.33 करोड़ परिवार आयुष्मान भारत योजना (ABY) के दायरे में आयेंगे. इस तरह PM-JAY के दायरे में 50 करोड़ लोग आएंगे. 

साल 2008 में यूपीए सरकार द्वारा लांच राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (NHBY) को भी आयुष्मान भारत योजना (PM-JAY) में मिला दिया गया है.

ABY की योग्यता का निर्धारण कैसे होता है?

SECC के आंकड़ों के हिसाब से आयुष्मान भारत योजना (ABY) में लोगों को मेडिकल इंश्योरेंस मिल रहा है. SECC के आंकड़ों के हिसाब से ग्रामीण इलाके की आबादी में D1, D2, D3, D4, D5 और D7 कैटेगरी के लोग आयुष्मान भारत योजना (ABY) में शामिल किये गए हैं. 

शहरी इलाके में 11 पूर्व निर्धारित पेशे/कामकाज के हिसाब से लोग आयुष्मान भारत योजना (ABY) में शामिल हो सकते हैं. राज्यों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में पहले से शामिल लोग खुद ही आयुष्मान भारत योजना (ABY) में शामिल हो गए हैं.

ग्रामीण इलाके के लिए ABY की योग्यता 

आयुष्मान भारत योजना (ABY) में शामिल होने के लिए मोटे तौर पर ये योग्यता हैं: 

  • ग्रामीण इलाके में कच्चा मकान, परिवार में किसी व्यस्क (16-59 साल) का नहीं होना, परिवार की मुखिया महिला हो, परिवार में कोई दिव्यांग हो, अनुसूचित जाति/जनजाति से हों और भूमिहीन व्यक्ति/दिहाड़ी मजदूर

  • इसके अलावा ग्रामीण इलाके के बेघर व्यक्ति, निराश्रित, दान या भीख मांगने वाले, आदिवासी और क़ानूनी रूप से मुक्त बंधुआ आदि खुद आयुष्मान भारत योजना (ABY) में शामिल हो जायेंगे.

शहरी इलाके के लिए ABY की योग्यता

आयुष्मान भारत योजना (ABY) में शामिल होने के लिए मोटे तौर पर ये योग्यता हैं: भिखारी, कूड़ा बीनने वाले, घरेलू कामकाज करने वाले, रेहड़ी-पटरी दुकानदार, मोची, फेरी वाले, सड़क पर कामकाज करने वाले अन्य व्यक्ति. कंस्ट्रक्शन साईट पर काम करने वाले मजदूर, प्लंबर, राजमिस्त्री, मजदूर, पेंटर, वेल्डर, सिक्योरिटी गार्ड, कुली और भार ढोने वाले अन्य कामकाजी व्यक्ति स्वीपर, सफाई कर्मी, घरेलू काम करने वाले, हेंडीक्राफ्ट का काम करने वाले लोग, टेलर, ड्राईवर, रिक्शा चालक, दुकान पर काम करने वाले लोग आदि आयुष्मान भारत योजना (ABY) में शामिल होंगे.

ABY में अस्पताल में भर्ती की प्रक्रिया

आयुष्मान भारत योजना (ABY) का लाभार्थी अस्पताल में एडमिट होने के लिए कोई चार्ज नहीं चुकाएगा. अस्पताल में दाखिल होने से लेकर इलाज तक का सारा खर्च इस योजना में कवर किया जायेगा. आयुष्मान भारत योजना (ABY) के लाभ में अस्पताल में दाखिल होने से पहले और बाद के खर्च भी कवर किये जायेंगे. पैनल में शामिल हर अस्पताल में एक आयुष्मान मित्र होगा. वह मरीज की मदद करेगा और उसे अस्पताल की सुविधाएं दिलाने में मदद करेगा. अस्पताल में एक हेल्प डेस्क भी होगा जो दस्तावेज चेक करने, स्कीम में नामांकन के लिए वेरिफिकेशन में मदद करेगा. आयुष्मान भारत योजना में शामिल व्यक्ति देश के किसी भी सरकारी/पैनल में शामिल निजी अस्पताल में इलाज करा सकेगा.

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के वरिष्‍ठ अधिकारी डेविड मालपास को विश्‍व बैंक का नए अध्‍यक्ष बना दिया गया। वह फिलहाल वित्त विभाग में अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप मंत्री है। उनका कार्यकाल नौ अप्रैल से पांच साल के लिये होगा।

अमेरिका के वित्‍त विभाग के वरिष्‍ठ अधिकारी डेविड मालपास विश्‍व बैंक के नए अध्‍यक्ष होंगे। विश्‍व बैंक के कार्यकारी बोर्ड ने 63 वर्ष के मालपास को पांच वर्ष के कार्यकाल के लिए बैंक के 13वें अध्‍यक्ष के रूप में चयन किया। विश्वबैंक के कार्यकारी बोर्ड ने आम सहमति से मालपास का अध्यक्ष के रूप में चयन किया। वह फिलहाल वित्त विभाग में अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप मंत्री है। उनका कार्यकाल नौ अप्रैल से पांच साल के लिये होगा। गौरतलब है कि सभी 13 अध्यक्ष अमेरिकी हैं। विश्वबैंक का अध्यक्ष अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक (आईबीआरडी) तथा अंतरराष्ट्रीय विकास संघ (आईडीए) के निदेशक मंडल के अध्यक्ष होते हैं।

आज 27 मार्च को भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल किया है. हमारे वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में 300 किलोमीटर दूर Low Earth Orbit (LEO) में एक लाइव सैटेलाइट को मार गिराया है. यह सैटेलाइट जो कि एक पूर्व निर्धारित लक्ष्य था, एसेट मिसाइल द्वारा मार गिराया गया. 'मिशन शक्ति' को तीन मिनट में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया. यह अत्यंत कठिन ऑपरेशन था. इसमें उच्च गुणवत्ता वाली तकनीक की जरूरत थी. सभी निर्धारित उद्देश्य प्राप्त कर लिए गए. यह भारत में एंटी सैटेलाइट (ए-सेट) मिसाइल द्वारा सिद्ध किया गया.

 भारत ने अंतरिक्ष में एक और कामयाबी का परचम लहराया है और मिशन शक्ति (Mission Shakti) की सफलता के साथ अमेरिका, चीन, रूस के बाद भारत दुनिया का चौथा सबसे शक्तिशाली देश बन गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने देश के नाम संबोधन में इस बात की जानकारी दी. पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान कहा कि भारत अंतरिक्ष पावर के रूप में दुनिया का चौथा सबसे शक्तिशाली देश बन गया है.

अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों और जिम्मेदार देश होने के कारण भारत ने पहले इस क्षमता को हासिल होने के बारे में कोई पुष्टि नहीं की थी। लेकिन वर्तमान में बढ़ते सामरिक खतरों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज इस मिसाइल के सफल परीक्षण के साथ इस बात की घोषणा कर दी कि भारत भी इस प्रकार के विशिष्ट क्लब में शामिल हो गया है।

चीन ने भारत के उपग्रह रोधी मिसाइल परीक्षण पर सतर्कतापूर्वक प्रतिक्रिया जताते हुए उम्मीद जतायी कि सभी देश बाहरी अंतरिक्ष में शांति बनाये रखेंगे। चीन ने ऐसा एक परीक्षण जनवरी 2007 में किया था जब उसके उपग्रह रोधी मिसाइल ने एक निष्क्रिय मौसम उपग्रह को नष्ट कर दिया था।

क्या होता है लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) ?

लो अर्थ ऑर्बिट धरती के सबसे पास वाली कक्षा होती है। यह धरती से 2000 किमी ऊपर होती है। धरती की इस कक्षा में ज्यादातर टेलीकम्युनिकेशन सेटेलाइट्स को रखा जाता है।

क्या होता है स्पेस वॉर ?

माना जा रहा है कि अगला विश्‍व युद्ध धरती पर नहीं अंतरिक्ष में लड़ा जाएगा। इसे देखते हुए दुनिया के कई देशों ने उपग्रहों का प्रक्षेपण तेज कर दिया है। सभी देश अंतरिक्ष में अपनी ताकत तेज करने में लगे हुए हैं। जून 2018 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक स्पेस फोर्स बनाने का एलान कर अंतरिक्ष में हथियारों और सेनाओं की मौजूदगी को लेकर बहस छेड़ दी थी। उन्होंने अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन को स्पेस-फोर्स बनाने का आदेश दिया था। स्पेस-फोर्स के फैसले को वो देश की निजी सुरक्षा से जुड़ा मानते हैं।

क्या होगा भारत को फायदा ?

पाकिस्तान और चीन की और से लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत को इसका बहुत फायदा होगा। चीन और पाकिस्तान की मिसा‍इलों का भारत की रडार से बचना अब खासा मुश्किल हो जाएगा। इससे न सिर्फ भारत का दुनिया में दबदबा बढ़ेगा बल्कि भारत की सुरक्षा व्यवस्‍था बेहद मजबूत हो जाएगी।

चुनाव आयोग ने 10.03.2019 को लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2019)  की तारीखों की घोषणा कर दी है. जिसके मुताबिक पहले चरण में 11 अप्रैल को 20 राज्यों की 91 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. इनमें आंध्र प्रदेश की 25, यूपी की 8, बिहार की 4, महाराष्ट्र की 7, अरुणाचल प्रदेश की 2, असम की 5, छत्तीसगढ़ की 1, जम्मू-कश्मीर की 2, मणिपुर की 1, मेघालय की 2, मिज़ोरम की 1, नागालैंड की 1, ओडिशा की 4, सिक्किम की 1,  उत्तराखंड की 5, पश्चिम बंगाल की 2, लक्षद्वीप की 1, तेलंगाना की 17, त्रिपुरा की 1 और अंडमान की 1 सीटें शामिल हैं. दूसरे चरण में 18 अप्रैल को 12 राज्यों की 97 सीट पर वोट पड़ेंगे. इनमें असम की 5, बिहार की 5, छत्तीसगढ़ की 3, जम्मू-कश्मीर की 2, कर्नाटक की 14, महाराष्ट्र की 10, मणिपुर की 1, ओडिशा की 5, तमिलनाडु की 39, त्रिपुरा की 1, उत्तर प्रदेश की 8, पश्चिम बंगाल की 3 और पुड्डुचेरी की 1 सीटें शामिल हैं. तीसरे चरण में 23 अप्रैल को 14 राज्यों की 115 सीटों पर मतदान होगा. इनमें असम की 4, बिहार की 5, छत्तीसगढ़ की 7, गुजरात की 26, गोवा की 2, जम्मू-कश्मीर की 1, कर्नाटक की 14, केरल की 20, महाराष्ट्र की 14, ओडिशा की 6, उत्तर प्रदेश की 10, पश्चिम बंगाल की 5, दादरा और नगर हवेली की 1, और दमन-दीव की 1 सीटें शामिल हैं. 

चौथे चरण में 29 अप्रैल को 9 राज्यों की 71 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. इनमें बिहार की 5, जम्मू-कश्मीर की 1, झारखंड की 3, मध्य प्रदेश की 6, महाराष्ट्र की 17, ओडिशा की 6, राजस्थान की 13, उत्तर प्रदेश की 13, और पश्चिम बंगाल की 8 सीटें शामिल हैं. पांचवें चरण में 6 मई को 7 राज्यों की 51 सीटों पर वोट पड़ेंगे. इनमें बिहार की 5, जम्मू-कश्मीर की 2, झारखंड की 4, मध्य प्रदेश की 7, राजस्थान की 12, उत्तर प्रदेश की 14 और पश्चिम बंगाल की 7 सीटें शामिल हैं. छठे चरण में 12 मई को 7 राज्यों की 59 सीटों पर वोट पड़ेंगे. इनमें बिहार की 8, हरियाणा की 10, झारखंड की 4, मध्य प्रदेश की 8, उत्तर प्रदेश की 14, पश्चिम बंगाल की 8 सीटें हैं... दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों पर भी इसी दिन वोटिंग होगी. सातवें चरण में 19 मई को 8 राज्यों की 59 सीटों पर वोट डाले जाएंगे... इनमें बिहार की 8, झारखंड की 3, मध्य प्रदेश की 8, पंजाब की 13, पश्चिम बंगाल की 9, चंडीगढ़ की 1, उत्तर प्रदेश की 13 और हिमाचल प्रदेश की 4 सीटें शामिल हैं. इसके चार दिन बाद 23 मई को नतीजे आएंगे.

Lok Sabha Election 2019 : किस सीट पर कब होगा मतदान 

राजस्थान में 25 सीटें, 2 चरण में मतदान
29 अप्रैल : जोधपुर, टोंक-सवाईमाधोपुर, पाली, बाड़मेर, जालौर, उदयपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा, कोटा, झालावाड़-बारां, , अजमेर,
6 मई :  दौसा, नागौर, गंगानगर, बीकानेर, चुरू, झुंझुनू, सीकर, जयपुर ग्रामीण, जयपुर, अलवर, भरतपुर, करौली धौलपुर,

मध्यप्रदेश में 29 सीटें, चार चरण मतदान
29 अप्रैल : सीधी, शहडोल, जबलपुर, मंडला, बालाघाट, छिंदवाड़ा
6 मई : टीकमगढ़, दमोह, खजुराहो, सतना, रीवा, होशंगाबाद, बैतूल
12 मई : मुरैना, भिंड, ग्वालियर, गुना, सागर, विदिशा, भोपाल, राजगढ़
19 मई : देवास, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम, धार, इंदौर, खरगोन, खंडवा

छत्तीसगढ़ में 11 सीटें, 3 चरण में मतदान 
11 अप्रैल : बस्तर
18 अप्रैल : राजनांदगांव, महासमुंद, कांकेर
23 अप्रैल : रायपुर, सरगुजा, जांजगीर-चंपा, कोरबा, बिलासपुर, दुर्ग, 

बिहार में 40 सीटें, 7 चरणों मतदान
11 अप्रैल : जमुई औरंगाबाद, गया, नवादा,
18 अप्रैल : बांका, किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, भागलपुर
23 अप्रैल : खगड़िया, झंझारपुर, सुपौल, अररिया, मधेपुरा,
29 अप्रैल : दरभंगा, उजियारपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, मुंगेर
6 मई : मधुबनी, मुजफ्फरपुर, सारन, हाजीपुर, सीतामढ़ी,
12 मई : पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, , शिवहर, वैशाली, गोपालगंज, सिवान, महाराजगंज, वाल्मीकिनगर
19 मई : नालंदा, पटना साहिब, पाटलिपुत्र, आरा, बक्सर, सासाराम, काराकट, जहानाबाद

उत्तर प्रदेश में 80 सीटें, 7 चरणों में मतदान
11 अप्रैल : गौतमबुद्ध नगर, कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, सहारनपुर
18 अप्रैल : अलीगढ़, अमरोहा, बुलंदशहर, हाथरस, मथुरा, आगरा, फतेहपुर सीकरी, नगीना
23 अप्रैल : मुरादाबाद, रामपुर, संभल, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, बदायूं, आंवला, बरेली, पीलीभीत
29 अप्रैल : शाहजहांपुर, खेड़ी़, हरदोई, मिश्रिख, उन्नाव, फर्रुखाबाद, इटावा, कनौज, कानपुर, अकबरपुर, जालौन, झांसी, हमीरपुर
6 मई : फिरोजाबाद, धौरहरा, सीतापुर, माेहनलालगंज, लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, बांदा, फतेहपुर, कौशांबी, बाराबंकी, बहराइच, कैसरगंज, गोंडा
12 मई : सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, फूलपुर, प्रयागराज, अंबेडकर नगर, श्रावस्ती, डुमरियागंज, बस्ती, संत कबीर नगर, लालगंज, आजमगढ़, जौनपुर, मछलीशहर, भदोही
19 मई : महाराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, बांसगांव, घोसी, सालेमपुर, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, मिर्जापुर, रॉबर्ट्सगंज

झारखंड में 14 सीटें, 4 चरणों में मतदान
29 अप्रैल : चतरा, लोहारदगा, पलामू
6 मई : कोडरमा, रांची, खूंटी, हजारीबाग
12 मई : गिरीडीह, धनबाद, जमशेदपुर, सिंहभूम
19 मई : राजमहल, दुमका, गोड्डा

महाराष्ट्र में 48 सीटें, 4 चरणों में मतदान 
11 अप्रैल : वर्धा, रामटेक, नागपुर, भंडारा-गोंदिया, गढ़चिरौली-चिमूर, चंद्रपुर, यवतमाल-वाशिम
18 अप्रैल : बुलढाना, अकोला, अमरावती, हिंगोली, नांदेड़, परभणी, बीड, उस्मानाबाद, लातूर, सोलापुर
23 अप्रैल : जलगांव, रावेर, जालना, औरंगाबाद, रायगढ़, पुणे, बारामती, अहमदनगर, मढ़ा, सांगली, सातारा, रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग, कोल्हापुर, हटकानांगले
29 अप्रैल : नंदूरबार, धुले, डिंडोरी, नासिक, पालघर, भिवंडी, कल्याण, ठाणे, मुंबई, मुंबई उत्तर-पश्चिम, मुंबई उत्तर-पूर्व, मुंबई उत्तर-मध्य, मुंबई दक्षिण-मध्य, मुंबई दक्षिण, मावल, शिरूर, शिर्डी

असम में 14 सीटें, 3 चरणों में मतदान
11 अप्रैल : तेजपुर, कलियाबोर, जोरहट, डिब्रूगढ़, लखीमपुर  
18 अप्रैल : करीमगंज, सिलचर, ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट, मंगलदोई और नौगांव
23 अप्रैल : धुबड़ी, कोकराझार, बारपेटा, गुवाहाटी

जम्मू-कश्मीर में 6 सीटें, 5 चरणों में मतदान
11 अप्रैल : बारामूला, जम्मू 
18 अप्रैल : श्रीनगर, उधमपुर
23 अप्रैल : अनंतनाग (सिर्फ अनंतनाग जिले में वोटिंग)
29 अप्रैल : अनंतनाग (सिर्फ कुलगाम जिले में वोटिंग)
6 मई : लद्दाख, अनंतनाग (सिर्फ शोपियां जिले में वोटिंग)

कर्नाटक में 28 सीटें दो चरणों मतदान
18 अप्रैल : उदुपी-चिकमगलूर, हासन, दक्षिण कन्नड़, चित्रदुर्गा, तुमकुर, मांड्या, मैसूर, चामराजनगर, बेंगलुरु ग्रामीण, बेंगलुरु उत्तर, बेंगलुरु मध्य, बेंगलुरु दक्षिण, चिक्काबल्लापुर, कोलार
23 अप्रैल : चिक्कोडी, बेलगांव, बगलकोट, बीजापुर, गुलबर्गा, रायचूर, बीदर, कोप्पल, बेल्लारी, हावेरी, धारवाड़ा, उत्तर कन्नड़, दावणगेरे, शिमोगा

ओडिशा में 21 सीटें, 4 चरणों मतदान
11 अप्रैल : कालाहांडी, नबरंगपुर, बेरहामपुर, कोरापुट
18 अप्रैल : बरगढ़, सुंदरगढ़, बोलांगीर, कंधमाल, अस्का
23 अप्रैल : संबलपुर, क्योंझर, ढेंकानाल, कटक, पुरी, भुवनेश्वर
29 अप्रैल : मयूरभंज, बालासोर, भद्रक, जाजपुर, केंद्रपाड़ा, जगतसिंहपुर

मणिपुर में 2 सीटों, दो चरणों मतदान 
1 अप्रैल : बाहरी मणिपुर
18 अप्रैल : आंतरिक मणिपुर

त्रिपुरा में 2 सीटों में मतदान, दो चरण में मतदान
11 अप्रैल : त्रिपुरा पश्चिम
18 अप्रैल : त्रिपुरा पूर्व

बंगाल में 42 सीटें, 7 चरणों मतदान
11 अप्रैल : कूच बिहार, अलीपुरदुआर
18 अप्रैल : जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, रायगंज
23 अप्रैल : बालुरघाट, मालदा उत्तर, मालदा दक्षिण, जंगीपुर, मुर्शिदाबाद
29 अप्रैल : बेहरामपुर, कृष्णानगर, राणाघाट, बर्धमान पूर्व, बर्धमान-दुर्गापुर, आसनसोल, बोलपुर, बीरभूम
6 मई : बंगांव, बैरकपुर, हावड़ा, उलुबेरिया, श्रीरामपुर, हुगली, आरामबाग
12 मई : तामलुक, कांति, घाटल, झारग्राम, मेदिनीपुर, पूर्णिया, बांकुरा, विष्णुपुर, 
19 मई :  मथुरापुर, डायमंड हार्बर, जाधवपुर, कोलकाता दक्षिण, कोलकाता उत्तर, दमदम, बारासात, बशीरहाट, जयनगर,

7 मार्च 2019 को जन औषधि दिवस देशभर में मनाया जाएगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पांच हजार जन औषधि भण्‍डारों के संचालकों और इस कार्यक्रम के लाभार्थियों से बातचीत करेंगे। देश के छह सौ बावन जिलों में पांच हजार से अधिक प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना केन्‍द्र काम कर रहे हैं।

रसायन और उर्वरक राज्‍य मंत्री मनसुख मांडविया ने नई दिल्‍ली में संवाददाताओं को बताया कि पिछले तीन वर्षों में जेनेरिक औषधियों की बाजार में हिस्‍सेदारी में तीन गुना बढ़ोतरी हुई है जो दो प्रतिशत से बढ़कर सात प्रतिशत हो गई है।

श्री मांडविया ने कहा कि सरकार का लक्ष्‍य 2020 तक ब्‍लॉक स्‍तर पर जन औषधि केन्‍द्र खोलने का है।

सारे देश में हमने पांच हजार जन औषधि स्टोर आज के दिन में सर्व कर दिया है। ये जन औषधि स्टोर पर मेक्सिमम 50 परसेन्ट, मिनिमम 20 परसेन्ट, 30 परसेन्‍ट रेट में क्‍वालिटी जेनेरिक मेडिसिन उपलब्‍ध होती है। जन औषधि केंद्र के माध्यम से जेनेरिक मेडिसिन उपलब्ध करवा के देश में जेनेरिक मेडिसिन पोपुलर बने, उसकेलिए भी हमने प्रयास करना शुरू किया है।

सरकार आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि जैसी योजनाओं के जरिए से सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है। इस परियोजना से आम नागरिकों को करीब लगभग 1000 करोड़ रुपये की बचत हुई है, केंद्रों के जरिए बेची जाने वाली दवाईओं की कीमत औसत बाजार मूल्य से 50 से 90 प्रतिशत तक कम होती है। जनऔषधि दिवस पर आज सभी केंद्रों पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस बारे में जागरूक किया जा सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के उन तमाम वर्गो को सामाजिक सुरक्षा से लैस कर दिया जो अब तक इन सुविधाओं से वंचित थे।  पीएम ने अपनी गुजरात यात्रा के दूसरे दिन असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे कामगारों के लिए इस बड़ी योजना की शरूआत की। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये योजना देश के श्रमजीवियों,कर्मजीवियों को समर्पित है और मां भारती के भाल पर ये एक तिलक के समान है। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि ग़रीबी कैसी होती है और एक मज़दूर का जीवन कितना संघर्षपूर्ण होता है इसे उन्होने नज़दीक से देखा है। वजह यही है आज़ादी के बाद जो काम ग़रीबों,मज़दूरों और कामगारों के हित के लिए नहीं हुआ उसे सिर्फ 55 महीने वाली सरकार ने मुमकिन करके दिखाया है। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और मजदूरों के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना की घोषणा इस साल फरवरी में अंतरिम बजट में की गई थी। श्रम योगी मानधन योजना से वे सभी लोग जुड़ सकते हैं जिनकी आय 15 हज़ार प्रति माह है या इससे कम है।

इस योजना में स्वैच्छिक रूप से वो लोग जुड़ सकते हैं जो योग्य हों। योजना के साथ जुड़ने की उम्र 18 वर्ष से 40 वर्ष तक की है। किसी भी कॉमन सेंटर पर जाकर रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है। 60 वर्ष की उम्र के बाद जुड़ने वाले पात्र व्यक्तियों 3 हज़ार प्रति माह की निश्चित राशि पेंशन के रूप में मिलेगी। इसके तहत 18 वर्ष की उम्र में जुड़ने वाले व्यक्ति को 55रु. प्रति माह 29 वर्ष की आयु में जुड़ने वाले को 100रु. प्रति माह और 40वर्ष की उम्र में जुड़ने वाले व्यक्ति को 200रु. प्रति माह का अंशदान देना होगा। 

योजना से असंगठित क्षेत्र के 10 करोड़ श्रमिकों को लाभ मिलेगा। पीएम ने 'प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना' के तहत 11 लाख 51 हजार लाभार्थियों तक 13 करोड़ 58 लाख 31 हजार 918 रुपये की धनराशि सीधे श्रमिकों के पेंशन खातों में ट्रांसफर की। दरअसल, मेहनतकश लोगों तक सामाजिक लाभ पहुंचे इसके लिए सरकार ने प्रधानमंत्री बीमा योजना भी लागू की है। अब बीमा के बाद पेंशन योजना की शुरुआत असंगठित क्षेत्र के लोगों के लिए नई उम्मीद है। 

बुल्गारिया के सोफिया में चल रहे डेन कोलोव-निकोला पेट्रोव इंटरनेशनल मीट में भारतीय पलवानो ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 2 स्वर्ण और 4 रजत पदक अपने नाम कर लिए है। भारत के लिए बजरंग पुनिया और पूजा ढांडा ने स्वर्ण जीतने में सफलता पाई। बजरंग ने 65 किग्रा फ्रीस्टाइल के फाइनल में अमेरिका के जॉर्डन माइकल ओलिवर को 12-3 से हराया। बजरंग भी अपने तीनों मैच जीतने में सफल रहे। उन्होंने सेमीफाइनल में रूस के एडुअर्ड ग्रिगोरेव को हराया था। 2018 वर्ल्ड चैम्पियनशिप की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट पूजा ने 59 किग्रा फ्रीस्टाइल में गोल्ड मेडल जीता। इसी कैटेगरी में भारत की सरिता देवी ने सिल्वर हासिल किया।

 इन दोनों के अलावा तीन अन्य भारतीय रेसलर्स ने रजत पदक जीते। 65 किग्रा के फाइनल में साक्षी मलिक को हार का सामना करना पड़ा है। साक्षी के अलावा सरीता मोर ने महिलाओं के 59 किग्रा वर्ग में और पुरूषों की फ्रीस्टाइल स्पर्धा में संदीप तोमर को 61 किग्रा में रजत पदक से संतोष करना पड़ा। वहीं महिलाओं के 53 किग्रा वर्ग में विनेश फोगट को भी रजत पदक से संतोष करना पड़ा। विनेश को फाइनल में वर्ल्ड चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीतने वालीं चीन की कियानयू पंग से शिकस्त मिली।

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 के पुरस्कारों की घोषणा हुई। इंदौर सबसे स्वच्छ शहर रहा। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में अहमदाबाद पहले पायदान पर रहा। 3-10 लाख आबादी वाले शहरों में उज्जैन ने मारी बाजी और 1-3 लाख आबादी वाले शहरों में एनडीएमसी दिल्ली ने अपना परचम लहराया। सबसे स्वच्छ राजधानी में भोपाल अव्वल पायदान पर रहा। 

इंदौर सबसे स्वच्छ शहर रहा। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में अहमदाबाद पहले पायदान पर रहा। 3-10 लाख आबादी वाले शहरों में उज्जैन ने मारी बाजी और 1-3 लाख आबादी वाले शहरों में एनडीएमसी दिल्ली ने अपना परचम लहराया। सबसे स्वच्छ राजधानी में भोपाल अव्वल पायदान पर रहा, नमामि गंगे योजना में उत्तराखंड के गोचर अव्वल रहा तो वेस्ट परफोर्मिग राज्य में छत्तीसगढ़ पहले, झारखंड दूसरे और महाराष्ट्र तीसरे दर्ज पर रहा। 

साल 2016 में शुरू होनेवाले स्वच्छता सर्वेक्षण में महज 73 शहरो ने हिस्सा लिया था, 2017 में 434 शहर , 2018 में 4041 शहर, और साल 2019 में 4273 शहरों ने जुड़कर इसे दुनिया का सबसे बड़ा सर्वे बना दिया। जिसमें करीब 40 करोड़ शहरी आबादी जुड़ी। 64 लाख नागरिको के फीडबैक आये। 4.5 करोड़ लोग सोशल मीडिया से जुड़े। 41 लाख जीओटैग फोटो खीचे गये। जहां डोर टू डोर कचरा कलेक्शन और पूर्णरूपेण डिजिटल सर्वेक्षण किताबी बातें नहीं बल्कि सच्चाई बनकर सामने आई।

केवल 28 दिनों में पूरा होनेवाले इस सर्वे में स्टार रेटिंग, ओडीएफ प्लस, ओडीएफ प्लस प्लस ने देश के सभी शहरों में आगे बढ़ने की होड़ लगा दी। शहरों में कचरे से कम्पोस्ट बनाना, सुन्दर पार्क बनाना, गंदगी को दूर कर स्वच्छ और स्मार्ट शहर के निर्माण ने सर्वे को नई बुलंदियों तक पहुंचा दिया।

फ़ोर्ब्स ने 2019 की सबसे अमीर लोगों की सूची जारी कर दी है. इसके अनुसार दुनिया के सबसे अमीर आदमियों की सूची में मुकेश अंबानी अपनी स्थिति को छह पायदान सुधारते हुए 13वें स्थान पर पहुंच गये हैं.

2018 में मुकेश अंबानी 19वें स्थान पर थे जबकि 2017 में उनका 33वां स्थान था.

इस लिस्ट के अनुसार अमेज़न के संस्थापक जेफ़ बेजोस (131 बिलियन डॉलर) दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बने हुए हैं. उनके बाद बिल गेट्स (96.6 बिलियन डॉलर) और वॉरेन बफ़ेट (82.5 बिलियन डॉलर) का स्थान है.

वहीं, फ़ेसबुक के संस्थापक मार्क ज़करबर्ग (62.3 बिलियन डॉलर) तीन स्थान नीचे (आठवें पर) आ गए हैं जबकि न्यूयॉर्क के पूर्व मेयर माइकल ब्लूमबर्ग (55.5 बिलियन डॉलर) दो स्थान ऊपर (9वें स्थान पर) पहुंचे हैं.

फ़्रांस की एलवीएमएच के सीईओ बर्नार्ड अरनॉल्ट (76 बिलियन डॉलर) इस सूची में चौथे स्थान पर हैं.

पांचवे स्थान पर लैटिन अमरीका की सबसे बड़ी मोबाइल कंपनी 'अमरीका मोविल' के मालिक कार्लोस स्लिम हेलू (64 बिलियन डॉलर) हैं. स्लिम मैक्सिको के सबसे अमीर शख़्स भी हैं.

शीर्ष-10 की सूची में ज़ारा फैशन चेन से प्रसिद्ध 82 वर्षीय अमानसियो ऑरटेगा (62.7 बिलियन डॉलर) छठे, ओरेकल के सह-संस्थापक लैरी इलिसन (62.5 बिलियन डॉलर) सातवें और गूगल के पहले सीईओ रहे लैरी पेज (50.8 बिलियन डॉलर) 10वें स्थान पर हैं.

पिछले 10 सालों में महिला अरबपतियों की संख्या में 167 फ़ीसदी इज़ाफ़ा हुआ है. 2010 में महिला अरबपतियों की कुल संख्या 91 थी जो 2019 में बढ़कर 243 पर जा पहुंची है.

इस साल टॉप 20 की सूची में केवल दो महिलाएं लोरियल की फ्रैंकोइस बेटनकोर्ट और क्रिस्टल ब्रिजेस म्यूज़ियम ऑफ़ अमेरिकन आर्ट की एलिस वॉल्टन हैं.

बेटनकोर्ट फ्रांसिसी कॉस्मेटिक कंपनी लॉरियल की उत्तराधिकारी हैं जबकि एलिस वॉल्टनअमरीकी सुपरमार्केट वॉलमार्ट के संस्थापक सैम वॉल्टन की इकलौती पुत्री हैं.

इस लिस्ट में सबसे युवा महिला अरबपति बनी हैं काइली जेनर. कार्दाशियां परिवार की जेनर केवल 21 साल की हैं लिहाज़ा उन्होंने मार्क ज़करबर्ग के 23 साल में अरबपति बनने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है.

जेनर काइली कॉस्मेटिक चलाती हैं, जिसे उन्होंने केवल तीन साल पहले शुरू किया था. इस कंपनी ने बीते वर्ष 360 मिलियन डॉलर का बिज़नेस किया है.

जेनर ने फ़ोर्ब्स से कहा, "मैं कुछ भी उम्मीद नहीं करती. मैं भविष्य के पूर्वानुमान नहीं लगाती."

जेनर ने कहा, " लेकिन (मान्यता) मिलने से अच्छा लगता है. यह मुझे मिली शाबासी है."

फ़ोर्ब्स की 2019 की सूची में 2,153 लोगों के नाम हैं जो 2018 की तुलना में 55 कम है.

2018 में अरबपतियों की संख्या 2,208 थी. इस साल अरबपतियों की कुल संपति 8,700 अरब डॉलर रही जो 2018 में 9,100 अरब डॉलर थी.

फ़ोर्ब्स की यह सूची 8 फ़रवरी के कंपनियों के शेयर और विनिमय दर के आधार पर तैयार की गई है.

ओआईसी इस्लामी देशों से संबद्ध महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार करने के लिये प्रत्येक तीन वर्ष के अंतराल पर राष्ट्राध्यक्षों का सम्मेलन बुलाया जाता है। विदेश मंत्रियों का सम्मेलन ओआईसी की प्रमुख संस्था है, जिसमें सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि सम्मिलित होते हैं इसके प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं- संगठन की नीतियों की क्रियान्वित करना गैर- सदस्यीय देशों के साथ संबंधों के लिये दिशा निर्देशों का निर्धारण करना और राष्ट्राध्यक्षों के सम्मेलन के विचार के लिये रिपोर्ट तैयार करना इसके सचिवालय का प्रधान अधिकारी महासचिव होता है, जो विदेश मंत्रियों के सम्मेलन के द्वारा चार वर्षों के लिये निर्वाचित होता है। सचिवालय सभी प्रकार के प्रशासनिक कार्य करता है तथा यह सांस्कृतिक, राजनीतिक और वितीय मंडलों में विभक्त होता है। प्रत्येक मंडल का प्रधान उप-महासचिव होता है। इसके अतिरिक्त संगठन के विशिष्ट कार्यों के निष्पादन के लिये अनेक विशेष निकाय स्थायी समितियां तथा अस्थायी समूह कार्यरत हैं।

भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन (ओआईसी) की बैठक में भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) ने आतंकवाद पर जोरदार प्रहार किया है. उन्होंने दो टूक कहा कि आतंकवाद का दायरा बढ़ा है. आतंकवाद से लड़ाई किसी धर्म विशेष के खिलाफ लड़ाई नहीं है. आतंकवाद को पनाह और फंडिंग बंद होना चाहिए. उन्होंने कहा कि आतंकवाद पूरी दुनिया के लिए खतरा है. विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने कहा "एक महान धर्म और प्राचीन सभ्यताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले मुल्कों से आए साथियों के बीच आकर सम्मानित महसूस कर रही हूं... मैं उस देश की प्रतिनिधि हूं, जो ज्ञान का भंडार रहा है, शांति का दूत रहा है, आस्था व परम्पराओं का स्रोत रहा है, बहुत-से धर्मों का घर रहा है और दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है..." उन्होंने कहा, "OIC के सदस्य संयुक्त राष्ट्र के एक-चौथाई हैं, और लगभग एक-चौथाई मानवता का प्रतिनिधित्व करते हैं... भारत का आपसे बहुत कुछ साझा है, और हममें से बहुत से उपनिवेशवाद के काले दिन भुगते हैं..." विदेश मंत्री ने कहा कि भारत विविधताओं से भरा देश है... भारत में हर धर्म के लोग हैं, सभी धर्म और संस्कृतियों का सम्मान किया जाता है. 

इससे पहले OIC की बैठक में भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) के शामिल होने की वजह से पाकिस्तान ने बैठक में भाग लेने से इनकार कर दिया था. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी (Shah Mehmood Qureshi) का कहना है, "मैं विदेश मंत्रियों की काउंसिल बैठक में शिरकत नहीं करूंगा.यह उसूलों की बात है, क्योंकि (भारत की विदेशमंत्री) सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) को 'गेस्ट ऑफ ऑनर' के रूप में न्योता दिया गया है.

भारत को 57 इस्लामिक देशों के समूह ने पहली बार अपनी बैठक में आमंत्रित किया. सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj)  ने बतौर विशिष्ट अतिथि संबोधित किया. भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि में भारत और ओआईसी के बीच यह नया संबंध स्थापित हो रहा है. आपको बता दें कि दोनों मुल्कों के बीच जारी तनाव के बीच एक दिन पहले ही नयी दिल्ली में भारतीय थल सेना, वायुसेना और नौसेना के शीर्ष अधिकारियों की एक संयुक्त मीडिया ब्रीफिंग में कहा गया कि सशस्त्र बल किसी भी सुरक्षा चुनौती से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर हैं. 

पाकिस्तान के लिए क्यों है तगड़ा झटका 

मुस्लिम आबादी के लिहाज से दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मुल्क भारत न तो OIC का सदस्य है और न ही उसे संगठन ने पर्यवेक्षक राष्ट्र का दर्जा दिया है। इसके बाद भी OIC की तरफ से भारत को न्योता देना पाकिस्तान के लिए तगड़ा झटका है। पाकिस्तान ने OIC को भारत को दिए न्योते को रद्द करने की मांग की थी लेकिन उसकी मांग को कोई तवज्जो नहीं मिली। इससे बौखलाए पाकिस्तान ने बैठक का बहिष्कार किया है। इस तरह यह भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत भी है। पाकिस्तान के लिए यह तगड़ा झटका इसलिए भी है कि वह हमेशा से इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करता आया है और इस संगठन में भारत की एंट्री का विरोध करता आया है। थाइलैंड और रूस जैसे कम मुस्लिम आबादी वाले देशों को भी OIC के पर्यवेक्षक का दर्जा मिला हुआ है लेकिन 18.5 करोड़ मुस्लिम आबादी वाले भारत को यह दर्जा नहीं है। 

पहली बार OIC बैठक में शामिल हो रहा भारत 

पाकिस्तान इससे पहले भी एक बार भारत को न्योता दिए जाने का विरोध किया था और तब OIC उसकी मांग के आगे झुक गया था। इस बार खुद की मांग को भाव नहीं मिलने से पाकिस्तान का बौखलाना लाजिमी है। 50 साल पहले 1969 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद को सऊदी अरब की सलाह पर OIC के पहले शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने का न्योता दिया गया था। हालांकि पाकिस्तान की आपत्ति के बाद OIC ने आखिरी वक्त में भारत को दिया न्योता रद्द कर दिया था, जिसकी वजह से भारतीय प्रतिनिधिमंडल को बीच रास्ते से लौटना पड़ा था। 

इस बार क्यों नहीं काम आया पाक का दबाव 

भारत के OIC के ज्यादातर सदस्य देशों खासकर पश्चिम एशियाई देशों से अच्छे संबंध हैं। यूऐई के साथ तो पिछले कुछ वर्षों में हमारे रिश्ते और ज्यादा मजबूत हुए हैं। कतर ने 2002 में पहली बार भारत को पर्यवेक्षक का दर्जा देने का प्रस्ताव दिया था। तुर्की और बांग्लादेश तो भारत को OIC सदस्य बनाए जाने की मांग कर चुके हैं। इस बार भारत तो न्योता देने वाले UAE की आबादी में एक तिहाई भारतीय हैं। उसने भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काफी निवेश किया है। इसके अलावा, UAE भारत के अनुरोध पर राजीव सक्सेना और क्रिस्चन मिशेल जैसे आरोपियों का प्रत्यर्पण कर भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में भी सहयोग किया है। 

ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन (ओआईसी)

ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन (ओआईसी) (Organisation of the Islamic Conference—OIC) विधिवत स्थापना 24 मुस्लिम देशों के राष्ट्राध्यक्षों क रबात (मोरक्को) में 1969 में सम्पन्न शिखर सम्मेलन और विदेश मंत्रियों की 1970 में सम्पन्न बैठक के बाद मई 1971 में जेद्दा (सऊदी अरब) में हुई। ओआईसी के चार्टर को 1972 में अपनाया गया। आर्थिक सहयोग में मजबूती लाने के लिये 1981 में एक कार्य योजना को अपनाया गया। 1990 के दशक में इसकी सदस्यता में नियमित रूप से वृद्धि हुई। 28 जून, 2011 को अस्ताना (कजाखस्तान) में 38वीं विदेशमंत्री परिषद (सीएमएम) बैठक के दौरान संगठन का नाम ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द इस्लामिक कांफ्रेंस से बदलकर ऑर्गेनाइजेशन ऑफ़ इस्लामिक को-ऑपरेशन किया गया।

ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कारपोरेशन: Organisation of Islamic Cooperation (OIC) इस्लामिक देशों के मध्य सभी विषयों में सहयोग को प्रोत्साहित करता है। जिसका औपचारिक नाम: ऑर्गेनाइजेशन डी ला को-ऑपरेशन इस्लामिक (फ्रेंच)। मुख्यालय: जेद्दा, (सऊदी अरब) मेँ स्थित है तथा सदस्यता वाले देश: अफगानिस्तान, अल्बानिया, अल्जीरिया, अज़रबैजान, बहरीन, बांग्लादेश, बेनिन, ब्रूनेई, दार-ए- सलाम, बुर्किना फासो, कैमरून, चाड, कोमोरोस, आईवरी कोस्ट, जिबूती, मिस्र, गैबॉन, गाम्बिया, गिनी, गिनी-बिसाऊ, गुयाना, इंडोनेशिया, ईरान, इराक, जार्डन, कजाखस्तान, कुवैत, किरगिज़स्तान, लेबनान, लीबिया, मलेशिया, मालदीव, माली, मॉरिटानिया, मोरक्को, मोजाम्बिक, नाइजर, नाइजीरिया, ओमान, पाकिस्तान, फिलिस्तीन, कतर, सऊदी अरब, सेनेगल, सियरा लिओन, सोमालिया, सूडान, सूरीनाम, सीरिया, ताजिकिस्तान, टोगो, ट्यूनीशिया, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान, युगांडा, संयुक्त अरब अमीरात, उज्बेकिस्तान, यमन। और आधिकारिक भाषाएं: अरबी, अंग्रेजी और फ्रांसीसी है।

उद्देश्य

  • 1972 में अपनाये गये चार्टर के आधार पर ओआईसी के उद्देश्य हैं- सदस्य देशों के मध्य आर्थिक सामाजिक सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इस्लामी एकजुटता को प्रोत्साहन देना तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों से जुड़े सदस्यों के मध्य परामर्श की व्यवस्था करना;किसी भी रूप में विद्यमान उपनिवेशवाद की समाप्ति तथा जातीय अलगाव और भेदभाव की समाप्ति के लिये प्रयास करना;न्याय पर आधारित अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षाके विकास के लिये आवश्यक कदम उठाना; धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के प्रयासों में समन्वय स्थापित करना फिलिस्तीन संघर्ष को समर्थन तथा उनके अधिकारों और जमीनों को वापसी में उन्हें सहायता देना;

  • विश्व के सभी मुसलमानों की गरिमा, स्वतंत्रता और राष्ट्रीय अधिकारों की रक्षा करने के लिये उनके संघर्षों को मजबूती प्रदान करना, तथा; सदस्य देशों और अन्य देशोंके मध्य सहयोग और तालमेल को प्रोत्साहित करने के लिये एक उपयुक्त वातावरण तैयार करना।

राष्‍ट्रपति श्री राम नाथ कोविन्‍द ने आज राष्‍ट्रपति भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में वर्ष 2015, 2016, 2017 और 2018 के लिए गांधी शांति पुरस्‍कार प्रदान किये। इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी, संस्‍कृति राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) डॉ. महेश शर्मा और अन्‍य गणमान्‍य व्‍यक्ति उपस्थित थे।

गांधी शांति पुरस्‍कार वर्ष 2015 के लिए विवेकानंद केन्‍द्र, कन्‍याकुमारी, 2016 के लिए संयुक्‍त रूप से अक्षय पात्र फाउंडेशन व सुलभ इं‍टरनेशनल, 2017 के लिए एकल अभियान ट्रस्‍ट तथा 2018 के लिए जापान के श्री योहेई ससाकावा को प्रदान किया गया।

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पुरस्‍कार विजेताओं के योगदान के बारे में राष्‍ट्रपति ने कहा कि विवेकानंद केन्‍द्र ने पूरे देश में विशेषकर जनजाति बहुल इलाकों में स्‍वयं सहायता, सततता और विकास को प्रोत्‍साहन दिया है। संगठन ने शिक्षा तथा स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में क्षमता निर्माण किया है। अक्षय पात्र फाउंडेशन ने शिक्षा का प्रसार करने, भूख को मिटाने तथा पोषण को बेहतर बनाने का कार्य किया है। फाउंडेशन स्‍कूली बच्‍चों को संतुलित और पोषण युक्‍त भोजन उपलब्‍ध कराने के लिए आधुनिकतम तकनीक का उपयोग करता है। सुलभ इं‍टरनेशनल और इसके संस्‍थापक डॉ. विंदेश्‍वर पाठक ने स्‍वच्‍छता के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाई है। एकल अभियान ट्रस्‍ट 22 लाख बच्‍चों को शिक्षा प्राप्‍त करने में सहायता प्रदान कर रहा है। इन बच्‍चों में 52 प्रतिशत लड़कियां हैं। ट्रस्‍ट के कई कार्यक्रमों से जनजातीय समुदायों को लाभ मिला है। श्री योहेई ससाकावा ने कुष्‍ठ रोग के खिलाफ हमारी लड़ाई (रोकथाम व समाप्ति) में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अहिंसा के माध्‍यम से सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक रूपांतर के लिए गांधी शांति पुरस्‍कार की स्‍थापना 1995 में की गई थी। पुरस्‍कार के अंतर्गत एक करोड़ रुपये की धनराशि और एक प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है। भारत के प्रधानमंत्री, ज्‍यूरी के अध्‍यक्ष हैं, जो विजेताओं का चयन करती है। यह वार्षिक पुरस्कार समाज के कमजोर तबको में शांति, अहिंसा और मानवीय कष्‍टों को समाप्‍त करने के लिए कार्य करने वाले संगठनों, संस्‍थाओं, संघों या व्‍यक्तिगत स्‍तर पर दिया जाता है। इस पुरस्‍कार के लिए सभी व्‍यक्ति योग्‍य हैं। इसके चयन में राष्‍ट्रीयता, भाषा, जाति, वर्ग, समुदाय या लिंग का विभेद नहीं किया जाता है।

भारत के राष्ट्रपति – श्री रामनाथ कोविंद (25 जुलाई 2017)

भारत के उपराष्ट्रपति – वेंकैया नायडू (5 अगस्त 2017)

भारत के प्रधानमंत्री – नरेंद्र मोदी

राज्य सभा के सभापति – श्री एम वेंकैया नायडू

लोकसभा अध्यक्ष – सुश्री सुमित्रा महाजन

राज्य सभा के उपसभापति – श्री हरिवंश 
लोकसभा के महासचिव – स्नेह लता श्रीवास्तव (1 दिसंबर 2017 ,कार्यकाल 30 नवंबर 2018)
राज्यसभा के महासचिव – देश दीपक वर्मा (1 सितंबर 2017)
विपक्ष के नेता (राज्यसभा) – गुलाम नबी आजाद
लोकसभा के डिप्टी स्पीकर – डॉक्टर एम थंबीदुरई
केंद्रीय गृह मंत्री – श्री राजनाथ सिंह
वित्त मंत्री – अरुण जेटली
मुख्य चुनाव आयुक्त –सुशील चंद्रा (पहले सुनील अरोड़ा  थे)
नीति आयोग के अध्यक्ष – नरेंद्र मोदी
नीति आयोग के उपाध्यक्ष – डॉ राजीव कुमार (सितंबर 2017 ,अरविंद पनगढ़िया की जगह)
नीति आयोग के सीईओ – श्री अमिताभ कांत (Jan 2015)
भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (FTII) के अध्यक्ष – बृजेंद्र पाल सिंह
प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी- ए सूर्यप्रकाश (दिसंबर 2017 -कार्यकाल फरवरी 2020 तक)
प्रसार भारती के सीईओ – शशी शेखर वैंपति
दिल्ली मेट्रो रेल निगम बोर्ड (DMRC) के अध्यक्ष – डी एस मिश्रा
भारतीय विदेश सचिव – विजय केशव गोखले (29 जनवरी 2018)
भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के अध्यक्ष – शोभना कामिनेनी (1 मई, 2017 को –इसकी स्थापना वर्ष 1895 में हुई थी।
भारतीय सेना का प्रमुख- जनरल बिपिन रावत (31 दिसंबर 2016)
भारतीय वायु सेना प्रमुख- एयर मार्शल बीएस धनोवा (31 दिसंबर 2016,25 वें वायुसेना अध्यक्ष)
भारतीय वायु सेना का नया उप-प्रमुख – एयर मार्शल अनिल खोसला
भारतीय नौसेना प्रमुख- एडमिरल सुनील लांबा (31 मई 2016 ,23 वें)
सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक (BSF )- रजनी कांत मिश्रा (1984 बैच के उत्तर प्रदेश काडर के आईपीएस अधिकारी)
भारतीय तटरक्षक के महानिदेशक- राजेंद्र सिंह (25 फरवरी 2016)
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) महानिदेशक – राजीव राय भटनागर (30 जून 2017)
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के महानिदेशक – राजेश रंजन (1984 बैच के बिहार कैडर आईपीएस अधिकारी)
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के महानिदेशक- श्री धर्मेंद्र कुमार (धर्मेंद्र कुमार 30 सितंबर 2018 को सेवानिवृत्त हो जाएंगे)
भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस (iTBP) के महानिदेशक – एस.एस. देशवाल ( 31 अक्टूबर को आर.के. पचनंदा सेवानिवृत्त हो  गए)
NCC के महानिदेशक –  राजीव चोपड़ा
सशस्त्र सीमा बल (SSB) के महानिदेशक – कुमार राजेश चंद्र( 31 दिसंबर 2021 तक)

परमाणु ऊर्जा विभाग के अध्यक्ष – K. N. Vyas (के एन व्यास)
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष – श्री सिवन के (10 जनवरी 2018)
परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड के अध्यक्ष (President of Atomic Energy Regulatory Board) (AERB) – नागेश्वर राव गुंटूर 
राष्ट्रीय कौशल विकास निगम का अध्यक्ष (President of National Skill Development Corporation) (NSDC) – ए.एम. नायक
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National crime record bureau) के निदेशक (Director) – रामपाल पवार
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (Additional solicitor general) – माधवी दीवान (Madhavi Dewan) (30 जून 2020 तक; माधवी  ASG में नियुक्त होने वाली तीसरी महिला; इंदिरा जयसिंह पहली महिला)
Federation of Indian Chambers of Commerce and industry (FICCI) के अध्यक्ष – संदीप सोमने (Sandeep Somane)
Federation of Indian Chambers of Commerce and industry (FICCI) का उपाध्यक्ष (Vice president) – उदय शंकर (Uday Shankar)

न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश – रंजन गोगोई (3 अक्टूबर, 2018,46वें मुख्य न्यायाधीश)

भारतीय जांच एजेंसी (NIA- नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी) महानिदेशक – श्री वाईसी मोदी( 18 सितंबर 2018 ,शरद कुमार के स्थान पर)

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के अध्यक्ष – प्रोफेसर धीरेंद्र पाल सिंह
इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के अध्यक्ष – डॉ बीएन सुरेश
ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन (abc)- Debabrata Mukherjee
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अध्यक्ष (CBDT) – पी.सी. मोदी( प्रमोद चंद्र मोदी) (Feb 2019)
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड( SEBI) के अध्यक्ष – अजय त्यागी
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW), अध्यक्ष –  रेखा शर्मा (August 2018)
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष – सैयद गय्यूर-उल-हसन रिजवी
बाल अधिकार के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय आयोग (NCPCR)- प्रियंका (vacent)
केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री (Central Women and Child Development Minister) – मेनका संजय गांधी
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक [Comptroller and Auditor General](CAG) – राजीव महर्षि( 24 सितंबर 2017)
संघ लोक सेवा आयोग( UPSC) के अध्यक्ष – श्री अरविंद सक्सेना (07-08-2020 तक) UPSC स्थापना- अक्टूबर 1, 1926, अरविंद सक्सेना को 20 जून से कार्यकारी चैयरमेन नियुक्त किया गया है।)
तीरंदाजी संघ के अध्यक्ष –  बी.वी.पी. राव

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (भारतीय सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष)- प्रसून जोशी
रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग (DRDO) अध्यक्ष- जी सतीश रेड्डी (अगस्त 2018)
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी, ICC) के चेयरमैन – शंशाक मनोहर (मई 2016 )
ICC के CEO – मनु साहनी
अंतर्राष्ट्रीय चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) – पॉल पोलमैन(1 जुलाई 2018 से)
तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड (ओएनजीसी) के अध्यक्ष- श्री दिनेश कुमार सर्राफ
भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के अध्यक्ष- श्री हेमंत भार्गव( जुलाई 2019 तक)
भारत के बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई, IRDAI)  नए चैयरमेन –  सुभाष चंद्र खुंटिया 
भारतीय खाद्य निगम के अध्यक्ष (FCI )- श्री योगेंद्र त्रिपाठी
अंतर्राष्ट्रीय उर्वरक संघ (IFA) के अध्यक्ष- राकेश कपूर (24 मई, 2017 )
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया(NSE) के अध्यक्ष- श्री अशोक चावला(इस्तीफा दिया)
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक( नाबार्ड) के अध्यक्ष- डॉक्टर हर्ष कुमार भानवाला( सितंबर 2013 ,कार्यकाल पांच वर्ष )
भारतीय निर्यातकों के संगठन संघ( FIEO) के अध्यक्ष- SC रल्हन
इंफोसिस के संस्थापक- नारायण मूर्ति

राष्ट्रीय किसान आयोग (NCF) के अध्यक्ष- डॉ एम एस स्वामीनाथन
मुख्य सूचना आयुक्त (CIC)- सुधीर भार्गव(31 December 2018)
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव – श्री अमित खरे
सूचना और प्रसारण मंत्री –राज्यवर्धन सिंह राठौड़(राज्य मंत्री) (14 May 2018 to Continue)
SSC के अध्यक्ष – श्री असीम खुराना
भारतीय भारोत्तोलन महासंघ (IWLF) के अध्यक्ष- वीरेंद्र प्रसाद वैश्य( नवंबर 2017 ,कार्यकाल 2017-21 तक होगा)
इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) चीफ – राजीव जैन ( 17 दिसंबर, 2016,कार्यकाल 2 वर्षों का होगा)
परमाणु ऊर्जा निगम ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के अध्यक्ष – एस के शर्मा(23 मई 2016,पांच वर्ष के लिए नियुक्त किया गया है)
सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज एंड कस्टम(CBEC) के अध्यक्ष- नजीब शाह
CBSE बोर्ड के अध्यक्ष- अनीता करवाल( 31 अगस्त 2017)
21 वे विधि आयोग के अध्यक्ष – न्यायमूर्ति बलवीर सिंह चौहान

BAI (भारतीय बैडमिंटन संघ) के अध्यक्ष – हिमांता बिस्वा सरमा
बैंक बोर्ड ब्यूरो (BBB) के अध्यक्ष – भानु प्रताप शर्मा( विनोद रॉय की जगह , कार्यकाल 2 वर्ष का होगा)
भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री – मंत्री श्री सुरेश प्रभु 
राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के महानिदेशक – पी.पी. मल्होत्रा
इंडिगो के अंतरिम सीईओ – राहुल भाटिया (31 जुलाई, 2018)
खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) –पवन कुमार अग्रवाल (August 2015 तक)
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) का अध्यक्ष – आर के अग्रवाल(सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति)
ट्राईफेड(TRIFED) के अध्यक्ष – रमेश चंद मीणा
 ट्राईफेड(TRIFED) के उपाध्‍यक्ष – श्रीमती प्रतिभा (मारियामा कोशी) ब्रह्मा
 प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) का अध्यक्ष- सी के प्रसाद (वह न्यायमूर्ति मार्कंडे काटजू की जगह नियुक्त हुए)
कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन-सीएमडी – अनिल कुमार झा (31 जनवरी 2020 तक)
इंडिया हॉकी  के अध्यक्ष – मुस्ताक अहमद
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई, NHAI) के अध्यक्ष – युद्धवीर सिंह मलिक(अतिरिक्त प्रभार)
ललित कला अकादमी का अध्यक्ष – उत्‍तम पछरने (3 वर्ष तक इस पद पर रहेंगे)
प्रतिष्ठित न्यायवादी (ज्यूरिस्ट) – मुकुल रोहतगी

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर – श्री शक्तिकांत दास (December 2018)
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर – महेश कुमार जैन
भारतीय रिजर्व बैंक की पहली सीएफओ नियुक्त – सुधा बालकृष्णन (15 मई 2018,उनका कार्यकाल 3 साल का होगा)
भारतीय रिजर्व बैंक के लिए गैर-आधिकारिक निदेशक – स्वामीनाथन गुरुमूर्ति (August 2018, चार साल की अवधि के लिए)
प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार – अजीत डोभाल
उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार – पंकज सरन
इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के अध्यक्ष – डॉ बीएन सुरेश
वित्त आयोग का अध्यक्ष – नंद किशोर सिंह ( 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष)
वित्त सचिव के (Finance secretary)अध्यक्ष  – ए एन झा(A. N. Jha)
भारतीय विदेश सचिव – विजय केशव गोखले (29 जनवरी 2018)
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन- वीके यादव
इंफोसिस के सीईओ(Ceo of Infosys) –  सलिल पारेख(Salil Parekh)(2 jan 2018 से)
पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के महानिदेशक – ए.पी. महेश्वरी ( 30 अक्टूबर, 2017, 28 फरवरी, 2021 तक )
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के अध्यक्ष – राम सेवक शर्मा(सितंबर 2020 तक)
भारतीय व्यापार संवर्धन संगठन (आईटीपीओ ITPO) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक – श्री एल. सी. गोयल(31 August 2015)
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री – धर्मेंद्र प्रधान
प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो (PIB) प्रमुख – शीतांशु कर
खान मंत्री – नरेंद्र सिंह तोमर
नागर विमानन मंत्रालय – सुरेश प्रभु (अतिरिक्त प्रभार)
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण(AAI) के अध्यक्ष – गुरुप्रसाद महापात्रा
Sidbi के चेयरमैन प्रबंध निदेशक – श्री मोहम्मद मुस्तफा
केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री – प्रकाश जावड़ेकर
केंद्रीय रेल और कोयला मंत्री – श्री पीयूष गोयल (स्वतंत्र भारत के पहले रेल मंत्री – जॉन मथाई)
KVIC के अध्यक्ष – श्री विनय कुमार सक्सेना
आयुष्मान भारत के सीईओ – श्री इंदू भूषण
नासकॉम के अध्यक्ष – देबजानी घोष 

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के निदेशक – ऋषि कुमार शुक्ला
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (Central Board of Indirect Taxes & Customs (CBIC)) के अध्यक्ष – प्रणव कुमार दास
सर्तकता आयुक्त के रूप में नियुक्त – श्री शरद कुमार
तरराष्ट्रीय कबड्डी फेडरेशन (IKF) के अध्यक्ष –जनार्दन सिंह गहलोत (कार्यकाल 4 वर्ष)
दिल्ली और जिला क्रिकेट (DDC)  संघ के अध्यक्ष –  रजत शर्मा
रिलायंस केचेयरमेन – मुकेश अंबानी (july 2018 , पांच साल का कार्यकाल)
राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) का अध्यक्ष – आदर्श कुमार गोयल
सेल (Sail) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक – Anil Kumar Chaudhary
यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के निदेशक और महाप्रबंधक- बी विजय श्रीनिवास (1 July, 2018 को)
पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई,PCI) के अध्यक्ष – विश्वास पटेल (नवीन सूर्या की जगह)
एमेरिटस के अध्यक्ष – नवीन सूर्या
केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (सीएटी) के अध्यक्ष – पूर्व CJ नरसिम्हा रेड्डी
 Rajasthan Public Service Commission (RPSC) के चेयरमैन – दीपक उप्रेती (July 2018)
अखिल भारतीय परिषद तकनीकी शिक्षा (एआईसीटीई) के अध्यक्ष – अनिल डी सहस्रबुद्ध (17 जुलाई, 2015,पुनर्नियुक्त)
राष्ट्रीय दिव्य रोजगार संवर्धन केंद्र (एनसीपीईडीपी) के निदेशक – अरमान अली(कार्यकारी निदेशक)
HSBC (हांगकांग एंड शंघाई बैंकिंग कॉर्पोरेशन) इंडिया के नये सीईओ – सुरेंद्र रोशा
विद्युत अपीलीय ट्रिब्यूनल की अध्यक्ष – श्रीमती न्यायमूर्ति मंजुला चेल्लूर (कलकत्ता उच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश थीं)
प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के सीईओ – आशीष कुमार भूटानी (9 मई, 2020 तक)
एसोचैम (ASSOCHAM) के महासचिव(Secretary) – उदय कुमार वर्मा (अगस्त 2018, डीएस रावत की जगह)
हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड (HAL) के अध्यक्ष और प्रबंधन निदेशक – आर माधवन
भारत के इस्पात मंत्री – चौधरी बिरेंदर सिंह
इस्पात मंत्रालय के सचिव – बिनॉय कुमार
राष्ट्रीय दिव्य रोजगार संवर्धन केंद्र (NCPEDP) के निदेशक – अरमान अली(कार्यकारी निदेशक)
HSBC (हांगकांग एंड शंघाई बैंकिंग कॉर्पोरेशन) इंडिया के नये सीईओ – सुरेंद्र रोशा
अंतरराष्ट्रीय विज्ञापन संघ (IAA) अध्यक्ष – श्रीनिवास स्वामी
भारत का मुख्य  सांख्यिकी (CSI)(India’s Chief Statistics) – प्रवीण श्रीवास्तव
AMFI के अध्यक्ष – निमेश शाह(इससे पहले  इस पद पर बालासुब्रमण्यम थे)
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री – श्री राधा मोहन सिंह
केंद्रीय संस्कृति मंत्री – डॉ महेश शर्मा
शहरी और आवास मामलों के मंत्री – श्री हरदीप सिंह पुरी
केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान और  पर्यावरण मंत्री – डॉक्टर हर्षवर्धन
Independent Director of WIPRO – अरुंधति भट्टाचार्य (1 जनवरी 2019 से 5 साल के लिए)
प्रवर्तन निदेशालय(director of enforcement) के अंतरिम निदेशक –  संजय मिश्रा(नवंबर से 3 महीने के लिए)
यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक(United India Insurance President and Managing Director) – गिरीश राधा कृष्ण
भारत के प्रतिस्पर्धा आयोग (competition commission of india) (CCI) के अध्यक्ष – अशोक कुमार गुप्ता( 25 अक्टूबर 2022 तक)
भारत के अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) का अध्यक्ष – जलज श्रीवास्तव (Jalaj Shrivastav)

आर्थिक कुंजी फ्रेमवर्क समिति (Economic capital framework Committee)  के अध्यक्ष – विमल जालान
भारत में कानून और न्याय मंत्री (Law and Justice Minister in India) – रविशंकर प्रसाद
आयुध कारखानों के महानिदेशक (Director general of ordnance factories) (DGOF) – सौरभ कुमार
आयुध निर्माणी बोर्ड के अध्यक्ष (President of Ordnance Factory Board) – सौरभ कुमार
Society for Applied Microwave Electronics Engineering and Research(SAMEER)के महानिदेशक –  सुलभा रानाडे
युवा मामलों को खेल मंत्री – कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर (3 September 2017 से अब तक)
Government eE-Marketplace (GEM) के CEO –  एस राधा चौहान
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के लोकपाल (First Ombudsman of the Board of Control for Cricket in India) – डीके जैन  (Feb 2019)

पुलवामा आतंकी हमले और फिर भारतीय वायुसेना की ओर से 26 फरवरी को पाकिस्‍तान के बालाकोट में की गई एयर स्‍ट्राइक के बाद पाकिस्‍तान ने भारतीय हवाई क्षेत्र के उल्‍लंघन की कोशिश की, जिसे भारत ने सतर्कता से विफल कर दिया। हालांकि इस दौरान एक मिग-21 बायसन हादसे का शिकार हो गया और पायलट को पाकिस्‍तान ने अपनी हिरासत में ले लिया।

विंग कमांडर को पाकिस्‍तान द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद जेनेवा संधि की चर्चा हो रही है। इस चर्चा को इन आरोपों के बीच बल मिला कि पाकिस्‍तान में भारतीय विंग कमांडर के बीच बदसलूकी की गई और 'युद्ध बंदी' के साथ इस तरह का सलूक जेनेवा संधि का उल्‍लंघन है।

क्‍या है जेनेवा कन्‍वेंशन?

जेनेवा कन्‍वेंशन (1949) अंतरराष्‍ट्रीय संधियों का एक सेट है, जिसमें चार संधियां और तीन अतिरिक्त प्रोटोकॉल शामिल हैं। यह सुनिश्चित करता है कि युद्ध में शामिल सभी पक्ष नागरिकों और मेडिकल कर्मचारियों के साथ अंतरराष्‍ट्रीय कानून के तहत मानवीय व्‍यवहार करेंगे। दूसरे शब्‍दों में कहें तो यह कैदियों के युद्धकालीन बुनियादी अधिकारों (नागरिक और सैन्य) को परिभाषित करता है।

कौन होते हैं युद्धबंदी?

युद्ध के दौरान अगर कोई सैनिक शत्रु देश की सीमा में दाखिल हो जाता है और उसे गिरफ्तार किया जाता है तो वह युद्धबंदी माना जाएगा और शत्रु पक्ष उन्‍हें डरा-धमका या अपमानित नहीं कर सकता। कन्‍वेंशन यह प्रावधान भी करता है कि ऐसा कुछ भी न किया जाए, जिससे आम लोगों में उनके बारे में जानने की उत्सुकता बढ़े। विंग कमांडर अभिनंदन के संदर्भ में संधि के उल्‍लंघन की बात इसलिए भी सामने आ रही है, क्‍योंकि सोशल मीडिया पर उनके कई वीडियो सामने आए हैं।

युद्ध बंदियों के क्‍या अधिकार हैं?

जेनेवा कन्‍वेंशन के तहत युद्धबंदियों को किसी तरह की शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना नहीं दी जा सकती और न ही उन्‍हें किसी तरह की सूचना देने के लिए शारीरिक या मानसिक तौर पर बाध्‍य किया जा सकता है। उनके साथ किसी भी तरह की जोर-जबरदस्‍ती निषेध है। अगर वह किसी सवाल का जवाब न देना चाहे तो उन्‍हें इसके लिए दंडित नहीं किया जा सकता और न ही उनका इस्‍तेमाल मानवीय ढाल (human shield) की तरह किया जा सकता है। हालांकि पकड़े जाने की स्थिति में युद्धबंदियों को अपना नाम, सैन्य पद और नंबर बताना होगा।

क्‍या युद्ध बंदियों को रिहा किया जा सकता है?

संध‍ि के प्रावधानों के तहत युद्धबंदियों के खिलाफ मुकदमा चलाने का प्रावधान है। साथ ही एक विकल्प यह भी है कि युद्ध समाप्त हो जाने के बाद उन्हें संबंधित देश को वापस लौटा दिया जाए। संघर्षरत पक्षों को गंभीर रूप से घायल या बीमार सैनिकों को ठीक हो जाने के बाद उनके देश भेजना होगा। विभिन्‍न पक्ष इस बारे में समझौता कर सकते हैं और युद्धबंदियों की रिहाई या नजरबंदी के बारे में एक आम राय कायम कर सकते हैं। यहां उल्‍लेखनीय है कि 1971 के युद्ध के दौरान 80,000 से अधिक पाकिस्‍तानी सैनिकों ने भारत के सामने समर्पण कर दिया था, जिन्‍हें भारत ने 1972 के शिमला समझौते के तहत रिहा कर दिया था। विंग कमांडर अभिनंदन के संदर्भ में भी पाकिस्‍तान पर यह बात लागू होती है।

कौन निर्धारित करता है इस संधि का पालन हो रहा है या नहीं?

जेनेवा संधि का अनुपालन समुचित तरीके से हो रहा है या नहीं, इसका निर्धारण आम तौर पर अंतरराष्‍ट्रीय रेड क्रॉस समिति करती है। कारगिल युद्ध के दौरान भी पाकिस्‍तान ने दो भारतीय पायलटों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता को पाकिस्‍तान ने बाद में रिहा कर दिया था, जबकि एक अन्‍य युद्ध बंदी स्‍क्‍वाड्रन लीडर अजय आहूजा पाकिस्‍तान की कैद में ही शहीद हो गए थे।

भारत में सन् 1986 से प्रतिवर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (नेशनल साइंस डे) मनाया जाता है। प्रोफेसर सी.वी. रमन (चंद्रशेखर वेंकटरमन) ने सन् 1928 में कोलकाता में इस दिन एक उत्कृष्ट वैज्ञानिक खोज की थी, जो ‘रमन प्रभाव’ के रूप में प्रसिद्ध है। रमण की यह खोज 28 फरवरी 1930 को प्रकाश में आई थी। इस कारण 28 फरवरी राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस कार्य के लिए उनको 1930 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इस दिवस का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति आकर्षित करना, विज्ञान के क्षेत्र में नए प्रयोगों के लिए प्रेरित करना तथा विज्ञान एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति सजग बनाना है। इस दिन, विज्ञान संस्थान, प्रयोगशाला, विज्ञान अकादमी, स्कूल, कॉलेज तथा प्रशिक्षण संस्थानों में वैज्ञानिक गतिविधियों से संबंधित प्रोग्रामों का आयोजन किया जाता हैं। रसायनों की आणविक संरचना के अध्ययन में 'रमन प्रभाव' एक प्रभावी साधन है। 

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस देश में विज्ञान के निरंतर उन्नति का आह्वान करता है, परमाणु ऊर्जा को लेकर लोगों के मन में कायम भ्रातियों को दूर करना इसका मुख्य उद्देश्य है तथा इसके विकास के द्वारा ही हम समाज के लोगों का जीवन स्तर अधिक से अधिक खुशहाल बना सकते हैं।  

रमन प्रभाव में एकल तरंग- दैध्र्य प्रकाश (मोनोक्रोमेटिक) किरणें, जब किसी पारदर्शक माध्यम ठोस, द्रव या गैस से गुजरती है तब इसकी छितराई किरणों का अध्ययन करने पर पता चला कि मूल प्रकाश की किरणों के अलावा स्थिर अंतर पर बहुत कमजोर तीव्रता की किरणें भी उपस्थित होती हैं। इन्हीं किरणों को रमन-किरण भी कहते हैं। > भौतिक शास्त्री सर सी.वी. रमन एक ऐसे महान आविष्कारक थे, जो न सिर्फ लाखों भारतीयों के लिए बल्कि दुनिया भर के लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। यह किरणें माध्यम के कणों के कंपन एवं घूर्णन की वजह से मूल प्रकाश की किरणों में ऊर्जा में लाभ या हानि के होने से उत्पन्न होती हैं। इतना ही नहीं इसका अनुसंधान की अन्य शाखाओं, औषधि विज्ञान, जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान, खगोल विज्ञान तथा दूरसंचार के क्षेत्र में भी बहुत महत्व है।

केंद्र सरकार ने 27 फ़रवरीं 2019 को आंध्र प्रदेश के लिए एक अलग नया रेलवे जोन दक्षिण तटीय रेलवे (एससीओआर-South Coast Railway) की स्थापना की घोषणा की है ।  इस रेलवे जोन में गुंतकल, गुंटूर तथा विजयवाड़ा डिवीज़न शामिल होंगे। यह डिवीज़न केन्द्रीय रेलवे के अधीन आते हैं। दक्षिणी केन्द्रीय रेलवे में हैदराबाद, सिकंदराबाद तथा नांदेड़ डिवीज़न शामिल होंगे। वाल्टेयर डिवीजन को दो भागों में बाटा जाएगा। वाल्टेयर डिवीजन के एक हिस्से को नए मंडल यानि दक्षिण तटीय रेलवे में शामिल करके पड़ोसी विजयवाड़ा डिवीजन में मिला लिया जाएगा। वाल्टेयर डिवीजन के बाकी हिस्से को एक नए डिवीजन में परिवर्तित कर दिया जाएगा। इसका मुख्यालय पूर्वी तटीय रेलवे के अधीन रायगडा में होगा। दक्षिण मध्य रेलवे में हैदराबाद, सिकंद्राबाद और नान्देड़ डिवीजन शामिल होंगे। 

आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2014 की अनुसूची 13 (बुनियादी ढांची) की मद संख्या 8 के अनुसार भारतीय रेलवे बोर्ड से उत्तराधिकारी राज्य आंध्र प्रदेश में एक नए रेल मंडल की स्थापना की जांच पड़ताल करना अपेक्षित था। इस मामले में हितधारकों के साथ परामर्श करके विस्तृत जांच पड़ताल की गई और विशाखापत्तनम में मुख्यालय वाले नए मंडल का निर्माण करने का निर्णय लिया गया।

भारतीय रेलवे विश्व के सबसे उत्कृष्ट रेलवे नेटवर्क में से एक है, भारतीय रेलवे का 1,51,000 किलोमीटर ट्रैक, 7000 स्टेशन, 13 लाख कर्मचारी तथा 160 वर्षों का इतिहास है। भारत में रेलवे की शुरुआत 16 अप्रैल, 1853 को बोरी बंदर और थाने के बीच हुई थी। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'प्रधानमंत्री जन आरोग्य' योजना (आयुष्मान भारत योजना यानी ABY) की घोषणा की है. इसे पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जयंती पर 25 सितंबर से देशभर में लागू कर दिया गया है. सरकार ABY के माध्यम से गरीब, उपेक्षित परिवार और शहरी गरीब लोगों के परिवारों को स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराना चाहती है. 

सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) 2011 के हिसाब से ग्रामीण इलाके के 8.03 करोड़ परिवार और शहरी इलाके के 2.33 करोड़ परिवार आयुष्मान भारत योजना (ABY) के दायरे में आयेंगे. 

आयुष्मान भारत योजना (ABY) में हर परिवार को सालाना पांच लाख रुपये का मेडिकल इंश्योरेंस मिल रहा है. साल 2008 में यूपीए सरकार द्वारा लांच राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (NHBY) को भी आयुष्मान भारत योजना (PM-JAY) में मिला दिया गया है. 

ABY की योग्यता का निर्धारण कैसे होता है?
SECC के आंकड़ों के हिसाब से आयुष्मान भारत योजना (ABY) में लोगों को मेडिकल इंश्योरेंस मिल रहा है. SECC के आंकड़ों के हिसाब से ग्रामीण इलाके की आबादी में D1, D2, D3, D4, D5 और D7 कैटेगरी के लोग आयुष्मान भारत योजना (ABY) में शामिल किये गए हैं. 

शहरी इलाके में 11 पूर्व निर्धारित पेशे/कामकाज के हिसाब से लोग आयुष्मान भारत योजना (ABY) में शामिल हो सकते हैं. राज्यों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में पहले से शामिल लोग खुद ही आयुष्मान भारत योजना (ABY) में शामिल हो गए हैं.

ग्रामीण इलाके के लिए ABY की योग्यता 
आयुष्मान भारत योजना (ABY) में शामिल होने के लिए मोटे तौर पर ये योग्यता हैं: 

  • ग्रामीण इलाके में कच्चा मकान, परिवार में किसी व्यस्क (16-59 साल) का नहीं होना, परिवार की मुखिया महिला हो, परिवार में कोई दिव्यांग हो, अनुसूचित जाति/जनजाति से हों और भूमिहीन व्यक्ति/दिहाड़ी मजदूर

  • इसके अलावा ग्रामीण इलाके के बेघर व्यक्ति, निराश्रित, दान या भीख मांगने वाले, आदिवासी और क़ानूनी रूप से मुक्त बंधुआ आदि खुद आयुष्मान भारत योजना आयुष्मान भारत योजना (ABY) में शामिल हो जायेंगे.

शहरी इलाके के लिए ABY की योग्यता

आयुष्मान भारत योजना (ABY) में शामिल होने के लिए मोटे तौर पर ये योग्यता हैं: भिखारी, कूड़ा बीनने वाले, घरेलू कामकाज करने वाले, रेहड़ी-पटरी दुकानदार, मोची, फेरी वाले, सड़क पर कामकाज करने वाले अन्य व्यक्ति. कंस्ट्रक्शन साईट पर काम करने वाले मजदूर, प्लंबर, राजमिस्त्री, मजदूर, पेंटर, वेल्डर, सिक्योरिटी गार्ड, कुली और भार ढोने वाले अन्य कामकाजी व्यक्ति स्वीपर, सफाई कर्मी, घरेलू काम करने वाले, हेंडीक्राफ्ट का काम करने वाले लोग, टेलर, ड्राईवर, रिक्शा चालक, दुकान पर काम करने वाले लोग आदि आयुष्मान भारत योजना (ABY) में शामिल होंगे.

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संविधान (जम्‍मू और कश्‍मीर में लागू होने के लिए) संशोधन आदेश, 2019 के माध्‍यम से संविधान (जम्‍मू और कश्‍मीर में लागू होने के लिए) आदेश,1954 में संशोधन के संबंध में जम्‍मू और कश्‍मीर सरकार के प्रस्‍ताव को अपनी मंजूरी दे दी है। इससे राष्‍ट्रपति द्वारा अनुच्‍छेद 370 की धारा (1) के अंतर्गत जारी संविधान (जम्‍मू और कश्‍मीर में लागू होने के लिए) संशोधन आदेश,2019 द्वारा संविधान (77वां संशोधन) अधिनियम,1955 तथा संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम,2019 से संशोधित भारत के संविधान के प्रासंगिक प्रावधान लागू होंगे।

प्रभाव

अधिसूचित होने पर यह आदेश सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों को पदोनत्ति लाभ का मार्ग प्रशस्‍त करेगा और जम्‍मू और कश्‍मीर में सरकारी रोजगार में वर्तमान आरक्षण के अतिरिक्‍त आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत तक आरक्षण का लाभ प्रदान करेगा।

पृष्‍ठभूमि: समानता और समावेश

संविधान (77वां संशोधन) अधिनियम 1955 को भारत के संविधान के अनुच्‍छेद 16 की धारा 4 के बाद धारा (4ए) जोड़कर लागू किया गया। धारा (4ए) में सेवा में अनुसूचित जातियों तथा जनजातियों को पदोन्‍नति लाभ देने का प्रावधान है। संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम 2019 देश में जम्‍मू और कश्‍मीर को छोड़कर लागू किया गया है और जम्‍मू और कश्‍मीर तक अधिनियम के विस्‍तार से राज्‍य के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण का लाभ प्राप्‍त होगा।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने केन्‍द्रीय होम्‍योपैथी  परिषद (संशोधन) अध्‍यादेश, 2019 के मसौदे को मंजूरी दे दी है। इसके तहत केन्‍द्रीय परिषद के पुनर्गठन की अवधि मौजूदा एक वर्ष से बढ़ाकर दो वर्ष करने की व्‍यवस्‍था है ताकि केन्द्रीय परिषद का कामकाज चलाने के लिए संचालन मंडल का अधिकार और कार्यकाल 17 मई, 2019 से एक वर्ष के लिए और बढ़ाया जा सके।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के विनिर्माण और उनके तेजी से इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए फेम इंडिया योजना के दूसरे चरण को मंजूरी दे दी है।

कुल 10,000 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली यह योजना 1 अप्रैल, 2019 से तीन वर्षों के लिए शुरू की जाएगी। यह योजना मौजूदा ‘फेम इंडिया वन’ का विस्तारित संस्करण है। ‘फेम इंडिया वन’योजना 1 अप्रैल, 2015 को लागू की गई थी।

वित्तीय प्रभावः

फेम इंडिया योजना का दूसरा चरण 2019-20 से 2021-22 तक तीन वर्षों के लिए लागू किया जाएगा। इसके लिए कुल 10,000 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी।

प्रभावः

इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश में इलेक्ट्रिक और हाईब्रिड वाहनों के तेजी से इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। इसके लिए लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद में शुरूआती स्तर पर प्रोत्साहन राशि देने तथा ऐसे वाहनों की चार्जिंग के लिए पर्याप्त आधारभूत ढांचा विकसित करना है। यह योजना पर्यावरण प्रदूषण और ईंधन सुरक्षा जैसी समस्याओं का समाधान करेगी।

विवरणः

·         बिजली से चलने वाली सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर जोर।

·         इलेक्ट्रिक बसों के संचालन पर होने वाले खर्चों के लिए मांग आधारित प्रोत्साहन राशि मॉडल अपनाना, ऐसे खर्च राज्य और शहरी परिवहन निगमों द्वारा दिया जाना। 

·         सार्वजनिक परिवहन सेवाओं और वाणिज्यिक इस्तेमाल के लिए पंजीकृत 3 वॉट और 4 वॉट श्रेणी वाले इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए प्रोत्साहन राशि।

·         2 वॉट श्रेणी वाले इलेक्ट्रिक वाहनों में मुख्य ध्यान निजी वाहनों पर केन्द्रित रखना।

·         इस योजना के तहत 2 वॉट वाले 10 लाख, 3 वॉट वाले 5 लाख, 4 वॉट वाले 55,000 वाहन और 7000 बसों को वित्तीय प्रोत्साहन राशि देने की योजना है।

·         नवीन प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन राशि का लाभ केवल उन्हीं वाहनों को दिया जाएगा, जिनमें अत्याधुनिक लिथियम आयोन या ऐसी ही अन्य नई तकनीक वाली बैट्रियां लगाई गई हों।

·         योजना के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग के लिए पर्याप्त आधारभूत ढांचा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है इसके तहत महानगरों, 10 लाख से ज्यादा की आबादी वाले शहरों, स्मार्ट शहरों, छोटे शहरों और पर्वतीय राज्यों के शहरों में तीन किलोमीटर के अंतराल में 2700 चार्जिंग स्टेशन बनाने का प्रस्ताव हैं।

·         बड़े शहरों को जोड़ने वाले प्रमुख राजमार्गों पर भी चार्जिंग स्टेशन बनाने की योजना है।

·         ऐसे राजमार्गों पर 25 किलोमीटर के अंतराल पर दोनों तरफ भी ऐसे चार्जिंग स्टेशन लगाने की योजना है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने  प्रधानमंत्री जी-वन (जैव ईंधन वातावरण अनुकूल फसल अवशेष निवारण) योजना के लिए वित्तीय मदद को मंजूरी दे दी है। इसके तहत ऐसी एकीकृत बायो-इथेनॉल परियोजनाओं को, जो लिग्नोसेलुलॉसिक बायोमास और अन्य नवीकरणीय फीडस्टॉक का इस्तेमाल करती हैं, के लिए वित्तीय मदद का प्रावधान है।

भारत सरकार ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम 2003 में लागू किया था। इसके जरिए पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण कर पर्यावरण को जीवाश्म ईंधनों के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान से बचाना, किसानों को क्षतिपूर्ति दिलाना तथा कच्चे तेल के आयात को कम कर विदेशी मुद्रा बचाना है। वर्तमान में ईबीपी 21 राज्यों और 4 संघ शासित प्रदेशों में चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत तेल विपणन कम्पनियों के लिए पेट्रोल में 10 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाना अनिवार्य बनाया गया है। मौजूदा नीति के तहत पेट्रोकेमिकल के अलावा मोलासिस और नॉन फीड स्‍टाक उत्पादों जैसे सेलुलोसेस और लिग्नोसेलुलोसेस जैसे पदार्थों से इथेनॉल प्राप्त करने की अनुमति दी गई है।

वित्तीय प्रभावः

जी-वन योजना के लिए 2018-19 से 2023-24 की अवधि में कुल 1969.50 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय को मंजूरी दी गई है। परियोजनाओं के लिए स्वीकृत कुल 1969.50 करोड़ रुपये की राशि में से 1800 करोड़ रुपये 12 वाणिज्यिक परियोजनाओं की मदद के लिए, 150 करोड़ रुपये प्रदर्शित परियोजनाओं के लिए और बाकी बचे 9.50 करोड़ रुपये केन्द्र को उच्च प्रौद्योगिकी प्रशासनिक शुल्क के रूप में दिए जाएंगे।

विवरणः

इस योजना के तहत वाणिज्यिक स्तर पर 12 परियोजनाओं को और प्रदर्शन के स्तर पर दूसरी पीढ़ी के 10 इथेनॉल परियोजनाओं को दो चरणों में वित्तीय मदद दी जाएगी।

1.      पहला चरण (2018-19 से 2022-23)- इस अवधि में 6 वाणिज्यिक परियोजनाओं और 5 प्रदर्शन के स्तर वाली परियोजनाओं को आर्थिक मदद दी जाएगी।

2.      दूसरा चरण (2020-21 से 2023-24)- इस अवधि में बाकी बची 6 वाणिज्यिक परियोजनाओं और 5 प्रदर्शन स्तर वाली परियोजनाओं को मदद की व्यवस्था की गई है।

·         परियोजना के तहत दूसरी पीढ़ी के इथेनॉल क्षेत्र को प्रोत्साहित करने और मदद करने का काम किया गया है। इसके लिए उसे वाणिज्यिक परियोजनाएं स्थापित करने और अनुसंधान और विकास गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने का काम किया गया है।

·         ईबीपी कार्यक्रम के तहत सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को मदद पहुंचाने के अलावा निम्नलिखित लाभ भी होंगे।

1.      जीवाश्म ईंधन के स्थान पर जैव ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देकर आयात पर निर्भरता घटाने की भारत सरकार की परिकल्पना को साकार करना।

2.      जीवाश्म ईंधन के स्थान पर जैव ईंधन के इस्तेमाल का विकल्प लाकर उत्सर्जन के सीएचजी मानक की प्राप्ति।

3.      बायोमास और फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण को होने वाले नुकसान का समाधान और लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना।

4.      दूसरी पीढ़ी की इथेनॉल परियोजना और बायोमास आपूर्ति श्रृंखला में ग्रामीण और शहरी लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना।

5.      बायोमास कचरे और शहरी क्षेत्रों से निकलने वाले कचरे के संग्रहण की समुचित व्यवस्था कर स्वच्छ भारत मिशन में योगदान करना।

6.      दूसरी पीढ़ी के बायोमास को इथेनॉल प्रौद्योगिकी में परिवर्तित करने की विधि का स्वदेशीकरण।

·         योजना के लाभार्थियों द्वारा बनाए गए इथेनॉल की अनिवार्य रूप से तेल विपणन कम्पनियों को आपूर्ति, ताकि वे ईबीपी कार्यक्रम के तहत इनमें निर्धारित प्रतिशत में मिश्रण कर सके।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 2022 तक पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण 10 प्रतिशत करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इथेनॉल की कीमत ज्यादा रखने और इथेनॉल खरीद प्रक्रिया को आसान बनाने के तमाम सरकारी प्रयासों के बावजूद 2017-18 के दौरान इथेनॉल की खरीद 150 करोड़ लीटर ही रही, हालांकि यह देशभर में पेट्रोल में इथेनॉल के 4.22 प्रतिशत मिश्रण के लिए पर्याप्त है। इथेनॉल इसी वजह से बायोमास और अन्य कचरों से दूसरी पीढ़ी का इथेनॉल प्राप्त करने की संभावनाएं पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा तलाशी जा रही हैं। इससे ईबीपी कार्यक्रम के तहत किसी तरह होने वाली कमी को पूरा किया जा सकेगा। प्रधानमंत्री जी-वन योजना इसी को ध्यान में रखते हुए लागू की गई है। इसके तहत देश में दूसरी पीढ़ी की इथेनॉल क्षमता विकसित करने और इस नए क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने का प्रयास किया गया है।

इस योजना को लागू करने का अधिकार पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत काम करने वाली एक तकनीकी इकाई सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी को सौंपा गया है। इस योजना का लाभ उठाने के इच्छुक प्रोजेक्ट डेवलपरों को अपने प्रस्ताव समीक्षा के लिए मंत्रालय की वैज्ञानिक सलाहकार समिति को सौंपने होंगे। समिति जिन परियोजनाओं की अनुशंसा करेगी उन्हें मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में संचालन समिति द्वारा मंजूरी दी जाएगी।

वर्ल्ड नम्बर-1 जोकोविक (Novak Djokovic) ने सातवीं बार ऑस्‍ट्रेलियन ओपन खिताब अपने नाम किया है. उन्‍होंने पिछली बार 2016 में साल के पहले ग्रैंड स्लैम ऑस्ट्रेलियन ओपन का खिताब अपने नाम किया था. दो साल बाद उन्होंने एक बार फिर इस खिताब पर अपना कब्जा जमाया है. दूसरी ओर स्‍पेन नडाल ने 2009 में यह खिताब अपने नाम किया था.

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, नाना जी देशमुख (मरणोपरांत) और डॉ. भूपेन हजारिका (मरणोपरांत) को देश का सर्वोच्च सम्मान दिया जाएगा। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तीन हस्तियों को देश का सर्वोच्च सम्मान 'भारत रत्न' देने की घोषणा की है।

नानाजी देशमुख एक समर्पित समाजसेवी थे। उन्होंने ने अपना पूरा जीवन समाजसेवा के लिए समर्पित कर दिया था। ग्रामीण विकास में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

मशहूर लोक गायक भूपेन हजारिका की बात करें तो वे असम से ताल्लुक रखते हैं। 8 सितंबर 1926 में भारत के पूर्वोत्तर असम राज्य के सदिया में जन्मे हजारिका ने अपना पहला गाना 10 साल की उम्र में गाया था। 

वहीं पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बात करें तो उनका अनुभव हर क्षेत्र में रहा है। प्रणब मुखर्जी ने देश का वित्त, रक्षा, विधि, वाणिज्य सभी मंत्रालय संभाला है।

देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक, तीन श्रेणियों में सम्मानित किया जाता है:पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री. पुरस्कार विभिन्न विषयों/गतिविधियों के क्षेत्रों में दिए जाते हैं, अर्थात:  कला, सामाजिक कार्य, सार्वजनिक मामलों, विज्ञान और इंजीनियरिंग, व्यापार और उद्योग, चिकित्सा, साहित्य और शिक्षा, खेल, सिविल सेवा, आदि और पद्म विभूषण से 'असाधारण और विशिष्ट सेवा' के लिए सम्मानित किया जाता है; ‘पद्म भूषण’से उच्च क्रम की विशिष्ट सेवा के लिए और 'पद्म श्री’ से किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए सम्मानित किया जाता है. पुरस्कारों की घोषणा हर वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर की जाती है.

इस सूची में 4 पद्म विभूषण, 14 पद्म भूषण और 94 पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं. पुरस्कार पाने वालों में 21 महिलाएं हैं और सूची में विदेशियों की श्रेणी के 11 व्यक्ति / एनआरआई / पीआईओ / ओसीआई, 3 मरणोपरांत पुरस्कार पाने वाले और 1 ट्रांसजेंडर व्यक्ति शामिल हैं. इस सूची में 3 भारत रत्न पुरस्कार विजेता भी शामिल हैं.

ब्रितानी शासनकाल ने भारत को कई चीज़ें दी हैं. इनमें से एक अहम चीज़ है पूरे देश का एक ही टाइमज़ोन में होना. कई लोगों के अनुसार ये अनेकता में एकता का प्रतीक है. लेकिन ऐसा नहीं है कि सभी मानते हों कि भारतीय मानक समय यानी इंडियन स्टेंडर्ड टाइम एक अच्छी चीज़ है. पढ़िए क्यों. पूर्व से पश्चिम तक भारत 3,000 किलोमीटर यानी 1,864 मील तक चौड़ा है. देशान्तर रेखा पर देखें तो ये कम से कम 30 डिग्री तक के इलाके में फैला है. सूर्य को आधार बना कर होने वाली समय की गणना के अनुसार इसका मतलब है कि एक छोर से दूसरे छोर तक समय का फर्क कम से कम दो घंटे का है.

इस फर्क का अंदाज़ा न्यू यॉर्क और यूटा के समय को देखने पर पता चलता है. अगर ये दोनों जगहें भारत में होतीं तो दोनों जगहों पर समय एक ही होता. लेकिन, भारत में इस छोटे से फर्क का असर लाखों लोंगों पर पड़ा है.

भारत के सूदूर पश्चिमी छोर के मुकाबले देश के पूर्व में सूर्योदय तकरीबन दो घंटे पहले होता है.

पूरे देश के लिए एक मानक समय की आलोचना करने वालों का कहना है कि देश के पूर्वोत्तर में सूर्य की रोशनी का पूरा इस्तेमाल करने के लिए ये ज़रूरी है कि भारत में दो मानक समय को स्वीकार किया जाए. पूर्व में सूर्य की रोशनी जल्दी पड़ती है और इस कारण वहां इसका इस्तेमाल पहले शुरु हो सकता है.

हमारे शरीर के भीतर एक घड़ी होती है जो एक नियत ताल पर चलती है, इसे सिर्काडियन रिदम कहते हैं. सूर्य का उदय होना और ढलना इस ताल को सीधे तौर पर प्रभावित करता है. जैसे-जैसे सांझ होने लगती है हमारे शरीर में नींद को प्रभावित करने वाला हॉर्मोन मेलाटोनिन बनता है, इस कारण व्यक्ति को नींद आने लगती है.

चूंकि पूरे भारत में एक ही मानक समय को अपनाया गया है तो देश भर के स्कूल लगभग एक ही समय पर खुलते हैं. लेकिन, जिन जगहों पर सूर्य देर से अस्त होता है वहां बच्चे देर में सोने जाते हैं और इस कारण उन्हें जितनी नींद मिलनी चाहिए उससे कम नींद मिलती है.

अगर सूर्य के अस्त होने में एक घंटे की देरी है तो बच्चे को इस कारण आधे घंटी की नींद कम मिलती है.

इंडियन टाइम सर्वे और भारतीय डेमोग्राफिक एंड हेल्थ सर्वे के तहत जमा किए गए आंकड़ों का आकलन करने के बाद मौलिक जगनानी का कहना है कि जिन जगहों पर सूर्य देर में डूबता है वहां बच्चों को मिलने वाली शिक्षा का वक्त भी कम हो जाता है और ऐसी जगहों में बच्चों के प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल छोड़ने की आशंका अधिक रहती है.

उनका कहना है कि सूरज के देर में डूबने के कारण अधिकतर ग़रीब परिवारों के बच्चों को नींद कम मिलती है. ख़ास कर ऐसे परिवारों में जो मुश्किल आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं.

मिग-21 बाइसन आधुनिक हथियारों से लैस मिग-21 सिरीज़ का सबसे उन्नत लड़ाकू विमान है. इसका उपयोग इंटरसेप्टर के रूप में किया जाता है. इंटरसेप्टर लड़ाकू विमानों को दुश्मन के विमानों, ख़ासकर बमवर्षकों और टोही विमानों पर हमला करने के लिए डिज़ाइन किया जाता है. भारतीय वायुसेना ने पहली बार 1960 में मिग-21 विमानों को अपने बेड़े में शामिल किया था. करगिल युद्ध के बाद से भारतीय वायुसेना अपने बेड़े से पुराने मिग-21 विमानों को हटाकर इसी उन्नत मिग-21 बाइसन को शामिल कर रही है. बाइसन को बलालैका के नाम से भी बुलाया जाता है. नैटो सेनाएं इसे फिशबेड के नाम से भी बुलाती हैं.

मिग-21 बाइसन की ख़ासियत

मिग-21 बाइसन में एक बड़ा सर्च एंड ट्रैक रडार लगा है जो रडार नियंत्रित मिसाइल को संचालित करता है और रडार गाइडेड मिसाइलों का रास्ता तय करता है. इसमें बीवीआर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है जो आखों से ओझल मिसाइलों के ख़िलाफ़ सामान्य लेकिन घातक लड़ाकू विमान को युद्ध क्षमता के योग्य बनाता है. इन लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल किए गए इलेक्ट्रॉनिक और इसकी कॉकपिट उन्नत क़िस्म की होती है. मिग-21 बाइसन, ब्राज़ील के अपेक्षाकृत नए एफ़-5ईएम फ़ाइटर प्लेन के समान है.

मिग-21 बाइसन सुपरसोनिक लड़ाकू जेट विमान है जो लंबाई में 15.76 मीटर और चौड़ाई में 5.15 मीटर है. बिना हथियारों के ये क़रीब 5200 किलोग्राम को होता है जबकि असलहा लोड होने के बाद क़रीब 8,000 किलोग्राम तक के वज़न के साथ उड़ान भर सकता है.

सोवियत रूस के मिकोयान-गुरेविच डिज़ाइन ब्यूरो ने इसे 1959 में बनाना शुरु किया था. 1961 में भारत ने मिग विमानों को रूस से ख़रीदने का फ़ैसला किया था.

बाद के दौर में इसे और बेहतर बनाने की प्रक्रिया चलती रही और इसी क्रम में मिग को अपग्रेड कर मिग-बाइसन सेना में शामिल किया गया.

मिग-21 एक हल्का सिंगल पायलट लड़ाकू विमान है. और 18 हज़ार मीटर तक की ऊंचाई पर उड़ सकता है.

इसकी स्पीड अधिकतम 2,230 किलोमीटर प्रति घंटे यानी 1,204 नॉट्स (माक 2.05) तक की हो सकती है.

ये आसमान से आसमान में मार करने वाली मिसाइलों के साथ-साथ और बम ले जा सकने में सक्षम है.

1965 और 1971 में हुए भारत-पाक युद्ध में मिग-21 विमानों का इस्तेमाल हुआ था. 1971 में भारतीय मिग ने चेंगड़ु एफ़ विमान (ये भी मिग का ही एक और वेरियंट था जिसे चीन ने बनाया था) को गिराया था.

मिराज-2000 और इसकी ख़ासियत

मिराज-2000 अत्याधुनिक लड़ाकू विमान है जिसका निर्माण फ़्रांस की डासो एविएशन कंपनी ने किया है. ये वही कंपनी है जिसने रफ़ाल लड़ाकू विमान बनाया है. मिराज-2000 की लंबाई 47 फ़ीट और वज़न 7,500 किलो है. यह अधिकतम 2,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से उड़ सकता है. मिराज-2000 13,800 किलो गोला बारूद के साथ 2,336 किलोमीटर की गति से उड़ सकता है. डबल इंजन वाला मिराज-2000, चौथी पीढ़ी का मल्टीरोल लड़ाकू विमान और माक 2 है. भारत ने पहली बार इसे 80 के दशक में ख़रीदने का ऑर्डर दिया था.

करगिल युद्ध में मिग-21 के साथ मिराज-2000 विमानों ने भी अहम भूमिका निभाई थी.

साल 2015 में कंपनी ने अपग्रेडेड मिराज-2000 लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना को सौंपे. इन अपग्रेडेड विमानों में नए रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लगे हैं, जिनसे इन विमानों की मारक और टोही क्षमता में भारी इज़ाफ़ा हो गया है.

लेकिन फ़्रांस ने ये विमान केवल भारत को ही नहीं बेचा, बल्कि आज की तारीख़ में नौ देशों की वायुसेना इस विमान का इस्तेमाल करती हैं.

मिराज-2000 में जुड़वां इंजन हैं. सिंगल इंजन होने की वजह से लड़ाकू विमानों का वज़न कम होता है जिससे उनके मूवमेंट में आसानी होती है. लेकिन कई बार इंजन फेल होने से विमान के क्रैश होने की आशंका रहती है.

ऐसी स्थिति में यदि लड़ाकू विमान में एक से अधिक इंजन हो तो एक इंजन फेल होने पर दूसरा इंजन काम करता रहता है. इससे पायलट और विमान दोनों सुरक्षित रहते हैं.

दो इंजन होने की वजह से मिराज-2000 के क्रैश होने की संभावना बेहद कम है.

मिराज-2000 विमान एक साथ कई काम कर सकता है. जहां एक ओर यह अधिक से अधिक बम या मिसाइल गिराने में सक्षम है. वहीं यह हवा में दुश्मन का मुक़ाबला भी आसानी से करने के योग्य है.

मिराज लड़ाकू विमान DEFA 554 ऑटोकैन से लैस है, जिसमें 30 मिमी रिवॉल्वर प्रकार के तोप हैं.

ये तोप 1200 से लेकर 1800 राउंड प्रति मिनट की दर से आग उगल सकते हैं. साथ ही ये एक बार में 6.3 टन तक असला ले जाने में सक्षम है.

ये विमान आसमान से आसमान में मार करने वाली और आसमान से ज़मीन पर मार करने वाली मिसाइलें, लेज़र गाइडेड मिसाइलें, परमाणु शक्ति से लस क्रूज़ मिसाइलें ले जाने में सक्षम है.

अमरीका ने शीत युद्ध के दौर के प्रमुख परमाणु ​हथियार समझौते इंटरमीडिएट रेंज न्यूक्लियर फ़ोर्स यानी आईएनएफ़ संधि को स्थगित कर दिया है. फिलहाल अमरीका ने संधि को छह महीनों के लिए स्थगित कर दिया है और अगर रूस के साथ मतभेद हल नहीं होते हैं तो अमरीका संधि से बाहर निकल जाएगा.

अमरीका का कहना है कि रूस के क्रूज़ मिसाइल विकसित करने से संधि की शर्तों का उल्लंघन हुआ है. हालांकि, रूस अमरीका के इस आरोप से लगातार इनकार करता रहा है. दोनों ही पक्ष सं​धि का पालन न करने को लेकर एक-दूसरे को लंबे समय से आरोपी ठहराते आए हैं.

यह संधि एक महत्वपूर्ण हथियार नियंत्रण समझौता है जिस पर अमरीका और सोवियत संघ ने 1987 में हस्ताक्षर किए थे.

दुनिया की महाशक्तियों ने संधि के तहत ज़मीन से मार करने वाली 500 से लेकर 5,500 किलोमीटर की रेंज वाली मध्यम दूरी की मिसाइलों और क्रूज़ मिसाइलों को नष्ट करने और प्रतिबंधित करने पर सहमति जताई थी. इसमें परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह की मिसाइलें शामिल हैं.

1970 में सोवियत रूस ने पश्चिमी यूरोप में एसएस-20 मिसाइल भेजी थी जिनसे नेटो में शामिल देशों की चिंताएं बढ़ गई थीं.

आईएनएफ संधि के परिणामस्वरूप, अमरीका और सोवियत संघ ने जून 1991 तक 2,692 छोटी, मध्यम और मध्यवर्ती दूरी की मिसाइलों को नष्ट कर दिया था.

आईएनएफ़ का टूटना एसटीएआरटी संधि के लिए भी अच्छा संकेत नहीं है. साल 2010 में हुई यह संधि लंबी दूरी की रणनीतिक मिसाइलों के लिए सीमा निर्धारित करती है. यह संधि 2021 में खत्म हो रही है.

अगर अमरीका और रूस दोनों तैयार होते हैं तो ये संधि पांच साल के लिए आगे बढ़ाई जा सकती है. लेकिन, कई विश्लेषकों की चिंताएं हैं कि वर्तमान में बिगड़ते राजनीतिक हालात में इस महत्वपूर्ण संधि को खतरा हो सकता है.

क्यों हुआ टकराव?

अमरीका साल 2014 से रूस पर मध्यम दूरी की नोवाटोर 9एम729 मिसाइल बनाकर संधि के उल्लंघन का आरोप लगाता रहा है.

कुछ रिपोर्टों के अनुसार, रूस के पास संधि को तोड़ने वाली क़रीब 100 मिसाइलें हैं.

अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, ''सालों से रूस बिना किसी पछतावे के आईएनएफ संधि की शर्तों को तोड़ता आ रहा है. एक पक्ष के समझौते का पालन न करने की स्थिति में उसमें बने रहना अच्छा नहीं है.''

वहीं, रूस कहता है कि उसकी मिसाइल 500 किमी से कम की रेंज में है और आरोप लगाता है कि अमरीका का पोलैंड और रोमानिया में ज़मीन से मार करने वाला बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम रूस पर हमले के लिए प्रतिबंधित मिसाइलों के इस्तेमाल में लाया जा सकता है.

जबकी अमरीका का कहना है कि उसका मिसाइल डिफेंस सिस्टम पूरी तरह से आईएनएफ की शर्तों के अनुरूप है.

रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रिएटकोफ ने कहा कि अमरीका का आईएनएफ की संधि से पीछे हटना अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा है. उन्होंने ये बात माइक पोम्पियो की घोषणा से पहले कही थी.

उन्होंने कहा, ''यह अंतरराष्ट्रीय हथियार नियंत्रण प्रणाली और सामूहिक विनाश के हथियारों के अप्रसार की प्रणाली के लिए एक गंभीर झटका होगा. एक पक्ष का इसे तोड़ना गैरजिम्मेदाराना रवैया होगा.''

नेटो ने अमरीका के दावे का समर्थन किया है और एक बयान जारी कर रूस को पूरी तरह इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया है.

नेटो ने कहा, ''अगर रूस अपनी 9एमएस729 प्रणाली को नष्ट करके आईएनएफ संधि का सम्मान नहीं करता और अमरीका के संधि से निकलने से पहले पूरी तरह संधि का पालन नहीं करता तो रूस इस संधि के ख़त्म होने के लिए अकेला ज़िम्मेदार होगा.''

सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा एवं रोजगार में 10 प्रतिशत आरक्षण देने से जुड़ा 124वां संविधान संशोधन विधेयक 9 जनवरी 2019 को राज्यसभा में भी पास हो गया। उच्च सदन में विपक्ष सहित लगभग सभी दलों ने इस विधेयक का समर्थन किया। बिल को लेकर राज्यसभा में हुई वोटिंग के दौरान इसके समर्थन में 165 और खिलाफ में केवल 7 वोट पड़े। इससे पहले बिल को सिलेक्ट कमिटी के पास भेजने के लिए कनिमोझी ने प्रस्ताव रखा था। हालांकि वोटिंग के दौरान इसके पक्ष में 18 और खिलाफ में 155 वोट पड़े। इसके साथ ही बिल को सिलेक्ट कमिटी में भेजने की मांग खारिज हो गई। 

आपको बता दें कि 124वें संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा ने एक  दिन पहले 8 जनवरी 2019 को ही बहुमत के साथ पारित कर दिया था। सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि इस विधेयक को राज्यों की मंजूरी लेने की कोई जरूरत नहीं है। ऐसे में इस विधेयक को मंजूरी के लिए अब सीधे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। कुछ विपक्षी दलों ने इस विधेयक को लोकसभा चुनाव से पहले लाए जाने को लेकर सरकार की मंशा तथा इस विधेयक की न्यायिक समीक्षा में टिक पाने को लेकर आशंका जताई। हालांकि सरकार ने दावा किया कि कानून बनने के बाद यह न्यायिक समीक्षा की अग्निपरीक्षा में भी खरा उतरेगा क्योंकि इसे संविधान संशोधन के जरिए लाया गया है। 

मुख्य तथ्य

1. इसके पूर्व 21 बार प्राइवेट मेंबर बिल लाकर अनारक्षित वर्ग के लिए आरक्षण संबंधी सुविधाएँ प्रदान करने की माँग हुईं.

2. मंडल आयोग ने भी इसकी अनुशंसा की थी.झ् नरसिंह राव सरकार ने 1992 में एक प्रावधान किया था पर संविधान संशोधन नहीं होने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया.

3. सिन्नो कमीशन (कमीशन टू एग्ज़ामिन सब-कैटेगोराइजेशन ऑफ ओबीसी) ने 2004 से 2010 तक इस बारे में काम किया और 2010 में तत्कालीन सरकार को प्रतिवेदन दिया.

4. मोदी सरकार ने इसी कमिशन की सिफ़ारिश के आधार पर संविधान संशोधन बिल तैयार किया है.

5. प्रस्तावित आरक्षण का कोटा वर्तमान कोटे से अलग होगा. अभी देश में कुल 49.5 फ़ीसदी आरक्षण है. अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 फ़ीसदी, अनुसूचित जातियों को 15 फ़ीसदी और अनुसूचित जनजाति को 7.5 फ़ीसदी आरक्षण की व्यवस्था है.

6. संविधान के आर्टिकल 15 में 15.6 जोड़ा गया है जिसके अनुसार राज्य और भारत सरकार को इस संबंध में कानून बनाने से नहीं रोका जा सकेगा.

7. इसके अनुसार आर्थिक रूप से दुर्बल सामान्य वर्ग को शैक्षणिक संस्थानों में 10 फ़ीसदी आरक्षण का प्रस्ताव किया गया है.

8. संविधान के 16 आर्टिकल में एक बिंदु जोड़ा जाएगा जिसके अनुसार राज्य सरकार और केंद्र सरकार 10 फ़ीसदी आरक्षण दे सकते हैं.

9. ग़रीब सवर्णों को प्रस्तावित 10 फ़ीसदी आरक्षण मौजूदा 50 फ़ीसदी की सीमा से अलग होगा.

चीन ने चांद के अनदेखे हिस्से पर दुनिया का पहला अंतरिक्ष यान उतारने में सफलता हासिल की है. उसके अनदेखे हिस्से का अध्ययन करने के लिए पहली बार कोई मिशन लांच किया गया है. यह उपलब्धि अंतरिक्ष में सुपरपावर बनने की दिशा में चीन के बढ़ते कदम की गवाह है. चीन के राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन (सीएनएसए) ने घोषणा की कि यान चांग‘ई-4 ने चंद्रमा की दूसरी ओर की सतह को छुआ. चांद के इस हिस्से को डार्क साइड भी कहा जाता है.चांग‘ई-4 का प्रक्षेपण शिचांग के प्रक्षेपण केंद्र से 08 दिसंबर 2018 को लॉन्ग मार्च 3बी रॉकेट के जरिये किया गया था. चीन को 03 जनवरी को 2019 को सफलता हासिल हुई. ये यान अपने साथ एक रोवर भी लेकर गया है. लो फ्रीक्वेंसी रेडियो एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेशन की मदद से चांद के इस हिस्से के बारे में पता लगाएगा.

चंद्र अभियान चांग‘ई-4 का नाम चीनी पौराणिक कथाओं की चंद्रमा देवी के नाम पर रखा गया है.मिशन के तहत घाटियों का अध्ययन: इस मिशन के तहत वहां की भू-संरचनाओं व घाटियों का अध्ययन किया जाएगा. इसके अतिरिक्त चांद पर मौजूद खनिजों और उसकी सतह की संरचना का भी पता लगाया जाएगा. इस यान के साथ चार विशेष वैज्ञानिक उपकरण भी भेजे गए हैं जिनका इस्तेमाल मिशन के दौरान किया जाएगा.

एक सेटेलाइट भी लांच किया गया: पृथ्वी से ना दिखाई देने के कारण चांद के उस हिस्से से सीधे संचार स्थापित करना लगभग नामुमकिन है. इसी कारण चांग‘ई-4 से संपर्क स्थापित करने के लिए एक सेटेलाइट भी लांच किया गया है. क्यूकिआओ नाम का यह सेटेलाइट मई 2018 में लॉन्घ्च कर दिया गया था.सोवियत संघ ने ली पहली तस्वीरः उल्लेखनीय है कि चंद्रमा का आगे वाला हिस्सा हमेशा धरती के सम्मुख होता है और वहा कई समतल क्षेत्र हैं. इस पर उतरना आसान होता है, लेकिन इसकी दूसरी ओर की सतह का क्षेत्र पहाड़ी और काफी ऊबड़-खाबड़ है.

सोवियत संघ ने वर्ष 1959 में पहली बार चंद्रमा की दूसरी तरफ की सतह की पहली तस्वीर ली थी, लेकिन अभी तक कोई भी चंद्र लैंडर या रोवर चंद्रमा की विमुख सतह पर नहीं उतर सका था.

चीन अकादमी ऑफ स्पेस टेक्नोलॉजी: चीन ने अंतरिक्ष की खोज के लिए चीन अकादमी ऑफ स्पेस टेक्नोलॉजी की स्थापना वर्ष 1968 में की थी. यहां 27 हजार से ज्यादा कर्मचारी हैं. यह अकादमी वल्र्ड क्लास अकादमी में से एक है जो बेहतरीन स्पेसक्राफ्ट बनाती है.चन्द्रमा पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है. यह सौर मंडल का पाचवाँ,सबसे विशाल प्राकृतिक उपग्रह है. पृथ्वी के मध्य से चन्द्रमा के मध्य तक कि दूरी 3,84,403 किलोमीटर है. यह दूरी पृथ्वी कि परिधि के 30 गुना है. चन्द्रमा पर गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी से 1/6 है. यह पृथ्वी कि परिक्रमा 27.3 दिन में पूरा करता है और अपने अक्ष के चारों ओर एक पूरा चक्कर भी 27.3 दिन में लगाता है.

चांद की एक ओर अंधेरा क्यों रहता है?

चांद का हमेशा एक ही हिस्सा हमें इसलिए दिखता है, क्योंकि जिस गति से वह पृथ्वी के चक्कर लगाता है, उसी गति से अपनी धुरी पर भी चक्कर लगाता है. यही कारण है कि चांद का एक हिस्सा हमें नहीं दिखाई देता है.

पंजाब का जालंधर शहर देश के सबसे बड़े विज्ञान सम्मेलन का मेजबान बना है क्योंकि इस बार 106वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस (आईएससी-2019) का आयोजन इसी शहर में किया जा रहा है। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में 3 जनवरी से 7 जनवरी तक चलने वाली भारतीय विज्ञान कांग्रेस की थीम इस बार ‘भविष्य का भारत: विज्ञान और प्रौद्योगिकी रखी गई है।’ इस बार भारतीय विज्ञान कांग्रेस में जर्मन-अमेरिकी जीव रसायन विज्ञानी थॉमस क्रिस्चियन सुडॉफ, ब्रिटिश मूल के भौतिक-विज्ञानी प्रोफेसर फ्रेडरिक डंकन हेल्डेन और इजरायल के जीव रसायनशास्त्री एवरम हेर्शको समेत दुनिया के तीन प्रमुख नोबेल पुरस्कार प्राप्त वैज्ञानिक शामिल हो रहे हैं।भारतीय विज्ञान कांग्रेस एसोसिएशन (आईएससीए) के अध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार चक्रवर्ती के अनुसार, ‘भारतीय विज्ञान कांग्रेस का यह संस्करण भारत के भविष्य के विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है क्योंकि यह युवाओं के बीच विचारों एवं नवोन्मेषों के आदान-प्रदान का एक बड़ा मंच उपलब्ध करा रहा है।’105वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस का आयोजन गत वर्ष मणिपुर विश्वविद्यालय, इंफाल में किया गया था। ज्ञातव्य है कि वर्ष 1914 से भारतीय विज्ञान कांग्रेस एसोसिएशन द्वारा विज्ञान कांग्रेस का आयोजन किया जा रहा है। भारत में आधुनिक विज्ञान को आगे बढ़ाना एवं समाज के विकास के लिए इसका उपयोग इस संस्था की स्थापना का उद्देश्य रहा है। आरंभ से ही भारत के शीर्ष वैज्ञानिक, शिक्षाविद् एवं राजनेता से इस संस्था से जुड़े रहे है।

खेल में उत्कृष्टता को पहचानने और पुरस्कृत करने के लिए प्रति वर्ष राष्ट्रीय खेल पुरस्कार दिये जाते हैं. राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार चार वर्ष की अवधि में एक खिलाड़ी द्वारा खेल के क्षेत्र में शानदार और सबसे उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया जाता है, अर्जुन पुरस्कार वर्ष साल में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया जाता है, प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय खेल में पदक विजेताओं के निर्माण के लिए कोच को द्रोणाचार्य पुरस्कार, खेल विकास में योगदान के लिए ध्यानचंद पुरस्कार और खेल पदोन्नति और विकास के क्षेत्र में एक दृश्य भूमिका निभाने के लिए कॉर्पोरेट संस्थाओं (निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों में) और व्यक्तियों को राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार शामिल है. इंटर-यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट में कुल मिलाकर शीर्ष प्रदर्शन करने वाले विश्वविद्यालय को मौलाना अबुल कलाम आजाद (माका) ट्रॉफी दी गई है.

राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2018 के विजेताओं की पूरी सूची यहां दी गई है: 

राजीव गांधी खेल रत्न 2018
क्र. सं. खिलाड़ी का नाम खेल
1. सुश्री एस मिराबाई चानू भारोत्तोलन
2. श्री विराट कोहली क्रिकेट
द्रोणाचार्य पुरस्कार2018
क्र. सं. कोच का नाम खेल
1. सुबेदार चेनंदा अचैया कुट्टप्पा मुक्केबाज़ी
2. श्री विजय शर्मा भारोत्तोलन
3. श्री ए श्रीनिवास राव टेबल टेनिस
4. श्री सुखदेव सिंह पन्नू एथलेटिक्स
5. श्री क्लेरेंस लोबो हॉकी (लाइफ टाइम)
6. श्री तारक सिन्हा क्रिकेट (लाइफ टाइम)
7. श्री जीवन कुमार शर्मा जुडो (लाइफ टाइम)
8. श्री वी.आर. बीडू एथलेटिक्स (लाइफ टाइम)
Arjuna Awards 2018
क्र. सं. खिलाड़ी का नाम खेल
1. श्री नीरज चोपड़ा एथलेटिक्स
2. नाइब सुबेदार जीन्सन जॉनसन एथलेटिक्स
3. सुश्री हिमा दास एथलेटिक्स
4. सुश्री नीलकुर्ति सिक्की रेड्डी बैडमिंटन
5. सूबेदार सतीश कुमार मुक्केबाज़ी
6. सुश्री. स्मृति मंधना क्रिकेट
7. श्री शुभंकर शर्मा गोल्फ़
8. श्री मनप्रीत सिंह हॉकी
9. सुश्री सविता हॉकी
10. कर्नल रवि राठौर पोलो
11. सुश्री रही सरनोबत निशानेबाज़ी
12. श्री अंकुर मित्तल निशानेबाज़ी
13. मस. श्रेयसी सिंह निशानेबाज़ी
14. सुश्री मनिका बत्रा टेबल टेनिस
15. श्री जी. साथिया टेबल टेनिस
16. श्री रोहन बोपन्ना टेनिस
17. श्री सुमित कुश्ती
18. सुश्री पूजा कादियन वुशु
19. श्री अंकुर धामा पैरा एथलेटिक्स
20. श्री मनोज सरकार पैरा बैडमिंटन
ध्यान चंद पुरस्कार 2018
क्र. सं. खिलाड़ी का नाम खेल
1. श्री सत्यदेव प्रसाद तीरंदाजी
2. श्री भरत कुमार छेत्री हॉकी
3. सुश्री बॉबी अलॉयसियस एथलेटिक्स
4. श्री चौगले दादू दत्तात्रे कुश्ती
राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार 2018
क्र. सं. वर्ग इकाई का नाम
1. उभरते और युवा प्रतिभा की पहचान और पोषण राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड
2. कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से खेल को प्रोत्साहन जेएसडब्ल्यू स्पोर्ट्स
3. विकास के लिए खेल ईशा आउटरीच
मौलाना अबुल कलाम आजाद (MAKA) ट्रॉफी 2017-18
1. गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर

असम में आज नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन जारी कर दिया गया है. नये मसौदे में असम में बसे सभी भारतीय नागरिकों के नाम पते और फोटो हैं. कुल 3.29 करोड़ आवेदन में 2.89 करोड़ लोगों के नाम नेशनल रजिस्टर में शामिल किए जाने के योग्य पाए गए हैं. वहीं 40 लाख लोग वैध नागरिक नहीं पाए गए. हालांकि यह फाइनल लिस्ट नहीं है बल्कि ड्राफ्ट है. जिनका नाम इस ड्राफ्ट में शामिल नहीं है वो इसके लिए दावा कर सकते हैं.   

यह पहला मौका है जब राज्य में अवैध रूप से रहने वाले लोगों के बारे में जानकारी मिल सकेगी. देश में लागू नागरिकता कानून से थोड़े अलग रूप में राज्य में असम समझौता 1985 लागू है. इसके मुताबिक 24 मार्च 1971 की आधी रात तक सूबे में प्रवेश करने वाले लोगों को भारतीय नागरिक माना जाएगा.

असम में नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) के फाइनल ड्राफ्ट में 40 लाख लोगों के नाम शामिल न किए जाने पर सड़क से लेकर संसद तक संग्राम मचा है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुआई में विपक्षी दल जहां सरकार पर हमलावर हैं, वहीं बीजेपी इसे एक बड़ा कदम बता रही है। मंगलवार को राज्यसभा में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने एनआरसी को 1985 में राजीव सरकार द्वारा किए गए असम अकॉर्ड का हिस्सा बताया। शाह के इस बयान पर जबर्दस्त हंगामा हुआ। शाह ने कहा कि 15 अगस्त 1985 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने असम अकॉर्ड को डिक्लेयर किया, लेकिन इसके बाद इसे लागू करने की हिम्मत नहीं जुटाई जा सकी। आइए आपको बताते हैं कि 1985 में राजीव सरकार द्वारा साइन किए गए असम अकॉर्ड में आखिर था क्या और एनआरसी से इसका क्या कनेक्शन है.

देश में असम ही एक मात्र राज्य है जहां सिटिजनशिप रजिस्टर की व्यवस्था लागू है। असम में सिटिजनशिप रजिस्टर देश में लागू नागरिकता कानून से थोड़ा अलग है। प्रदेश में 1985 से लागू असम समझौते के अनुसार, 24 मार्च 1971 की आधी रात तक असम में प्रवेश करने वाले लोग और उनकी अगली पीढ़ी को भारतीय नागरिक माना जाएगा। 

बांग्लादेशी घुसपैठ को लेकर राजीव गांधी ने एजीपी से किया था समझौता असम में 1980 में बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा हावी था। पाकिस्तान से अलग होकर बांग्लादेश बनने के बाद से असम में बांग्लादेशी घुसपैठियों का अवैध प्रवेश चल रहा था। घुसपैठ के मुद्दे ने राज्य की राजनीति में भी जोर पकड़ा और सिटिजनशिप रजिस्टर अपडेट करने को लेकर आंदोलन खड़ा हो गया। इसका इसका नेतृत्व अखिल असम छात्र संघ (आसू) और असम गण परिषद ने किया था। आंदोलन की आंच राष्ट्रीय राजनीति तक भी पहुंच गई और 1985 में केंद्र की तत्कालीन राजीव गांधी सरकार और आंदोलनकारियों के बीच समझौता हुआ। 

राजीव ने अवैध बांग्लादेशियों को बाहर करने का आश्वासन दिया था 
असम गण परिषद और अन्य आंदोलनकारी नेताओं के बीच असम समझौता हुआ। राजीव गांधी ने अवैध बांग्लादेशियों को प्रदेश से बाहर करने का आश्वासन दिया था। इस समझौते में कहा गया कि 24 मार्च 1971 तक असम में आकर बसे बांग्लादेशियों को नागरिकता दी जाएगी। इस तय समय के बाद आए बाकी लोगों को राज्य से डिपोर्ट किया जाएगा। 

एनआरसी पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश 
बाद के सालों में यह मामला लटकता चला गया। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। असम पब्लिक वर्क नाम के एनजीओ सहित कई अन्य संगठनों ने 2013 में इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। असम के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने इसे एक बड़ा मुद्दा बनाया था। 2015 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और निगरानी में यह काम शुरू हुआ और 2018 जुलाई में फाइनल ड्राफ्ट पेश किया गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने, जिन 40 लाख लोगों के नाम लिस्ट में नहीं हैं, उन पर किसी तरह की सख्ती बरतने पर फिलहाल के लिए रोक लगाई है।

वित्त मंत्री अरूण जेटली की गैरमौजूदगी में कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयष गोयल ने 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2019-20 का अंतरिम बजट लोकसभा में पेश किया. प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार का यह छठा और अंतिम बजट है. यह बजट ‘अंतरिम बजट’ के रूप में पेश किया गया. इससे पहले इस सरकार ने पांच पूर्ण बजट पेश कर चुकी है.यह अंतरिम बजट करीब 27.84 लाख करोड़ रुपये का है जो कि पिछले बजट से लगभग 13.30 प्रतिशत अधिक है. पिछला बजट 24.57 लाख करोड़ रुपये का था. 
 
अंतरिम बजट क्या है? 

अंतरिम बजट में पूरे वित्तीय वर्ष (Financial Year) के अलावा आंशिक समय के लिए बजट पेश किया जाता है. यह बजट चुनावी साल में पेश होता है यानी जिस साल लोकसभा चुनाव होने हो उसी साल अंतरिम बजट पेश किया जाता है. नई सरकार बनाने के लिए जो समय होता है, उस अवधि के लिए अंतरिम बजट संसद में पेश किया जाता है. 
 
रुपया कहाँ से आया और कहाँ गया 

वित्त वर्ष 2018-19 के अंतरिम बजट के अनुसार सरकार की आमदनी और खर्च का ब्योरा प्रतिशत में इस प्रकार है:
 
सरकार की आमदनी

ऋण से इतर पूंजी प्राप्तियां: 3%
कर से इतर राजस्व: 8%
वस्तु एवं सेवा कर (GST) : 21%
केन्द्रीय उत्पाद शुल्क: 7%
सीमा शुल्क: 4%
आय कर: 17%
निगम कर: 21%
उधार और अन्य देयताएं: 19%

सरकार का खर्च

ब्याज: 18%
रक्षा: 8%
सब्सिडी: 9%
वित्त आयोग और अन्य खर्च: 8%
करों और शुल्कों में राज्यों का हिस्सा: 23%
पेंशन: 5%
केन्द्रीय प्रायोजित योजनाएं: 9%
केन्द्रीय क्षेत्र की योजना: 12%
अन्य खर्च: 8%

रेल बजट 

इस वर्ष भी रेल बजट अलग से पेश नहीं किया गया, क्योंकि वित्त वर्ष 2017-18 से ही रेल बजट को आम बजट में शामिल कर दिया गया है. अंतरिम बजट में यात्री किराए एवं माल भाड़ा शुल्क में कोई वृद्धि नहीं की गई.बजट में रेलवे के लिए 1.58 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्‍यय आवंटन की घोषणा की गई. यह रेलवे के लिए अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक पूंजीगत खर्च की योजना है. पिछले बजट में रेलवे के लिए 1.48 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए गये थे. 

रक्षा बजट 

वित्त वर्ष 2019-20 के बजट प्रावधानों में रक्षा बजट के लिए 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक का आवंटन किया गया है. पहली बार देश का रक्षा बजट 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक किया गया है. वर्ष 2018-19 में रक्षा क्षेत्र के लिए 2.96 लाख करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया था.

शिक्षा के लिए बजट

वित्त वर्ष 2019-20 के लिए शिक्षा क्षेत्र के लिए 93,847.64 करोड़ रुपए आवंटित किए गये हैं. यह पिछले बजट (2018-19) में आवंटित 85,010 करोड़ रुपए से 10 फीसद से अधिक है. इस बजट में उच्च शिक्षा के लिए 37,461.01 करोड़ रुपए तथा स्कूली शिक्षा के लिए 56,386.63 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं.

स्वास्थ्य पर बजट

अंतरिम बजट 2019-20 में स्वास्य क्षेत्र के लिए 61,398 करोड़ रुपए के बजटीय प्रावधान की घोषणा की गयी है. यह पिछले बजट से 16 प्रतिशत अधिक है. पिछले वर्ष यह आवंटन 54,302.50 करोड़ रुपए था. स्वास्य क्षेत्र के लिए आवंटित कुल राशि में 6400 करोड़ रुपए केंद्र की महत्वाकांक्षी आयुष्मान योजना के लिए आवंटित किए गए हैं.

अंतरिक्ष के लिए बजट

अंतरिम बजट 2019-2020 में अंतरिक्ष के लिए बजट 10,252 करोड़ रुपए कर दिया है. पिछले वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान में विभाग को 9,918 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया था. इस प्रकार इसमें 3.37 फीसद की बढ़त की गई है.

विज्ञान संबंधी विभागों के लिए बजट

केंद्र के दो विज्ञान मंत्रालयों को 2019-20 के अंतरिम बजट में संयुक्त तौर पर 14,697 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं. यह पिछले बजट के आवंटन से मामूली अधिक है. आवंटित बजट में भूविज्ञान मंत्रालय (MOES) को अंतरिम बजट में 1,901 करोड़ रुपए दिए गए हैं.

किसानों को किसान सम्मान निधि

इस बजट में ‘प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि’ नाम से एक नयी योजना की घोषणा की गयी है. इस योजन के तहत छोटे किसानों को तीन किस्तों में सालाना 6,000 रुपये की नकद सहायता दी जाएगी. इस योजना से सरकारी खजाने पर सालाना 75,000 करोड़ रुपये का वार्षिक बोझ पड़ेगा. यह सहायता दो हेक्टेयर से कम जोत वाले किसानों को उपलब्ध होगी. इस योजना से लगभग 12 करोड़ किसान लाभान्वित होंगे. यह योजना 1 दिसंबर 2018 से लागू मानी जाएगी.

मध्यम वर्ग को आय कर में छूट

वित्त मंत्री ने इस बजट में पांच लाख रुपये तक की सालाना आय को कर मुक्त कर दिया. इससे सरकारी खजाने पर 18,500 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ेगा. आय कर में दिया जाने वाला मानक कटौती को भी मौजूदा 40 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया है.
 
इससे पहले 2.5 से 5 लाख रुपये तक की आय पर 5 प्रतिशत, 5 से 10 लाख रुपये पर 20 प्रतिशत तथा 10 लाख रुपये से अधिक की आय पर 30 प्रतिशत की दर से कर लागू है. पांच लाख रुपये तक की आय के कर मुक्त होने के बाद सबसे निम्न स्लैब पूरी तरह कर मुक्त हो गया है.

सब्सिडी में 12 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान 

आगामी वित्त वर्ष में खाद्य, उर्वरक और पेट्रोलियम पदार्थों समेत कुल सब्सिडी का बोझ करीब 12 प्रतिशत बढ़कर 3.34 लाख करोड़ रुपये पहुंच जाने का अनुमान है. चालू वित्त वर्ष (2018-19) के संशोधित बजट अनुमान के अनुसार कुल सब्सिडी 2.99 लाख करोड़ रुपये है.
 
कुल सब्सिडी में सर्वाधिक खर्च खाद्य पर आएगा. खाद्य सब्सिडी चालू वित्त वर्ष के संशोधित बजट अनुमान 1.71 लाख करोड़ से बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपए पहुंच जाने का अनुमान है. उर्वरक सब्सिडी पर खर्च 2018-19 के संशोधित बजट अनुमान 70 हजार करोड़ रुपये की तुलना में बढ़कर 75 हजार करोड़ पहुंच जाने की संभावना है. पेट्रोलियम उत्पादों पर दी जाने वाली सब्सिडी के भी चालू वित्त वर्ष के संशोधित बजट अनुमान 24.83 हजार करोड़ रुपए के मुकाबले 37.47 हजार करोड़ रुपए पर पहुंचने का अनुमान लगाया गया है. ब्याज सब्सिडी अंतरिम बजट में 25.14 हजार करोड़ रहने का अनुमान है. चालू वित्त वर्ष के संशोधित बजट अनुमान में यह 23 हजार करोड़ रुपए है.

मनरेगा के लिए आवंटन 

2019-20 के बजट अनुमानों के लिए मनरेगा हेतु 60 हजार करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा करते हुए वित्‍त मंत्री ने कहा कि यदि आवश्‍यकता हुई तो अतिरिक्‍त आवंटन किया जायेगा. 

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के लिए आवंटन 

अनुसूचित जाति के लिए आवंटन में 35.6 प्रतिशत की वृद्धि कर इसे 76,801 करोड़ रुपये किया गया, जो 2018-19 में 56,619 करोड़ रुपये था.अनुसूचित जनजाति के लिए आवंटन में 28 प्रतिशत की वृद्धि कर 2019-20 में इसे 50,086 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जबकि 2018-19 में यह 39,135 करोड़ रुपये था. 

पूर्वोत्तर के लिए विकास निधि 

अंतरिम बजट 2019-20 में पूर्वोत्तर राज्यों के विकास के लिए अवसंरचना आवंटन निधि में 21 प्रतिशत बढ़ोतरी की घोषणा की गयी है. वृद्धि के बाद पूर्वोत्तर में अवसंरचना विकास निधि 58 हजार करोड़ रुपये हो गयी है.
 
पूर्वोत्तर राज्यों के विकास निधि से अरुणाचल प्रदेश में हाल ही में विमान सेवा शुरू की गई और मेघालय, त्रिपुरा तथा मिजोरम को पहली बार भारतीय रेल के नक्शे पर स्थान मिला है. इसी के तहत सिक्किम में पाक्‍योंग हवाई अड्डे को चालू किया गया है.

गैर-अधिसूचित घुमंतू समुदाय के लिए समिति का गठन किये जाने की घोषणा 

सरकार ने घुमंतू समुदाय के लिए एक समिति का गठन किये जाने की घोषणा की है. वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने 1 फरवरी को अंतरिम बजट (2019-20) पेश करने के दौरान यह घोषणा की. इस समिति का गठन नीति आयोग के तहत किया जाएगा, जिसका काम गैर-अधिसूचित, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू को औपचारिक रूप से वर्गीकृत करना होगा.इसके अलावा सरकार सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत एक कल्याण विकास बोर्ड का भी गठन करेगी. इसका उद्देश्य गैर-अधिसूचित, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के कल्याण और विकास कार्यक्रमों को कार्यान्वित करना होगा. 

अंतरिम बजट 19: मुख्य बिन्दु
 
पांच लाख रुपए तक की आय पर कर में पूरी छूट.
 
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत छोटे किसानों को सालाना 6,000 रुपए की मदद.असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए ‘प्रधान श्रम योगी मानधन पेंशन योजना’.रक्षा बजट बढ़कर 3,05,296 करोड़ रुपए हुआ.रेलवे के लिए 64,587 करोड़ रुपए आवंटित.महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए 1330 करोड़ रुपए.राजकोषीय घाटा कम होकर 3.4 प्रतिशत पर रहेगा.कर वसूली बढ़कर लगभग 12 लाख करोड़ रुपए हुई.फिल्म निर्माताओं को भी एकल खिड़की मंजूरी सुविधा.राष्ट्रीय शिक्षा योजना के लिए आवंटन 38,570 करोड़ हुआ.‘वन रैंक, वन पेंशन’ के तहत 35,000 करोड़ आवंटित.प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए बजट में 19 हजार करोड़ रूपये का आबंटन.मनरेगा के लिए 60 हजार करोड़ रूपये का आबंटन.वर्ष 2019-20 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.4 प्रतिशत.देश का 22वां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान हरियाणा में स्थापित किया जाएगा.सभी इच्छित परिवारों को मार्च 2019 तक बिजली के कनेक्शन प्रदान किये जाएंगे.आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर राष्ट्रीय कार्यक्रम की सहायता के लिए एक नवीन राष्ट्रीय आर्टिफिशियल पोर्टल का गठन.किफायती आवासीय योजना विकसित करने वाली रीयल एस्टेट कंपनियों को मिल रही कर राहत को अगले वित्त वर्ष तक के लिए बढ़ा दिया है.अचल संपत्ति की बिक्री से मिलने वाले दो करोड़ रुपए तक के पूंजीगत लाभ को अब दो आवासीय संपत्तियों में निवेश करने पर कर में छूट का प्रावधान.

वर्ष 2030 के भारत के लिए विजन के दस आयाम 

सरकार ने अगले दशक के लिए 10 सूत्री परिकल्पना पेश की है. लोकसभा में 1 फरवरी को वित्‍त मंत्री पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट 2019-20 पेश करते हुए इन 10 सूत्री परिकल्पना की घोषणा की. इन परिकल्पना में वर्ष 2030 तक गरीबी, कुपोषण, गंदगी और निरक्षरता से मुक्त भारत के निर्माण की बात कही गयी है.
 
10 परिकल्पनाएं: एक दृष्टि10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था और सहज-सुखद जीवन के लिए भौतिक तथा सामाजिक अवसंरचना का निर्माण करना.एक ऐसे डिजिटल भारत का निर्माण करना है, जहां हमारा युवा वर्ग डिजिटल भारत के सृजन में व्‍यापक स्‍तरपर स्‍टार्ट-अप और इको-सिस्‍टम में लाखों रोजगारों का सृजन करते हुए इसका नेतृत्‍व करेगा.भारत को प्रदूषण मुक्‍त राष्‍ट्र बनाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों और नवीकरणीय ऊर्जा पर विशेष ध्‍यान देना.आधुनिक डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके ग्रामीण औद्योगिकीकरण के विस्‍तार के माध्‍यम से बड़े पैमाने पर रोजगारों का सृजन करना.सभी भारतीयों के लिए सुरक्षित पेयजल के साथ स्‍वच्‍छ नदियां और लघु सिंचाई तकनीकों को अपनाने के माध्‍यम से सिंचाई में जल का कुशल उपयोग करना.सागरमाला कार्यक्रम के प्रयासों में तेजी लाने के साथ भारत के तटीय और समुद्री मार्गों के माध्‍यम से देश के विकास को सशक्‍त बनाना.अंतरिक्ष कार्यक्रम – गगनयान के तहत वर्ष 2022 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में भेजना.सर्वाधिक जैविक तरीके से खाद्यान्‍न उत्‍पादन में भारत को आत्‍मनिर्भर बनाना और खाद्यान्‍नों का निर्यात करना.स्‍वस्‍थ भारत और एक बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल एवं व्‍यापक आरोग्‍य प्रणाली के साथ-साथ आयुष्‍मान भारत और महिला सहभागिता भी इसका एक महत्‍वपूर्ण घटक होगा.10. न्‍यूनतम सरकार, अधिकतम शासन (Minimum Government Maximum Governance) वाले एक ऐसे राष्‍ट्र का रूप देना, जहां एक चुनी हुई सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकार चलने वाले सहकर्मियों और अधिकारियों के शासन को मूर्त रूप दिया जा सकता है.

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि भारत सरकार के बाद राष्ट्रीय बायोफ्यूल नीति 2018 को लागू करने के वाला देश में राजस्थान पहला राज्य बन गया है। राठौड़ की अध्यक्षता में सोमवार को इंदिरा गांधी पंचायती राज प्रशिक्षण संस्थान में बायोफ्यूल प्राधिकरण उच्चाधिकार समिति की चतुर्थ बैठक में बायोफ्यूल नीति 2018 को प्रदेश में लागू करने को अनुमोदन किया। 

उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा इस कच्चे तेल के आयात में कमी लाए जाने के उद्देश्य से घरेलू स्तर पर जैव ईंधन का उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री के ‘स्वच्छ भारत एवं मेक-इन इंडिया’ अभियानों को बढ़ावा देते हुए भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा हाल ही 4 जून 2018 को राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति-2018 घोषित की गई है।

राठौड़ ने कहा कि बायोफ्यूल के उपयोग के प्रति आमजन को जागरूक करने एवं तैलीय बीजों का उत्पादन बढ़ाने के साथ उसके फायदों व मार्केटिंग व्यवस्था के व्यापक प्रचार-प्रसार जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बायोफ्यूल संबंधित गतिविधियों विशेषकर उत्पादन व वितरण प्रक्रिया के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राजस्थान जैव ईंधन नियम 2018 को लागू किए जाने के साथ बायोडीजल उत्पादन के लिए भारतीय रेलवे के वित्तीय सहयोग से राज्य में 8 टन प्रतिदिन क्षमता वाले बायोडीजल उत्पादन संयंत्र की स्थापना की गई है।

दो सप्ताह तक चलने वाली संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन बिना किसी नतीजों के साथ शुक्रवार को खत्म हो गई। अक्षय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) की तरफ सुचारु ढंग से बढ़ने के मद्देनजर विकसित देशों की ओर से विकासशील देशों को धन देने के मसले पर जलवायु विशेषज्ञों के बीच अभी भी विवाद बना हुआ है।विकासशील देशों के एक प्रतिनिधि वार्ताकार ने बताया, 'बड़ा सवाल है कि पेरिस जलवायु समझौते के तहत धनी देशों की ओर से कितना पैसा गरीब देशों को दिया जाएगा। इसमें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण समय है, कब दिया जाएगा।'उन्होंने बताया कि ये सब मूल प्रश्न हैं जिनको लेकर 197 देशों के वार्ताकार उलझे हुए हैं और सम्मेलन समाप्त होने जा रहा है।

वाशिंगटन स्थित वर्ल्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट के सस्टेनेबल फायनेंस सेंटर में क्लाइमेट फायनेंस एसोसिएट निरंजली मनेल अमेरासिंघे ने बताया, 'विकसित देश पहले ही 2020 तक विकासशील देशों को 100 अरब डॉलर सालाना देने को सहमत हो चुके थे। यह धन विकासशील देशों को निम्न कार्बन उत्सर्जन प्रौद्योगिकी अपनाने और जलवायु असर के लिए उनको तैयार करने में मदद के लिए देने की बात थी।'भारत समेत विकासशील देशों के लिए 2020 के पहले की जलवायु कार्ययोजना को लेकर एक बड़ी उपलब्धि की बात यह थी कि दुनिया के विकसित देश बाद के दो वर्षो में भी इस विषय पर बातचीत को राजी थे।

भारत पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि विकासशील देशों को वित्तीय मदद, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण सहायता प्रदान करने के प्रावधान संकटपूर्ण हैं।जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में गुरुवार को मंत्रियों की उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने कहा, 'हमें कार्रवाई करने के लिए हमेशा वैज्ञानिक रिपोर्ट की प्रतीक्षा करने की जरूरत नहीं है।'उन्होंने कहा कि सदी के अंत तक वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी को दो डिग्री सेंटीग्रेड तक सीमित रखने के लिए क्योटो प्रोटोकॉल के तहत विकसित देशों की ओर से 2020 के पहले अतिरिक्त व प्रारंभिक कार्य-योजना और विकासशील देशों को वित्तीय मदद, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण सहायता प्रदान करने के प्रावधान संकटपूर्ण स्थिति में हैं।भारत सम्मेलन के पहले दिन 6 नवंबर से ही 2020 के पूर्व की जलवायु कार्य-योजना को वार्ता के औपचारिक एजेंडा में शामिल करने की मांग कर रहा था।

भारत बिजनेस ऑप्टिमाइज इंडेक्स में दूसरे पायदान से फिसलकर 7वें पायदान पर पहुंच गया है। भारत की रैंकिंग में यह गिरावट सितंबर तिमाही के दौरान देखने को मिली है। ग्रांट थोर्नटन की अंतरराष्ट्रीय व्यापार रिपोर्ट (आईबीआर) के अनुसार इस सर्वे में इंडोनेशिया टॉप पर रहा है। इंडोनेशिया के बाद फिनलैंड ने दूसरा स्थान हासिल किया है। इसके बाद नीदरलैंड नंबर 3 पर फिलीपींस नंबर 4 पर ऑस्ट्रिया नंबर 5 पर और नाइजीरिया नंबर 6 पर,  भारत फिसलकर 7वें पायदान पर रहा है।

व्यापार आशावाद पर तिमाही वैश्विक सर्वेक्षण के मुताबिक भारतीय व्यवसायों ने अगले 12 महीनों में राजस्व की दृष्टि से कम आत्मविश्वास व्यक्त किया है। वहीं मुनाफे के पैमाने पर भी व्यवसायों के आत्मविश्वास में कमी देखने को मिली है।

इस सर्वे में करीब 54 फीसद लोगों ने व्यवसायों में आशावादिता वाला दृष्टिकोण अपनाया है.

ग्रांट थॉर्नटन इंडिया एलएलपी के इंडिया पार्टनर लीडरशिप टीम के हरीश एचवी ने बताया कि यह सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था के पिछड़ने का संकेत है, जिसकी वजह से रैकिंग में गिरावट देखने को मिली है। हालांकि सरकारी की ओर से उठाए जा रहे कदमों और सुधारों के चलते जिसके कारण ईज ऑफ डूइंग बिजनेस लिस्ट में भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ है, अगली कुछ तिमाहियों में भारतीय व्यवसायों में आशावादिता के रूख की वापसी हो सकती है। इस सर्वे के मुताबिक इसके अलावा अन्य मापदंडों जैसे कि बिक्री कीमतों और निर्यात में इजाफे को लेकर भी इस तिमाही में थोड़ी कम आशावादिता नजर आ रही है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय वायुसेना (आईएएफ) ने 3.11.2017 को ओडिशा के चांदीपुर में एकीकृत टेस्ट रेंज में स्वदेशी तौर पर निर्मित हल्के 'ग्लाइड बम' का परीक्षण किया।

स्मार्ट एंटी एयरफील्ड हथियार (SAAW) के रूप में नामित, आईएएफ विमान से जारी बम को सटीक नेविगेशन प्रणाली के माध्यम से मार्गदर्शन किया गया था।
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, 'ग्लैड बम' 70 किमी से अधिक की दूरी पर लक्ष्य तक पहुंच गया, जिसमें उच्च क्षमताएं थीं।

तीन रिसाव की स्थिति और सीमाओं के साथ-साथ तीन परीक्षण-अग्नि का आयोजन किया गया था।

डीआरडीओ के अन्य प्रयोगशालाओं और आईएएफ के सहयोग से डीआरडीओ के रिसर्च सेंटर इमरात (आरसीआई) ने बम विकसित किया है।

सफलता के बाद, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने आईएएफ की टीम और डीआरडीओ के वैज्ञानिकों को बधाई दी।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ। एस क्रिस्टोफर ने पुष्टि की कि सआव को जल्द ही सशस्त्र बलों में शामिल कर लिया जाएगा।
डायरेक्टर जनरल मिसाइल और स्ट्रैटेजिक सिस्टम डीजी (एमएसएस) डा। जी। सतेश रेड्डी ने निर्देशित बम विकसित करने के लिए स्वदेशी क्षमताओं में SAAW को एक प्रमुख मील का पत्थर कहा।

 SAAW लंबी दूरी की सटीक-निर्देशित एंटी-एयरफ़ील्ड हथियार है, जो 100 किमी की सीमा तक उच्च परिशुद्धता के साथ जमीन के लक्ष्य को सक्षम करने के लिए तैयार किया गया है।

साहित्य के क्षेत्र में दिया जाने वाला देश का सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार साल 2017 के लिए हिन्दी की शीर्षस्थ कथाकार कृष्णा सोबती को प्रदान किया जायेगा. यह पुरस्कार उन्हें साहित्य के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रदान किया जायेगा. ज्ञानपीठ के निदेशक लीलाधर मंडलोई ने बताया कि प्रो. नामवर सिंह की अध्यक्षता में 3.11.2017 को हुई प्रवर परिषद की बैठक में वर्ष 2017 का 53वां ज्ञानपीठ पुरस्कार हिन्दी साहित्य की सशक्त हस्ताक्षर कृष्णा सोबती को देने का निर्णय किया गया. कृष्णा सोबती को 11 लाख रूपये, प्रशस्ति पत्र और वाग्देवी की कांस्य प्रतिमा प्रदान की जायेगी.

कृष्णा सोबती को उनके उपन्यास ‘जिंदगीनामा’ के लिए साल 1980 का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था. उन्हें 1996 में अकादमी के उच्चतम सम्मान ‘साहित्य अकादमी फैलोशिप’ से नवाजा गया था. इसके अलावा कृष्णा सोबती को पद्मभूषण, व्यास सम्मान, शलाका सम्मान से भी नवाजा जा चुका है.

कृष्णा सोबती के कालजयी उपन्यासों ‘सूरजमुखी अँधेरे के’, ‘दिलोदानिश’, ‘ज़िन्दगीनामा’, ‘ऐ लड़की’, ‘समय सरगम’, ‘मित्रो मरजानी’, ‘जैनी मेहरबान सिंह’, ‘हम हशमत’, ‘बादलों के घेरे’ ने कथा साहित्य को अप्रतिम ताजगी और स्फूर्ति प्रदान की है.

हाल में प्रकाशित ‘बुद्ध का कमंडल लद्दाख’ और ‘गुजरात पाकिस्तान से गुजरात हिन्दुस्तान’ भी उनके लेखन के उत्कृष्ट उदाहरण है. 18 फरवरी 1924 को गुजरात (वर्तमान पाकिस्तान) में जन्मी सोबती साहसपूर्ण रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए जानी जाती है.

उनके रचनाकर्म में निर्भिकता, खुलापन और भाषागत प्रयोगशीलता स्पष्ट परिलक्षित होती है. 1950 में कहानी ‘लामा’ से साहित्यिक सफर शुरू करने वाली सोबती स्त्री की आजादी और न्याय की पक्षधर है. उन्होंने समय और समाज को केंद्र में रखकर अपनी रचनाओं में एक युग को जिया है.

गौरतलब है कि पहला ज्ञानपीठ पुरस्कार 1965 में मलयालम के लेखक जी शंकर कुरूप को प्रदान किया गया था. सुमित्रानंदन पंत ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित होने वाले हिन्दी के पहले रचनाकार थे. कृष्णा सोबती ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित होने वाली हिन्दी की 11वीं रचनाकार हैं. इससे पहले हिन्दी के 10 लेखकों को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिल चुका है. इनमें पंत, दिनकर, अज्ञेय और महादेवी वर्मा शामिल हैं.

भारत वर्ल्ड इकनोमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स पर चीन में 21 स्थानों पर फिसल गया, चीन और बांग्लादेश के पीछे पड़ोसी देशों के पीछे, मुख्य रूप से अर्थव्यवस्था में महिलाओं की कम भागीदारी और कम मजदूरी के कारण। इसके अलावा, भारत की नवीनतम रैंकिंग 2006 के मुकाबले 10 गुणा कम है, जब डब्ल्यूईएफ ने लिंग अंतर को मापना शुरू किया था।

डब्ल्यूईएफ ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2017 के अनुसार, भारत ने अपने लिंग अंतर में 67%, अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के मुकाबले कम, और बांग्लादेश जैसे कुछ पड़ोसी देशों को 47 वां स्थान दिया है जबकि चीन को 100 वें स्थान पर रखा गया है।

विश्व स्तर पर भी, इस साल की कहानी एक उदास एक है डब्ल्यूईएफ ने चार स्तंभों – स्वास्थ्य, शिक्षा, कार्यस्थल और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के अंतर को मापने के बाद से पहली बार – वैश्विक अंतराल वास्तव में चौड़ाइ आई है. “वेफ ग्लोबल जेंडर  गैप रिपोर्ट 2006 में पहली बार प्रकाशित होने के बाद पहली बार लैंगिक अंतर को चौड़ा करने के साथ, 2017 में लिंगों के बीच समानता को सुधारने में धीमी लेकिन स्थिर प्रगति के एक दशक का रुख आया।”

आज प्रकाशित इस साल की रिपोर्ट में पाया गया कि वैश्विक लिंग अंतर का कुल 68% बंद हो गया है। 2016 से यह मामूली गिरावट आई जब अंतर बंद हुआ 68.3% था।

प्रगति की वर्तमान दर पर, पिछले वर्ष 83 की तुलना में वैश्विक लिंग अंतर को पुल के लिए 100 साल लगेंगे।

यह मामला कार्यस्थल लिंग भेदभाव के मामले में भी बदतर है, जो रिपोर्ट के अनुमानों को बंद करने के लिए 217 साल लगेगा।

एक सकारात्मक नोट पर, हालांकि, कई देशों ने निराशाजनक वैश्विक रुझानों को आगे बढ़ाया है, इस साल के सभी 144 देशों में से एक से अधिक आधे से ज्यादा लोग पिछले 12 महीनों में अपने स्कोर को सुधारते देखा है।

ग्लोबल के शीर्ष पर, लिंग गैप इंडेक्स आइसलैंड है देश ने अपने अंतराल का लगभग 88% बंद कर दिया है नौ साल तक यह दुनिया का सबसे लिंग-समान देश रहा है।

शीर्ष 10 में नॉर्वे (2), फिनलैंड (3), रवांडा (4) और स्वीडन (5), निकारागुआ (6) और स्लोवेनिया (7), आयरलैंड (8), न्यूजीलैंड (9) और फिलीपींस 10) अन्य शामिल हैं।

भारत की सबसे बड़ी चुनौतियां आर्थिक भागीदारी और अवसर स्तंभ में हैं जहां देश 13 9 के साथ-साथ स्वास्थ्य और अस्तित्व के स्तम्भ के स्थान पर है जहां देश को 141 स्थान पर रखा गया है।

रिपोर्ट ने वैश्विक ग्लोबल ग्लैप गेप इंडेक्स पर राजनीतिक सशक्तिकरण के साथ-साथ स्वस्थ जीवन प्रत्याशा और बुनियादी साक्षरता में लिंग अंतर को चौड़ा करने के लिए भारत की स्थिति में गिरावट का श्रेय दिया।

“1966 में देश की पहली महिला प्रधान मंत्री के उद्घाटन के बाद 50 से अधिक वर्षों तक पारित होने के बाद, राजनीतिक सशक्तिकरण उप-सूचकांक में अपनी वैश्विक शीर्ष 20 रैंकिंग को बनाए रखने से भारत एक नई पीढ़ी महिला राजनीतिक नेतृत्व, “रिपोर्ट ने कहा।

भारत ने विश्वबैंक की कारोबार सुगमता रिपोर्ट रैंकिंग में लंबी छलांग लगायी है. देश की रैंकिंग 30 पायदान सुधरकर 100वें स्थान पर पहुंच गयी. इससे उत्साहित सरकार ने सुधारों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया जिससे देश आने वाले वर्ष में कारोबार सुगमता के मामले में शीर्ष 50 देशों में शामिल हो सकता है.

नरेंद्र मोदी सरकार के 2014 में सत्ता में आने के समय भारत की रैंकिंग 142 थी. पिछले साल यह 130 थी. इस साल भारत एकमात्र बड़ा देश है जिसने कराधान, निर्माण परमिट, निवेशक संरक्षण और ऋण शोधन के लिये उठाये गये कदम के दम पर यह बड़ी उपलब्धि हासिल की.

विश्व बैंक ने कहा इस साल के आकलन में यह शीर्ष 10 सुधारकर्ता देशों में एक है. कारोबार सुगमता के 10 संकेतकों में से आठ में सुधारों को क्रियान्वित किया गया. यह पहला मौका है जब भारत इस मामले में पहले 100 देशों में शामिल हुआ है. इस बारे में अपनी प्रतिक्रिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार सुधार, निष्पादन और रूपांतरण के मंत्र के साथ रैंकिंग में और सुधार तथा आर्थिक वृद्धि में तेजी लाने को प्रतिबद्ध है. उन्होंने कारोबार सुगमता में भारत की रैंकिंग में उछाल की सराहना की और कहा कि यह चौतरफा तथा विविध क्षेत्रों में किये गये सुधारों का नतीजा है.

अपनी सालाना रिपोर्ट ‘डूइंग बिजनेस 2018: रिफार्मिंग टू क्रिएट जॉब्स’ में विश्वबैंक ने कहा कि भारत की रैंकिंग 2003 से अपनाये गये 37 सुधारों में से करीब आधे का पिछले चार साल में किये गये क्रियान्वयन को प्रतिबिंबित करता है. हालांकि, व्यापार माहौन के आकलन के लिये जून को आखिरी महीने के रूप में लिया गया है.इससे रैंकिंग में जीएसटी क्रियान्वयन के बाद के कारोबारी माहौल पर गौर नहीं किया गया है. इस नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था से 1.3 अरब की आबादी वाला देश एक कर के साथ एक बाजार में तब्दील हुआ और व्यापार के लिये राज्यों के बीच की बाधाएं दूर हुई है.

भारत पिछले साल 190 देशों की सूची में 130वें स्थान पर था. इस साल के आकलन में यह शीर्ष 10 सुधारकर्ता देशों में एक है. कारोबार सुगमता के 10 संकेतकों में से आठ में सुधारों को क्रियान्वित किया गया. यह पहला मौका है जब भारत इस मामले में पहले 100 देशों में शामिल हुआ है. विश्वबैंक की इस रिपोर्ट से नरेंद्र मोदी सरकार के तरकश में नये तीर आ गये हैं. यह रिपोर्ट ऐसे समय आयी है जब मोदी सरकार जीएसटी और नोटबंदी के बाद अर्थव्यवस्था में आयी नरमी को लेकर विपक्ष के निशाने पर है.

हालांकि कंपनी गठित करना, अनुबंधों को लागू करना और निर्माण परमिट के मामले में लेकिन इसके बावजूद भारत कारोबार शुरू करने, अनुबंध के लागू करने तथा निर्माण परमिट के मामले में अब भी पीछे है. नई कंपनी को पंजीकरण कराने में अब भी 30 दिन का समय लगता है जो 15 साल पहले 127 दिन था लेकिन स्थानीय उद्यमियों के लिये प्रक्रियाओं की संख्या जटिल बनी हुई है. उन्हें अब भी 12 प्रक्रियाओं से गुजरने की आवश्यकता होती है.

हालांकि भारत निवेशकों के संरक्षण के मामले में दुनिया में चौथे स्थान (पिछले साल 13वें स्थान) पर आ गया लेकिन बिजली प्राप्त करने के मामले में स्थिति बिगड़ी है और पिछले साल के 26 से 29वें स्थान पर आ गया. कर्ज उपलब्धता रैंकिंग 44 से सुधरकर 29 पर आ गयी. वहीं कर भुगतान सुगमता के मामले में रैंकिंग 172वें से सुधकर 119वें स्थान पर आ गयी.

विश्वबैंक के ‘ग्लोबल इंडिकेटर्स ग्रुप’ के कार्यवाहक निदेशक रीता रमाल्हो ने वाशिंगटन में पीटीआई भाषा से कहा, ‘यह बड़ा उछाल है.’ उन्होंने 30 पायदान के सुधार के लिये मोदी सरकार की अगुवाई में 2014 से किये गये सुधारों को श्रेय दिया. एक जुलाई से लागू माल एवं सेवा कर (जीएसटी) अगले साल की व्यापार सुगमता रिपोर्ट में प्रतिबिंबित होगा. रीता ने कहा, ‘इस साल जीएसटी सुधारों पर गौर नहीं किया गया. इस पर अगले साल की रिपोर्ट में विचार किया जाएगा.’ विश्वबैंक के अनुसार दुनिया में न्यूजीलैंड कारोबार के लिहाज से सबसे बेहतर जगह है. उसके बाद क्रमश: सिंगापुर, डेनमार्क, दक्षिण कोरिया और हांगकांग का स्थान है. अमेरिका तथा ब्रिटेन सूची में क्रमश: छठे और सातवें स्थान पर है.

ब्रिक्स देशों में रूस सूची में अव्वल है और वह 35वें स्थान पर है. उसके बाद चीन का स्थान है जो लगातार दूसरे साल 78वें स्थान पर है. रिपोर्ट लिखने वालों ने कहा कि यह इस साल का सबसे बड़ा आश्चर्य भारत है. उसकी रैंकिंग 30 पायदान सुधरी है. इस संदर्भ में उसका अंक 4.71 बढ़कर 60.76 अंक पहुंच गया.

भारतमाला नेशनल हाईवे डेवलपमेंट प्रोजेक्ट हैं। इसके तहत नए हाईवे के अलावा उन प्रोजेक्ट्स को भी पूरा किया जाएगा तो अब तक अधूरे हैं। इसमें बॉर्डर और इंटरनेशनल कनेक्टिविटी वाले डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को शामिल किया गया है। पोर्ट्स और रोड, नेशनल कॉरिडोर्स को ज्यादा बेहतर बनाना और नेशनल कॉरिडोर्स को डेपलप करना भी इस प्रोजेक्ट में शामिल है। इसके अलावा बैकवर्ड एरिया, रिलीजियस और टूरिस्ट साइट्स को जोड़ने वालेनेशनल हाइवे बनाए जाएंगे।

भारतमाला परियोजना के तहत भारत सरकार ने 7 फेज में 34,800 किलोमीटर सड़कें बनाने का फैसला लिया है। इसके तहत नेशनल हाईवे, बॉर्डर्स, कोस्टल एरिया को जोड़ा जाएगा। ईस्टर्न और वेस्टर्न बॉर्डर्स पर 3,300 किमी रोड बनाई जाएंगी। लुधियाना-अजमेर और मुंबई-कोचीन के बीच नया नेशनल हाईवे बनाया जाएगा। लुधियाना-अजमेर के प्रपोज्ड हाईवे में दूरी 721 किमी तो हो जाएगी, लेकिन दोनों शहरों के बीच ट्रैवल टाइम घटकर 9 घंटे 15 मिनट हो जाएगा। मौजूदा 627 किमी लंबे हाईवे में अभी 10 घंटे लगते हैं। इसी तरह, प्रपोज्ड मुंबई-कोचीन हाईवे में दूरी 200 किमी बढ़ जाएगी, वक्त करीब 5 घंटे कम हो जाएगा।

कैटिगरी

किलोमीटर

इकोनॉमिक कॉरिडोर
9000
इंटर कॉरिडोर/फीडर रूट
6000
नेशनल कॉरिडोर एफिशिएंसी इम्प्रूवमेंट                              
5000
बॉर्डर रोड/इंटरनेशनल कनेक्टिविटी
2000
कोस्टल रोड/पोर्ट कनेक्टिविटी
2000
ग्रीन फील्ड एक्स्प्रेसवे
800
बैलेंस NHDP वर्क्स
10,000

कितना खर्चा आएगा?

 5.35 लाख करोड़ रुपए खर्च आएगा। इस भारतमाला परियोजना को कैबिनेट ने 24.10.2017 को मंजूरी दी।

पैसा कहां से आएगा?

भारतमाला प्रोजेक्ट के लिए 2.09 लाख करोड़ रुपए मार्केट, 1.06 लाख करोड़ प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और 2.19 लाख करोड़ CRF/TOT/टोल के जरिए आएगा।

लुधियाना-अजमेर, मुंबई-कोचीन के प्रपोज्ड हाईवे में कितना वक्त बचेगा?

मौजूदा लुधियाना-अजमेर नेशनल हाईवे के बीच की दूरी 627 किमी है। इसके लिए अभी 10 घंटे का वक्त लगता है।

भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बनने वाले हाईवे में दूरी 100 किमी बढ़कर 721 किमी हो जाएगी, लेकिन करीब 45 मिनट की बचत होगी। नए रूट में करीब 9 घंटे 15 मिनट लगेंगे।

मौजूदा मुंबई-कोचीन नेशनल हाईवे के बीच की दूरी 1346 किमी है। अभी इस सफर में 29 घंटे का वक्त लगता है। 

भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बनने वाले नए रूट के तहत दूरी बढ़कर 1537 किमी हो जाएगी, लेकिन वक्त 5 घंटे कम हो जाएगा। इस सफर को पूरा करने में करीब 24 घंटे का वक्त लगेगा।

बॉर्डर्सऔर कोस्टल एरिया में कितने किमी सड़क बनेंगी?

भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत ईस्टर्न और वेस्टर्न बॉर्डर्स पर 3300 किमी रोड बनाई जाएंगी। पहले फेज में 1000 किमी प्रस्तावित है। टूरिज्म और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए 2100 किमी की कोस्टल रोड्स बनाई जाएंगी।

पोर्ट कनेक्टिविटी के लिए 2000 किमी की रोड बनाए जाएंंगी। इसे पहले फेज में बनाया जाएगा।

अभी कितने हाईवे हैं?

फिलहाल देश में 82 हाईवे हैं। इसमें 34 हजार करोड़ का इन्वेस्टमेंट किया जाना है। पहले फेज में 9 हाईवे के 680.64 किमी को चुना गया है। इस पर 6,258 करोड़ का खर्च आएगा।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी की संपत्ति में लगातार इजाफा हो रहा है। 38 अरब डॉलर (2.5 लाख करोड़ रुपये) की नेटवर्थ के साथ वो लगातार 10वें साल भारत के सबसे अमीर शख्स बनकर उभरे हैं। दिलचस्प बात यह है कि आर्थिक सुस्ती के दौर में भी टॉप 100 अमीर लोगों की नेटवर्थ (संपत्ति) में 26 फीसद का इजाफा हुआ है। अमीर लोगों का आंकलन करने वाली पत्रिका ने इंडिया रिच लिस्ट 2017 की सूची जारी की है।

इस सूची में मुकेश अंबानी टॉप पर बने हुए हैं। वहीं देश की तीसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्माता कंपनी विप्रो के प्रमुख अजीम प्रेमजी ने दूसरा स्थान हासिल किया है। उनकी कुल नेटवर्थ 19 अरब डॉलर की है। अजीम प्रेमजी ने इस सूची में दो स्थानों की छलांग लगाई है।

नोबेल यानी दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक। यह पुरस्कार स्वीडन के अल्फ्रेड नोबेल के नाम पर दिया जाता है, जो वैज्ञानिक, कारोबारी और हथियार निर्माता थे। 1896 में मरने से पहले उन्होंने अपने वसीयत में लिखा कि उनका सारा पैसा नोबेल फाउंडेशन के नाम कर दिया जाए और इन पैसों से नोबेल प्राइज़ दिया जाए। नोबेल के नाम पर करीब साढ़े तीन सौ पेटेंट थे, तो पैसा भी बहुत था। फिर 1901 से नोबेल प्राइज़ दिए जाने शुरू हुए। यह अवॉर्ड मेडिकल साइंस, फिजिक्स, केमेस्ट्री, पीस, लिटरेचर और इकॉनमिक्स के क्षेत्र में सबसे उम्दा काम करने वालों को दिया जाता है। 

नोबेल पुरस्कार हर साल 10 दिसंबर को दिए जाते हैं, क्योंकि इसी दिन अल्फ्रेड नोबेल का देहांत हुआ था। इस साल के नामों की घोषणा हो चुकी है और पुरस्कार समारोह 10 दिसंबर को होगा। 

#1. मेडिकल साइंस 

किसे मिला: अमेरिका के जेम्स पी. एलिसन और जापान के तासुकू होन्जो। 
क्यों मिला: इम्यून चेकपॉइंट थ्योरी के लिए। 

समाज में क्या योगदान: हमारे शरीर में ढेर सारी कोशिकाएं होती हैं। इनमें कैंसर की कोशिकाएं भी होती हैं. हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम इन खराब कोशिकाओं को पहचानकर इन्हें खत्म करने की कोशिश करता है। रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी या सर्जरी से कैंसर वाली कोशिकाएं खत्म की जा सकती हैं। लेकिन, कैंसर फैलाने वाली कोशिकाओं को पकड़ना आसान नहीं होता है। अगर एक बार इलाज के बाद ये दोबारा फैलती हैं, तो और ताकतवर हो जाती हैं। तो इन वैज्ञानिकों ने वह प्रोटीन खोज लिया है, जो कैंसर के दौरान शरीर का इम्यून सिस्टम कमज़ोर करता है। इसका नाम पीडी-1 है। इन वैज्ञानिकों ने कैंसर के इलाज के लिए इम्यूनोथेरेपी ईजाद की। इम्यूनोथेरेपी में शरीर का इम्यून सिस्टम कैंसर सेल्स और इस प्रोटीन को निशाना बनाता है। यानी कैंसर के इलाज का एक और विकल्प खुल गया है।

#2. फिजिक्स 

किसे मिला: अमेरिका के ऑर्थर अश्किन, फ्रांस के जेरार्ड मोउरो और कनाडा की डोना स्ट्रिकलैंड 
क्यों मिला: लेज़र फिज़िक्स के क्षेत्र में अपने काम के लिए। 

समाज में क्या योगदान: आपने बल्ब और लेज़र लाइट की रोशनी देखी होगी। बल्ब की रोशनी चारों तरफ फैलती है, जबकि लेज़र बीम सीधी चलती है। आर्थर अश्किन ने ऐसा अविष्कार किया है, जिससे लेज़र बीम के ज़रिए अणुओं और परमाणुओं को पकड़ा जा सकता है। जेरार्ड मोउरो और डोना स्ट्रिकलैंड को संयुक्त रूप से पुरस्कार दिया गया है, जो एक ही मकसद पर काम कर रहे थे। लेज़र बीम के ज़रिए चीज़ों को जलाया भी जा सकता है। इन दोनों वैज्ञानिकों ने चिर्प्ड पल्स एंप्लीफिकेशन का अविष्कार किया, जिससे लेज़र बीम की इंटेसिटी को कम-ज़्यादा किया जा सकता है। मान लीजिए आप प्लास्टिक की बोतल में पानी खौला रहे हैं। तो पहले की तकनीक में वह बोतल जल जाती, लेकिन जेरार्ड और डोना के अविष्कार से अब पानी गर्म हो जाएगा, लेकिन बोतल को नुकसान नहीं होगा। 

#3. केमेस्ट्री 

किसे मिला: अमेरिका की फ्रांसेस अर्नॉल्ड, अमेरिका के जॉर्ज स्मिथ और ब्रिटेन के ग्रेगरी विंटर 
क्यों मिला: डायरेक्टेड इवॉल्यूशन और फेज़ डिस्प्ले के क्षेत्र में नई खोजों के लिए। 

समाज में क्या योगदान: इन तीनों वैज्ञानिकों ने डायरेक्टेड इवॉल्यूशन और फेज़ डिस्प्ले के क्षेत्र में नई खोजें की हैं। इसे समझने के लिए हमें डार्विन के पास जाना होगा। डार्विन की थ्योरीज़ के मुताबिक जीवों में आनुवांशिक तौर पर बदलाव आते रहते हैं, जिससे कई हज़ार सालों में एक नए किस्म के जीव तैयार होते हैं। लेकिन प्राकृतिक रूप से यह प्रक्रिया बहुत लंबी है। इन वैज्ञानिकों ने जो खोजें की हैं, उससे यह प्रॉसेस तेज किया जा सकता है। डायरेक्टेड इवॉल्यूशन के ज़रिए नए एंजाइम बना सकते हैं और फेज़ डिस्प्ले के ज़रिए बेहतर मेडिकल एंटीबॉडी डिवेलप की जा सकती है। इन खोजों का इस्तेमाल इंसानी शरीर के अलावा जैव-ईंधन जैसे ऊर्जा के सस्ते विकल्प और कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने के लिए किया जा सकता है। 

#4. पीस (शांति) 

किसे मिला: इराक की नादिया मुराद और अफ्रीका के डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के डेनिस मुकवेज 
क्यों मिला: नादिया ने यौन हिंसा के खिलाफ मुहिम चलाई। डेनिस ने यौन हिंसा की शिकार महिलाओं का इलाज किया। 

समाज में क्या योगदान: 25 साल की नादिया को आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने अगवा कर लिया था। उनका तीन महीने तक शोषण हुआ। किसी तरह छूटने के बाद उन्होंने बताया कि कैसे IS आतंकी दिन-रात यजीदी लड़कियों का रेप करते थे और मन भरने पर बेच देते थे। उन्होंने इसके खिलाफ आवाज़ उठाई, जिसे दुनियाभर में सुना गया। 2016 में वह संयुक्त राष्ट्र की गुडविल ऐंबैसडर बनाई गईं। नादिया शांति का नोबेल पाने वाली पहली इराकी नागरिक हैं। 
कॉन्गो के डेनिस मुकवेज को 'डॉक्टर मिरैकल' के नाम से जाना जाता है। उन्होंने अपनी सारी ज़िंदगी कांगो में यौन हिंसा से पीड़ित महिलाओं के इलाज में बिताई। इनमें से अधिकांश महिलाएं कांगो में लंबे समय तक चले गृहयुद्ध के दौरान यौन हिंसा की शिकार हुई थीं। डेनिस ने न सिर्फ महिलाओं का इलाज किया, बल्कि कोई ऐक्शन न लेने पर कांगो समेत कई देशों की सरकारों की आलोचना भी की। 

#5. इकॉनमिक्स 

किसे मिला: अमेरिकी अर्थशास्त्री (इकॉनमिस्ट) विलियम डी. नॉर्डहॉस और पॉल एम रोमर 
क्यों मिला: जलवायु परिवर्तन पर नई तकनीक की खोज के लिए। 

समाज में क्या योगदान: विलियम और पॉल मैक्रोइकॉनमिक्स से ताल्लुक रखते हैं। दोनों ने प्रकृति और मार्केट इकॉनमी के बीच रिश्ते को विस्तार देने वाले मॉडल बनाए हैं और जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान को रोकने के तरीकों पर खोज की है। 21वीं सदी में पूरी दुनिया के सामने ग्लोबल वॉर्मिंग और इकॉनमिक डिवेलपमेंट दो सबसे बड़े सवाल हैं। इन दोनों अर्थशास्त्रियों ने अपनी थ्योरीज़ में इन अहम सवालों के जवाब दिए हैं कि कैसे दुनिया के देश प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना अपनी आर्थिक वृद्धि को लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं। विलियम को जलवायु परिवर्तन इकॉनमिक्स का पितामह कहा जाता है, जबकि पॉल वर्ल्ड बैंक के सीनियर वाइस प्रेज़िडेंट हैं। 

#6. साहित्य (लिटरेचर) 

किसे मिला: किसी को नहीं। 
क्यों नहीं: इस साल किसी को भी साहित्य का नोबेल नहीं दिया जाएगा, क्योंकि नोबेल पुरस्कारों की घोषणा करने वाली 'दि स्वीडिश कमिटी' कई झंझावतों से गुज़री है। इस कमिटी में 18 सदस्य होते हैं। इसकी एक सदस्य कटरीना फ्रॉस्टेनशन के फटॉग्रफर पति जीन क्लोड अनॉर्ल्ट पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा और फिर रेप के जुर्म में दो साल की सज़ा सुनाई गई। इसके अलावा जीन पर आरोप लगा कि उन्होंने सात बार नोबेल विजेताओं के नाम आधिकारिक घोषणा से पहले लीक कर दिए। ज़ाहिर है कि वह अपनी पत्नी की वजह से ऐसा कर पाए। कमिटी के तमाम लोग चाहते थे कि कटरीना को कमिटी से बाहर किया जाए और इसके लिए तीन सदस्यों ने इस्तीफा भी दे दिया। लेकिन, कटरीना ने सदस्यता नहीं छोड़ी। इस पूरे विवाद के दौरान 3 मई को अकैडमी ने फैसला लिया कि वह इस साल साहित्य का नोबेल नहीं देगी, क्योंकि ऐसा करने पर नोबेल की प्रतिष्ठा कम हो जाएगी। 

चलते-चलते: नोबेल के लिए किसी को कैसे चुना जाता है 
- पहले चरण में लोगों से नामांकन मंगाए जाते हैं, फिर नॉमिनेट हुए लोगों पर एक्सपर्ट्स विचार करते हैं। उनकी खासियत और योगदान पर चर्चा होती है। नॉमिनेट हुए शख्स के बारे में उसके देश की सरकार, पूर्व नोबेल विजेताओं और विद्वानों से राय मांगी जाती है। इसके बाद ही किसी का नाम फाइनल होता है। 
- किसी व्यक्ति को उसकी मौत के बाद नोबेल प्राइज़ के लिए नॉमिनेट नहीं किया जा सकता। हां, अगर नॉमिनेशन के बाद मौत हो गई हो, तो पुरस्कार दिया जा सकता है। ऐसा दो बार हो चुका है। 
- अगर किसी कैटेगरी में दो विजेता चुने गए हैं, तो दोनों इनाम की राशि आधी-आधी बांटेंगे। अगर तीन विजेता चुने गए हैं, तो पहले विजेता को आधी रकम मिलेगी, जबकि बाकी दोनों विजेता बची रकम को आधा-आधा बांटेंगे। 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में अब सिर्फ 3000 से भी कम गांव ऐसे बचे हैं जहां बिजली नहीं पहुंची है. लेकिन, सरकार भी मानती है कि देश में चार करोड़ से ज्यादा ऐसे परिवार हैं जिनके पास घरों में बिजली का कनेक्शन नहीं है और वह अंधेरे में जीने को मजबूर हैं. 25.09.2017 को यह ऐलान किया कि अब वह इस स्थिति को बदलने जा रही है. सोमवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीनदयाल उपाध्याय की जन्मशती के मौके पर सौभाग्य नाम की योजना की शुरुआत की, जिसका मकसद है हर घर तक बिजली का कनेक्शन पहुंचाना.

इस योजना का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वह खुद मिट्टी तेल के दीए में पढ़ चुके हैं और इसलिए इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि जिन घरों में बिजली नहीं पहुंची है वहां जिंदगी कितनी मुश्किल होती है.

उन्होंने कहा कि सौभाग्य योजना से 2018 दिसंबर तक हर घर तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि देश में कोई भी घर अंधेरे में ना रहे. यानी 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार इसे एक अपनी बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश करना चाहेगी.

सौभाग्य योजना के लिए सरकार ने 16,320 करोड़ रुपये का बजट रखा है और हर घर तक बिजली पहुंचाने का 60 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार उठाएगी 10% खर्च राज्य सरकारों को उठाना होगा और 30% बैंकों से लोन लिया जाएगा. इस योजना की खास बात यह है कि लोगों को अपने घर में बिजली कनेक्शन पाने के लिए कोई खर्च नहीं करना होगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस योजना के लागू होने के बाद बिजली का कनेक्शन पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के बार बार चक्कर काटने का सिलसिला भी बंद हो जाएगा. क्योंकि सरकार खुद लोगों के घर-घर जाकर बिजली कनेक्शन लगाएगी और उन लोगों की पहचान करेगी जिनके घर बिजली का कनेक्शन अभी तक नहीं है.

प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए मोबाइल ऐप का सहारा लिया जाएगा और लोग बिजली के कनेक्शन के लिए आवेदन देने से लेकर सारी कार्यवाही मोबाइल के जरिए ही पूरी कर सकेंगे. गरीब लोगों के लिए बिजली कनेक्शन पाने की प्रक्रिया पूरी तरह मुफ्त होगी. लेकिन बाकी लोगों को भी इसके लिए सिर्फ ₹500 खर्च करने होंगे और वह भी 10 किश्तों में बिजली बिल के साथ लिया जाएगा.

देश के दूरदराज इलाकों में जहां हर घर में बिजली का कनेक्शन पहुंचाना मुश्किल है वहां सरकार घरों को रोशन करने के लिए सौर ऊर्जा का सहारा लेगी और लोगों को बैटरी, 5 LED लाइट और एक पंखा भी दिया जाएगा.

सौभाग्य योजना से पहले मोदी सरकार ने हर घर तक एलपीजी गैस कनेक्शन पहुंचाने के लिए उज्ज्वला योजना चलाई थी जिसके तहत अब तक तीन करोड़ सिलेंडर के कनेक्शन बांटे जा चुके हैं. उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के चुनाव में BJP को उज्वला योजना का जबरदस्त फायदा मिला.

माना जा रहा है कि सौभाग्य योजना के पीछे पूरी ताकत लगाकर बीजेपी अगले लोकसभा चुनाव में इसे भी अपनी एक बड़ी कामयाबी के रूप में पेश करना चाहेगी.

देश में 40,000 रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर बहस तेज है। इस बीच देश में चकमा और हजोंग शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दे दी गई है। चकमा और हजोंग शरणार्थी भारत में बांग्लादेश के चटगांव के पहाड़ी क्षेत्रों से आए हैं। इन लोगों की जमीनें 1960 के दशक में वहां कर्णाफुली नदी पर बनी कापताई बांध परियोजना में चली गई थीं। इसके अलावा धार्मिक उत्पीड़न का भी इन्हें शिकार होना पड़ा है। चकमा बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं, जबकि हजोंग हिंदू हैं।

चकमा लोग बंगाली-असमिया भाषा से मिलती-जुलती भाषा बोलते हैं। हजोंग तिब्बती-बर्मी भाषा बोलते हैं, हालांकि इसे असमिया की तरह ही लिखा जाता है। 

फिलहाल भारत में लगभग 1 लाख चकमा और हजोंग शरणार्थी रह रहे हैं।- वर्ष 1964 में जब ये लोग भारत आए थे, तब करीब 15,000 चकमा थे और 2,000 हजोंग थे।2015 के आंकड़ों के मुताबिक शुरुआती दौर में भारत आए तमाम लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से सिर्फ 5,000 लोग कैंपों में हैं।

2010-11 में गृह मंत्रालय की ओर से किए गए सर्वे के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश के तीन जिलों में इनकी आबादी 53,730 थी। 1987 में 45,000 अन्य चकमा लोगों ने बांग्लादेश से त्रिपुरा में प्रवेश किया था।

1947 में भारत विभाजन के बाद चटगांव को पूर्वी पाकिस्तान को सौंपे जाने के विरोध में चकमा बुद्ध आज भी 'चकमा ब्लैक डे' का आयोजन करते हैं। यही नहीं 1971 में जब बांग्लादेश का गठन हुआ तो वह उसका हिस्सा भी नहीं रहना चाहते थे। स्वायत्ता के लिए उन्होंने शांति वाहिनी के नाम से सशस्त्र संघर्ष भी शुरू किया था। बांग्लादेशी सेना से लड़ते हुए ये लोग लगातार भारत के त्रिपुरा राज्य में प्रवेश करते रहे।

1990 में चकमा लोगों से शेख हसीना सरकार ने शांति वार्ता की थी और उन्हें जनजाति का दर्जा दिया था। हालांकि अब भी चकमा वहां उ त्पीड़न के डर से भारत में ही बने रहना चाहते हैं।

2005 में चुनाव आयोग ने चकमा और हजोंग शरणार्थियों को अरुणाचल प्रदेश की मतदाता सूची में शामिल करने का आदेश दिया था। अरुणाचल की मतदाता सूचियों में करीब 1,000 से ज्यादा चकमा लोगों के नाम शामिल हैं।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के ग्लोबल ह्यूमन कैपिटल इंडेक्स (वैश्विक मानव पूंजी सूचकांक) में 130 देशों की लिस्ट में भारत 103वें स्थान पर है। ये रैंक ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, साउथ अफ्रीका) में भी सबसे नीचे है। नॉर्वे इस लिस्ट में टॉप पर है। ये इंडेक्स इस बात का संकेत होता है कि कौन-सा देश अपने लोगों के डेवलपमेंट, उनकी टीचिंग- ट्रेनिंग और टैलेंट के इस्तेमाल में कितना आगे है।

इस बार की लिस्ट में नॉर्वे ने टॉप पर जगह बनाई है और इस देश ने पिछले बार के टॉप पर बरकरार फिनलैंड को इस बार दूसरे स्थान पर धकेल दिया है।

जेनेवा के डब्ल्यूईएफ (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) की रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि इम्प्लॉयमेंट में जेंडर गैप के मामले में भी भारत दुनिया में सबसे पीछे है। हालांकि फ्यूचर के लिए जरूरी स्किल्स के डेवलपमेंट के मामले में भारत की स्थिति बेहतर है और इस मामले में 130 देशों के बीच इसकी रैंक 65 है। फोरम ने पिछले साल की अपनी रिपोर्ट में भारत को 105वीं रैंक दी थी और कहा था कि यह देश अपनी ह्यूमन कैपिटल की संभावनाओं का सिर्फ 57% ही इस्तेमाल कर पा रहा है। उस लिस्ट में फिनलैंड टॉप पर था। WEF की लिस्ट किसी देश के लोगों की नॉलेज और स्किल के आधार पर तैयार होती है, ये ग्लोबल इकोनॉमिक सिस्टम में उस देश की वैल्यू को बताती है और उसकी ह्यूमन कैपिटल रैंक तय करती है।

WEF के मुताबिक इस साल की लिस्ट में ब्रिक्स देशों में रूस सबसे आगे है। उसे 16वीं रैंक मिली है। चीन को 34वीं, ब्राजील को 77वीं और साउथ अफ्रीका को 87वीं रैंक हासिल हुई है। नई लिस्ट में शामिल साउथ एशिया के देशों में भारत, श्रीलंका और नेपाल से पीछे है, लेकिन पाकिस्तान और बांग्लादेश से आगे है। ह्यूमन कैपिटल इंडेक्स में भारत के पीछे रह जाने की रिपोर्ट में कई वजहें बताई गई हैं। मसलन- एजुकेशन की फील्ड में पिछड़ना और ह्यूमन कैपिटल का कम फैलाव होना। WEF के मुताबिक इसका मतलब है कि भारत में अवलेबल स्किल का बेहतर इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।

उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने 09.09.2017 को देश की पहली ग्रीन फील्ड स्मार्ट सिटी का भूमि पूजन किया। लगभग 7000 करोड़ रुपये की यह परियोजना दो वर्षों में मूर्त रूप लेगी। उपराष्ट्रपति ने इसके साथ ही स्मार्ट सिटी परिसर में प्रस्तावित 690 करोड़ 71 लाख रुपये की लागत वाले अर्बन सिविक टावर, कंवेंशन सेंटर तथा झारखंड अर्बन प्लानिंग एंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (जुपमी) के बिल्डिंग निर्माण की आधारशिला भी रखी।

इस बीच उन्होंने जहां झारखंड अर्बन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड (जुटकोल), रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथारिटी (रेरा) और स्मार्ट सिटी की वेबसाइट की लांचिंग की, वहीं स्मार्ट सिटी के मास्टर प्लान का विमोचन भी किया।

रांची स्थिति एचईसी के कोर कैपिटल एरिया में प्रस्तावित स्मार्ट सिटी के भूमि पूजन समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्मार्ट सिटी की स्मार्ट परिकल्पना को धरातल पर उतारने के लिए स्मार्ट लीडर की जरूरत है। ऐसा लीडर जिसमें क्षमता हो, दूरदर्शिता हो, स्पष्टवादिता हो, जनता के प्रति कमिटमेंट हो। हाई-फाई, कोट-टाई, सूट-बूट नहीं चलेगा।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि कि दुनिया आगे बढ़ रही है। फिर हम पीछे क्यों रहें? बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा, 24 घंटे बिजली, जलापूर्ति, अच्छी सड़कें, सीवरेज, पार्क, आईटी कनेक्टिविटी, नो व्हीकल जोन, स्मार्ट मीटरिंग, वाटर हार्वेस्टिंग, सौर ऊर्जा, पैदल पथ आदि स्मार्ट सिटी की पहचान हैं।

ब्रिक्स सम्मेलन में भारत को बड़ी कूटनीतिक जीत मिली है। चीन चाहता था कि भारत इस मंच पर पाक के खिलाफ आतंकवाद का मुद्दा न उठाए, लेकिन ब्रिक्स देशों की ओर से जो घोषणापत्र का मजमून सामने आया है, उसमें आतंकवाद की कड़ी निंदा की गई है। और तो और, पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन की भी कड़ी निंदा की गई है। यह घोषणापत्र अहम है क्योंकि चीन कई बार जैश-ए-मोहम्मद चीफ मसूद अजहर पर यूएन द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने की दिशा में अड़ंगा लगा चुका है। भारत आतंकवाद के मुद्दे पर चीन को साथ जोड़ने में कामयाब हो गया है। 

शायमेन डिक्लेरेशन में लिखा है, 'हम ब्रिक्स देशों समेत पूरी दुनिया में हुए आतंकी हमलों की निंदा करते हैं। हम सभी तरह के आतंकवाद की निंदा करते हैं, चाहे वो कहीं भी घटित हुए हों और उसे किसी ने अंजाम दिया हो। इनके पक्ष में कोई तर्क नहीं दिया जा सकता। हम क्षेत्र में सुरक्षा के हालात और तालिबान, आईएसआईएस, अलकायदा और उसके सहयोगी, हक्कानी नेटवर्क, लश्कर-ए-तैयबा, जैश ए मोहम्मद, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और हिज्ब-उत-ताहिर द्वारा फैलाई हिंसा की निंदा करते हैं।' 

घोषणापत्र में लिखा है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हम इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की जरूरत है। यह काम अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक होना चाहिए। इसमें देशों की संप्रभुता का खयाल रखना चाहिए, अंदरूनी मामलों में दखल नहीं दिया जाना चाहिए। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हम एक साथ हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ व्यापक संधि को स्वीकार किए जाने के काम में तेजी लाई जानी चाहिए। कट्टरपंथ रोके जाने का प्रयास होना चाहिए। 

ब्राजील, रूस्, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका ने सभी देशों से अपील की कि वे आतंकवाद से निपटने के लिए एक समग्र रूख अपनाए। आतंकवाद से निपटने के क्रम में चरमपंथ से निपटने और आतंकियों के वित्त पोषण के स्रोतों को अवरूद्ध करने की भी बात की गई।समूह ने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति के साथ-साथ तालिबान, आईएसआईएस, अल-कायदा और लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद एवं हक्कानी नेटवर्क समेत इसके सहयोगी संगठनों द्वारा की जाने वाली हिंसा पर चिंता जाहिर की।समूह ने ईस्टर्न तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट और इस्लामिक मूवमेंट ऑफ उज्बेकिस्तान, तहरीक-ए-तालिबान और हिज्ब उत-तहरीर जैसे आतंकी संगठनों का भी जिक्र किया।

ब्रिक्स ने कहा कि हम संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से कंप्रीहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेरेरिज्म अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर समग्र समझौते को जल्दी ही अंतिम रूप दिए जाने और इसे अंगीकार किए जाने की मांग करते हैं।

भारत ने उठाया आतंकवाद का मुद्दा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स सम्मेलन के लिए चीन के शहर श्यामेन में हैं। पीएम ने ब्रिक्स बैठक में बोलते हुए कहा कि सभी देशों में शांति के लिए ब्रिक्स देशों का एकजुट रहना जरूरी है। उन्होंने सम्मेलन में आतंकवाद का भी मुद्दा उठाया। इस पर अन्य सदस्य देशों ने भी चिंता जताई। इससे पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पीएम मोदी का औपचारिक स्वागत किया।

बता दें कि ये ब्रिक्स का 9वां सम्मेलन है। ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका देश शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकास को आगे ले जाने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच मजबूत भागीदारी का आज आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस ब्लॉक ने सहयोग के लिए एक मजबूत ढांचा विकसित किया है और अनिश्चितता की तरफ बढ़ रही दुनिया में स्थिरता के लिए योगदान दिया है। मोदी ने आंतकवाद का भी मुद्दा उठाया। इस पर ब्रिक्स देशों ने क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति और तालिबान, अल-कायदा, पाकिस्तान आधारित लश्कर-ए-तैयबा एवं जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी समूहों द्वारा की जा रही हिंसा पर चिंता जतायी।

चीन के शियामन शहर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि व्यापार और अर्थव्यवस्था  ब्रिक्स-ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के बीच सहयोग का आधार हैं। उन्होंने विकासशील देशों की संप्रभु और कॉरपोरेट कंपनियों की वित्तीय आवयश्यकताओं को पूरा करने के लिए ब्रिक्स रेटिंग एजेंसी बनाए जाने का भी आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि नवोन्मेष और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर सदस्य देशों के बीच मजबूत भागीदारी विकास को आगे ले जाने, पारदर्शिता को बढ़ाने और सतत विकास लक्ष्यों का समर्थन करने में मदद कर सकती है। उन्होंने सदस्य देशों के सेंट्रल बैंकों से अपनी क्षमताओं को और बढ़ाने और समूह तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की आकस्मिक विदेशी मुद्रा कोष व्यवस्था के बीच सहयोग को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया।मोदी ने स्मार्ट शहरों, नगरीकरण और आपदा प्रबंधन में सहयोग की रफ्तार बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स ने सहयोग, स्थिरता में योगदान तथा अनिश्चितता की दिशा में बढ़ रही दुनिया में विकास के लिए एक मजबूत ढांचा विकसित किया है। हमारे प्रयास आज कृषि, संस्कृति, पर्यावरण, ऊर्जा, खेल तथा सूचना एवं प्रौद्योगिकी जैसे विविध क्षेत्रों से जुड़े हैं। मोदी ने कहा कि गरीबी उन्मूलन और स्वास्थ्य, स्वच्छता, कौशल, खाद्य सुरक्षा, लैंगिक समानता, ऊर्जा तथा शिक्षा सुनश्चित करने के लिए समूह मिशन मोड में है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण कार्यक्रम उत्पादकता बढ़ाने वाले कार्यक्रम हैं जो महिलाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में लाते हैं।

अंतरराष्ट्रीय शांति और विकास के लिए सभी करें काम- जिनपिंग 

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि जिस तरह से दुनिया में परिवर्तन हुए हैं, उसके बाद ब्रिक्स में देशों का सहयोग अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परिस्थितियों में हमारे मतभेदों के बावजूद हमारे 5 देश डीजीएचपीएनएटी के समान चरण में हैं और समान विकास साझा करते हैं। हमें एक आवाज से बात करनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं विकास से संबंधित मुद्दों के लिए संयुक्त रूप से समाधान पेश करना चाहिए। चीन ने एनडीबी परियोजना तैयार करने के लिए 4 मिलियन अमेरिकन डॉलर का योगदान दिया है ताकि बैंक का संचालन और  और उसका विकसा लंबे समय तक किया जा सके। शी ने कहा  कि दुनिया के अन्य भागों से भी हमें अपने संबंध मधुर बनाने की जरूरत है। उन्होंने  कहा कि ब्रिक्स के हम 5 देश वैश्विक शासन में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। इसलिए हमारे सहयोग के बिना दुनिया की चुनौतियों का समाधान नहीं हो सकता।

राष्ट्रीय खेल पुरस्कार प्रत्येक वर्ष खेलों में मान्यता प्रदान करने और उत्कृष्टता को पुरस्कृत करने के लिए दिए जाते हैं। राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार किसी खेल में खिलाड़ी के चार वर्षों से अधिक शानदार और असाधारण प्रदर्शन के लिए दिया जाता है। अर्जुन पुरस्कार चार वर्षों के लिए लगातार असाधारण प्रदर्शन करने के लिए दिया जाता है, द्रोणाचार्य पुस्कार कोच को प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय खेल आयोजनों में पदक विजेता तैयार करने के लिए दिया जाता है, ध्यानचंद पुरस्कार खेल के विकास में आजीवन योगदान के लिए दिया जाता है और राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार कंपनियों (निजी और सार्वजनिक क्षेत्र दोनों) तथा व्यक्तियों को दिए जाते हैं जो खेल के प्रोत्साहन और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अंतर-विश्वविद्यालय टूर्नामेंट में सम्रग रूप से शीर्ष प्रदर्शन करने वाले विश्वविद्यालय को मौलाना अबुल कलाम आजाद (एमएकेए) ट्रॉफी दी जाती है।

इस वर्ष इन पुरस्कारों के लिए बड़ी संख्या में नामांकन प्राप्त हुए जिनपर पूर्व ओलंपिक खिलाड़ी, अर्जुन पुरस्कार विजेताओं, द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेताओं, ध्यानचंद पुरस्कार विजेताओं, खेल पत्रकार/विशेषज्ञ/आंखों देखा हाल सुनाने वाले कमेंटेटर और खेल प्रकाशकों की चयन समितियों द्वारा विचार किया गया। राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार तथा अर्जुन पुरस्कार के लिए चयन समितियों का नेतृत्व न्यायमूर्ति सुश्री इंदरमित कौर कोचर (पूर्व न्यायाधीश दिल्ली हाईकोर्ट) ने किया। द्रोणाचार्य पुरस्कारों और ध्यानचंद पुरस्कारों के लिए चयन समिति के प्रमुख न्यायमूर्ति श्री मुकुल मुद्गल (पूर्व मुख्य न्यायाधीश पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट) थे। राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार के लिए चयन समिति की अगुवाई श्री राहुल भटनागर, सचिव (खेल) ने की। एमएकेए ट्रॉफी के लिए चयन समिति के प्रमुख पूर्व ओलंपिक खिलाड़ी श्री अशोक कुमार थे।

समिति की सिफारिशों के आधार पर और जांच के बाद सरकार ने निम्नलिखित खिलाड़ियों, कोच तथा कंपनियों को पुरस्कृत करने का निर्णय लिया है।

(i) राजीव गांधी खेल रत्न 2018 

क्र.सं.

खिलाड़ी का नाम

खेल

1.

सुश्री एस मिराबाई चानू

भारोत्तोलन

2.

श्री विराट कोहली

क्रिकेट

(ii) द्रोणाचार्य पुरस्कार 2018 

क्र.सं.

खिलाड़ी का नाम

खेल

  1.  

सुबेदार चेनंदा अचच्चा कुट्टप्पा

मुक्केबाज़ी

  1.  

श्री विजय शर्मा

भारोत्तोलन

  1.  

श्री ए श्रीनिवास राव

टेबल टेनिस

  1.  

श्री सुखदेव सिंह पन्नू

एथलेटिक्स

  1.  

श्री क्लैरेंस लोबो

हॉकी (लाईफटाइम)

  1.  

श्री तारक सिन्हा

क्रिकेट (लाईफटाइम)

  1.  

श्री जीवन कुमार शर्मा

जुडो (लाईफटाइम)

  1.  

श्री वी.आर. बीडु

एथलेटिक्स (लाईफटाइम)

(iii) अर्जुन पुरस्कार 2018 

क्र.सं.

खिलाड़ी का नाम

खेल

  1.  

श्री नीरज चोपड़ा

एथलेटिक्स

  1.  

नाइब सूबेदार जीन्सन जॉनसन

एथलेटिक्स

  1.  

सुश्री हिमा दास

एथलेटिक्स

  1.  

सुश्री नेलाकुर्ती सिक्की रेड्डी

बैडमिंटन

  1.  

सूबेदार सतीश कुमार

मुक्केबाज़ी

  1.  

सुश्री स्मृति मंधाना

क्रिकेट

  1.  

श्री शुभंकर शर्मा

गोल्फ़

  1.  

श्री मनप्रीत सिंह

हॉकी

  1.  

सुश्री सविता

हॉकी

  1.  

कर्नल रवि राठौर

पोलो

  1.  

सुश्री राही सरनोबत

शूटिंग

  1.  

श्री अंकुर मित्तल

शूटिंग

  1.  

सुश्री श्रेयसी सिंह

शूटिंग

  1.  

सुश्री मनिका बत्रा

टेबल टेनिस

  1.  

श्री जी सथियान

टेबल टेनिस

  1.  

श्री रोहन बोपन्ना

टेनिस

  1.  

श्री सुमित

कुश्ती

  1.  

सुश्री पूजा कादियान

वुशु

  1.  

श्री अंकुर धामा

पैरा एथलेटिक्स

  1.  

श्री मनोज सरकार

पैरा बैडमिंटन

(iv) ध्यान चंद पुरस्कार 2018

क्र.सं.

खिलाड़ी का नाम

खेल

  1.  

श्री सत्यदेव प्रसाद

तीरंदाजी

  1.  

श्री भरत कुमार छेत्री

हॉकी

  1.  

सुश्री बॉबी अलॉयसियस

एथलेटिक्स

  1.  

श्री चौगले दादू दत्तात्रेय

कुश्ती

(vi) राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार 2018

क्र.सं.

वर्ग

कंपनी का नाम

1.

उदीयमान और युवा प्रतिभा पहचान और प्रोत्साहन

राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड

2.

कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से खेल प्रोत्साहन

जेएसडब्ल्यू स्पोर्ट्स

3.

विकास के लिए खेल

ईशा आउटरीच

(vii) मौलाना अबुल कलाम आजाद (एमएकेए) ट्रॉफी 2017-18

गुरुनानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर

राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार प्राप्त करने वाले को पदक और प्रशस्ति पत्र के अतिरिक्त 7.5 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। अर्जुन, द्रोणाचार्य तथा ध्यानचंद पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रत्येक खिलाड़ियों को लघुप्रतिमाएं, प्रमाण पत्र और पांच लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिए जाएंगे। राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार, 2018 में कंपनियों को एक ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है। अंतर-विश्वविद्यालय टूर्नामेंट में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले विश्वविद्यालय को एमएकेए ट्रॉफी, 10 लाख रुपये का पुरस्कार और प्रमाण पत्र दिया जाएगा।

पीएसएलवी-सी 39 / आईआरएनएसएस -1 एच का गुरूवार, 31 अगस्त 2017 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र शार, श्रीहरिकोटा से 19:00 बजे प्रमोचन निर्धारित किया गया है ।

ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन वाहन, अपने इकतालसवीं उड़ान (पीएसएलवी-सी39) द्वारा आईआरएनएसएस-1एच भारतीय प्रादेशिक नौसंचालन उपग्रह प्रणाली (आईआरएनएसएस) के आठवें उपग्रह को उप- भूतुल्यकाली स्तानांतरण कक्षा (उप-जीटीओ) में प्रमोचन करेगा।

प्रमोचन सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी), शार श्रीहरिकोटा के दूसरे प्रमोचन पैड (एसएलपी) से किया जाएगा। आईआरएनएसएस उपग्रहों के पहले के 6 प्रमोचनों की तरह पीएसएलवी-सी39 “एक्सएल” रूपांतर 6 स्ट्रैपऑन के साथ, जिनमें प्रत्येक में 12 टन प्रनोदक होगा, का उपयोग करेगा।

संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भारतीय भाषाओं में उत्कृष्ट साहित्य लेखन के लिए दिया जाने वाला प्रतिष्ठित सरस्वती सम्मान अगले हफ्ते कोंकणी साहित्यकार महाबलेश्वर सैल को दिया जाएगा.

के के बिरला फाउंडेशन की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि वर्ष 2016 का ‘सरस्वती सम्मान’ आगामी 30 अगस्त को यहां राष्ट्रीय संग्रहालय सभागार में रेल मंत्री सुरेश प्रभु द्वारा सैल को उनके उपन्यास ‘होथन’ के लिए दिया जाएगा.

74 वर्षीय लेखक ने चार मराठी नाटक और सात कोंकणी उपन्यास लिखे हैं. इसके अलावा उन्होंने मराठी भाषा में पांच लघु कथाएं और एक उपन्यास भी लिखा है. फाउंडेशन के लिए इस पुरस्कार में 15 लाख रुपये का नकद और एक प्रशस्ति पत्र दिया जाता है. पहला सरस्वती सम्मान 1991 में हरिवंश राय बच्चन को उनकी आत्मकथा के लिए प्रदान किया गया था.

प्रधानमंत्री देउबा पांच दिवसीय भारत यात्रा पर 23.08.2017 को नई दिल्ली पहुंचे। जून में पदभार संभालने के बाद यह उनका पहला विदेशी दौरा है। 24.08.2017 को  भारत और नेपाल के बीच विभिन्न क्षेत्रों में आठ समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। इनमें से चार नेपाल में भूकंप के बाद पुनर्निर्माण से संबंधित हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने नरेंद्र मोदी और शेर बहादुर देउबा नेतृत्व में हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद ट्वीट कर कहा, "सहयोग के नए तंत्रों की स्थापना। भारत और नेपाल के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौते।"

भारत ने नेपाल में अप्रैल 2015 को आए भूकंप के बाद पुनर्निर्माण कार्यो के लिए एक अरब डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई थी। नेपाल में 50,000 घरों के पुनर्निर्माण में मदद के लिए आवास अनुदान, शिक्षा, सांस्कृतिक विरासत और स्वास्थ्य क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच चार समझौता ज्ञापन (एमओयू) हुए।

एक अन्य एमओयू भारत के अनुदान से एशियाई विकास बैंक के दक्षिण एशिया उपक्षेत्रीय आर्थिक सहयोग (एसएएसईसी) सड़क संपर्क कार्यक्रम के तहत मेची पुल के निर्माण के लिए लागत साझा करने और सुरक्षा मुद्दों के क्रियान्वयन को लेकर हुआ।

छठा एमओयू नशाखोरी रोकथाम के तहत नार्कोटिक्स ड्रग्स, साइकोट्रॉपिक पदार्थो व अन्य रासायनिक पदार्थो की तस्करी रोकने को लेकर हुए।

सातवां एमओयू इंस्टीटयूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया और इंस्टीटयूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ नेपाल के बीच सहयोग को लेकर हुआ।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने बड़े फैसले में नागरिक के निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार माना है। इसके साथ ही निजता अब मौलिक अधिकारों में शामिल हो गया है। कर्नाटक हाईकोर्ट के पूर्व जज केएस पुट्टस्वामी ने सन् 2012 में 'आधार' को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. इस मामले समेत 21 पिटीशंस पर सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों ने फ़ैसला देते हुए कहा है कि प्राइवेसी या निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है.

संविधान के भाग-3 में मौलिक अधिकार के प्रावधान हैं, जिन्हें डॉक्टर अंबेडकर ने संविधान की आत्मा बताया था. अनुच्छेद-21 में जीवन तथा स्वतन्त्रता का अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट ने अनेक मामलों में निर्णय देकर शिक्षा, स्वास्थ्य, जल्द न्याय, अच्छे पर्यावरण आदि को जीवन के अधिकार का हिस्सा माना है. संविधान के अनुच्छेद-141 के तहत सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला देश का क़ानून माना जाता है, और अब प्राइवेसी भी मौलिक अधिकार का हिस्सा बन गई है. मौलिक अधिकार होने के बाद कोई भी व्यक्ति हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में सीधे याचिका दायर करके न्याय की मांग कर सकता है.

सरकार की तरफ से अटार्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दिया कि प्राइवेसी कॉमन लॉ के तहत कानून तो है पर इसे मौलिक अधिकार का दर्जा नहीं दिया जा सकता. इस बारे में सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के पुराने दो फैसलों खड़क सिंह (1954) और एमपी शर्मा (1962) की जोरदार दलील दी गई थी. पिटीशनर्स के अनुसार संविधान में जनता सर्वोपरि है तो फिर प्राइवेसी को मौलिक अधिकार क्यों नहीं माना जाना चाहिए? पिटीशंस ने अमेरिका में प्राइवेसी के बारे में चौथे अमेंडमेंट समेत कई अन्य दलीलें रखीं. सुप्रीम कोर्ट ने पिटीशनर्स की तरफ से पेश दलीलों को मानते हुए प्राइवेसी को मौलिक अधिकार मान लिया है.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले लगाई रोक के बावजूद सरकार द्वारा 'आधार' को 92 कल्याणकारी योजनाओं में अनिवार्य बना दिया गया था. 'आधार' के तहत लोगों को निजी सूचनाओं के साथ बायोमैट्रिक्स यानि फेस डिटेल्स, अंगुलियों के निशान और आंखों की पुतलियों के निशान देने पड़ते हैं. 'आधार' को इनकम टैक्स समेत कई अन्य जगहों पर जरूरी कर दिया गया है. 'आधार' की अनिवार्यता और बायोमैट्रिक्स के सरकारी डेटाबेस को प्राइवेसी के ख़िलाफ़ बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन फ़ाइल हुई थी. इस मामले में पहले तीन जजों की बेंच में और फिर पांच जजों की बेंच ने सुनवाई की. खड़कसिंह मामले में 8 जजों की बेंच ने फ़ैसला दिया था इसलिए प्राइवेसी के मामले पर फ़ैसले के लिए नौ जजों की बेंच बनाई गई. संविधान पीठ के इस फ़ैसले के बाद अब पांच जजों की बेंच 'आधार' मामले पर सुनवाई करेगी.

आधार के अलावा सुप्रीम कोर्ट में व्हाट्सऐप की प्राइवेसी पालिसी को चुनौती दी गई थी. प्राइवेसी पर संविधान पीठ के फैसले के बाद व्हाट्सऐप मामले पर पांच जजों की बेंच सुनवाई करेगी. सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान जस्टिस चन्द्रचूड़ ने डिजिटल कम्पनियों द्वारा डेटा कलेक्शन पर चिंता जताई थी. फ़ैसले में जस्टिस सप्रे ने डिजिटल कम्पनियों द्वारा डेटा ट्रान्सफर और प्राइवेसी के उल्लघंन पर चिंता जताई. फ़ैसले में लिखा गया है कि उबर कम्पनी बगैर टैक्सी के, फ़ेसबुक बगैर कंटेन्ट के और अलीबाबा बगैर सामान के ही विश्व की बड़ी कम्पनी बन गई हैं. केएन गोविन्दाचार्य ने सन् 2012 में दिल्ली हाईकोर्ट में डिजिटल कम्पनियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े करते हुए इन कम्पनियों के ऑफ़िस और सर्वर्स भारत में स्थापित करने की मांग की थी.

सुप्रीम कोर्ट में प्राइवेसी पर सुनवाई के दौरान सरकार ने पूर्व जज श्रीकृष्णा की अध्यक्षता में डेटा प्रोटेक्शन पर क़ानून बनाने के लिए समिति का गठन कर दिया था. तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला उसी दिन से लागू हो गया. प्राइवेसी पर नौ जजों ने सहमति से ऐतिहासिक फ़ैसला दिया है, जिसे तुरंत प्रभाव से सरकार को लागू करना पड़ेगा. इस फ़ैसले के बाद सरकार को इंटरनेट और मोबाइल कम्पनी द्वारा डेटा के गैर-क़ानूनी कारोबार पर रोक लगानी होगी, जिससे डिजिटल इंडिया के विस्तार पर सवालिया निशान खड़े हो सकते हैं.

फैसले के बाद सरकार के सामने चुनौतियाँ

इस फ़ैसले के बाद सरकार को आधार कानून में बदलाव करने के साथ डेटा प्रोटेक्शन पर जल्द ही क़ानून बनाना होगा. डिजिटल इंडिया के व्यापक दौर में दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) अपनी भूमिका के निर्वहन में विफल रही है. प्राइवेसी के क़ानून को लागू करने के लिए सरकार को प्रभावी रेगुलेटरी व्यवस्था बनाना होगा. इस फ़ैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में पिटीशन्स और पीआईएल का दौर आया तो अदालतों में मुकदमों का बोझ और बढ़ जायेगा.

क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को बदल सकती है ?

शाहबानो मामले में राजीव गांधी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को बदल दिया था. राज्यसभा में बहुमत नहीं होने से सरकार सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को शायद ही बदल पाए. 1973 में केशवानंद भारती मामले में 13 जजों की बेंच ने ये फ़ैसला दिया था कि संविधान के बुनियादी ढांचे में बदलाव करने के लिए संसद क़ानून नहीं बना सकती. इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने संसद द्वारा पारित न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) को अक्टूबर-2015 में निरस्त कर दिया था. प्राइवेसी अब मौलिक अधिकार है जिसे संसद के क़ानून द्वारा अब बदलना मुश्किल है.

सरकार की तरफ़ से सुप्रीम कोर्ट में यह कहा गया कि विकासशील देश में जनता की भलाई के लिए कुछ अभिजात्य लोगों की प्राइवेसी को देशहित में दर-किनार किया जा सकता है पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से देश के सभी 127 करोड़ लोगों को फ़ायदा हुआ है. 

शहरीकरण एक ख़ास समय में ग्रामीण बस्तियों से शहरी बस्तियों में बसने की प्रक्रिया है जहां 70 प्रतिशत लोग दोयम अथवा तीसरे दर्ज (सेवाएं) की श्रेणी वाले क्षेत्रों में निवास करते हैं. शहरों को समावेशी आर्थिक विकास का इंजन’ माना जाता है. शहरी क्षेत्रों में सांविधिक क्षेत्र’ (नगर निगमनगरपालिकाछावनी बोर्ड या अधिसूचित क्षेत्र समिति)और न्यूनतम 5000 की जनसंख्या तथा ग़ैर कृषि गतिविधियों में संलग्न 75 प्रतिशत मुख्य पुरुष कामगारों तथा प्रति कि.मी. न्यूनतम 400 व्यक्तियों की जनसंख्या घनत्व के मानदंड के साथ जनगणना कस्बे’ दोनों सम्मिलित होते हैं. भारत की जनगणना 2011 के अनुसारहमारी शहरी जनसंख्या 37.7 करोड़ (31.16 %) है. इस तरह 1901-2011 के दौरानभारत की शहरी जनसंख्या में 20 प्रतिशत बिंदुओं से अधिक की वृद्धि हुई है.

ऐतिहासिक रूप से, 1901 के बाद जब भारत की शहरी जनसंख्या कुल जनसंख्या का मात्र 10.8 प्रतिशत थीइसमें लगभग तीन गुणा बढ़ोतरी हुई है.

यद्यपिविश्व बैंक और जनसंख्या डाटा के अनुसार शहरी जनसंख्या का यह अनुपात कई विकासशील और विकसित देशों की अपेक्षा बहुत ही कम है.

उदाहणार्थ-जापान(91.16%)ब्राजील(84.6%)ब्रिटेन(81.6%)जर्मनी(74.5%)रूस(73.77%) और चीन(50.6%). भारत की 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में मुंबईदिल्लीकोलकाताचेन्नैबंगलुरूहैदराबादअहमदाबादपुणेसूरत और जयपुर दस बड़े शहर हैं. 2001-2011 में दिल्ली में 35 लाख अतिरिक्त जनसंख्या जुड़ी (आगरा और विशाखापत्तनम को एक साथ जोडक़रइनके बराबर)बंगुलरू में 28 लाख अतिरिक्त जनसंख्या जुड़ी (कानपुर के बराबर)चेन्नै में 20 लाख अतिरिक्त जनसंख्या जुड़ी (पटना के बराबर)मुंबई में 20 लाख अतिरिक्त जनसंख्या जुड़ी (कोझीकोड के बराबर)हैदराबाद में 19 लाख अतिरिक्त जनसंख्या जुड़ी (त्रिशूर के बराबर)सूरत में 18 लाख अतिरिक्त जनसंख्या जुड़ी (वडोदरा के बराबर)अहमदाबाद में 14 लाख अतिरिक्त जनसंख्या जुड़ी (वाराणसी के बराबर)पुणे में 13 लाख अतिरिक्त जनसंख्या जुड़ी (श्रीनगर के बराबर)कोलकाता में 8 लाख अतिरिक्त जनसंख्या जुड़ी (वारंगल के बराबर)और जयपुर में 7 लाख अतिरिक्त जनसंख्या जुड़ी (देहरादून के बराबर). 2030 तक भारत की शहरी आबादी 40.7% हो जायेगी.

शहरों में जनसंख्या में वृद्धि तीन कारणों से है: पहलाअसीमित संख्या में उच्चतर जन्म दरदूसरा मृत्यु दर में कमी और तीसरा गांवों से (ग्रामीण से शहरी विस्थापन) अथवा छोटे कस्बों (कस्बों से शहरों में) से शहरों की तरफ विस्थापन. वास्तव मेंकिसी शहर विशेष में एक अवधि के लिये जनसंख्या में स्थिरता के पीछेमहिलाओं की अधिक और बेहतर शिक्षाछोटे परिवार के आदर्श का प्रसारपरिवारों के बीच अधिक मनोरंजन सुविधाओं का होनाबड़े आकार के परिवारों को संभालने में आर्थिकविशेष और सामाजिक कठिनाइयांबार-बार गर्भधारण करने से उत्पन्न होने वाले स्वास्थ्य संबंधी खतरों के बारे में जागरूकता के कारण अपेक्षाकृत कुल प्रजनन दर में कमी के कारण प्रति वर्ष जन्म दर में गिरावट आई है. यद्यपि एक शहर में होने वाले कुल जन्मों का विकास पर प्रभाव होता हैलेकिन शहरों के आकार में वृद्धि के पीछे सामान्यत: उच्च जन्म दर ही नहीं है.

इसके अलावा स्वास्थ्य सुविधाएंविशेषकर प्रजनन स्वास्थ्य सुविधाएं सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में समान रूप से बेहतर रूप में उपलब्ध हैंअत: प्रति हजार जन्मों पर पांच बच्चों की मृत्यु दर और प्रति लाख जन्मों पर मातृत्व मृत्यु दर ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी क्षेत्रों में कम है. तदनुसार जनसंख्या में मामूली वृद्धि है परंतु यह भी कम जन्म दर के द्वारा संतुलित है. लेकिन विस्थापन (ग्रामीण और अन्य शहरी क्षेत्रोंदोनों से) शहरों में जनसंख्या वृद्धि में बहुत बड़ा योगदान करता है. विस्थापन सामान्यत: खिंचाव’ एवं दबाव’ दोनों कारणों से होता है. शहरों के खिंचाव कारकों में मुख्यत: संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में अधिक नये और बेहतर आजीविका अवसर (सार्वजनिक और निजी) होनाबच्चों की स्कूली और उच्चतर शिक्षा दोनों के लिये अधिक और बेहतर अवसर होनाअधिक और बेहतर आवासीय सुविधाएंबेहतर सांस्कृतिक और मनोरंजन सुविधाएं (सिनेमाक्लबथिएटर)अधिक सरकारी कार्यालय और सार्वजनिक उपयोगिताएंनिजी क्षेत्र का विकासविभिन्न प्रकार से भिन्न-2 स्तरों पर राजनीतिक भागीदारी के लिये अधिक अवसर प्रदान करने के लिये राजनीतिक मामलों का हबस्वास्थ्य और साफ-सफाई के लिये अधिक और बेहतर सुविधाएंअभिव्यक्ति और भागीदारी के लिये अवसर प्रदान करने हेतु अधिक जनसंचार स्रोतयुवाओं को अधिक आज़ादीअधिक और बेहतर परिवहन और संचार सुविधाएं आदि शामिल होती हैं.

यही कारण है कि दस लाख से अधिक जनसंख्या वाले मेट्रो शहरों की संख्या 1901 में 1 (कलकत्ता) से बढक़र 2011 के दौरान 52 हो गई-1951 में यह संख्या 5, 1961 में 7, 1971 में 9, 1981 में 12, 1991 में 24, 2001 में 39 और 2011 में 52 हो गई. अब महाराष्ट्र में 6 शहरकेरल और उत्तर प्रदेश में प्रत्येक में 7, मध्य प्रदेशगुजरात और तमिलनाडु में प्रत्येक में 4, झारखंडराजस्थान और आंध्र प्रदेश में प्रत्येक में 3, पश्चिम बंगालछत्तीसगढ़ और पंजाब में प्रत्येक में 2, और दिल्लीजम्मू एवं कश्मीरहरियाणाबिहार और कर्नाटक में प्रत्येक में 1 में दस लाख से अधिक जनसंख्या (2011) है. भारत में सबसे तेज़ी से विकसित हो रहे दस शहर हैं - गाजिय़ाबाद (23.8 लाख जनसंख्या)दुर्ग-भिलाईनगर (10.6), वसाई-विरार (12.2), फरीदाबाद (14.1), मलापुरम (17), कन्नूर (16.4), सूरत (45.9), भोपाल (18.9), औरंगाबाद (महाराष्ट्र 11.9) और धनबाद (12) - वार्षिक वृद्धि दर 4.8 प्रतिशत (धनबाद) से 6.9 प्रतिशत (गाजिय़ाबाद) है.

दूसरी तरफ मुख्यत: गांवों में दबाव’ के कारक हैं: आजीविका के अवसरों का अभाव (कृषि में रोजग़ार के अवसरों की कमी अथवा प्रच्छन्न बेरोजगारी’ (जैसा कि गुन्नार मिरडल ने इसे संज्ञा दी)शैक्षणिक और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभावपरिवहन और संचार सुविधाओं का अभावअनावश्यक बंधन और रूढि़वादी रीति रिवाजविशेषकर महिलाओंनिचले तबकों और समुदायों के मामले में. पिछले पांच-छह दशकों में यह प्रवृत्ति भी रही है कि गांवों में उग्रवाद और नक्सलवाद की समस्या के कारण बहुत से परिवार उसी राज्य में अथवा अन्य विकसित राज्य/अथवा राष्ट्रीय राजधानी में सामूहिक रूप से शहरी केंद्रों में विस्थापित हो गये.

शहरीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था

शहरीकरण को भारतीय अर्थव्यवस्था के उचित संदर्भ में भी देखा जाना चाहिये. भारत चीन (138 करोड़ जनसंख्या) के बाद जनसंख्या के हिसाब से दुनिया में जनसंख्या की दृष्टि से (विश्व जनसंख्या में 17.5 प्रतिशत हिस्सेदारी) दूसरा सबसे बड़ा देश है (2011 की जनगणना के अनुसार 121 करोड़ लोगअब 2016 में करीब 130 करोड़ होने का अनुमान). विश्व अर्थव्यवस्था में चीन (विश्व अर्थव्यवस्था में 17.4 प्रतिशत की हिस्सेदारी) और अमरीका (विश्व अर्थव्यवस्था में 15.4 प्रतिशत की हिस्सेदारी) के बाद भारत (विश्व अर्थव्यवस्था में 7.2 प्रतिशत की हिस्सेदारी) तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है.

प्रति व्यक्ति जीडीपी की दृष्टि सेअमरीका के 57.2 हजार डॉलरआस्ट्रेलिया के 48.2 हजार डॉलरजर्मनी के 47.5 डॉलरकनाडा के 46.2 हजार डॉलरब्रिटेन के 42 हजार डॉलरफ्रांस के 41.9 हजार डॉलरसऊदी अरब के 53.7 हजार डॉलरजापान के 38.7 हजार डॉलरदक्षिण कोरिया के 37.7 हजार डॉलरइटली के 36.2 हजार डॉलररूस के 25.2 हजार डॉलरमैक्सिको के 17.9 हजार डॉलरब्राजील के 15.2 हजार डॉलरचीन के 15.1 हजार डॉलरदक्षिण अफ्रीका के 13.2 हजार डॉलरइंडोनेशिया के 11.6 हजार डॉलर के मुकाबले भारत के केवल 6.6 हजार डॉलर (पीपीपी) हैं.

इस प्रकार मानव विकास सूचकांक एचडीआई रैंकिंग (2014) में भारत 130वें स्थान पर है-न केवल जी-20 देशों और ब्रिक्स में सबसे निचले स्थान पर बल्कि दुनिया के किसी भी विकासशील देश से नीचे है. भारतीय अर्थव्यवस्था प्रति वर्ष 7 प्रतिशत की दर से तेज़ी से बढ़ रही है परंतु लेबर ब्यूरो डाटा (2016) के अनुसार गैर कृषि अर्थव्यवस्था के 8 प्रमुख क्षेत्रों के आधार पर रोजग़ार में वृद्धि मात्र 1.1 प्रतिशत वार्षिक की है. इस तरह बेरोजग़ारी दर में 2011 में 3.8 प्रतिशत से वृद्धि होकर 2015 में प्रतिशत हो गई. 2016 में कुल सृजित रोजग़ार शिक्षा में 50 लाख (कम मज़दूरी)व्यापार में 14.5 लाखस्वास्थ्य में 12.1 लाख (कम मज़दूरी)आईटी/बीपीओ में 10.4लाखआवास/रेस्तरां में 7.7 लाखपरिवहन में 5.8 लाख और निर्माण क्षेत्र में 3.7 लाख था. परंतु आईटी में तेज़ी को भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा हैविशेषकर वैश्विक मंदीवीजा प्रतिबंध और घरेलू आईटी सेक्टर में कटौतियों के कारण ऐसा हो रहा है. इसने शहरी मध्यमवर्गीय घरों को कई तरीकों से प्रभावित किया है.

शहरीकरण की समस्याएं:

यदि हम परिवहन और इसके प्रभावों की स्थिति पर नजऱ डालेंहम पाते हैं कि दिल्ली में सर्वाधिक संख्या में पंजीकृत वाहन हैं (25 मई, 2017 को 1.05 करोड़ से अधिक)जिनमें से 66.49 लाख मोटर साइकिल/स्कूटर, 31.73 लाख कारें और 7.46 लाख अन्य वाहन हैं. (2.25 लाख माल ढुलाई वाहनों सहित). ऐसे वाहनों के कारण बड़े उच्च स्तर का ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण होता है. दिल्ली को विश्व श्रव्य सूचकांक ने केवल ध्वनि प्रदूषण के आधार पर दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा ध्वनि प्रदूषण वाले शहर का स्थान दिया है परंतु इसे सर्वाधिक शोर और अधिकतम श्रव्य हानि की दृष्टि से विश्व में दूसरे स्थान पर रखा गया है-गौंगझोऊ (चीन) पहले स्थान पर है. दिल्ली को दुनिया में उन 50 शहरों में पहले स्थान पर रखा गया हैजहां पर श्रव्य सर्वाधिक निम्नीकृत है (सभी कारणों सेध्वनि प्रदूषण सहित). दिल्ली मेंकिसी व्यक्ति में श्रव्य क्षमता कम से कम बीस वर्ष आयु के किसी व्यक्ति के समान है-अर्थात उस आयु में 20 प्रतिशत कम की क्षमता होती है. शहरी ध्वनि प्रदूषण और श्रव्य हानि के बीच निकट का सकारात्मक संबंध है-(64 प्रतिशत). अधिक स्पष्ट रूप में भारत में दिल्ली जैसे बड़े शहरी क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण के मुख्य स्रोत सडक़ यातायातविमानट्रेनेंनिर्माण गतिविधियां और उद्योग हैं.

यदि हम वायु प्रदूषण पर नजऱ डालेंकई भारतीय शहरों में स्थिति फिर गंभीर है. वैश्विक वायु 2017 रिपोर्ट की स्थिति के अनुसारसंपूर्ण दुनिया में महीन कणों (पीएम 2.5) का दीर्घावधि प्रभाव 2015 में 42 लाख समयपूर्व मृत्यु का कारण बना जिसमें से भारत और चीन को एक साथ जोडक़र इसमें 52 प्रतिशत की हिस्सेदारी थीयानी चीन में ऐसी मौतें 11.08 लाखभारत में 10.90 लाखयूरोपीय संघ में 2.57 लाखरूस में 1.37 लाखपाकिस्तान में 1.35 लाखबंगलादेश में 1.22 लाख और अमरीका में 88400 लाख मौतें हुईं. 1990 से लेकर पीएम 2.5 से संबंधित समय पूर्व मौतों में चीन में 17.22 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि इसी अवधि में भारत में यह वृद्धि 48 प्रतिशत हुई.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट (अगस्त, 2016) के अनुसार, 2015 में 10 लाख से अधिक की आबादी वाले 41 भारतीय मेट्रो शहरों को कुल निगरानी दिवसों के 60 प्रतिशत में खराब वायु गुणवत्ता का सामना करना पड़ा. 24 राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में 168 शहरों में ग्रीन पीस रिपोर्ट एअरपोकैलीप्स’’ अध्ययन से पता चला है कि दक्षिण भारत में कुछ शहरों को छोडक़रज्यादातर भारतीय शहर विश्व स्वास्थ्य संगठन अथवा राष्ट्रीय व्यापक वायु गुणवत्ता मानदंडों का पालन नहीं करते हैं. 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर (पीएम10) की मानक सीमा के बदले भारत में 20 सबसे बड़े शहरों में 268 और 168 (2015) के बीच बहुत अधिक पीएम 10स्तर रखते हैं - दिल्ली का स्थान पहला है (268 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर)तदुपरांत गाजियाबाद (258), इलाहाबाद (250), बरेली (240), फरीदाबाद (240), झरिया (228), अलवर (227), रांची (216), कुसुंडाझारखंड (214), बस्ताकोलाझारखंड (216), कानपुर (205) और पटना (200) का स्थान आता है. वायु प्रदूषण विशेष तौर पर युवा और बुजुर्गों में श्वासहृदय और रक्तचाप जैसी समस्याओं का मुख्य कारण बनता है.

ज्यादातर भारतीय शहरों में वाहनों से निकलने वाला धुआंखुली निर्माण सामग्रियोंकचड़े को जलानेपराली (फसल के अवशेष)विशेषकर पंजाबहरियाणा और पश्चिमी उ.प्र. में जलाने के कारण होने वाले धुएंईंट भट्ठों से निकलने वाली राखपुराने भवनों को गिराये जानेथर्मल संयंत्रों से होने वाले उच्च उत्सर्जनकोयला जलनेकुछेक क्षेत्रों में ईंधन लकड़ी के इस्तेमाल आदि के कारण वायु प्रदूषण होता है. दिल्ली में वाहनों से होने वाले उत्सर्जन का वायु प्रदूषण में 40 प्रतिशत से अधिक योगदान है. 2000-2016 के दौरान दिल्ली में वाहनों में स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल बढऩे और थर्मल संयंत्रों के बंद होने से सल्फर डाईऑक्साइड (एसओ2) 15 माइक्रोग्राम से कम होकर 7 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर हो गया परंतु दूसरी तरफ इसी अवधि के दौरान नाइट्रोजन डाईआक्साइड (एनओ2) का स्तर 36 माइक्रोग्राम से 65 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर हो गया. डीजल वाहनों की संख्या में वृद्धि के कारण-दिल्ली में बिकने वाली कारों 2000 में डीजल इंजन वाली कारों की संख्या 10 प्रतिशत से कम थी परंतु अब 50 प्रतिशत से अधिक हो गई है-एनओ2 में वृद्धि हुई है. अत: डीजल से पेट्रोल और सीएनजी में तबदीली की आवश्यकता है. इसके अलावा एनओ2 को कम करने के लिये कचड़े और जैविक ईंधन के जलाये जाने को बंद करना होगा

वायु में एनओ2 का स्तर बढऩे के कारण ओजोन प्रदूषण बुरी तरह होता है. बीएस- ढ्ढढ्ढ में सल्फर की मात्रा 500 पीपीएम थी जबकि बीएस-ढ्ढढ्ढढ्ढ में यह 100पीपीएम और बीएस-ढ्ढङ्क में यह मात्र 50 पीपीएम है.

हम हर साल 22 मार्च को विश्व जल दिवस वास्तविक कार्य सूची से अधिक बड़ी श्रद्धा के साथ मनाते हैं. क्षेत्रोंराष्ट्रों और उप राष्ट्रों के बीच पानी का विषम वितरण है. उदाहरण के लिये एशिया में दुनिया की 60 प्रतिशत जनसंख्या है परंतु इसमें केवल वैश्विक प्रवाह 36 प्रतिशत है जबकि दक्षिण अमरीका में विश्व की मात्र 6 प्रतिशत जनसंख्या है परंतु वहां 26 प्रतिशत वैश्विक प्रवाह है. इसी तरह भारत में विश्व जनसंख्या का 17.5 प्रतिशत है परंतु केवल 4 प्रतिशत विश्व का ताज़ा जल इसे प्राप्त होता है. सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों में से एक 2015 तक सुरक्षित पेयजल की पहुंच से वंचित लोगों में आधी संख्या को कम करना था परंतु हम इस प्रमुख लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाए.

शहरी भारत मेंहम विभिन्न शहरों में भिन्न भिन्न प्रकार से और समानुपात में पानी की कमी का सामना करते हैंउदाहरण के लिये राजस्थान में दस कस्बों में तीन दिनों में से केवल एक दिन पानी की आपूर्ति की जाती है. इसके अलावा भारत में 35 शहरों में करीब एक करोड़ लोगों को पूर्व की सामान्य आपूर्ति की अपेक्षा 38प्रतिशत कम पानी की आपूर्ति की जाती है. 1947 में भारत की स्वतंत्रता के समयदिल्ली में करीब 800 तालाब/झीलें थीं परंतु इनमें से ज्यादातर का अतिक्रमण कर लिया गया है और भवनों के निर्माणसमतल क्षेत्रोंसडक़ों और अन्य सार्वजनिक उपयोगिताओं के लिये उनकी प्रकृति को बदल दिया गया. इसके अलावा चार मेट्रो शहरों (कोलकातादिल्लीचेन्नै और मुंबई) में रोज़ाना 90 करोड़ लीटर गंदा पानी नदियों में बहा दिया जाता है परंतु केवल 30 प्रतिशत को शोधन किया जाता है. देश के अन्य शहरोंविशेषकर कानपुरइलाहाबादवाराणसीलखनऊपटनाभागलपुर आदि के मामले में भी ऐसा ही है.

भारत के पास 433 अरब क्यूबिक मीटर भूजल है और भारत में ग्रामीण तथा शहरी घरेलू जल की 80 प्रतिशतता से अधिक जरूरत भूजल से पूरी होती है. परंतु भारत की प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता में तेज़ी से गिरावट हुई है-1947 में 6042 क्यूबिक मीटर से 2011 में 1545 मीटर क्यूबिक-और इसमें आगे गिरावट होकर 2015 में 1340 क्यूबिक मीटर और 2050 में 1140 क्यूबिक मीटर हो जाने की आशा है. दूसरी तरफ भारत केवल कुल वर्षा जल का केवल 20 प्रतिशत संरक्षित करता है जबकि इस्राइल वैज्ञानिक रूप से इसके कुल वर्षा जल का 80 प्रतिशत संरक्षित करता है. पानी की कमी अक्सर झुग्गियों और अविकसित कालोनियों में आम लोगों के बीच झगड़ों/दंगों का कारण बनती है जहां जनसंख्या घनत्व बहुत अधिक होता है और पानी के नल/टैंकर/हैंड पंप बहुत कम उपलब्ध होते हैं.

सुधारात्मक उपाय: भारत में स्मार्ट शहर विकसित किये जा रहे हैं परंतु इनकी संख्या सीमित है और पहले से मौजूद शहरों को स्मार्ट शहरों में परिवर्तित किया जा रहा है. अत: सभी शहरी केंद्रों को विकसित किये जाने की आवश्यकता है.

अत: उपर्युक्त गंभीर स्थिति की पृष्ठभूमि में निम्नलिखित कदम गंभीरता के साथ उठाये जाने चाहियें:-

क) राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देशानुसार 15 वर्ष या अधिक पुराने सभी डीजल वाहनों को शहरों में चलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिये क्योंकि ये अधिक प्रदूषित हवा छोड़ते हैंनये डीजल वाहनों के उत्पादन को हतोत्साहित किया जाना चाहिये और इनके लिये बहुत अधिक पंजीकरण और पार्किंग शुल्क होने चाहियेअब केवल भारत ङ्कढ्ढ (यूरो ङ्कढ्ढ की पद्धति पर) अनुपालन वाहनों का उत्पादन और पंजीकरण किया जाना चाहिये और वाहनों में केवल स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल की अनुमति होनी चाहिये.

ख) एक तरफ पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराया जाना चाहिये और दूसरी तरफ जनता को भी सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल और निजी वाहनों का मित्रोंपड़ोसियों और साथियों के साथ मिलकर इस्तेमाल करने के लिये प्रेरित और प्रोत्साहित किया जाना चाहिये.

ग) पर्याप्त तैयारी के साथ वाहनों का ओड-ईवन फार्मूला लागू किया जाना चाहिये.

घ) शादियोंजन्मत्योहारों (दीवाली) और अन्य समारोहों का शहरों में पटाखों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध/इनके उत्पादनबिक्री और खरीद को सीमित करते हुए रोक लगाई जानी चाहिये.

ड़) प्रदूषण फैलाने वाली सभी फैक्ट्रियोंथर्मल संयंत्रोंईंट भट्ठों आदि को तत्काल शहरों और आसपास के क्षेत्रों से अन्य क्षेत्रों में तबदील किया जाना चाहियेइसके अलावा इन्हें नई प्रौद्योगिकियों के साथ पर्यावरण अनुकूल बनाया जाना चाहिये.

च) सब्सिडी देकर वर्षा जल संरक्षण को लोकप्रिय बनाया जाना चाहिये और सभी पुराने तालाबों/टैंकों का पुनर्विकास किया जाना चाहिये.

छ) शहरों में हर साल सुनियोजित वृक्षारोपण अभियान चलाये जाने चाहियें और छात्रोंशिक्षकोंसरकारी कर्मचारियोंआंगनबाड़ी कार्यकर्ताआशास्वैच्छिक संगठनोंनगर निकायों आदि को सही प्रकार से संलग्न किया जाना चाहिये.

ज) ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिये उच्च शक्ति की लाउड स्पीकरोंडी. जे. आदि के आवासीय और सांस्थानिक क्षेत्रों में इस्तेमाल पर प्रतिबंध होना चाहिये.

झ) चालकों को अनावश्यक हार्न न दिये जाने के प्रति प्रशिक्षित किया जाना चाहिये (जैसा कि पश्चिमी देशों में व्यवहार में है)

ट) निर्माण कार्यों के लिये सुनियोजित नियम होने चाहियें जिसमें शोर और वायु प्रदूषण रोकने तथा निर्माण सामग्रियों के लिये सडक़/लेन को बाधित नहीं किये जाने के नियम शामिल हों.

ठ) साइकिलों और बैटरी रिक्शा (सुरक्षा उपकरणों के साथ) के इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया जाना चाहिये और यूरोपीय देशों की तरह साइकिल चलाने वालों के लिये साइकिल ट्रैकों का निर्माण किया जाना चाहिये.

ड) स्वच्छता कार्य योजना में जलवायु और मिट्टी प्रदूषण की रोकथाम के लिये उपकरणों और यंत्रों को शामिल किया जाना चाहियेमुख्य सडक़ों की यंत्रीकृत सफाई शीघ्रातिशीघ्र की जानी चाहिये क्योंकि जमा धूल जानलेवा होती जा रही है.

ण) प्रत्येक नागरिक शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों दोनों में खाद्य के अधिकार के भाग के तौर पर पर्याप्त सुरक्षित पेयजल प्राप्त करने का हकदार होना चाहिये-क्योंकि यह समस्या शहरी झुग्गी झोपडिय़ों में अधिक गंभीर है.

त) झोपडिय़ोंभीड़भाड़ वाले कस्बों और तथाकथित ग़ैर कानूनी कालोनियों का अच्छी तरह विकास करना जिनमें स्वच्छ पेयजलसडक़स्वास्थ्यशिक्षासीवर और अन्य सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर होनी चाहियेकेवल तभी स्मार्ट शहरों’ की अवधारणा को हक़ीकत बनाया जा सकता है.

27.07.2017 को फोर्ब्स मैगजीन से जारी किए गए अनुमान के मुताबिक अमेजॉन के संस्थापक जेफ बेजोस ने माइक्रोसॉफ्ट के बिल गेट्स को पछाड़कर दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति का खिताब हासिल कर लिया था. उनकी कुल संपत्ति देखी जाए तो बिल गेट्स की 90.7 बिलियन डॉलर की प्रॉपर्टी के मुकाबले 90.9 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई थी. फोर्ब्स के मुताबिक, बिल गेट्स मार्च में पत्रिका की सालाना रैंकिंग में पिछले चार सालों से सबसे अमीर व्यक्ति थे.

भारत के सबसे धमवान मुकेश अंबानी से कितने अमीर हैं जेफ बेजोस

हालांकि दुनिया के सबसे अमीर इंसान और भारत के सबसे अमीर इंसान की संपत्ति की तुलना की जाए तो अंतर को जानकर आपको भारी हैरानी होगी. अगर भारत के सबसे अमीर-धनवान की बात की जाए तो मुकेश अंबानी के पास कुल 19.3 अरब डॉलर की नेटवर्थ है. अगर जेफ बेजोस की 90.9 अरब डॉलर की नेटवर्थ के सामने देखें तो दोनों की संपत्ति में 71.6 अरब डॉलर का भारी अंतर है.

भारत के कुल  6 करोड़ लोगों के बराबर अकेले जेफ बेजोस की इनकम !

जेफ बेजोस की संपत्ति का रुपये में आकलन किया जाए तो ये 5,768,440,000,000 रुपये बैठती है और अगर इसके सामने भारत की कुल आबादी की प्रति व्यक्ति आय देखें तो ये 1 लाख 3 हजार 219 रुपये सालाना है. इसको दूसरे नजरिए से देखें तो भारत के लगभग 5.8 करोड़ लोग एक साल में जितनी आय हासिल करते हैं उतनी अकेले की इनकम विश्व के सबसे धनवान व्यक्ति जेफ बेजोस के पास है.

कैसे बने जेफ बेजोस दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति

दुनिया की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेलर कंपनी एमेजन इंक कंपनी एमेजन के शेयरों में आए 1 फीसदी की उछाल की बदौलत इसका शेयर कल 1046 डॉलर के ऊपरी स्तर पर पहुंच गया. कल यानी गुरूवार के कारोबार के दौरान अमेजॉन का शेयर 1083.31 डॉलर पर तक जा पहुंचा था. जेफ बेजोस के पास अमेजन के कुल 8 करोड़ शेयर हैं और जो कंपनी के कुल शेयरों का 17 फीसदी है. कल की शानदार तेजी के बदौलत कल इनकी कुल वैल्यू 87 अरब डॉलर हो गई थी जो अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है. 2017 की शुरुआत में बेजोज़ चौथे सबसे अमीर शख्स थे. लेकिन अब वो वारेन बफेट और एमैंसियो ऑर्टिगा को भी पछाड़ चुके हैं. हालांकि, कल कुछ ही देर बाद बेजोस फिसल कर फिर से दूसरे नंबर पर आ गए क्योंकि अमेजॉन के शेयरों द्वारा बनाई गई बढ़त कम हो गई.

दुनिया के टॉप 5 नेटवर्थ वाले शख्स/गुरुवार का आंकड़ा

1. जेफ बेजोज़- 90.9 बिलियन डॉलर

2. बिल गेट्स- 90.7 बिलियन डॉलर

3. एमैंसियो ऑर्टिगा 82.7 बिलियन डॉलर

4. बारेन बफेट- 74.5 बिलियन डॉलर

5. मार्क जकरबर्ग- 70.5 बिलियन डॉलर

देश के पूर्व राष्ट्रपति और एक महान वैज्ञानिक के रूप में ख्याति प्राप्त डॉ. अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि (27.07.2017) पर उन्हें देशभर में याद किया गया एवं श्रद्धांजलि दी गई. पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की दूसरी पुण्यतिथि पर आज ओडिशा सरकार ने भद्रक जिले में बाहरी व्हीलर द्वीप का नाम एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप रखा है.

राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री महेश्वर मोहंती ने बताया कि राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग ने गृह मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाणपत्र मिलने के बाद कल गजट अधिसूचना जारी की. मोहंती ने गजट अधिसूचना की एक प्रति मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को सौंपी , जिन्होंने पूर्व में व्हीलर द्वीप का नाम कलाम के नाम पर करने की घोषणा की है.

पटनायक ने पूर्व राष्ट्रपति की दूसरी पुण्यतिथि के मौके पर आयोजित समारोह में उन्हें श्रद्धांजलि दीं. समारोह में उन्होंने भद्रक जिले में व्हीलर द्वीप और बालेश्वर जिले में चांदीपुर के अस्थायी प्रक्षेपण स्थल से कलाम के भावनात्मक जुड़ाव को याद किया.

श्रद्धांजलि देने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि कलाम ने देश की प्रतिरक्षा के लिए मिसाइल विकसित करने के अपने प्रयासों के तहत इन दो जगहों पर सबसे अधिक समय बिताया हैं.

यह योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और दीनदयाल अंत्योदय योजना के तहत ‘आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना’ नामक एक नई योजना की शुरू कर रहा है। ग्रामीण विकास मंत्री श्री राम कृपाल यादव ने कहा कि आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की सुविधा प्रदान करके DAY-NRLM के तहत पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के सदस्यों को आजीविका का एक वैकल्पिक स्रोत प्रदान करना है।

इस योजना के तहत आर्थिक विकास के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सहित प्रमुख सेवाओं और सुविधाओं के साथ दूरदराज के गांवों को एक दुसरे से जुड़ने के लिए ई-रिक्शा, 3 और 4-व्हीलर मोटर परिवहन वाहनों जैसी एक सुरक्षित, सस्ती और समुदाय निगरानी सहित ग्रामीण परिवहन सेवाएं प्रदान की जाएंगी।

आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना का एक वैकल्पिक आजीविका बनाने के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की आर्थिक मदद से महिलाओं की सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है। मंत्रालय ने घोषणा की है कि 2017-18 से 2019-20 तक 3 वर्षों की निर्धारित समय अवधि के लिए देश भर में 250 ब्लॉकों में जल्द ही कार्यान्वित किया जाएगा। उप-योजना के तहत दिए जाने वाले प्रस्तावों में से एक यह है कि सामुदायिक आधार संगठन (CBO) अपने स्वयं के कोष से स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को वाहन खरीदने के लिए ब्याज रहित ऋण प्रदान करेगा।

एजीवीका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना का उद्देश्य डीएआई-एनआरएलएम के तहत स्व-सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्यों को आजीविका का एक वैकल्पिक स्रोत प्रदान करना है। अब तक, कार्यक्रम के तहत 34.4 लाख महिलाएं एसएचजी समर्थित हैं। आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना, पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को संभालने के लिए सभी सुविधाएं प्रदान करेगी।

एजसी सभी दूरस्थ गांवों को मुख्य सेवाओं के साथ जोड़ने के लिए सुरक्षित, सस्ती और सामुदायिक निगरानी वाले ग्रामीण परिवहन वाहनों को प्रदान करना सुनिश्चित करेगा। जिन वाहनों का उपयोग इस योजना के तहत किया जाएगा वे हैं|

भारत, अमेरिका और जापान की नौसेना के बीच संयुक्त अभ्यास सोमवार को ख़त्म हो गया। इस अभ्यास का मक़सद तीनों देशों की सेनाओं के बीच सैन्य ऑपरेशन के दौरान बेहतर तालमेल बनाना है। इस दौरान समुद्र में तीनों देशों की सेनाओं की ताक़त और अत्याधुनिक तकनीक का प्रदर्शन किया गया।

अमेरिका, जापान और भारतीय नौसेना द्वारा 10 से 17 जुलाई के बीच बंगाल की खाड़ी में ऑपरेशन मालाबार नाम का नौसेना अभ्यास किया गया। इस नौसेना अभ्यास में तीनों देशों के विमान, नौसेना की परमाणु पनडुब्बियां और नौसैन्य पोत शामिल हुए। मालाबार सैन्य अभ्यास का लक्ष्य सामरिक रूप से प्रशांत क्षेत्र में तीनों नौसेनाओं के बीच गहरे सैन्य संबंध और तालमेल स्थापित करना है। भारत का आईएनएस विक्रमादित्य, जापान का जिमूआ और दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट करियर माना जाने वाला अमेरिका का यूएसएस निमित्ज़ भी इसमें शामिल हुआ।

मालाबार अभ्यास की प्रक्रिया एक साल पहले शुरू हुई थी और शुरुआती योजना छह महीने पहले बनी थी। इस नौसैनिक अभ्यास में तीनों देशों के करीब 95 विमान, 16 जहाज और दो पनडुब्बियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान समुद्र तट पर और समुद्र में अभ्यास किया गया। इसमें समूह अभियान, समुद्री गश्त और टोही कार्रवाई, सतह और पनडुब्बीरोधी युद्ध का अभ्यास किया गया। इस अभ्यास में चिकित्सा अभियान, ख़तरे कम से कम करने, विस्फोटक आयुध निपटान, हेलीकॉप्टर अभियान का भी अभ्यास किया गया।

गौरतलब है कि पीएम मोदी के अमेरिका दौरे में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि अमेरिकी सेना भारत के साथ आपसी सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। दरअसल अमेरिका ने भारत को बड़ा रक्षा साझीदार माना है और इसी के चलते दोनों देशों में सहयोग बढ़ा है। भारत-अमेरिका और जापान के बीच नौसेना अभ्यास 1992 से शुरू हुआ था और तब से लगातार जारी है। दुनिया के मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए इस अभ्यास को अहम माना जा रहा है।

अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने अमेरिका को पेरिस जलवायु समझौते से अलग कर लिया। व्‍हाइट हाउस के रोज गार्डन से प्रसारित अपने कॉन्‍फ्रेंस में उन्‍होंने इसकी घोषणा की। सन 2015 में पेरिस समझौते में 195 देशों ने सहमति जताई थी। इसके तहत जीवाश्म ईंधन के जलने से कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य गैसों के उत्सर्जन को घटाना लक्ष्य है। समझौते के तहत अमेरिका ने 2025 तक 2005 के स्तर से अपने उत्सर्जन को 26 से 28 प्रतिशत कम करने का वादा किया था।

पेरिस जलवायु समझौते से अलग होने के बाद अमेरिका सीरिया और निकारागुआ के साथ आ गया जिन्होंने इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। ट्रंप ने अपने चुनावी अभियान के दौरान इस समझौते को अमेरिकी अर्थव्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश बताया था। 

अमेरिका द्वारा पेरिस समझौते से बाहर निकलने के फैसले पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री हर्ष वर्धन ने कहा है कि भारत सरकार देश की भावी पीढ़ी को एक स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध है और वह इसे लेकर अपने प्रयासों को जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका जलवायु परिवर्तन को लेकर क्या फैसला लेता है, यह उसकी अपनी नीतियों पर निर्भर करता है। 

साइबर सुरक्षा वैश्विक सूचकांक (GCI) में भारत को 165 देशों में से 23 वां स्थान प्रदान किया गया. दूसरा ग्लोबल साइबर सिक्युरिटी इंडेक्स (जीसीआई) संयुक्त राष्ट्र के दूरसंचार एजेंसी इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (आईटीयू) द्वारा जारी किया गया.

भारत, 0.683 के अंक के साथ इंडेक्स पर 23 वें स्थान पर है और परिपक्व श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है. सिंगापुर,  0.925 अंक के साथ सूचकांक में शीर्ष पर स्थित है.

साइबर सुरक्षा के शीर्ष 5 में स्थित देश है -1. सिंगापुर, 2. यूनाइटेड स्टेट्स, 3. मलेशिया, 4. ओमान, 5. एस्टोनिया

पीएम मोदी ने असम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की आधारशिला रखते हुए देश के लिए एक नई नीति की घोषणा की। मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 3 साल पूरे होने पर पीएम ने संपदा योजना (स्कीम फॉर एग्रो मरीन प्रोसेसिंग ऐंड डिवेलपमेंट ऑफ एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टर्स) को देश को समर्पित किया। सरकार ने समुद्री एवं विभिन्न कृषि उत्पादों के प्रोसेसिंग को गति देने के लिए लगभग 6000 करोड़ रुपए की एक नई फूड प्रोसेसिंग योजना संपदा (SAMPADA) को अपनी मंजूरी दे दी है जिसे 2016 से 2020 की अवधि में पूरी तरह लागू किया जाना है। 

इस योजना के तहत मिनिस्‍ट्री ऑफ फूड प्रोसेसिंग इंडस्‍ट्रीज के अंतर्गत एग्रो मैराइन प्रोसेसिंग एंड डवलेपमेंट ऑफ एग्रो क्‍लस्‍टर्स की योजनाओं को साल 2019-20 तक पूरा किया जाना है। मेगा एग्रो प्रोसेसिंग योजनाओं को मंजूरी मिलने के बाद इनमें लगभग 31400 करोड़ रुपए का निवेश होने की पूरी संभावना है। सरकार को यह उम्‍मीद है कि इससे करीब 334 लाख टन खाद्य पदार्थों को खराब होने से पूरी तरह बचाया जा सकेगा और इसके एवज में लगभग 1.04 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्‍त बचत हर साल की जा सकेगी। इन योजनाओं से करीब 20 लाख किसानों को बहुत ही फायदा होगा और 5,305,00 लोगों को प्रत्‍यक्ष और अप्रत्‍यक्ष रूप से रोजगार भी मिल सकेगा। फूड प्रोसेसिंग इंडस्‍ट्रीज मिनिस्‍टर हरसिमरन कौर ने इससे पहले कहा था कि कोल्‍ड चेन और प्रोसेसिंग सिस्‍टम के अभाव में हर साल लगभग 92 हजार करोड़ रुपए के खाद्य पदार्थ बेकार हो जाते हैं।

इस नई योजना के लिए लगभग 6,000 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। यह 31,400 करोड़ रुपए के निवेश को आकर्षित करने और 1,04,125 करोड़ रुपए मूल्य के 334 लाख टन कृषि उत्पादों के प्रबंधन की सुविधा भी देगी।

अगर चीन ने गीदड़भभकी के जरिये अपनी विस्तारवादी नीति को जायज ठहरने की कोशिश करेगा तो यह चीन को महंगा भी पड़ सकता है. २१वी सदी के भारत या अन्य किसी देश को कम करके आंकना चीनी खिलौनों की तरह उसका सपना बिखर जायेगा. 

सिक्किम सेक्टर में भारतीय और चीनी सेना के बीच महीने भर से जारी गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इससे पहले चीन के सरकारी मीडिया और थिंक टैंक ने कहा था कि इस विवाद से अगर उचित तरीके से नहीं निपटा गया तो इससे 'युद्ध' छिड़ सकता है। राजनयिक ने कहा कि चीन सरकार इस बात को लेकर बहुत स्पष्ट है कि वह स्थिति का शांतिपूर्ण समाधान चाहती है और इसके लिए इलाके से भारतीय सैनिकों की वापसी 'पूर्व शर्त' है।

भारत चीन के बीच सीमा पर लगातार तनाव बरकरार है। इस बीच चीन की नौसेना के कई पोतों और पनडुब्बियों का हिन्दमहासागर में दखल देखा गया है। चीन की नापाक की हरकतों पर भारतीय नौसेना बारीकी से नजर बनाए हुए है और इसके लिए जीसैट-7 का इस्तेमाल कर रही है, जिसे भारत ने 29 सितंबर 2013 को लॉन्च किया था। 

हिंदमहासागर में चीन के बढ़ते हुए दखल को देखते हुए नौसेना समुद्री सीमाओं पर नजर बनाए हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत को चीनी नौसेना की हर कदम की जानकारी जीसैट-7 सेटेलाइट के जरिए मिल रही है। इस उपग्रह का नाम रुक्मिणी है।

आपको बता दें कि हाल ही में हिंदमहासागर क्षेत्र में 14 चीनी नौसेना पोतों को भारतीय समुद्री क्षेत्र में घूमते देखा गया था। इनमें आधुनिक लुआंग-3 और कुनमिंग क्लास स्टील्थ डेस्ट्रॉयर्स भी शामिल थे।

क्या है रुक्मिणी

यह भारत का पहला सैन्य सेटेलाइट है। 2,625 किलोग्राम वजन का यह सैटेलाइट हिंद महासागर क्षेत्र में नजर रखने में नौसेना की मदद कर रहा है। यह एक मल्‍टी-बैंड कम्‍युनिकेशन-कम सर्विलान्‍स सेटेलाइट है, जिसका 36,000 किमी की ऊंचाई से संचालन हो रहा है। इसके जरिए हिंद महासागर के विस्तृत जलक्षेत्र में 2000 किमी तक के दायरे में निगरानी करना भारतीय नौसेना के लिए काफी आसान हो गया है। रुक्मिणी सेटेलाइट जंगी बेड़ों, सबमरीन, समुद्री एयरक्राफ्ट की गतिविधियों का रियल टाइम अपडेट मुहैया कराता है। इस सेटेलाइट की जद में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों ही हैं। 

2013 में भारत के पास 4 टन वर्ग के सैटलाइट को लॉन्च करने के लिए आधुनिक जीएसएलवी रॉकेट नहीं थे। इसकी वजह से भारत को 185 करोड़ रुपये कीमत वाले जीसैट-7 सैटलाइट को फ्रेंच गुएना से लॉन्च से किया गया था।

अब भारतीय वायुसेना के लिए भी इसी तरह का एक अन्य सैटलाइट जीसैट-7A विकसित किया जा रहा है। एक सूत्र ने बताया, 'इस सैटलाइट का लॉन्च साल के आखिर में होना है।' इसकी मदद से एयरफोर्स जमीन पर स्थित कई रेडार स्टेशनों, एयरबेसों और एयरबॉर्न अर्ली वॉर्निंग ऐंड कंट्रोल (अवॉक्स) एयरक्राफ्ट्स से सीधे जुड़ सकेगी।

ये है विवाद की वजह

डोक ला इस क्षेत्र का भारतीय नाम है, जिसे भूटान डोकलाम के रूप में मान्यता देता है, जबकि चीन इसे अपने डोंगलांग इलाके का हिस्सा बताता है। भारत में चीन के राजदूत झाओहुई ने कहा, 'स्थिति गंभीर है, जिसने मुझे गंभीर चिंता में डाल दिया है। यह पहला मौका है जब भारतीय सैनिकों ने पारस्परिक सहमति वाली सीमा रेखा पारकर चीन की सीमा में प्रवेश किया है। इससे चीन और भारत के सीमा पर तैनात सैनिकों के बीच गहरा गतिरोध पैदा हो गया है। अब 19 दिन बीत चुके हैं लेकिन स्थिति अब भी सहज नहीं हो सकी है।' उन्होंने कहा कि भारत को चीन-भूटान सीमा वार्ता में हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं है और ना ही वह भूटान की तरफ से क्षेत्र को लेकर दावा करने के लिए अधिकृत है।

कहां है डोकलाम

संधि स्थल को भारत डोक ला कहता है। भूटान इसे डोकलाम कहता है। चीन इसी हिस्से में डोंगलोंग पर अपना दावा करता है। चीन और भूटान के बीच क्षेत्र पर दावे को लेकर वार्ता होती रही है। भूटान का चीन के साथ कोई कूटनीतिक रिश्ता नहीं है। भारत ही उसे सैन्य और कूटनीतिक समर्थन देता है। चीन का कहना है कि भारत के पास न तो चीन-भूटान सीमा विवाद में हस्तक्षेप का और न ही भूटान की तरफ से क्षेत्र पर दावे का अधिकार है।

अगर आप स्कूल में बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं लेकिन किसी और पेशे से जुड़े हैं, तो भी आप बच्चों को पढ़ा सकेंगे। मोदी सरकार आपको पढ़ाने के अपने सपने को पूरा करने का मौका देने जा रही है। ऐसे लोगों के लिए जो शिक्षक नहीं है लेकिन बच्चों को पढ़ाने की हसरत रखते हैं, मोदी सरकार 16 जून से विद्यांजलि योजना शुरू करने जा रही है। इसके तहत स्कूलों में पढ़ाने के लिए शिक्षक होने की बाध्यता खत्म होगी। इस योजना का मकसद आम जन को सरकारी स्कूलों से जोड़कर उनका विकास करना है।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से विद्यांजलि योजना की शुरुआत 16 जून से हो गयी। पहले चरण में देश के 210 राज्यों के सरकारी स्कूलों में योजना लागू होगी। बीते आठ फरवरी को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी की राज्यों के अफसरों के साथ बैठक में इस योजना के संचालन पर सहमति बनी।

खास बात है कि हुनरमंद महिलाओं के साथ कोई भी पढ़ा-लिखा व्यक्ति या एनआरआई स्कूलों में पढ़ा सकता है। रिटायर्ड शिक्षक, सरकारी कर्मी और सेना के जवान भी पे स्केल पर पढ़ा सकते हैं।

विद्यांजलि योजना के तहत कोई भी पढ़ा लिखा व्यक्ति किसी भी सरकारी स्कूल से जुड़ सकता है। इसके लिए mygov.in वेबसाइट पर स्कूल के नाम के साथ आवेदन करना होगा।

वस्‍तु एवं सेवा कर (जीएसटी) शुक्रवार आधी रात 12 बजे (1 जुलाई) से लागू हो गया. एक देश-एक टैक्स के दावे के साथ सरकार द्वारा संसद भवन के सेंट्रल हॉल में आयोजित खास समारोह में जीएसटी का मेगा लॉन्‍च हुआ. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मध्‍यरात्रि में घंटा बजाए जाने के साथ जीएसटी देशभर में लागू हो गया.

प्रधानमंत्री ने इस महत्वपूर्ण कर सुधार की तुलना आजादी से करते हुए कहा कि यह देश के आर्थिक एकीकरण में महत्वपूर्ण उपलब्धि है. वहीं, संसद के केंद्रीय कक्ष में हुई विशेष बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इसे ऐतिहासिक क्षण करार दिया और कहा कि यह कराधान के क्षेत्र में एक नया युग है जोकि केंद्र एवं राज्यों के बीच बनी व्यापक सहमति का परिणाम है.

इस अवसर पर राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी, उप राष्‍ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व पीएम एच डी देवेगौडा समेत सभी कैबिनेट मंत्री एवं दिग्‍गज संसद के सेंट्रल हॉल में मौजूद रहे.

संसद के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में आजादी सहित यह चौथा ऐसा मौका है, जब मध्यरात्रि के समय कोई कार्यक्रम हुआ. 14 अगस्त 1947 की मध्‍यरात्रि के अलावा, 1972 में स्वतंत्रता की रजत जयंती और 1997 में स्वर्ण जयंती के अवसर पर ऐसे कार्यक्रम हुए थे.

इस अवसर पर राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि 'ये एक ऐतिहासिक मौका है. कुछ देर में हम एक नई टैक्‍स व्‍यवस्‍था को अपनाएंगे. यह मौका व्‍यक्तिगत रूप से मेरे लिए बेहद खास है. जीएसटी को लेकर पूरा विश्‍वास था. जीएसटी के लिए काउंसिल को बधाई देता हूंं. जीएसटी से निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी. जीएसटी से टैक्‍स व्‍यवस्‍था पारदर्शी होगी. शुरुआत में कुछ परेशानियां आ सकती हैं, लेकिन जीएसटी से बहुत बड़ा बदलाव आएगा'.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि 'राष्‍ट्र के निर्माण में कुछ ऐसे पल आते हैं, जिस पर हम किसी नए मोड़ पर जाते हैं, नए मुकाम की ओर पहुंचने का प्रयास करते हैं. आज इस मध्‍यरात्रि के समय हम सब मिलकर देश का आगे का मार्ग सुनिश्चित करने जा रहे हैं. कुछ देर बाद देश एक नई व्‍यवस्‍था की ओर चल पड़ेगा. सवा सौ करोड़ देशवासी इस ऐतिहासिक घटना के साक्षी हैं. जीएसटी की यह प्रकिया सिर्फ अर्थव्‍यवस्‍था के दायरे तक ही सीमित नहीं है. यह किसी एक दल की सिद्धी नहीं है, बल्कि ये हम सभी की सांझी विरासत है. आज वर्षों के बाद एक नई अर्थव्‍यवस्‍था के लिए जीएसटी के रूप में संसद जैसे पवित्र स्‍थान से बढ़कर ओर कोई जगह नहीं हो सकती थी.'

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि 'जीएसटी लंबी विचार प्रकिया का परिणाम है. संसद में सभी पूववर्ती सांसदों ने लगातार इस पर लंबी बहस की है. इसी का परिणाम है कि आज जीएसटी को हम साकार रूप में देख पाए हैं. संविधान ने पूरे देश के नागरिकों को समान अवसर-अधिकार देने के लिए सुनिश्चित व्‍यवस्‍था खड़ी कर दी थी. मैं जीएसटी काउंसिल को बधाई देता हूं और इस प्रकिया को जिन-जिन लोगों ने आगे बढ़ाया, मैं उन सभी को बधाई देता हूं. जीएसटी काउंसिल की 18वीं बैठकें हुईं और गीता के भी 18 अध्‍याय हैं'.

पीएम ने कहा कि 'जीएसटी के जरिये आर्थिक एकीकरण का काम हुआ है. जीएसटी से 500 तरह के टैक्‍सों की मुक्ति मिल गई है. जीएसटी के कारण आज अनेक तरह के टैक्‍सों की कन्‍फ्यूजन से मुक्ति मिल रही है. जीएसटी ज्‍यादा सरल और ज्‍यादा पारदर्शी है. गरीबों के हित के लिए यह सबसे सार्थक व्‍यवस्‍था है. आम लोगों पर नई व्‍यवस्‍था का बोझ नहीं पड़ेगा. छोटे कारोबारियों को भी परेशानियों से मुक्ति मिलेगी'.

पीएम मोदी ने कहा कि 'जो लोग आशंकाएं करते हैं, वो कृपया ऐसा न करें. जीएसटी से निर्यात बढ़ेगा. भारत के साथ कारोबार करना भी आसान होगा. जीएसटी से सभी राज्‍यों को आगे बढ़ने के मौके मिलेंगे. जीएसटी का फायदा आने वाली पीढि़यों को मिलेगा. न्‍यू इंडिया का सपना लेकर हम चल पड़े हैं, जीएसटी इसमें महत्‍वूपर्ण भूमिका अदा करेगा. जीएसटी न्‍यू इंडिया और डिजिटल भारत की एक नई टैक्‍स व्‍यवस्‍था है. जीएसटी सिर्फ एक टैक्‍स रिफॉर्म नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक रिफॉर्म का भी जरिया है'. 

प्रधानमंत्री ने कहा कि, हकीकत में यह 'गुड एंड सिंपल टैक्‍स' है. गुड इसलिए क्‍योंकि टैक्‍स पर टैक्‍स से मुक्ति मिलेगी और सिंपल इसलिए कि अब सिर्फ एक टैक्‍स होगा.

वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने समारोह में उद्घाटन भाषण में शामिल सभी दिग्‍गजों का स्‍वागत करते हुए कहा कि 'हम जीएसटी लॉन्च करके इतिहास रचने जा रहे हैं. भारत नई विकास यात्रा की शुरुआत करेगा. जीएसटी न्यू इंडिया की शुरुआत करेगा, जिसका लक्ष्य एक राष्ट्र-एक कर होगा'. जेटली ने आगे कहा, 'जीएसटी में केंद्र और राज्य मिलकर काम करेंगे. हम संविधान में संशोधन करके जीएसटी लाए हैं. हम संसद के सभी सदस्यों, राज्यों, राज्यों के वित्त मंत्रियों और इसके लिए कार्य करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद देते हैैं. राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी जीएसटी की इस यात्रा के सबसे बड़े गवाह हैं. 2006 के बजट में यूपीए सरकार ने घोषणा की थी कि इसे 2010 तक लागू किया जाएगा. जीएसटी काउंसिल 18 बार बैठ चुकी है. जीएसटी से राज्‍यों के अधिकारों का हनन नहीं होगा. हर बार आम राय से फैसले लिए गए'.

वित्‍त मंत्री ने कहा कि, सारे टैक्‍स खत्‍म, अब सिर्फ एक टैक्‍स होगा. अब सिर्फ एक रिटर्न जाएगा. टैक्‍स के ऊपर टैक्‍स न लगना जीएसटी की विशेषता है.  इस अवसर पर संसद के सेंट्रल हॉल में भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह के बगल में पार्टी के वरिष्‍ठ नेता लालकृष्‍ण आडवाणी और एनसीपी प्रमुख शरद पवार एक साथ बैठे दिखे. हालांकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस, लेफ्ट, टीएमसी, आरजेडी, आम आदमी पार्टी इसमें शामिल नहीं हुए. समाजवादी पार्टी समारोह में शामिल हुई.

जीएसटी के खास बिंदु...

1. वस्तुओं और सेवाओं पर पूरे देश में एक समान टैक्स

2. केंद्रीय जीएसटी, राज्य जीएसटी और समग्र जीएसटी-कुल तीन स्तर

3. 5%, 12%, 18%, 28% की चार बड़ी श्रेणियां

4. अल्कोहल जीएसटी के दायरे से बाहर-तेल से जुड़े उत्पाद भी जीएसटी के दायरे से बाहर

5. उत्पादन से बिक्री तक हर चरण पर टैक्स-लेकिन हर चरण में घटता जाएगा पिछला टैक्स

6. ग्राहकों पर कुल टैक्स के बोझ में कमी

7. कारोबारियों को हर महीने भरना होगा रिटर्न

8. 20 लाख तक के सालाना कारोबार पर जीएसटी नहीं

जीएसटी के लाभ

जीएसटी के लाभ निम्नांकित रूप में वर्णित किए जा सकते हैं:-

व्यापार और उद्योग के लिए
*आसान अनुपालन: भारत में जीएसटी व्यवस्था का आधार एक सुदृढ़ और व्यापक आईटी प्रणाली होगी. अत: सभी करदाता सेवाएंजैसे पंजीकरणरिटर्नभुगतान आदि ऑनलाइन प्रदान की जायेंगीजिससे अनुपालन में सुगमता और पारदर्शिता आयेगी.

*कर की दरों और संरचनाओं में एकरूपता : जीएसटी यह सुनिश्चित करेगा कि परोक्ष कर की दरें और संरचनाएं देशभर में एक समान रहेंजिससे व्यापार करने की अवश्यंभाविता और सुगमता में वृद्धि होगी. दूसरे शब्दों में जीएसटी देश में व्यापार प्रक्रिया को कर की दृष्टि से तटस्थ बनाएगाचाहे आप किसी भी स्थान पर व्यापार करने का विकल्प चुनें.

*प्रपाती प्रभाव की समाप्ति : समूची मूल्य शृंखला में कर-क्रेडिट की सीवनरहित प्रणालीयह सुनिश्चित करेगी कि करों का प्रपाती प्रभाव न्यूनतम हो. इससे व्यापार संचालन की प्रच्छन्न लागत में कमी आयेगी.

*प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार: व्यापार करने की लागत में कमी आने से अंतत: व्यापार और उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में सुधार होगा.  

*विनिर्माताओं और निर्यातकों को लाभ: प्रमुख केन्द्रीय और राज्य करों के जीएसटी में समाहित होनेइन्पुट वस्तुओं एवं सेवाओं का पूर्ण और व्यापक सेट-ऑफ और केन्द्रीय बिक्री कर (सीएसटी) की चरणबद्ध रूप में समाप्ति जैसे प्रावधानों से स्थानीय रूप में विनिर्मित वस्तुओं और सेवाओं की लागत में कमी आयेगी.

इससे अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में भारतीय वस्तुओं और सेवाओं की प्रतिस्पर्धा क्षमता में वृद्धि होगी और भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलेगा. समूचे देश में कर की दरों और प्रक्रियाओं में एकरूपता से भी अनुपालन लागत में भी काफी कमी आयेगी.

केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों के लिए

*संचालन की दृष्टि से सामान्य और सरल: केन्द्र और राज्यों के स्तर पर लगाए जाने वाले अनेक परोक्ष करों का स्थान जीएसटी लेगा. एक छोर से दूसरे छोर तक सुदृढ़ आईटी प्रणाली द्वारा समर्थित जीएसटी का संचालन केन्द्र और राज्यों के अब तक के सभी अन्य परोक्ष करों की तुलना में अधिक सामान्य और सरल किस्म का होगा.

*रिसाव पर कारगर नियंत्रण: एक मजबूत आईटी ढांचे के कारण जीएसटी का कर-अनुपालन बेहतर होगा. मूल्य संवद्र्धन शृंखला में एक चरण से दूसरे चरण तक इन्पुट टैक्स क्रेडिट अबाधित होने की बदौलत जीएसटी के डिजाइन में ऐसी अन्तर-निहित व्यवस्था की गई हैजो व्यापारियों को कर अनुपालन के लिए प्रेरित करेगी. 

*उच्चतर राजस्व सक्षमता: जीएसटी से यह अपेक्षा की जा रही है कि सरकार के कर-राजस्व संग्रह की लागत में कमी आयेगी और नतीजतन राजस्व सक्षमता में वृद्धि होगी.   

उपभोक्ताओं के लिए

*वस्तुओं और सेवाओं के अनुपात में एकल और पारदर्शी कर: केन्द्र और राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले बहुसंख्य करों और मूल्य शृंखला के परवर्ती चरणों में कोई इन्पुट कर क्रेडिट की व्यवस्था न होने या अधूरी व्यवस्था होने के कारण आज देश में अधिकतर वस्तुओं और सेवाओं की लागत में प्रच्छन्न कर समाहित रहते हैं. जीएसटी के अंतर्गत विनिर्माता से उपभोक्ता तक केवल एक ही कर होगाजिससे अंतिम उपभोक्ता तक अदा किए गए करों में पारदर्शिता रहेगी.

*समग्र कर बोझ में राहत: सक्षमता में वृद्धि और रिसाव की रोकथाम होने से ज्यादातर वस्तुओं पर कर का बोझ हलका होगाजिससे उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचेगा.

जीएसटी में समाहित किए जा रहे कर

केन्द्र के स्तर पर निम्नांकित कर समाहित किए जा रहे हैं:

क.केन्द्रीय उत्पाद शुल्क,

ख.अतिरिक्त उत्पाद शुल्क

ग.सेवा कर

घ.अतिरिक्त सीमा शुल्क जिसे प्रतिकारी शुल्क (काउंटरवेलिंग ड्यूटी) भी कहा जाता हैऔर

ङ.विशेष अतिरिक्त सीमा शुल्क.

राज्य स्तर परनिम्नांकित कर समाहित किए जा रहे हैं:

क.राज्य स्तरीय मूल्य सवंद्र्धित कर/बिक्री कर.

ख.मनोरंजन कर (स्थानीय निकायों द्वारा लगाए जाने वाले करों के अतिरिक्त)केन्द्रीय बिक्री कर (केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाया जाने वाला),

ग.चुंगी और प्रवेश कर,

घ.खरीद कर,

ङ.विलासिता करऔर

च.लाटरीबाजी और जुए पर कर.

घटनाक्रम का ब्यौरा

देश में जीएसटी के कार्यान्वयन के पीछे 13 वर्ष की लम्बी यात्रा रही है. पहली बार इसका उल्लेख परोक्ष करों के बारे में केल्कर कार्य दल की रिपोर्ट में किया गया था. भारत में जीएसटी शुरू करने के प्रस्ताव के बारे में प्रमुख घटनाओं का संक्षिप्त कालक्रमानुसार विवरण इस प्रकार है: 

क.2003 में परोक्ष कर के बारे में केल्कर कार्य दल ने वैट सिद्धांत के आधार पर एक व्यापक वस्तु एवं सेवा कर का सुझाव दिया.

ख.पहली बार वित्तीय वर्ष 2006-07 के लिए बजट भाषण में यह प्रस्ताव किया गया कि 1 अप्रैल, 2010 से राष्ट्रीय स्तर पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू किया जाये.

ग.चूंकि इस प्रस्ताव में न केवल केन्द्र द्वारा लगाए जाने वाले परोक्ष करों मेंबल्कि राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले करों में भी सुधार/पुनर्निधारण की आवश्यकता थीअत: जीएसटी का डिजाइन एवं रोडमैप तैयार करने का काम राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति को सौंपा गया.

घ.इस अधिकार प्राप्त समिति ने भारत सरकार और राज्यों से प्राप्त जानकारी के आधार पर नवम्बर 2009 में भारत में वस्तु एवं सेवा कर के बारे में प्रथम विमर्श पत्र जारी किया.
ङ.जीएसटी संबंधी कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए सितम्बर, 2009 में केन्द्र और राज्य सरकारों के अधिकारियों का एक संयुक्त कार्यदल बनाया गया. 

च.जीएसटी प्रारंभ करने के लिए संविधान में संशोधन करने हेतु मार्च, 2011 में लोकसभा में संविधान (115 संशोधन) विधेयक पेश किया गया. निर्धारित प्रक्रिया के अनुसारविधेयक को संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति को सौंप दिया गया ताकि वह उसकी जांच करके अपनी रिपोर्ट दे सके.

छ.इस बीचकेन्द्रीय वित्त मंत्री और राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति के बीच 8 नवम्बर, 2012 को हुई एक बैठक में किए गए निर्णय के अनुपालन में एक समिति का गठन किया गयाजिसमें भारत सरकारराज्य सरकारों और अधिकार प्राप्त समिति के अधिकारियों को शामिल किया गया. 

ज.इस समिति ने संविधान (115वां संशोधन) विधेयक सहित जीएसटी के डिजाइन के बारे में व्यापक विचार-विमर्श किया और जनवरी, 2013 में अपनी रिपोर्ट पेश की. इस रिपोर्ट के आधार परअधिकार प्राप्त समिति ने भुवनेश्वर में जनवरी, 2013 में अपनी बैठक में संविधान संशोधन विधेयक में कतिपय परिवर्तनों की अनुशंसा की.

झ.अधिकार प्राप्त समिति ने भुवनेश्वर में अपनी बैठक में यह निर्णय भी किया कि जीएसटी के विभिन्न पहलुओं के बारे में विचार करने और रिपोर्ट करने के लिए निम्नांकित अनुसार तीन समितियों का गठन किया जाये:

(क)आपूर्ति स्थान नियम और राजस्व तटस्थ दरें संबंधी समिति;

(ख)दोहरे नियंत्रणसीमारेखा और छूट संबंधी समिति;

(ग)    आयात संबंधी आईजीएसटी और जीएसटी संबंधी समिति

()स्थायी संसदीय समिति ने अगस्त, 2013 में अपनी रिपोर्ट लोकसभा को सौंपी. अधिकार प्राप्त समिति की अनुशंसाओं और संसदीय समिति की अनुशंसाओं की जांच-पड़ताल मंत्रालय में गईऔर उन पर विधायी विभाग से परामर्श किया गया. अधिकार प्राप्त समिति और स्थायी संसदीय समिति की अधिकतर अनुशंसाओं को स्वीकार कर लिया गया और संविधान संशोधन विधेयक के प्रारूप में उपयुक्त बदलाव किए गए.

ट.ऊपर वर्णित परिवर्तनों को समाहित करते हुए सितम्बर 2013 में संविधान संशोधन विधेयक का अंतिम प्रारूप अधिकार प्राप्त समिति को उसके विचारार्थ भेज गया.

ठ.अधिकार प्राप्त समिति ने एक बार फिर नवम्बर 2013 में शिलांग में अपनी बैठक में विधेयक के बारे में कुछ अनुशंसाएं कीं. संशोधित प्रारूप मार्च, 2014 में अधिकार प्राप्त समिति के विचारार्थ भेजा गया.

ड.115वां संविधान (संशोधन) विधेयक, 2011 जो मार्च 2011 में लोकसभा में पेश किया गया थावह 15वीं लोकसभा भंग होने के साथ ही कालातीत हो गया.

ढ.जून 2014 मेंसंविधान संशोधन विधेयक का प्रारूप नई सरकार के अनुमोदन के बाद अधिकार प्राप्त समिति को भेजा गया.

ण.विधेयक की रूपरेखा पर अधिकार प्राप्त समिति में व्यापक सहमति के आधार परकैबिनेट ने देश में वस्तु एवं सेवा कर का शुभारंभ करने के लिए 17.12.2014 को संविधान में संशोधन के लिए संसद में विधेयक पेश करने के प्रस्ताव का अनुमोदन कर दिया. यह विधेयक 19.12.2014 को लोकसभा में पेश किया गया और इसे 06.05.2015 को लोक सभा ने पारित कर दिया. इसके बाद इसे राज्य सभा की प्रवर समिति को सौंप दिया गयाजिसने 22.07.2015 को अपनी रिपोर्ट पेश की.

पूर्ण गरीबी गंभीर अभाव, भूख, समयपूर्व मृत्यु और पीड़ा के मामले के रूप में देखी गई है। यह गरीबी की एक महत्वपूर्ण समझ का कब्जा करता है और इसकी प्रासंगिकता आज दुनिया के कुछ हिस्सों में फैली हुई है। यह कार्रवाई की जरूरी आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित करती है हालांकि, कुछ परिस्थितियां हैं, जैसे कि भुखमरी या असुरक्षित पानी, जो तत्काल मृत्यु की ओर ले जाते हैं, इनमें से अधिकांश मानदंडों को निर्णय और तुलना की आवश्यकता होती है। 

जैसे, 1995 में संयुक्त राष्ट्र ने गरीबी की दो परिभाषाओं को अपनाया

संपूर्ण गरीबी को परिभाषित किया गया था:

"भोजन, सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता सुविधाओं, स्वास्थ्य, आश्रय, शिक्षा और सूचना सहित बुनियादी मानवीय जरूरतों के गंभीर अभाव के कारण एक ऐसी स्थिति होती है, जो केवल आय पर ही नहीं बल्कि सेवाओं तक पहुंच पर निर्भर करती है।"

"कुल गरीबी विभिन्न रूपों में शामिल है, जिनमें शामिल हैं: आय और उत्पादक संसाधनों की कमी, स्थायी जीवनसाध्य, भूख और कुपोषण, बीमार स्वास्थ्य, सीमित और शिक्षा और अन्य बुनियादी सेवाओं तक पहुंच की कमी, बीमारी से रोग और मृत्यु दर में वृद्धि, बेघर और अपर्याप्त आवास असुरक्षित वातावरण और सामाजिक भेदभाव और बहिष्कार.यह निर्णय लेने में और सिविल, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में भागीदारी की कमी के कारण भी होता है। यह सभी देशों में होता है: कई विकासशील देशों में गरीबी, गरीबी की जेबें विकसित हुईं देशों, आर्थिक मंदी के कारण आजीविका के नुकसान, आपदा या संघर्ष के कारण अचानक गरीबी, कम मजदूरी वाले श्रमिकों की गरीबी, और परिवार के समर्थन प्रणाली, सामाजिक संस्थानों और सुरक्षा नेट से बाहर गिरने वाले लोगों की निराशा होती है। "

ये गरीबी की रिश्तेदार परिभाषाएं हैं, जो समाज के भीतर रहने वाले न्यूनतम स्वीकार्य मानकों के मामले में गरीबी को देखते हैं, जिसमें किसी विशेष व्यक्ति का जीवन रहता है। (संयुक्त राष्ट्र, 1 99 5) लेकिन 'समग्र गरीबी' आगे चला जाता है, कई कारकों को पहचानना जो कि वंचितों में योगदान दे सकता है 2010 में, संयुक्त राष्ट्र ने स्वास्थ्य और शिक्षा को कवर करने वाले एक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) को अपनाया, साथ ही साथ रहने के मानकों का भी मूल्यांकन किया।

केंद्र सरकार ने 13.06.2017 को स्पष्ट किया कि गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स 1 जुलाई से ही लागू होगा और इसकी तैयारियों जोर-शोर से चल रही हैं। 

छोटे व्यवसाय भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ये देश की अर्थव्यव्स्था और औद्योगिक विकास को गति देकर नौकरियां पैदा करते हैं। हालांकि, देश में बहुत से व्यवसाय नियमित रूप से रिटर्न फाइल नहीं करते और न ही टैक्स अदा करते हैं। इसकी कुछ वजहें हो सकती हैं। मसलन, जानकारी का अभाव, परिस्थितिजन्य परेशानियां या कारोबारियों की यह धारणा कि आकार, संचालन और कमाई के लिहाज से उनका बिजनस बहुत छोटा है, इसलिए डेडलाइन मिस भी हो जाए तो चलता है। यही वजह है कि उन्हें टैक्स डिपार्टमेंट नोटिस भेजकर टैक्स पेमेंट, इंट्रेस्ट, लेट फी और पेनल्टीज की मांग करता रहता है। 

एक व्यापक अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के रूप में जीएसटी लागू होते ही मौजूदा अप्रत्यक्ष कर खत्म हो जाएंगे और इसके लागू होते ही किसी व्यवसाय की सफलता और विश्वसनीयता इस बात पर बहुत हद तक निर्भर हो जाएगी कि कारोबारी जीएसटी के नियमों का किस हद तक पालन कर रहे हैं।

जीएसटी सेल्फ-मॉनिटरिंग मेकनिजम पर काम करेगा। इस मॉडल के तहत वस्तु एवं सेवा मुहैया करवाने वाले और प्राप्त करने वालों के बीच इनवॉइस की बड़ी भूमिका होगी। दोनों इनवॉइस मैच करने और सप्लायर की ओर से टैक्स पे करने के बाद ही कन्ज्यूमर को इनपुट टैक्स क्रेडिट मिल पाएगा।

ऐसे में कोई भी ग्राहक वैसे वेंडरों के साथ ही बिजनस करना चाहेगा जो जीएसटी के नियम-कानून का सही-सही पालन करता हो। इस तरह जीएसटी लागू होने के बाद ग्राहक और दुकानदार या सेवा प्रदाता के बीच का भावनात्मक रिश्ता बदल जाएगा और कानून पालन की अनिवार्यता इस रिश्ते की जगह ले लेगी।

इस तरह जीएसटी लागू होने पर टैक्स कानून का पालन नहीं करने से फाइन, इंट्रेस्ट और पेनल्टीज के रूप में खर्चे बढ़ जाएंगे बल्कि आपके व्यवसाय पर भी असर होगा और कंप्लायंस रेटिंग भी घट जाएगी। चलिए, जीएसटी के तहत फाइल होने वाले विभिन्न प्रकार के रिटर्न्स के साथ-साथ इन्हें फाइल करते वक्त ध्यान रखने वाली बातों पर गौर करें.

महीने की 10 तारीख को फॉर्म जीएसटीआर-1 फॉर्म

जीएसटीआर-1 में आपको हर महीने बेचे गए सामान या दी गई सेवाओं का विस्तृत जिक्र करना होगा। रजिस्टर्ड डीलरों को सप्लाइज के हरेक इनवॉइस और ग्राहकों के लिए सामानों और सेवाओं की कुल कर योग्य कीमत की जानकारी देनी होगी। अगर दूसरे राज्य के ग्राहक को की गई आपूर्ति की कर योग्य कीमत 2.5 लाख रुपये से अधिक है तो हर हरेक इनवॉइस का विवरण देना होगा।

11 तारीख को फॉर्म जीएसटीआर-2

एजीएसटीआर-1 में सप्लायर की घोषणा के आधार पर महीने की 11वीं तारीख को प्राप्तकर्ता के लिए जीएसटीआर-2ए फॉर्म तैयार हो जाएगा। 11 से 15 तारीख के बीच इसमें संशोधन किया जा सकता है। रिटर्न फाइल करने के नजरिए से यह अवधि काफी महत्वपूर्ण होगी क्योंकि अगर इस दौरान आपने जीएसटीआर-2ए में संशोधन नहीं किया तो आपकी इनपुट टैक्स क्रेडिट एलिजिबलिटी पर असर पड़ सकता है। खास बात यह है कि नियमों का पालन करने और समय की बचत करने में टेक्नॉलजी आपकी बहुत मददगार साबित होगी।

15 तारीख को फॉर्म जीएसटीआर-2

फॉर्म जीएसटीआर-2ए में दी गई जानकारी के अतिरिक्त कोई दावा करने के लिए 15 तारीख तक जीएसटीआर-2 फॉर्म जमा कर देना होगा।

जीएसटीआर-2 में दी गई जानकारी के आधार पर आपके ई-क्रेडिट लेजर में आईटीसी क्रेडिट हो जाएगा और इनवॉइस मैच होने पर यह पक्का हो जाएगा।

16 तारीख को फॉर्म जीएसटीआर-1ए

फॉर्म जीएसटीआर-2 में आप जो सुधार करेंगे, उन्हें आपके सप्लायर को फॉर्म जीएसटीआर-1ए के जरिए मुहैया कराया जाएगा। तब सप्लायर आपके संशोधनों को स्वीकार या खारिज करेगा। 

20 तारीख को जीएसटीआर-3 फॉर्म

जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर-2 के आधार पर 20 तारीख को ऑटो-पॉप्युलेटेड रिटर्न जीएसटीआर-3 उपलब्ध हो जाएगा जिसे आप पेमेंट के साथ जमा कर सकते हैं।

फॉर्म जीएसटी एमआईएस-1 में इनपुट टैक्स क्रेडिट की आखिरी स्वीकृतिफॉर्म जीएसटीआर-3 में मंथली रिटर्न फाइल करने की सही तारीख के बाद आंतरिक आपूर्ति और बाह्य आपूर्ति में मिलान किया जाएगा। तब जीएसटी एमआईएस-1 में इनपुट टैक्स क्रेडिट को आखिरी स्वीकृति मिलेगी। बिलों के मिलान के वक्त इनका सहारा लिया जाएगा.

सप्लायर का जीएसटीआईएन

रिसीपिअंट का जीएसटीआईएन

इनवॉइस या डेबिट नोट नंबर

इनवॉइस या डेबिट नोट डेट

टैक्सेबल वैल्यू टैक्स अमाउंट

इसी मिलान के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावे पर विचार किया जाएगा। 

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, जीएसटी के नियमों का पालन एक दिन का काम नहीं है। जीएसटी के तहत रिटर्न साइकल मौजूदा रिवाजों को खत्म कर देगा। अभी ज्यादातर छोटे कारोबारी अपनी खरीद और बिक्री का आकलन कर एक दिन में रिटर्न तैयार कर लेते हैं। लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि जीएसटी रिटर्न साइकल पूरे महीने चलने वाला है। दूसरी बात यह कि कारोबारियों को ऑफलाइन की जगह ऑनलाइन आंकड़े सुरक्षित करने होंगे। तीसरी महत्वपूर्ण बात यह कि इस पूरी प्रक्रिया में टेक्नॉलजी की महत्वूर्ण भूमिका होगी। 

पुणे की परसिस्टेंट सिस्टम्स ने भर्तियों की पुरानी प्रथा को तोड़ते हुए अपनी टीम में कुछ फ्रीलांसरों और कंसल्टंट्स को शामिल कर लिया जिन्होंने कम वक्त के एक प्रॉजेक्ट पर काम किया। जॉब की दुनिया में यह थोड़ा नया आइडिया है जो ग्लोबल टेक्नॉलजी सर्विस इंडस्ट्री में धीरे-धीरे जोर पकड़ता जा रहा है। इसे 'गिग इकॉनमी' या वर्कफोर्स का ऊबराइजेशन (ऐप बेस्ड कैब मुहैया करानेवाली कंपनी ऊबर की तरह इस्तेमाल किया जाना) कहा जा रहा है, जहां लोग डिमांड-सप्लाइ मॉडल पर काम करते हैं। इसमें डिमांड और इंट्रेस्ट एरियाज के लिहाज से विभिन्न प्रॉजेक्ट्स के लिए एक से दूसरी कंपनी का भ्रमण करते रहते हैं। 

परसिस्टेंट सिस्टम्स के चीफ पीपल ऑफिसर समीर बेंद्रे ने कहा, 'हालांकि यह (ऊबराइजेशन) सर्विसेज कंपनियों में बड़े पैमाने पर अब तक नहीं दिखा है, लेकिन इसकी शुरुआत हो चुकी है।' उन्होंने कहा, 'कुछ पॉकेट्स में हम इसका प्रयोग कर रहे हैं... हमें लगता है कि कुछ क्षेत्रों में इसके इस्तेमाल के अच्छे अवसर हैं। मसलन, अगर महिलाएं मातृत्व अवकाश के बाद कम पर लौट रही हों तो।'

इन्फोसिस और विप्रो समेत दूसरी भारतीय आईटी कंपनियां 'ऊबराइज्ड वर्कफोर्स' के आइडिया पर विचार कर रही हैं। इस ट्रेंड के जोर पकड़ने के पीछे मार्केट में उठापटक और इंडियन आईटी सर्विसेज के सबसे बड़े मार्केट अमेरिका में बदली राजनीतिक स्थिति से कहीं बड़ी वजह युवाओं की प्राथमिकताओं का बदलना है। 

इन्फोसिस में एचआर हेड रिचर्ड लोबो ने कहा, 'वर्कफोर्स में मिलेनियल्स के बढ़ते दबदबे से वो सारी धारणाएं टूट रही हैं जो किसी एंप्लॉयी को कंपनी से जुड़ा और प्रेरित रखती थीं।' उन्होंने कहा, 'हम ज्यादा-से-ज्यादा मिलेजुले वर्कफोर्स के साथ डील कर रहे हैं जहां फुल टाइम और पार्ट टाइम एंप्लॉयी एक ही जगह पर काम करते हैं, लेकिन दोनों की जरूरतें बिल्कुल भिन्न हैं।'

लोबो कहते हैं कि फुल टाइम जॉब नहीं करने की चाहत रखनेवालों की तादाद बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा, 'जिस तरह लोगों को ऑन डिमांड कारों से आवाजाही की आदत हो गई है, उसी तरह एंप्लॉयर्स भी उन खास कामों के लिए लोगों की ऑन डिमांड हायरिंग कर लेंगे जिन्हें रेग्युलर स्टाफ नहीं निपटा सकते।' 

पिछले साल जब विप्रो ने अमेरिकी आईटी कंसल्टिंग फर्म ऐपिरियो का अधिग्रहण किया था, तब सीईओ आबिदअली नीमचवाला ने कहा था, 'हमें लगता है कि आईटी इंडस्ट्री में कामकाज का भविष्य कुछ हद तक ऊबराइज्ड होने जा रहा है।' 

चीन की बढ़ती ताकत और उसकी विस्‍तारवादी नीति को लेकर अब बड़े देशों को चिंता होने लगी है। इसका बड़ा उदाहरण अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन की वह रिपोर्ट है जिसमें चीन के पाकिस्‍तान और और अफ्रीका के जिबुति में मिलिट्री बेस स्‍थापित करने की बात कही है। जिबुति की भौगोलिक स्थिति सामरिक दृष्टि से काफी अहम है। यह अफ्रीकन देश हिंद महासागर के उत्तर-पश्चिमी किनारे पर बसा हुआ है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है चीन विदेशों में बंदरगाहों के जरिए अपनी विस्‍तारवादी नीति को अंजाम देने में लगा है। फिर चाहे वह पाकिस्‍तान का ग्‍वादर हो या कोई और। पूर्व राजनयिक विवेक काटजू भी मानते हैं कि चीन इस तरह से इस पूरे इलाके में अपनी स्थिति को मजबूत करने में लगा हुआ है।

जिबुति इसलिए भी खास है कि क्‍योंकि यहां पर अमेरिका का भी नेवल बेस है। यह लाल सागर और दक्षिण से स्‍वेज नहर में जाने का रास्‍ता भी है। अमेरिका का जहां रक्षा बजट 180 बिलियन डॉलर है वहीं चीन का रक्षा बजट करीब 954 बिलियन युआन (करीब 140.4 बिलियन डॉलर) है। वर्ष 2017 चीन ने पाकिस्‍तान को आठ पनडुब्बियों को बेचने की डील भी की है। वर्ष 2011-15 के दौरान चीन के हथियारों की बिक्री 9 बिलियन से बढ़कर 20 बिलियन तक पहुंच गई है।

यहां पर यह भी ध्‍यान रखना जरूरी होगा कि चीन के कर्ज में डूबे श्री लंका के लिए हबनतोता बंदरगाह को उसे सौंपना बहुत बड़ी मजबूरी बन गया है। हालांकि सरकार की तरफ से इसके करीब 80 फीसद शेयर चीन की कंपनी को बेचने की बात कही जा रही है। कुल मिलाकर यह चीन के ही कब्‍जे में है। इसपर चीन ने करीब आठ बिलियन डॉलर का खर्च किया है। श्री लंका की हालत इतनी खराब है कि वह चीन का कर्ज चुका पाने में नाकाम दिखाई दे रहा है। इसके अलावा पाकिस्‍तान का ग्‍वादर पोर्ट जिसकी सुरक्षा का जिम्‍मा भी चीन के पास है, में भी स्थिति काफी कुछ ऐसी ही है। ऐसे में चीन लगातार भारत को घेरने और भारत की चिंता का सबब बनता जा रहा है। भारत के प्रभाव को रोकने के लिए चीन की यह नई रणनीति का एक अहम हिस्‍सा है।

अमेरिकी कांग्रेस के सामने पेश की गई 97 पन्नों की रिपोर्ट में पिछले साल चीन की सेना द्वारा की गई गतिविधियों का भी जिक्र किया गया है। अमेरिका के मुताबिक, चीन ने अपने सुरक्षा खर्च में जमकर खर्च किया है। पेंटगन की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने इस क्षेत्र में 115 खरब से भी ज्यादा का बजट खर्च किया है जबकि वह अपना रक्षा बजट आधिकारिक तौर पर 90 खरब बताता रहा है। ऐसा इसलिए भी है क्‍योंकि चीन के नेता आर्थिक विकास की धीमी रफ्तार को नजरअंदाज करते हुए रक्षा खर्च में बढ़ोतरी के पक्षधर हैं। गौरतलब है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पाकिस्‍तान चीन द्वारा बेचे जाने वाले हथियारों का एक बड़ा ग्राहक है। चीन ने 2011 से 2015 के बीच कुल 12 खरब रुपये के हथियारों का निर्यात किया, जिसमें से करीब 6 खरब रुपये के हथियार अकेले पाकिस्तान ने खरीदे हैं।

रक्षा विशेषज्ञ अनिल कौल मानते हैं कि चीन और पाकिस्‍तान की विदेशनीति काफी भारत को देखते हुए बनाई जाती है। अफ्रीका में चीन के मिलिट्री बेस का होना इस बात का सुबूत है कि चीन हर तरफ से भारत पर नजर बनाए रखना चाहता है। वह लगातार भारत को घेरने की साजिश रच रहा है। इस साजिश के तहत उसने पहले श्रीलंका में बंदरगाह पर कब्‍जा जमाया है। इसके बाद पाकिस्‍तान में सीपैके के जरिए ग्‍वादर पोर्ट पर कब्‍जा किया है और अब अफ्रीका तक जा पहुंचा है। वह इसको विस्‍तारवादी नीति के अलावा भारत के घेराव की नीति भी मानते हैं। उनका यह भी कहना है कि भारत की कभी भी इस तरह की कोई पॉलिसी नहीं रही है। पेंटागन की रिपोर्ट पर बात करते हुए उन्‍होंने माना कि चीन के बढ़ते कदमों की आहट से अमेरिका भी काफी परेशान है। इसकी वजह यह है कि अमेरिका चीन को अपने वर्चस्‍व के लिए अब खतरा मानने लगा है। लिहाजा उसको इसे लेकर चिंता होनी स्‍वाभाविक है। 

फाबिओला जानोती, इटली

2014 में ब्रिटेन के अख़बार द गर्डियन ने इटली की भौतिक विज्ञानी फाबिओला जानोती को 'ब्रह्मांड के रहस्यों की कुंजी वाली महिला' करार दिया था. फाबिओला ने 2016 में स्विटज़रलैंड स्थित दुनिया के अहम विज्ञान केंद्र यूरोपियन ऑर्गेनाइजेशन फोर न्यूक्लियर रिसर्च में पार्टिकल फिजिक्स की अगुवाई की. 1994 से फाबिओला इस सेंटर में एक अहम भौतिक विज्ञानी खोजकर्ता थीं. 2009 से 2013 तक लार्ज हैड्रन कोलाइडर में एटलस के लिए प्रवक्ता रहीं. इन्होंने इस बात को दुनिया के सामने रखा कि प्रकृति में व्यापक पैमाने पर पार्टिकल क्यों हैं.

क्रिस्टिना फिगेरस, कोस्टा रिका

क्रिस्टिना से जब बीबीसी मुंडो ने पूछा कि उन्हें विज्ञान से प्रेम कैसे हुआ तो उन्होंने कहा कि प्रकृति उनका पहला घर रहा है. क्रिस्टिना ने कहा कि प्रकृति उनका अब भी पहला घर है. क्रिस्टिना एन्थ्रोपॉलोजिस्ट हैं और वह कोस्टा रिका के तीन बार राष्ट्रपति रहे जोसे फिगेरस फेरर की बेटी हैं. क्रिस्टिना 2012 और 2016 के बीच संयुक्त राष्ट्र संघ में फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज की कार्यकारी सचिव रहीं. क्रिस्टिना ने 2010 में कानकुन, 2011 में डर्बन, 2013 में वार्सा और 2014 में लिमा के जलवायु परिवर्तन कॉन्फ्रेंस की अगुवाई की थी. पेरिस में 2015 के ऐतिहासिक जलवायु समझौते में क्रिस्टिना की अहम भूमिका रही थी.

किरण मजूमदार-शॉ, भारत

अपने योगदान के कारण किरण मजूमदार-शॉ विज्ञान की दुनिया में पहचान के लिए मोहताज नहीं हैं. 2010 में अमरीका की महत्वपूर्ण पत्रिका टाइम ने वर्षिक रैंकिंग 'टाइम 100' में हमारी दुनिया की 100 प्रभावशाली लोगों में जगह दी थी. बायोटेक्नोलॉजी में अपने योगदान के कारण उन्हें हीरो की कैटिगरी में जगह दी गई थी. 2014 में फ्यूचर मैगज़ीन में किरण को एशिया-पसीफिक में सबसे प्रभावशाली महिला करार दिया था. किरण का जन्म भारत में हुआ था. वह बायोकॉन की संस्थापक और अध्यक्ष हैं. यह कंपनी बायोटेक्नॉलजी के क्षेत्र में शोध करती है.

गोयन शॉटवेल, अमरीका

अमरीकी मैगज़ीन फोर्ब्स ने दुनिया की 100 शक्तिशाली महिलाओं में गोयन को 76वें पायदान पर रखा था. इस लिस्ट में कंस्ट्रक्शन और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में वह एकमात्र महिला थीं. गोयन की विशेषज्ञता अप्लाइड मैथ्स में भी है. वह स्पेसएक्स की अध्यक्ष हैं. यह कंपनी स्पेस तकनीक पर काम करती है. इस कंपनी का जोर ख़ासकर स्पेस ट्रांसपोर्ट में खर्च को कम करना है.

मारग्राटा चान, चीन

चीनी फिजिशन मारग्राटा चान ने रोगाणुरोधक को लेकर काम किया है. चान ने गानरीअ जैसी बीमारियों को लेकर सतर्क किया था. वह विश्व स्वास्थ संगठन की महानिदेशक भी रही हैं. चान सांस संबंधी बीमारियों और बर्ड फ्लू की विशेषज्ञ हैं. चान ने महिलाओं और बच्चों की सेहत को लेकर काफी काम किया है.

इसरो के सबसे ताकतवर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल GSLV मार्क 3 डी-1 ने 05.06.2017 को पहली उड़ान भरी। इसका वजन 200 हाथियों के बराबर है। इसे आंध्र प्रदेश के सतीश धवन स्पेस सेंटर से छोड़ा गया। रॉकेट ने एक हाथी के बराबर वजनी देश के सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट GSAT-19 को 16 मिनट में स्पेस ऑर्बिट में पहुंचाया। इससे आने वाले कुछ सालों में भारत में हाई स्पीड इंटरनेट की शुरुआत होगी। इसरो ने कहा कि आने वाले वक्त में नए जीएसएलवी रॉकेट से इंसानों को स्पेस की सैर कराई जा सकती है। इस ऐतिहासिक मिशन की कामयाबी पर नरेंद्र मोदी और प्रेसिडेंट प्रणब मुखर्जी ने इसरो को बधाई दी।

1) क्या है ये मिशन?

इसरो के सबसे ताकतवर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल GSLV मार्क 3 डी-1 ने पहली उड़ान भरी। यह अपने साथ देश के सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट GSAT-19 (वजन 3136 kg ) को स्पेस में लेकर गया।

2) क्या है GSAT-19?

GSAT-19 देश में तैयार सबसे वजनी सैटेलाइट है। इसमें मॉडर्न प्लेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। यह हीट पाइप, फाइबर ऑप्टिक जायरो, माइक्रो-मेकैनिकल सिस्टम्स एक्सीलेरोमीटर, केयू-बैंड टीटीसी ट्रांसपोंडर और लीथियम आयन बैटरी से लैस है। इस पर करीब 300 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं

3) कम्युनिकेशन सैटेलाइट से क्या फायदा?

कुछ साल में देश में इंटरनेट स्पीड बढ़ेगी। सबसे तेज लाइव स्ट्रीमिंग मिलेगी। जहां फाइबर ऑप्टिकल नेटवर्क नहीं है, वहां फायदा होगा।- GSAT-19 और GSAT-11 कम्युनिकेशन सैटेलाइट्स की लॉन्चिंग से डिजिटल इंडिया को मजबूती मिलेगी।

4) क्या है GSLV?

GSLV इसरो का सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल है। इसका पूरा नाम जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल है। इस रॉकेट को इसरो ने डेवलप किया है। इसके जरिए 2001 से अब तक 11 बार सैटेलाइट स्पेस में भेजे जा चुके हैं। आखिरी उड़ान 5 मई, 2017 को भरी थी, तब यह जीसैट-9 को अपने साथ लेकर रवाना हुआ था।

5) GSLV मार्क 3 की खासियत क्या है?

GSLV मार्क 3 की लॉन्चिंग को स्पेस टेक्नोलॉजी में बड़ा बदलाव लाने वाले मिशन के तौर पर देखा जा रहा है। अब भारत दूसरे देशों पर डिपेंड हुए बिना बड़े और भारी सैटेलाइट्स की लॉन्चिंग देश में ही कर सकेगा। यह स्पेस में 4 टन तक के वजन वाले सैटेलाइट्स को ले जा सकता है। इसकी क्षमता मौजूदा जीएसएलवी मार्क 2 की दो टन की क्षमता से दोगुनी है। - धरती की कम ऊंचाई वाली ऑर्बिट तक 8 टन वजन ले जाने की ताकत रखता है, जो भारत के क्रू को लेकर जाने के लिए लिहाज से काफी है। इसरो पहले ही स्पेस में 2 से 3 मेंबर भेजने का प्लान बना चुका है। इसके लिए करीब 4 अरब डॉलर के फंड मिलने का इंतजार है।

6) इसे क्यों कहा जा रहा है फैट ब्वॉय सैटेलाइट?

GSLV मार्क 3 का वजन 630 टन है, जो 200 हाथियों (एक हाथी-करीब 3 टन) के बराबर है। ऊंचाई करीब 42 मीटर है। इसका वजन 5 पूरी तरह से भरे बोइंग जम्बो विमान या 200 हाथियों के बराबर है। इसीलिए इसे फैट ब्वॉय सैटेलाइट कहा जा रहा है। इसको बनाने में 160 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।

7) रॉकेट लॉन्चिंग में इसरो का क्या रिकॉर्ड?

इसरो के लिए यह मिशन आसान काम नहीं होगा। पहले रॉकेट लॉन्च में भारत का रिकॉर्ड कुछ खास अच्छा नहीं रहा है। 1993 में इसरो का PSLV पहले लॉन्च में फेल हो गया था। तब से अब तक इसके 39 लॉन्च कामयाब रहे हैं। - GSLV Mk-1 भी 2001 में अपने पहले लॉन्च में असफल हो गया था। तब से लेकर अब तक उससे 11 लॉन्च हुए हैं, जिसमें से आधे कामयाब रहे हैं।

8) इससे भारत को क्या फायदा मिलेगा?

GSLV मार्क 3 की पहली उड़ान कामयाबी होने से स्पेस में इंसान को भेजने का भारत का सपना जल्द पूरा हो सकता है। इसरो का यह जम्बो रॉकेट इंसानों को स्पेस में लेकर जाने की कैपिसिटी रखता है। इसरो के चेयमैन एएस. किरण कुमार ने कहा था कि अगर 10 साल या कम से कम 6 कामयाब लॉन्चिंग में सब कुछ ठीक रहा तो इस रॉकेट को 'धरती से भारतीयों को स्पेस में पहुंचाने वाले’ सबसे अच्छे ऑप्शन के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं।

9) भारत से पहला अंतरिक्ष यात्री कौन था?

स्पेस में जाने वाले भारत के पहले शख्स का नाम राकेश शर्मा है, जिन्होंने 2 अप्रैल 1984 को सोवियत यूनियन के मिशन के दौरान उड़ान भरी थी। शर्मा इंडियन एयरफोर्स के पायलट थे।

10) कितने देशों के पास यह कैपिसिटी?

GSLV मार्क 3 की कामयाबी के साथ भारत, रूस, अमेरिका और चीन के बाद ह्यूमन स्पेस फ्लाइट प्रोग्राम वाला दुनिया का चौथा देश बनने के और करीब पहुंच जाएगा।

11) स्पेस इंडस्ट्री में भारत कैसे आगे निकला?

रिकॉर्ड सैटैलाइट छोड़े। इसरो जो सैटेलाइट तैयार करता है, उसकी लागत कम होती है। इस वजह से वह ग्लोबल स्पेस इंडस्ट्री में आगे निकल रहा है। किसी हॉलीवुड मूवी की लागत से कम खर्च में भारत ने मंगल पर अपना मिशन भेज दिया था। इसरो कई करोड़ डॉलर के स्पेस लॉन्चिंग मार्केट में पकड़ मजबूत कर चुका है।

GSAT-11 को भी इसी साल छोड़ा जाएगा

इसरो के चेयरमैन किरण कुमार ने बताया कि GSAT-19 के बाद GSAT-11 को भी छोड़ा जाएगा। ये दो सैटेलाइट गेम चेंजर माने जा रहे हैं। कम्युनिकेशन में ये क्रांतिकारी बदलाव होगा। इनकी लॉन्चिंग डिजिटल इंडिया की दिशा में बेहद अहम कदम होगा। ये हाई स्पीड इंटरनेट सर्विस मुहैया कराने के साथ ही कम्युनिकेशन को असरदार बनाने में अहम रोल निभाएंगे। - स्पेस एप्लिकेशन सेंटर, अहमदाबाद के डायरेक्टर तपन मिश्रा ने बताया कि अगर यह लॉन्चिंग सफल रही तो अकेला GSAT-19 सैटेलाइट स्पेस में पहले से मौजूद पुराने किस्म के 6-7 कम्युनिकेश सैटेलाइट के ग्रुप के बराबर होगा। आज स्पेस में मौजूद 41 भारतीय सैटेलाइट्स में से 13 कम्युनिकेशन सैटेलाइट हैं। - मिश्रा के मुताबिक, इसे साल के आखिर में GSAT-11 छोड़ा जाएगा। इन दोनों सैटेलाइट के काम शुरू करते ही हाई क्वालिटी इंटरनेट, फोन और वीडियो सर्विस मिलनी शुरू हो जाएगी। स्पेस में पहले से मौजूद GSAT सैटेलाइट्स का प्रभावी डाटा रेट एक गीगाबाइट प्रति सेकंड है, जबकि GSAT-19 प्रति सेकंड 4 गीगाबाइट डाटा और GSAT-11 तेरह गीगाबाइट प्रति सेकंड की दर से डाटा ट्रांसफर करने के काबिल है।

दुनिया में कई ऐसे इलाके हैं जहां नये देश बनाने की मांग उठ रही है. आइए नजर डालते हैं दुनिया के सबसे नये नवेले देशों पर :

दक्षिणी सूडान

दक्षिणी सूडान दुनिया का सबसे नया देश है, जिसने 9 जुलाई 2011 को सूडान से आजादी का एलान किया. लेकिन आजादी के बाद से इस देश का सफर अच्छा नहीं रहा. तेल के संसाधनों से मालामाल साउथ सूडान गरीबी और सूखे का शिकार है. इसके अलावा राजनीतिक अस्थिरता और गृह युद्ध ने भी इस देश को उबरने नहीं दिया है.

कोसोवो

कोसोवो ने एकतरफा तौर पर 17 फरवरी 2008 को सर्बिया से आजादी की घोषणा की. सर्बिया के साथ साथ रूस ने भी इस कदम का विरोध किया. कोसोवो को अमेरिका और यूरोपीय संघ के बड़े देशों ने मान्यता दे दी है लेकिन अभी तक वह संयुक्त राष्ट्र का सदस्य नहीं है.

मोंटेनेग्रो और सर्बिया

1991 में यूगोस्लाविया के विघटन के बाद सर्बिया और मोंटेनेग्रो के नाम से एक देश की स्थापना हुई. लेकिन 2006 में उसका बंटवारा हो गया. मोंटेनेग्रो और सर्बिया दो अलग अलग देश बन गए. अलग होने की शुरुआत मोंटेनेग्रो ने की और 21 मई 2006 को एक जनमत संग्रह कराया. इसमें 55 प्रतिशत लोगों ने सर्बिया से अलग होने के हक में फैसला दिया.

पूर्वी तिमोर

पूर्वी तिमोर को अब तिमोर लेस्ते के नाम से जाना जाता है. उसे 20 मई 2002 को इंडोनेशिया से आजादी मिली. हालांकि इंडोनेशिया से अलग होने का फैसला पूर्वी तिमोर के लोग एक जनमत संग्रह में कई साल पहले ही कर चुके थे. जनमत संग्रह के बाद इलाके में हिंसा भड़क उठी. इंडोनेशिया समर्थक चरमपंथियों ने लोगों पर हमले किए, जिसके बाद वहां संयुक्त राष्ट्र बलों को तैनात करना पड़ा था.

पालाऊ

पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित पालाऊ 250 द्वीपों में फैला हुआ है, जिसकी आबादी 21 हजार से भी कम है. इसे एक अक्टूबर 1994 को आजादी मिली. हालांकि सांस्कृतिक और भाषाई अंतरों को देखते हुए पालाऊ ने इससे 15 साल पहले ही माइक्रोनेशिया से अलग होने का फैसला कर लिया था. संपन्न पर्यटन उद्योग के कारण उसे प्रशांत क्षेत्र के अमीर देशों में गिना जाता है.

एरिट्रिया

संयुक्त राष्ट्र ने 1952 में एरिट्रिया को इथियोपिया में एक स्वायत्त क्षेत्र के तौर पर स्थापित किया. लेकिन सम्राट हेले सेलासी ने 1962 में इसे पूरी तरह अपने राज्य का हिस्सा बना लिया. इससे वहां गृह युद्ध छिड़ गया जो 30 साल चला. लेकिन 1991 में इरीट्रियन पीपल्स लिबरेशन फ्रंट ने इथियोपिया की सेना को वहां से भगा दिया और दो साल बाद 1993 में आजादी की घोषणा की.

चेक रिपब्लिक और स्लोवाकिया

एक जनवरी 1993 को चेकोस्लोवाकिया को संसद ने भंग कर दिया और नतीजतन में दो अलग अलग देश अस्तित्व में आये. चेक गणराज्य और स्लोवाकिया. एक पार्टी वाले कम्युनिस्ट शासन को खत्म करने वाली "वेलवेट क्रांति" के बाद यह "वेलवेट डायवोर्स" था. दोनों ही देश अब यूरोपीय संघ का हिस्सा है जबकि स्लोवाकिया ने तो यूरो को भी अपना लिया है.

नामीबिया

अफ्रीकी देश नामीबिया 1990 तक दक्षिण अफ्रीका का हिस्सा था. कभी जर्मनी का उपनिवेश रहे नामीबिया पर पहले विश्व युद्ध के दौरान दक्षिण अफ्रीका ने कब्जा कर लिया था. लेकिन 21 मार्च 1990 को यह दक्षिण अफ्रीका से आजाद हो गया. इसकी आजादी के लिए 20 साल तक साउथ वेस्ट अफ्रीका पीपल्स ऑर्गेनाइजेशन नाम के गुट ने छापामार अभियान चलाया था.

जल्द ही वैज्ञानिक पृथ्वी की सबसे बड़ी दूरबीन की मदद से ब्रह्मांड की गहराई में झांक सकेंगे. लंबी और मुश्किल प्लानिंग के बाद यूरोपियन सदर्न ऑब्जरवेट्री ने दूरबीन निर्माण का काम शुरू किया है. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला तो ईएलटी (एक्सट्रीमली लार्ज टेलिस्कोप) 2024 से काम करने लगेगा.

ईएलटी में 39 मीटर व्यास के पांच विशाल दर्पण लगे हैं. फिलहाल जो सबसे बड़ी दूरबीन है, उसके लेंस का व्यास मात्र 10 मीटर है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नई दूरबीन कितनी ताकतवर होगी.

ईएलटी में दो आधुनिक स्पेक्ट्रोग्राफ लगे हैं. एडेप्टिव ऑप्टिक्स टेक्नोलॉजी से लैस दूरबीन वायुमंडल की हलचल को नजरअंदाज करते हुए ब्रह्मांड का नजारा दिखाएगी. इसके दर्पण एक सेकेंड में सैकड़ों बार पोजिशन बदल सकते हैं.

ईएलटी से मिलने वाली तस्वीरें हब्बल टेलिस्कोप के मुकाबले 15 गुना ज्यादा शार्प होंगी. इंसान की आंख के मुकाबले यह 1,000 गुना ज्यादा रोशनी को खीचेंगी. वैज्ञानिकों का दावा है कि ईएलटी की मदद से 400 साल बाद ब्रह्मांड के क्षेत्र में इंसान को क्रांतिकारी जानकारियां मिलेंगी.

यूरोपियन सदर्न ऑब्जरवेटरी की इस विशाल दूरबीन को बनाने के लिए 16 देश साथ आए हैं. पहले चरण में ही एक अरब यूरो का खर्च आएगा. दूरबीन की क्षमता को बढ़ाने के लिए इन्हें अटाकामा रेगिस्तान के सेरो आर्माजोनास पहाड़ पर बनाया जा रहा है. दूरबीन समुद्र तल से 3,048 मीटर ऊपर होगी.

धरती के अलावा क्या कहीं और जीवन मौजूद है? सदियों से इंसान इस सवाल का जवाब खोजना चाहता है. सुपर टेलिकोस्प इसका जबाव खोजने में मदद करेगा. यह सौर मंडल के बाहर मौजूद ग्रहों के बारे में भी बारीक जानकारी मुहैया कराएगी.

ब्रह्मांड में मौजूद आकाशगंगाएं और उन्हें निगलते ब्लैक होल. ईएलटी के जरिये यह भी पता चलेगा कि आकाशगंगाएं कैसे बनती हैं. ईएलटी की मदद से मिले डाटा को सुपर कंप्यूटर्स पर प्रोसेस करने से ब्लैकहोल और आकाशगंगाओं के भविष्य की गणना भी मुमकिन हो सकेगी.

सॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम किसानों के लिए शुरू की गयी एक क्रांतिकारी योजना है जिससे किसानों की खेती और उपज पर काफी फर्क पड़ रहा है। इससे फसल की  उत्पादकता में वृद्धि हो रही है और खेती की लागत कम हो रही है। इस स्कीम का शुभारंभ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 19 फरवरी 2015 को सूरतगढ़, राजस्थान में किया गया था। सॉयल हेल्थ कार्ड मिट्टी के पोषक तत्वों की स्थिति एवं और मिट्टी की उर्वरकता में सुधार के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले पोषक तत्वों की उचित मात्रा की सिफारिश की जानकारी किसानों को प्रदान करता है। इससे किसानों को खेत की मिट्टी की प्रकृति की जानकारी भी मिलती  है।

इसके बाद किसान उसी अनुसार खेत में उर्वरक और अन्य रसायन डालता है। इससे लागत में कमी आती है और उत्पादन में वृद्धि होती है।  सॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम के पहले 2 वर्षीय चक्र (2015-17) में अभी तक 2.53 करोड़ लक्षित नमून एकत्र किए जा चुके  हैं एवं 93% नमूने परीक्षित किए जा चुके हैं। राज्य सरकारों द्वारा लगभग 14 करोड़ सॉयल हेल्थ कार्ड बनाए जा रहे हैं जिसमें 31 मई तक 8 करोड़ किसानों को कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। अगले तीन माह में शेष सभी किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड उपलब्ध करा दिए जाएंगे। देश में अब तक सॉयल हेल्थ कार्ड के इस्तेमाल से काफी अच्छे परिणाम आए हैं।

16 राज्यों के 136 जिलों के किसानों से आई प्रतिक्रिया निम्नलिखित तथ्य दर्शाती है:-

1) नाइट्रोजन उर्वरकों के उपयोग में कमी आयी है और फॉस्फोरस पोटाश और सूक्ष्मपोषक तत्वों के उपयोग में बढ़ोतरी हुई  है।

2) धान में 16% से 25%,  दालों और तिलहनों में 10% से 15% खेती की लागत में कमी की सूचना मिली है।

3) धान में 10% से 22%, गेहूं और ज्वार में 10% से 15%, दालों में 10% से 30% और तिलहन में 35% से 66% की उत्पादन वृद्धि दर्ज की गयी है।

चीन की महत्वाकांक्षी ‘वन बेल्ट वन रोड' (ओबीओआर) योजना ने विश्व का ध्यान तो अपनी ओर खींच ही रखा है, खासकर चीन के पड़ोसी देश इसकी ओर बहुत ललचाई नजरों से देख रहे हैं. उन्हें लगता है कि जब 900 अरब डॉलर की इतनी बड़ी धनराशि खर्च की जाएगी तो उसका कुछ न कुछ हिस्सा तो सभी को मिलेगा.

बीजिंग में सम्पन्न हुए दो-दिवसीय बेल्ट एंड रोड फोरम (बीआरएफ) में भूटान को छोड़ कर भारत के सभी पड़ोसी देश इकट्ठा हुए, लेकिन भारत इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अनुपस्थित रहा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के आलोचक इसे विदेशनीति के मोर्चे पर सरकार की एक और विफलता बता रहे हैं क्योंकि भारत इस मुद्दे पर अलग-थलग पड़ गया है, लेकिन वहीं कुछ अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अभी भी इस योजना से लाभ उठा सकता है, बशर्ते वह अपने पत्ते सोच-समझकर खेले.

इस परियोजना का एक हिस्सा चीन और यूरेशिया के बीच सड़क एवं रेल संपर्क स्थापित करना है और दूसरा हिस्सा चीन को सामुद्रिक रास्तों के जरिये दक्षिण-पूर्व एशिया, दक्षिण एशिया एवं अफ्रीका के पूर्वी तट पर स्थित बंदरगाहों से जोड़ना है. यदि वह इस प्रयास में सफल हो जाता है, तो इस परियोजना के अंतर्गत स्थापित व्यापारिक संपर्कों के तहत दुनिया की 65 प्रतिशत आबादी, एक-तिहाई वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद और विश्व अर्थव्यवस्था की समस्त वस्तु एवं सेवाओं का एक-चौथाई हिस्सा आ जाएगा.

दिलचस्प बात यह है कि जहां अमेरिका, विकसित यूरोपीय देश और रूस इस परियोजना में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं, वहीं चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर के मुद्दे पर विरोध जता कर भारत ने इससे किनारा कर लिया है. यह कॉरिडोर जम्मू-कश्मीर के पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्र में से होकर गुजरता है जिस पर भारत का दावा है.

लेकिन सी. राजामोहन जैसे विदेशनीति के जानकार इसमें भी सकारात्मक तत्व देख रहे हैं. उनका कहना है कि जम्मू-कश्मीर विवाद में असल में भारत और पाकिस्तान---ये दो पक्ष ही नहीं हैं. इसमें चीन शुरू से ही एक पक्ष रहा है लेकिन भारत इस तथ्य की अनदेखी करता रहा है. चीन ने आर्थिक कॉरिडोर में भागीदारी के लिए भारत को भी आमंत्रित किया है. भारत को इस पेशकश को स्वीकार करके देखना चाहिए कि चीन और पाकिस्तान इस मामले में कितने ईमानदार हैं. अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के सामरिक महत्व को पूरी तरह से इस्तेमाल करके भारत चीन की सामुद्रिक महत्वाकांक्षाओं का सामना कर सकता है. भारत ने हमेशा अपने सीमांत प्रदेशों के महत्व को नजरंदाज किया है और इसका खामियाजा भी भुगता है. चीन की ओबीओआर परियोजना इन सीमांत प्रदेशों में उसकी स्थिति को और भी अधिक कमजोर कर सकती है यदि उसने अभी से वहां के ढांचागत विकास पर ध्यान नहीं दिया.

इस परियोजना ने भारत को नींद से जगाने का काम किया है वरना अचानक मोदी सरकार की ओर से उन परियोजनाओं की शिनाख्त न की जाती जो बरसों से उपमहाद्वीप का पड़ोसी देशों, दक्षिण-पूर्व एशिया और खाड़ी के देशों के साथ कनेक्टिविटी यानी सड़क, रेल, जलमार्ग और वायुमार्ग द्वारा संपर्क बढ़ाने के लिए चल रही हैं. लगता है अब उन्हें समाप्त करने पर सरकार विशेष ध्यान देने वाली है.

मोदी सरकार के आलोचकों का कहना है कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडॉर पर उसका आपत्ति करना बिलकुल उचित था लेकिन इस आधार पर उसे दो-दिवसीय सम्मेलन का बहिष्कार नहीं करना चाहिए था और उसमें भाग लेकर वहां अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने अपनी बात रखनी चाहिए थी. चीन पाकिस्तान के ग्वादर बन्दरगाह और श्रीलंका के हमबंटोटा बन्दरगाह के साथ सीधे जुड़कर अपनी सामुद्रिक शक्ति में कई गुना वृद्धि करने वाला है. ऐसे में भारत को अपनी सक्रियता बढ़ानी होगी. अलग-थलग पड़ जाना उसके हित में नहीं है.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमरीका पेरिस समझौते से बाहर निकल जाएगा. उन्होंने कहा कि वो नए सिरे से एक नया समझौता करेंगे जिसमें अमरीकी हितों की रक्षा उनका मकसद होगा. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वो एक ऐसा समझौता करना चाहेंगे जो अमरीका के औद्योगिक हितों की रक्षा करता हो और लोगों की नौकरियां बचाता हो. पिछले साल राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने मतदाताओं से चुनाव जीतने पर अमरीका को जलवायु परिवर्तन समझौते से बाहर करने का वादा किया था. मैं एक ऐसा समझौता करना चाहूंगा जो अमरीका के औद्योगिक हितों की रक्षा करे और लोगों की नौकरियां बचाता हो.

पेरिस समझौता ऐसा उदाहरण है जब वॉशिंगटन ने दूसरे देशों के फ़ायदे के लिए अमरीका के हितों को नुकसान पहुंचाया. अमरीका आज से ही गैर बाध्यकारी पेरिस समझौते को लागू करना बंद कर देगा. हम नहीं चाहते कि दुनिया के नेता और देश हम पर हंसे. वो अब हम पर नहीं हंसेगे. मैं पीट्सबर्ग के नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया हूं न कि पेरिस का प्रतिनिधित्व करने के लिए. मैंने वादा किया था कि मैं हर उस समझौते को तोड़ दूंगा या फिर से बातचीत करूंगा जो अमरीका के हितों का ध्यान नहीं रखता है.

क्या है पेरिस समझौता?

जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग का मतलब है उद्योगों और कृषि कार्यों से उत्सर्जित होने वाली गैसों से पर्यावरण पर होने वाले नकारात्मक और नुक़सानदेह असर. पेरिस समझौते का मक़सद गैसों का उत्सर्जन कम कर दुनियाभर में बढ़ रहे तापमान को रोकना था. वैश्विक तापमान को दो डिग्री सेल्सियस से नीचे रखना और कोशिश करना कि वो 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक न बढ़े. मानवीय कार्यों से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को इस स्तर पर लाना की पेड़, मिट्टी और समुद्र उसे प्राकृतिक रूप से सोख लें. इसकी शुरुआत 2050 से 2100 के बीच करना.हर पांच साल में गैस उत्सर्जन में कटौती में प्रत्येक देश की भूमिका की प्रगति की समीक्षा करना. विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्तीय सहायता के लिए 100 अरब डॉलर प्रति वर्ष देना और भविष्य में इसे बढ़ाने के प्रति प्रतिबद्धता.

अमरीकी भूल चीन के लिए मौक़ा

पेरिस जलवायु समझौते के दौरान अमरीका और चीन के बीच अहम सहमति बनी थी. अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति ओबामा और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इसमें बड़ी भूमिका अदा की थी. चीन इस बात को दोहरा रहा है वह पेरिस जलवायु करार के साथ खड़ा है. अमरीका के पीछे हटने और पेरिस जलवायु करार पर प्रतिबद्धता जताने के लिए चीन के साथ यूरोपियन यूनियन शनिवार को बयान जारी करने वाला है. ईयू के क्लाइमेट कमिश्नर मिगल अरिआस ने कहा, ''पेरिस जलवायु करार से किसी को भी पीछे नहीं हटना चाहिए. हमने और चीन ने इसके साथ चलने का संकल्प लिया है. ''बढ़ते तापमान की चुनौती का सामना करने के लिए कनाडा और मेक्सिको भी अहम भूमिका अदा कर सकते हैं.

कोल ईंधन की होगी वापसी

दूसरे विकसित देशों की तरह अमरीका भी कोयले के ईंधन से दूर हट चुका है. ब्रिटेन साल 2025 तक कोयले से बिजली पैदा करना पूरी तरह से बंद कर देगा. अमरीका के कोयला उद्योग में अब नौकरी सौर ऊर्जा के मुकाबले आधी बची है. दूसरी तरफ़ विकासशील देश अब भी बिजली के मामले में कोयले पर निर्भर हैं. यहां बिजली का प्राथमिक स्रोत कोयला है. ऊर्जा के दूसरे स्रोतों की कीमतों में कमी के कारण उभरती अर्थव्यवस्था वाले देश उस तरफ़ आकर्षित हो रहे हैं. भारत में हाल की एक नीलामी में सौर ऊर्जा की कीमत कोयले से उत्पादित होने वाली बिजली के मुकाबले 18 फ़ीसदी कम रही.

अमेरिका का यह रुख मोदी सरकार की नाकामी को जाहिर करता

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पेरिस जलवायु समझौते से हटते हुए भारत को भी आड़े हाथ लिया और उस पर अरबों खरबों डॉलर मांगने का आरोप लगाया. कुलदीप कुमार का कहना है कि अमेरिका का यह रुख मोदी सरकार की नाकामी को जाहिर करता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का आधे से अधिक कार्यकाल पूरा हो चुका है और अब उसके पास योजनाओं को पूरा करने के लिए केवल दो साल बचे हैं. विदेश नीति को विदेश मंत्री और उनके मंत्रालय के हाथ से लेकर स्वयं प्रधानमंत्री और उनके कार्यालय द्वारा चलाये जाने के नतीजे सुखद और सकारात्मक नहीं रहे हैं. अभी तक शायद किसी भी प्रधानमंत्री ने इतने विदेश दौरे नहीं किए, जितने मोदी कर चुके हैं लेकिन केवल वहां रहने वाले भारतीयों या भारतीय मूल के लोगों को प्रभावित करने के अलावा इन दौरों की अन्य कोई विशेष उपलब्धि सामने नहीं आ पायी है.

अब विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक और सामरिक शक्ति अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजातरीन बयान ने भारतीय विदेश नीति की विफलता को सरेआम उजागर कर दिया है. ट्रंप ने आरोप लगाया है कि पर्यावरण की रक्षा और कार्बन डाइऑक्साइड गैस के उत्सर्जन को कम करने के नाम पर भारत अरबों-खरबों डॉलर की मांग करता है और पेरिस समझौता भारत और चीन के पक्ष में झुका हुआ है. इसलिए अमेरिका इस समझौते से बाहर हो जाएगा.

भारत के लिए यह एक बहुत बड़ा झटका है. हालांकि अब चीन ने कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है, लेकिन अब भी वह 28 यूरोपीय देशों द्वारा कुल मिलाकर किए जाने वाले उत्सर्जन से अधिक गैस छोड़ रहा है. भारत का उत्सर्जन अमेरिका के उत्सर्जन के आधे से भी अधिक कम है जबकि उसकी जनसंख्या अमेरिका के मुकाबले चार गुना अधिक है. लेकिन ट्रंप और उनके सलाहकारों का मानना है कि कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन का स्तर कम करने से अमेरिका के औद्योगिक विकास पर असर पड़ेगा और उसके यहां रोजगार में कमी आएगी.

चेनानी-नाशरी सुरंग जिसे पत्नीटॉप सुरंग के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय राज्य जम्मू और कश्मीर के राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 44 (राष्ट्रीय राजमार्गों की संख्या पुनः निर्धारण से पूर्व नाम राष्ट्रीय राजमार्ग 1ए ) पर स्थित एक सड़क सुरंग है। इसका कार्य वर्ष 2011 में आरम्भ हुआ तथा उद्धघाटन 2 अप्रैल 2017 को किया गया।

यह भारत की सबसे लंबी सड़क सुरंग है जिसकी लंबाई 9.28 कि.मी. (5.8 मील) है। सुरंग बनाने पर मूल अनुमानित लागत ₹ 2,520 करोड़ (यूएस $ 367.92 मिलियन) थी लेकिन परिवर्धित करने में कुल ₹ 3,720 करोड़ (यूएस $ 543.12 मिलियन) खर्च हुये। मुख्य सुरंग का व्यास 13 मीटर है, जबकि समानांतर निकासी सुरंग का व्यास 6 मीटर है। मुख्य और निकासी सुरंगों में 29 स्थानों पर पार मार्ग बनाये गये हैं जो हर 300 मीटर की दूरी पर स्थिति हैं। यह देश की पहली पूर्ण रूप से एकीकृत सुरंग प्रणाली वाली सुरंग है।

सुरंग की सहायता से जम्मू और श्रीनगर के मध्य दूरी 30.11 कि.मी. (18.7 मील) रह गयी और यात्रा समय में दो घण्टे की कटौती हो गयी। पत्नीटॉप पर सर्दियों में बर्फबारी और हिमस्खलन के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर बाधा उत्पन्न होती थी तथा प्रत्येक शीतकाल में कई बार वाहनों की लम्बी कतार के कारण भी बाधा उत्पन्न होती थी - कई बार कई दिनों तक कतार में रहना पड़ता था। सुरंग पत्नीटॉप, कुद और बटोत को उपमार्गों से जोड़ती है जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर सर्दियों में ट्रैफ़िक जाम की समस्या को कम किया है।

1. सुरंग निचले हिमालय परास में स्थिति है जिसकी ऊँचाई 1200 मीटर है।

2. चेनानी-नाशरी सुरंग को आस्ट्रिया की नई सुरंग प्रौद्योगिकी से बनाया गया है। इसमें सुरक्षा के कई प्रावधान हैं। सभी का संचालन एक सॉफ्टवेयर से होता है।

3. इस परियोजना को बनाने का टेंडर एनएचआई के साथ आईएल एंड एफएस को मिला था।

4. यह सुरंग जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग को चार लेन का करने की परियोजना का हिस्सा है। जम्मू-श्रीनगर के बीच यात्रा की अवधि घटाने के लिए बारह ऐसी ही और सुरंग परियोजनाओं का निर्माण हो रहा है।

5. यह सुरंग ऊधमपुर जिले के चेनानी और रामबन जिले के नाशरी के बीच की 41 किलोमीटर की दूरी को घटाकर 10.89 किलोमीटर कर देगी और यह फासला महज दस मिनट में पार कर लिया जाएगा। अभी इसमें ढाई घंटे लगते हैं।

6. जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग को राज्य की जीवन रेखा माना जाता है।

7. सभी 12 सुरंगों का निर्माण पूरा होने के बाद जम्मू एवं श्रीनगर के बीच की 293 किलोमीटर की दूरी में से 62 किलोमीटर घट जाएंगे। यह 231 किलोमीटर की दूरी चार-साढ़े चार घंटे में तय कर ली जाएगी।

8. इस सुरंग की बेहद खास बात हर 150 मीटर पर एक आपातकालीन एसओएस कॉल बॉक्स और बाहर निकलने के लिए बचाव के रास्ते का होना है। इस रास्ते से होकर मुसाफिर सुरक्षा सुरंग तक जा सकेंगे जो इस मुख्य सुरंग के समानांतर बनाई गई है।

9. राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) ने फैसला किया है कि जम्मू एवं कश्मीर में लेह और श्रीनगर के बीच बनने वाली 14 किलोमीटर लंबी जोजी ला सुरंग को इसी तकनीक से बनाया जाएगा।

केंद्र की नरेंद्र मोदी कैबिनेट ने बुधवार19.04.2017 को वीवीआईपी कल्चर के खिलाफ एक बड़ा फैसले लिया है. आने वाली 1 मई से अब सिर्फ 5 लोग ही लाल बत्ती का इस्तेमाल कर पाएंगे. अब सिर्फ राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश और लोकसभा स्पीकर ही लाल बत्ती का इस्तेमाल कर सकेंगे. केंद्र की नरेंद्र मोदी कैबिनेट ने बुधवार को वीवीआईपी कल्चर के खिलाफ एक बड़ा फैसले लिया है. आने वाली 1 मई से अब सिर्फ 5 लोग ही लाल बत्ती का इस्तेमाल कर पाएंगे. अब सिर्फ राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश और लोकसभा स्पीकर ही लाल बत्ती का इस्तेमाल कर सकेंगे.

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में वीवीआईपी कल्चर को दरकिनार कर सामान्य ट्रैफिक में लोककल्याण मार्ग से लेकर दिल्ली एयरपोर्ट कर का सफर तय किया था. भारत दौरे पर आई बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शुक्रवार (7 अप्रैल) को भारत पहुंची, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद ही उनकी अगुवानी करने पहुंच गये थे.

पीएम मोदी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के स्वागत के लिये प्रोटोकॉल के विपरीत आईजीआई हवाईअड्डा पर खुद पहुंचे थे. इस दौरान उनके साथ सिर्फ ड्राइवर और एक एसपीजी कमांडो ही साथ थे.

विश्व आर्थिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) की 100 यंग ग्लोबल लीडर्स की सूची में पांच भारतीयों ने जगह बनाई है। इनमें पेटीएम के संस्थापक व सीईओ विजय शेखर शर्मा, द तमारा हॉस्पिटैलिटी की श्रुति शिबूलाल, ब्लिपर के संस्थापक व सीईओ अंबरीश मित्रा, फार्चून इंडिया के संपादक हिंडोल सेनगुप्ता, स्वानिती इनीशिएटिव की रित्विका भट्टाचार्य अग्रवाल शामिल हैं।

पेटीएम के सीईओ विजय शेखर शर्मा ने बताया कि मोबाइल वॉलेट सेवा देने वाली कंपनी पेटीएम मार्च के अंत तक देश में पेमेंट बैंक का परिचालन भी शुरू करने वाली है। उन्होंने बताया कि यह पेमेंट बैंक उन लाखों लोगों को बैंकिंग सेवा उपलब्ध कराने पर केंद्रित होगा जो अब तक इससे पूरी तरह या आंशिक रूप से वंचित हैं।

हॉस्पिटैलिटी वेंचर द तमारा की मुखिया श्रुति इंफोसिस के सह-संस्थापक एसडी शिबूलाल की बेटी हैं। अभी तमारा बेंगलुरु और केरल में काम कर रहा है। मित्रा के नेतृत्व वाली ब्लिपर एक मोबाइल फोन एप कंपनी है। इसका कारोबार डेढ़ अरब डॉलर का है।

इस सूची में पब्लिक सेक्टर से अजा ब्राउन को स्थान मिला है। वह कैलिफोर्निया के कांप्टन की सबसे युवा मेयर हैं। दुनियाभर में एप्पल के महात्वाकांक्षी क्लीन एनर्जी प्रोग्राम का नेतृत्व करने वाली केटी हिल को भी सूची में जगह मिली है। इसमें जीनोम एडिटिंग पर काम करने वाले विश्व के दो शीर्ष वैज्ञानिकों ने नाम भी हैं। इनमें ई-जेनेसिस बायोसाइंसेज के प्रमुख वैज्ञानिक लुहान यांग और एमआइटी और हार्वर्ड के बोर्ड के सदस्य फेंग झांग शामिल हैं।

दक्षिण एशिया से इस सूची में नौ लोगों को जगह मिली है। इनमें से पांच भारत के हैं। इस सूची में अमरीका और यूरोप में रह रहे भारतीय मूल के कुछ और लोग भी जगह बनाने में सफल रहे हैं। डब्ल्यूईएफ हर साल दुनिया के 100 यंग ग्लोबल लीडर्स का चयन करता है। इनकी उम्र 40 साल से ज्यादा नहीं होती है। इनमें ऐसे लोगों को चुना जाता है जो नए नजरिए के साथ दुनिया की सबसे जटिल चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इस सूची में आधे लोग बिजनेस तो आधे नॉट-फॉर-प्रॉफिट सेक्टर से लिए गए हैं। इन्होंने अच्छा काम करके लोगों के जीवन में बदलाव लाने का काम किया है।

आजादी के करीब 70 साल बाद भारत की पहली मेड इन इंडिया ट्रेन 18.03.2017 से चलनी शुरू. रेलमंत्री सुरेश प्रभु मुंबई में ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे. भारत की स्वदेशी ट्रेन का नाम 'मेधा' रखा गया है. अपनी पहली यात्रा में मेधा ट्रेन ने मुंबई के चर्चगेट से लोकमान्य तिलक टर्मिनस (एलटीटी) तक की यात्रा की.

इससे पहले 'मेधा' ट्रेन का कई चरण में सफल ट्रायल किया जा चुका है. इस ट्रेन को कमिश्नर ऑफ रेल सेफ्टी (सीआरएस) की स्वीकृति मिल चुकी है. 

भारत की स्वदेशी ट्रेन में कई ऐसी खूबियां हैं जो उसे दुनिया के कई ट्रेनों से उसे अगल बनाती है. इस ट्रेन में एक साथ 6,050 यात्री यात्रा कर सकते हैं. इसमें 1,168 सीटे हैं. इस ट्रेन की स्पीड 110 किमी प्रति घंटा है.

इस ट्रेन में फ्रेश एयर कूलिंग क्षमता 16,000 प्रति घंटा मीटर क्यूबिक है. रिजेनरेटड ब्रेकिंग सिस्टम युक्त यह रेक 30 से 35 प्रतिशत बिजली परिचालन के दौरान बचा सकती है. रेलवे अधिकारी के मुताबिक मेड-इन-इंडिया ट्रेन 'मेधा' को बनाने में लगभग 43.23 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. जबकि विदेश से खरीदी जाने वाली बॉम्बार्डियर ट्रेन की कीमत 44.36 करोड़ रुपए है.

मेक इन इंडिया के तहत देश की पहली स्वदेशी लोकल 'मेधा' हैदराबाद मेधा सर्वो ड्राइव्स फर्म की ओर से प्रायोजित है और चेन्नई कोच फैक्ट्री में तैयार किया गया है. वर्तमान में मध्य और पश्चिम रेल पर परिचालित होने वाली लोकल चैन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) में तैयार होती है. इन लोकल ट्रेनों में इलेक्ट्रिक तकनीकी समेत अन्य तकनीकी संबंधी काम सीमेंस और बॉम्बार्डियर कंपनियों की देख रेख में होता है. ये कंपनियां विदेशी है.

बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम (Benami Transactions Prohibition-Act) भारतीय संसद द्वारा पारित एक अधिनियम है जो बेनामी लेनदेन का निषेध करता है। यह पहली बार 1988 में पारित हुआ तथा २०१६ में इसमें संशोधन किया गया। संशोधित कानून 01 नवम्बर, 2016 से लागू हो गया। संशोधित बिल में बेनामी संपत्‍तियों को जब्‍त करने और उन्‍हें सील करने का अधिकार है। साथ ही, जुर्माने के साथ कैद का भी प्रावधान है। भारत में काले धन की बढ़ती समस्‍या को खत्‍म करने की दिशा में यह एक और कदम है।

मूल अधिनियम में बेनामी लेनदेन करने पर तीन साल की जेल और जुर्माना या दोनों का प्रावधान था। संशोधित कानून के तहत सजा की अवधि बढ़ाकर सात साल कर दी गई है। जो लोग जानबूझकर गलत सूचना देते हैं उन पर सम्पत्ति के बाजार मूल्य का 10 प्रतिशत तक जुर्माना भी देना पड़ सकता है। नया कानून घरेलू ब्लैक मनी खासकर रियल एस्टेट सेक्टर में लगे काले धन की जांच के लिए लाया गया है।

बेनामी संपत्ति वह है जिसकी कीमत किसी और ने चुकाई हो किन्तु नाम किसी दूसरे व्यक्ति का हो। यह संपत्त‍ि पत्नी, बच्चों या किसी रिश्तेदार के नाम पर खरीदी गई होती है। जिसके नाम पर ऐसी संपत्त‍ि खरीदी गई होती है, उसे 'बेनामदार' कहा जाता है। बेनामी संपत्ति चल या अचल संपत्त‍ि या वित्तीय दस्तावेजों के तौर पर हो सकती है। कुछ लोग अपने काले धन को ऐसी संपत्ति में निवेश करते हैं जो उनके खुद के नाम पर ना होकर किसी और के नाम होती है। ऐसे लोग संपत्ति अपने नौकर, पत्नी-बच्चों, मित्रों या परिवार के अन्य सदस्यों के नाम से खरीदते लेते हैं।

आमतौर पर ऐसे लोग बेनामी संपत्त‍ि रखते हैं जिनकी आमदनी का वर्तमान स्रोत स्वामित्व वाली संपत्त‍ि खरीदने के लिहाज से अपर्याप्त होता है। यह बहनों, भाइयों या रिश्तेदारों के साथ संयुक्त सम्पत्ति भी हो सकती है जिसकी रकम का भुगतान आय के घोषित स्रोतों से किया जाता है। इसमें संपत्त‍ि के एवज में भुगतान करने वाले के नाम से कोई वैध दस्तावेज नहीं होता है। ऐसे मामलों में बेनामी लेनदेन में शामिल दोनों पक्षों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

अगर किसी ने अपने बच्चों या पत्नी के नाम संपत्ति खरीदी है लेकिन उसे अपने आयकर रिटर्न में नहीं दिखाया तो उसे बेनामी संपत्ति माना जायेगा। अगर सरकार को किसी सम्पत्ति पर अंदेशा होता है तो वो उस संपत्ति के मालिक से पूछताछ कर सकती है और उसे नोटिस भेजकर उससे उस प्रॉपर्टी के सभी कागजात मांग सकती है जिसे मालिक को 90 दिनों के अंदर दिखाना होगा। अगर जाँच में कुछ गड़बड़ी पायी गई तो उस पर कड़ी कार्यवाही हो सकती है।

इस नए कानून के अन्तर्गत बेनामी लेनदेन करने वाले को 3 से 7 साल की जेल और उस प्रॉपर्टी की बाजार कीमत पर 25% जुर्माने का प्रावधान है। अगर कोई बेनामी संपत्ति की गलत सूचना देता है तो उस पर प्रॉपर्टी के बाजार मूल्य का 10% तक जुर्माना और 6 महीने से 5 साल तक की जेल का प्रावधान रखा गया है। इनके अलावा अगर कोई ये सिद्ध नहीं कर पाया की ये सम्पत्ति उसकी है तो सरकार द्वारा वह सम्पत्ति जब्त भी की जा सकती है।

संसद के बजट सत्र के दूसरा चरण चल रहा है. 14.03.2017 को लोकसभा में गृहमंत्री राजनाथ सिंह शत्रु संपत्ति संशोधन बिल को पेश करेंगे. इसको लेकर बीजेपी ने अपने सभी सांसदों को व्हिप जारी कर सदन में मौजूद रहने को कहा है.

राज्यसभा करीब 50 साल पुराने शत्रु संपत्ति कानून में संशोधन संबंधित बिल को पास कर चुका है. इस बिल में युद्ध के बाद पाकिस्तान और चीन पलायन कर गए लोगों की तरफ से छोड़ी गई संपत्ति पर उत्तराधिकार के दावों को रोकने के प्रावधान किए गए हैं. विभाजन या युद्ध के बाद गए लोगों की छूटी प्रॉपर्टी के दावों से निपटने के प्रावधान हैं. इसके मुताबिक पलायन करके वहां की नागरिकता लेने वाले लोगों की संपत्ति जब्त कर ली जाएगी.

भारत में रह रहे उत्तराधिकारियों का भी उनकी छूटी संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं रहेगा. संशोधनों से ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोगों के प्रभावित होने से ये मामला विवाद में भी है. संसद से पारित होने के बाद यह बिल इस संबंध में सरकार की तरफ से जारी किए गए ऑर्डिनेंस का स्थान लेगा.

48 साल पुराने इस एनिमी प्रॉपर्टी एक्ट बिल को को राज्यसभा से पास कर दिया गया. हालांकि राज्यसभा में विपक्ष की गैरमौजूदगी में ये बिल पास किया गया था. राज्यसभा में लंबित रहने की वजह से सरकार को इसके लिए पांच बार ऑर्डिनेंस लाना पड़ा था.

विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने यह बिल राज्यसभा में धोखे से पास कराया है. विपक्ष की मांग थी कि इस विधेयक पर आज चर्चा नहीं की जाए और अगले सप्ताह इस पर व्यापक चर्चा की जाए जब सदन में ज्यादातर सदस्य मौजूद हो.

सरकार ने कैसे पास किया बिल : उस समय सदन में मौजूद सदस्यों की संख्या कम थी और कांग्रेस के एक सदस्य ने कोरम का मुद्दा भी उठाया. हालांकि उपसभापति कुरियन ने गणना प्रकिया पूरी किए जाने के बाद कहा कि सदन में कोरम मौजूद है. बाद में सरकार के इस विधेयक के पारित कराने पर जोर दिए जाने पर कांग्रेस, वाम, तृणमूल सहित विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया था.

नरेंद्र मोदी की भारत सरकार द्वारा पिछले लगभग दो साल में कई योजनाओं की शुरुआत की गयी है जिनका लाभ सीधा भारत की जनता को मिल रहा है. सभी 50 से ज्यादा नयी सरकारी योजनाओं की सूची जो भी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने अभी तक शुरू की हैं या पुरानी बंद योजनाओं को दोबारा से शुरू किया है उनकी सूची नीचे है.

1-प्रधानमंत्री जन धन योजना

2-प्रधानमंत्री आवास योजना

3-प्रधानमंत्री सुकन्या समृद्धि योजना

4-प्रधानमंत्री मुद्रा योजना

5-प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना

6-प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना

7-अटल पेंशन योजना

8-संसद आदर्श ग्राम योजना

9-प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

10-प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना

11-प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजनाये

12-प्रधानमंत्री जन औषधि योजना

13-मेक इन इंडिया

14-स्वच्छ भारत अभियान

15-किसान विकास पत्र

16-सॉइल हेल्थ कार्ड स्कीम

17-डिजिटल इंडिया

18-स्किल इंडिया

18-बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना

20-मिशन इन्द्रधनुष

21-दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना

22-दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण

23-कौशल्या योजना

24-पंडित दीनदयाल उपाध्याय श्रमेव जयते योजना

25-अटल मिशन फॉर रेजुवेनशन एंड

26-अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत योजना)

27-स्वदेश दर्शन योजना

28-पिल्ग्रिमेज रेजुवेनशन एंड स्पिरिचुअल ऑग्मेंटशन ड्राइव (प्रसाद योजना)

29-नेशनल हेरिटेज सिटी डेवलपमेंट एंड ऑग्मेंटशन योजना (ह्रदय योजना)

30-उड़ान स्कीम

31-नेशनल बाल स्वछता मिशन

32-वन रैंक वन पेंशन (OROP) स्कीम

33-स्मार्ट सिटी मिशन

34-गोल्ड मोनेटाईजेशन स्कीम

35-स्टार्टअप इंडिया, स्टन्डप इंडिया

36-डिजिलोकर

37-इंटीग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्कीम

38-श्यामा प्रसाद मुखेर्जी रुर्बन मिशनसागरमाला प्रोजेक्ट

39-‘प्रकाश पथ’ – ‘वे टू लाइट’

40-उज्वल डिस्कॉम असुरन्स योजनाविकल्प स्कीम

41-नेशनल स्पोर्ट्स टैलेंट सर्च स्कीम

42-राष्ट्रीय गोकुल मिशन

43-पहल – डायरेक्ट बेनिफिट्स ट्रांसफर फॉर LPG (DBTL) कंस्यूमर्स स्कीम

44-नेशनल इंस्टीटूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (नीति आयोग)

45-प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना

46-नमामि गंगे प्रोजेक्ट

47-सेतु भारतं प्रोजेक्ट

48-रियल एस्टेट बिल

49-आधार बिल

50-क्लीन माय कोच

51-राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान – Proposed

52-प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना

राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 भारत सरकार द्वारा अधिसूचित एक कानून है जिसके माध्यम से भारत सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में जनसाधारण को खाद्यान्न उपलब्ध हो सके।

भारतीय संसद द्वारा पारित होने के उपरांत सरकार द्वारा 10 सितम्‍बर, 2013 को इसे अधिसूचित कर दिया गया।

राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का उद्देश्‍य लोगों को सस्‍ती दर पर पर्याप्‍त मात्रा में उत्‍तम खाद्यान्‍न उपलब्ध कराना है ताकि उन्हें खाद्य एवं पोषण सुरक्षा मिले और वे सम्‍मान के साथ जीवन जी सकें।

मुख्य प्रावधान

इस कानून के तहत लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में 75 प्रतिशत तक तथा शहरी क्षेत्रों की 50 प्रतिशत तक की आबादी को रियायती दरों पर खाद्यान्‍न उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इस प्रकार देश की लगभग दो-तिहाई जनसंख्‍या को इसका लाभ मिलने का अनुमान है। पात्र परिवारों को प्रतिमाह पांच कि. ग्रा. चावल, गेहूं व मोटा अनाज क्रमशः 3, 2 व 1 रुपये प्रति कि. ग्रा. की रियायती दर पर मिल सकेगा। अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) मे शामिल परिवारों को प्रति परिवार 35 कि. ग्रा. अनाज का मिलना पूर्ववत जारी रहेगा। इसके लागू होने के 365 दिन के अवधि के लिए, लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएम) के अंतर्गत‍ सब्सिडीयुक्‍त खाद्यान्‍न प्राप्‍त करने हेतु, पात्र परिवारों का चयन किया जाएगा। गर्भव‍ती तथा स्तनपान कराने वाली महिलाओं को गर्भावस्‍था के दौरान तथा प्रसव के छ: माह के उपरांत भोजन के अलावा कम से कम 6000 रुपये का मातृत्‍व लाभ भी मिलेगा।

14 वर्ष तक की आयु के बच्‍चे पौष्टिक आहार अथवा निर्धारित पौष्टिक मानदण्‍डानुसार घर राशन ले जा सकें।खाद्यान्‍न अथवा भोजन की आपूर्ति न हो पाने की स्थिति में, लाभार्थी को खाद्य सुरक्षा भत्‍ता दिया जाएगा। इस अधिनियम के जिला एवं राज्‍यस्‍तर पर शिकायत निवारण तंत्र स्‍थापित करने का भी प्रावधान है।

पारदर्शिता एवं उत्‍तरदायित्‍व सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्‍यक प्रावधान किए गए हैं।

नेशनल स्किल्स क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) अर्थात् राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क ज्ञान, कौशल और अभिरुचि के अनेक स्तरों के अनुसार योग्यताएं निर्धारित करता है. इन स्तरों को सीखने के परिणामों के संदर्भ में परिभाषित किया जाता है, जो प्रशिक्षार्थी को अवश्य हासिल करने होते हैं, भले ही ये कौशल उसने औपचारिक या अनौपचारिक प्रशिक्षण के जरिए हासिल न किए हों. इस अर्थ में एनएसक्यूएफ एक गुणवत्ता आश्वासन फ्रेमवर्क है. अत: यह एक राष्ट्रीय एकीकृत शिक्षा और योग्यता आधारित कौशल फ्रेमवर्क है, जो व्यावसायिक शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, सामान्य शिक्षा और तकनीकी शिक्षा के रूप में समानांतर और शीर्षवत दोनों ही दिशाओं में अधिसंख्य मार्ग प्रदान करेगा. इस तरह यह फ्रेमवर्क सीखने के एक स्तर को अन्य उच्चतर स्तर के साथ भी जोड़ेगा. इससे कोई व्यक्ति वांछित सक्षमता स्तर हासिल कर सकेगा, व्यवसाय बाजार में प्रवेश कर सकेगा और अवसर पाकर अपनी सक्षमताओं को उन्नत बनाने के लिए अतिरिक्त कौशल हासिल कर सकेगा.

एनएसक्यूएफ के मुख्य तत्व इस प्रकार हैं:-

क)विभिन्न स्तरों पर कौशल प्रवीणता और सक्षमताओं की पहचान के लिए राष्ट्रीय सिद्धांत निर्धारित करना ताकि उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर के समकक्ष बनाया जा सके.

ख)व्यावसायिक शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, सामान्य शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और व्यवसाय बाजार में प्रवेश करने और बाहर आने के अधिसंख्य अवसर प्रदान करना.

ग)कौशल योग्यता फ्रेमवर्क के भीतर प्रगति मार्ग निर्धारित करना.

घ)जीवन पर्यंत प्रशिक्षण और कौशल विकास के अवसरों को बढ़ावा देना.

ङ)उद्योग/नियोक्ताओं के साथ साझेदारी.

च) विभिन्न क्षेत्रों के बीच कौशल विकास के लिए एक पारदर्शी, जवाबदेह और भरोसेमंद व्यवस्था कायम करना.

छ)पहले सीखी गई चीजों को मान्यता देने की अधिक क्षमता कायम करना.

योग्यता फ्रेमवर्क स्कूलों, व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदाताओं, उच्चतर शिक्षा संस्थानों, प्राधिकरणों और उद्योग एवं उसके प्रतिनिधिक निकायों, संघों, व्यावसायिक असोसिएशनों और लाइसेंसिंग प्राधिकरणों के प्रत्यायन के लिए लाभदायक है. इस फ्रेमवर्क के सबसे बड़े लाभार्थियों में वे प्रशिक्षक शामिल हैं, जो फ्रेमवर्क में किसी विशेष स्तर पर किसी योग्यता के सापेक्षिक मूल्य का परीक्षण कर सकते हैं और उनकी व्यावसायिक प्रगति के मार्गों के बारे में विवेकपूर्ण निर्णय कर सकते हैं.

योग्यता फ्रेमवर्क संबंधी अंतर्राष्ट्रीय अनुभव

जानकारी पर आधारित शिक्षा से प्रशिक्षण परिणामों पर आधारित शिक्षा की दिशा में एक आदर्श परिवर्तन हो रहा है. परिणाम आधारित प्रशिक्षण का प्रयोग व्यापक अर्थ में किया जा रहा है. परिणाम आधारित प्रशिक्षण की दिशा में बदलाव कई कारणों से महत्वपूर्ण हैं:-

क) यह पद्धति शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदाताओं की बजाय उसके इस्तेमालकर्ताओं पर ध्यान केंद्रित करती है.

ख) किसी प्रशिक्षण प्र्रिक्रया के अंत में किसी प्रशिक्षार्थी से क्या जानने, समझने अथवा क्या करने की अपेक्षा की जाती है, यह स्पष्टीकरण प्रशिक्षार्थियों को इस बात को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है कि किसी पाठ्यक्रम विशेष में क्या प्रस्तावित किया गया है और इसका संबंध अन्य पाठ्यक्रमों और कार्र्यक्रमों के साथ कैसे जुड़ता है.

ग) यह योग्यताओं में पारदर्शिता बढ़ाता है और जवाबदेही सुदृढ़ करता है, जो अलग-अलग प्रशिक्षार्थियों और नियोक्ताओं के लिए लाभदायक है.

विश्व के औद्योगिक और विकासशील देशों में से अधिकतर अपनी योग्यताओं के फ्रेमवर्क में सुधार कर रहे हैं और साथ ही ऐसा फ्रेमवर्क तैयार कर रहे हैं, जिससे इन योग्यताओं को एक-दूसरे के साथ जोड़ा जा सके और समाज तथा श्रम बाजार में नई मांगें आमतौर पर पूरी की जा सकें. इन प्रणालियों के विकास को अक्सर उच्चतर शिक्षा, तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (टीवीईटी) और जीवन पर्यंत शिक्षा में हो रहे परिवर्तनों के साथ जोड़ा जाता है.

विश्वभर में अनेक देश योग्यता फ्रेमवर्क शुरू करने की प्रक्रिया में हैं. हालांकि सभी फ्रेमवर्कों के सैद्धांतिक मानदंड अधिकतर समान हैं, परंतु फ्रेमवर्क शुरू करने के लक्ष्य भिन्न हैं. चाहे शिक्षा और प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की प्रासंगिकता और उनका लचीलापन बढ़ाने, पहले से प्राप्त किए गए प्रशिक्षण को आसानी से मान्यता प्रदान करने, जीवन पर्यंत प्रशिक्षण को बढ़ावा देने, योग्यता प्रणालियों की पारदर्शिता में सुधार लाने, उनकी साख बढ़ाने और उनके हस्तांतरण के लिए संभावनाएं पैदा करने या गुणवत्ता आश्वासन प्रणालियों का विकास करने, जैसे विषयों के लिए सरकारें निरंतर योग्यता फ्रेमवर्कों को सुधार के लिए एक नीतिगत साधन के रूप में अपना रही हैं.

भारत में योग्यता फ्रेमवर्क की आवश्यकता

भारत में सामान्य शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण पृथक दायरों में प्रचालित किए जा रहे हैं और दोनों के बीच परस्पर संबंध बहुत कम हैं. इससे व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण को अपनाने में युवाओं को संकोच होता है, क्योंकि यह समझा जाता है कि यह क्षेत्र सम्बद्ध व्यक्ति को उच्चतर डिग्रियां और योग्यताएं हासिल करने से रोकता है. व्यावसायिक शिक्षा से सामान्य शिक्षा और इसके विपरीत दिशा में गतिशीलता बढ़ाने के लिए, भारत के लिए एक योग्यता फ्रेमवर्क अर्थात् राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) आवश्यक है, जो योग्यताओं को अधिक समझने योग्य और पारदर्शी बनाने में मदद करेगा. एनएसक्यूएफ की आवश्यकता निम्नांकित अतिरिक्त कारणों से भी है:-

क) अभी तक शिक्षा और प्रशिक्षण का फोकस लगभग पूरी तरह जानकारी पर आधारित रहा है. एनएसक्यूएफ परिणाम आधारित दृष्टिकोण पर आधारित है और एनएसक्यूएफ में प्रत्येक स्तर सक्षमता के संदर्भ में निर्धारित और वर्णित किया जाता है, जो हासिल किया जाना अपेक्षित होता है. इनमें से प्रत्येक सक्षमता स्तर के समरूप व्यावसायिक भूमिकाओं का निर्धारण उद्योग की भागीदारी से, सम्बद्ध क्षेत्रगत कौशल परिषदों (एसएससीज़) के जरिए किया जाता है.

ख) सीखने और आगे बढऩे के मार्ग, विशेषकर व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में, सामान्यत: अस्पष्ट या नदारद होते हैं. समानांतर गतिशीलता का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है. एनएसक्यूएफ प्रगति के मार्गों को पारदर्शी बनाएगा ताकि संस्थान, विद्यार्थी और कर्मचारी स्पष्ट रूप से यह समझ सकें कि किसी विशेष पाठ्यक्रम को पूरा करने के बाद वे क्या कर सकते हैं और क्या नहीं कर सकते तथा योग्यताओं में असमानता और भेदभाव के मुद्दों का समाधान कैसे किया जा सकता है.

ग) संस्थानों के बीच विभिन्न योग्यताओं से सम्बद्ध परिणामों में एकरूपता का अभाव है. प्रत्येक संस्थान के पाठ्यक्रमों के बारे में पृथक अवधि, पृथक सिलेबस, भर्ती और पाठ्यक्रम के नाम के बारे में अलग-अलग जरूरतें हैं. इससे अक्सर देश के विभिन्न हिस्सों में प्रमाणपत्रों/डिप्लोमा/ डिग्रियों की समकक्षता कायम करने में समस्याएं आती हैं. इसका दुष्प्रभाव विद्यार्थियों की रोजगार सक्षमता और गतिशीलता पर पड़ता है.

घ)योग्यताओं की गुणवत्ता के विकास से व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण से सम्बद्ध नकारात्मक धारणा महत्वपूर्ण ढंग से दूर की जा सकती है, इससे डिग्रियों और डॉक्टोरेट उपाधियों सहित उच्चतर शिक्षा ग्रहण करने की भी अनुमति मिलती है.

ङ) लोगों का एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है, जिन्होंने अनौपचारिक क्षेत्र में कौशल हासिल किया है, परंतु उनके पास अपने कौशल को दर्शाने के लिए आवश्यक औपचारिक प्रमाणपत्र नहीं हैं. सक्षमता आधारित और परिणाम आधारित योग्यता फ्रेमवर्क के रूप में एनएसक्यूएफ पूर्व प्रशिक्षण को मान्यता (आरपीएल) प्रदान करेगा, जिसका वर्तमान शिक्षा और प्रशिक्षण के परिप्रेक्ष्य में व्यापक अभाव है.

च) अधिसंख्य भारतीय योग्यताएं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और अंतर्राष्ट्रीय योग्यताएं राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नहीं हैं. इससे विद्यार्थियों और कार्मिकों के समक्ष समस्या पैदा होती है, क्योंकि उनकी अंतर्राष्ट्रीय गतिशीलता पर दुष्प्रभाव पड़ता है और उन्हें फिर से वह योग्यता प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम करना होता है, जो मेजबान देश में मान्यताप्राप्त हो. एनएसक्यूएफ सम्बद्ध द्विपक्षीय और बहुराष्ट्रीय समझौतों के माध्यम से भारतीय योग्यताओं को अंतर्राष्ट्रीय योग्यताओं के अनुरूप बनाने में मदद करेगा. अनेक देश पहले से ही योग्यता फ्रेमवर्कों के जरिए अपनी योग्यताओं को अंतर्राष्ट्रीय योग्यताओं के अनुरूप बनाने की प्र्रिक्रया में हैं.

छ)एनएसक्यूएफ में एकीकृत साख संचय और अंतरण प्रणाली, लोगों को उनके जीवन में विभिन्न स्तरों पर उनकी जरूरतों और सुविधा के अनुसार शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा और रोजगार के बीच गतिशील होने की अनुमति प्रदान करेगी. किसी भी विद्यार्थी के लिए यह संभव हो सकेगा कि वह शिक्षा क्षेत्र को छोड़ सके, उद्योग में कुछ व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर सके और अपने चुने हुए व्यवसाय में उच्चतर प्रगति करने के लिए वापस आकर योग्यताएं प्राप्त करने के लिए अध्ययन कर सके.

एनएसक्यूएफ के लक्ष्य

एनएसक्यूएफ के उद्देश्यों में एक ऐसा फ्रेमवर्क उपलब्ध कराना शामिल है, जो:-

क)भारतीय शिक्षा और प्रशिक्षण प्रणाली की विविधता को समायोजित कर सके.

ख)देशभर में स्वीकृत परिणामों के आधार पर योग्यताओं के प्रत्येक स्तर के लिए एक सेट का विकास कर सके.

ग)प्रगति के मार्गों के विकास और रखरखाव के लिए एक ऐसा ढांचा उपलब्ध करा सके, जो योग्यताओं तक पहुंच प्रदान करे और लोगों को इन क्षेत्रों और श्रम बाजार के बीच  विभिन्न शैक्षिक और प्रशिक्षण क्षेत्रों में शीघ्र एवं सुगम प्रवेश एवं वापसी की सुविधा प्राप्त करने में सहायता कर सके. 

घ)लोगों को यह विकल्प प्रदान कर सके कि वे अपने पूर्व प्रशिक्षण और अनुभवों के लिए मान्यताप्राप्त करते हुए शिक्षा और प्रशिक्षण के जरिए तरक्की कर सके.

ङ)शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए राष्ट्रीय नियामक और गुणवत्ता आश्वासन प्रबंधों को नया आधार प्रदान कर सकें.

च)भारतीय योग्यताओं के महत्व और समतुल्यता को अधिक मान्यता देने के जरिए एनएफक्यूएस-अनुवर्ती योग्यताएं रखने वाले व्यक्तियों की राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय गतिशीलता का समर्थन और संवर्धन करें.

एनएसक्यूएफ एक गुणवत्ता आश्वासन फ्रेमवर्क है

- यह भारतीय शिक्षा और प्रशिक्षण प्रणाली के भीतर साख प्रदान करने और उसके स्थानांतरण और संवर्धन मार्गों को प्रोत्साहित करता है. यह शिक्षा और प्रशिक्षण में शामिल प्रत्येक पक्ष को देश में प्रस्तावित योग्यताओं के बीच तुलना करने में शामिल होने में मदद करता है और यह समझाता है कि इनमें प्रत्येक के बीच क्या संबंध है.

यह कैसे काम करता है?

नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क में 10 स्तर शामिल हैं. प्रत्येक स्तर अपने समनुरूप सक्षमता प्रदर्शित करने के लिए जटिलता, ज्ञान और स्वायत्तता का भिन्न स्तर प्रस्तुत करता है. फ्रेमवर्क का स्तर-1 निम्नतम जटिलता प्रस्तुत करता है, जबकि स्तर-10 सर्वाधिक जटिलता प्रस्तुत करता है. स्तरों को प्रशिक्षण के परिणामों के रूप में व्यक्त मानदंड द्वारा परिभाषित किया जाता है. योग्यताएं अर्जित करने के लिए धारणात्मक समय व्यक्त करते हुए प्रशिक्षण की मात्रा कुछ स्तरों और कुछ क्षेत्रों के लिए निर्धारित की जा सकती है, परंतु यह जानना महत्वपूर्ण है कि एनएसक्यूएफ के स्तर अध्ययन के वर्षों के साथ सीधे संबंधित नहीं हैं.उनका निर्धारण प्रशिक्षार्थी द्वारा सक्षमता की व्यापक श्रेणियों में की गई मांगों की सीमा द्वारा किया जाता है, जैसे व्यावसायिक जानकारी, व्यावसायिक कौशल, बुनियादी कौशल और उत्तरदायित्व. जीवन पर्यंत प्रशिक्षण के दौरान व्यक्ति निचले स्तरों से उच्चतर स्तर की ओर अथवा योग्यताओं के विभिन्न स्तरों के बीच आगे बढ़ते हैं, क्योंकि वे नया प्रशिक्षण और नए कौशल प्राप्त करते हैं. प्रत्येक एनएसक्यूएफ स्तर प्रशिक्षण परिणामों के रूप में व्यक्त वर्णनकर्ताओं के एक समूह द्वारा निर्धारित किया जाता है. प्रशिक्षण के परिणामों के बीच व्यापक तुलनाओं के लिए स्तर वर्णनकर्ताओं की परिकल्पना की गई है. परंतुऐसा नहीं है कि प्रत्येक योग्यता में स्तर निरूपकों द्वारा निर्धारित सभी विशेषताएं होंगी या होनी चाहिए.

एनएसक्यूएफ स्तर पर प्रत्येक योग्यता पाठ्यचर्या, धारणात्मक संपर्क घंटों, विषयों, अध्ययन की अवधि, कार्यभार, प्रशिक्षक गुणवत्ता और प्रशिक्षण संस्थान के प्रकार के संदर्भ में और भी परिभाषित की जा सकती है, ताकि यह कहा जा सके कि प्रशिक्षण प्र्रिक्रया के अंत में प्रशिक्षार्थी की कितनी योग्यता अपेक्षित अथवा प्रयोज्य है. समान स्तर पर दो या अधिक योग्यताओं को रखना केवल यह दर्शाता है कि वे परिणाम के सामान्य स्तर के संदर्भ में मोटेतौर पर समान हैं. इससे यह पता नहीं चलता कि उनका प्रयोजन और विषयवस्तु अनिवार्यत: एक समान है. एनएसक्यूएफ से संबंधित कुछ अन्य मुद्दे नीचे दिए गए हैं:-

क)कैरिकुलम पैकेज: सक्षमता आधारित पाठ्यचर्या पैकेज के अंतर्गत सिलेबस, विद्यार्थी नियमावली, प्रशिक्षक गाइड, प्रशिक्षण नियमावली, प्रशिक्षक योग्यताएं, दिशा-निर्देशों का मूल्यांकन और परीक्षण तथा मल्टी-मीडिया पैकेज और ई-सामग्री शामिल है. इन सब चीजों का विकास प्रत्येक एनएसक्यूएफ स्तर के लिए किया जाएगा, और जहां अपेक्षित होगा, क्षेत्रगत कौशल परिषदों (एसएससीज़) द्वारा पहचान किए गए विशेष योग्यता समूहों के लिए किया जाएगा. यह कार्य मंत्रालयों/विभागों, क्षेत्रगत कौशल परिषदों जैसी एजेंसियों और निर्दिष्ट नियामक निकायों या एनएसक्यूएफ के अनुसार किन्हीं अन्य निकायों द्वारा किया जाएगा. एनएसक्यूएफ पाठ्यचर्या प्रमापीय होनी चाहिए, जिसमें कौशल अर्जित करने और उसमें प्रवेश या बहिर्गमन की सुविधा होनी चाहिए. पाठ्यचर्या का डिजाइन एक साख फ्रेमवर्क के भी अनुरूप होना चाहिए, जो अर्जित साख और अर्जित सक्षमताओं को प्रदर्शित कर सके. प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण भी एनएसक्यूएफ के अनुरूप होना चाहिए.

)उद्योग सम्बद्धता: क्योंकि एनएसक्यूएफ एक परिणाम आधारित दृष्टिकोण पर आधारित है, उद्योग जगत और नियोक्ताओं की भागीदारी एनएसक्यूएफ की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण शर्त है. इसमें व्यावसायिक शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, सामान्य शिक्षा और कौशल विकास पाठ्यक्रम एनएसक्यूएफ के अनुसार और क्षेत्रगत कौशल परिषदों (एसएससीज़), उद्योग और नियोक्ताओं के परामर्श से परिकल्पित, विकसित और वितरित किए जाएंगे. इसके अतिरिक्त प्रशिक्षण संस्थान प्रदान करने में भी उद्योग सहायता कर सकते हैं.

ग)समानांतर और शीर्षवत गतिशीलता: समानांतर और शीर्षगत गतिशीलता को अंजाम देने के लिए निम्नांकित चीजें अनिवार्य हैं:-

-प्रत्येक स्तर ऊपर और नीचे के स्तरों से सम्बद्ध है. यदि ये कदम उद्योग क्षेत्र अथवा शैक्षिक क्षेत्र में गायब होंगे, तो एनएसक्यूएफ इन लापता स्तरों की पहचान करने और उन्हें प्रस्तुत करने में सहायता करेगा.

-इन अंतरालों को भरना होगा और इस प्र्रिक्रया में प्रमुख प्रशासनिक मंत्रालय, उस क्षेत्र में पहले से प्रचालित  नियामक निकायों, क्षेत्रगत कौशल परिषदों (एसएससीज़) और एनएसक्यूसी के हिस्सा होने के नाते अन्य सम्बद्ध पक्षों के साथ सलाह मशविरा करना होगा.

-एनएसक्यूएफ द्वारा वांछित समझी जाने वाली परवर्ती गतिशीलता की मात्रा की पहचान की जाएगी, और साख ग्रहण एवं अंतरण के जरिए उसमें मदद करनी होगी. तदनुरूप, एनएसक्यूएफ को ऐसे नियामक संस्थानों (जैसे यूजीसी, एआईसीटीई, एनसीवीटी, तकनीकी और स्कूल बोर्ड आदि) की आवश्यकता पड़ेगी, जो एनएसक्यूएफ के प्रत्येक स्तर के लिए प्रवेश और बहिर्गमन के मानदंड हासिल की जाने वाली सक्षमताओं के संदर्भ में निर्धारित कर सकें, ताकि व्यावसायिक शिक्षा में शीर्षगत प्रगति को सुदृढ़ बनाया जा सके. यदि आवश्यक हो तो  इन स्तरों के जरिए प्रगति करने वाले व्यक्तियों की आपत्तियों पर विचार किया जा सकता है और उनका समाधान किया जा सकता है. उदाहरण के लिए, यह व्यवस्था कक्षा 10-12, आईटीआई और पोलीटेक्निक संस्थानों के पासआउट विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा अधिसूचित व्यावसायिक/तकनीकी/सामान्य शिक्षा के उच्चतर शिक्षा पाठ्यक्रमों और साथ ही बैचलर ऑफ वोकेशनल स्टडीज़ (बी.वीओसी) जैसे डिग्री स्तरीय पाठ्यक्रमों में प्रवेश करने में मदद करेगी. अर्जित सक्षमताओं और अर्जित साख पर विचार करते हुए, यदि वांछित हो तो पाठ्यक्रम में परिवर्तन भी संभव हो सकेगा. इसके अतिरिक्त कौशलयुक्त व्यक्तियों को विभिन्न स्तरों पर व्यावसायिक शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण से सामान्य शिक्षा और उच्चतर शिक्षा तथा इसके विपरीत परिवर्तन का विकल्प भी उपलब्ध होगा. इसके लिए स्कूल बोर्डों, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों द्वारा प्रदत्त मार्गों का इस्तेमाल किया जाएगा. यदि किसी उम्मीदवार में ‘‘सक्षमता संबंधी अंतरालों’’ की पहचान की जाएगी, तो संस्थानों द्वारा इन सक्षमताओं को अर्जित करने के लिए आदर्श पाठ्यचर्या पर आधारित ‘‘सेतु पाठ्यक्रम’’ का सहारा लिया जा सकता है.

घ) अंतर्राष्ट्रीय समकक्षता:- एनएसक्यूएफ भारतीय कौशल योग्यता स्तरों को अन्य देशों और क्षेत्रों के स्तरों से तुलना करने और उनके समरूप बनाने के माध्यम उपलब्ध कराएगा. इससे एनएसक्यूएफ-समनुरूप योग्यताधारकों को विश्व के विभिन्न भागों में काम करने और/या बसने में मदद मिलेगी. एनएसक्यूएफ विश्वभर में विकसित हो रहे विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रीय फ्रेमवर्कों के साथ परस्पर संपर्क का माध्यम भी होगा.

ङ) स्तर वर्णनकर्ता:- एनएसक्यूएफ के अंतर्गत स्तर-1 से 10 तक 10 स्तर होंगे:-

(द्ब) एनएसक्यूएफ का प्रत्येक स्तर वर्णनकर्ताओं के एक समूह से सम्बद्ध होगा, जो 5 परिणाम वक्तव्यों से युक्त होंगे और यह तय करेंगे कि उक्त स्तर का प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए किसी प्रशिक्षार्थी में सामान्यतौर पर न्यूनतम ज्ञान/कौशल और अभिलक्षण कितने अपेक्षित हैं.

(द्बद्ब) एनएसक्यूएफ के प्रत्येक स्तर का वर्णन 5 क्षेत्रों, जिन्हें वर्णनकर्ताओं का स्तर कहा जाएगा, पर आधारित होगा. ये पांच क्षेत्र इस प्रकार हैं:

 (क) प्रक्रिया,

 (ख) व्यावसायिक जानकारी

 (ग) व्यावसायिक कौशल

 (घ) बुनियादी कौशल और

 (ङ) उत्तरदायित्व.

पूर्व प्रशिक्षण की पहचान

पूर्व प्रशिक्षण की पहचान (आरपीएल), विशेषकर भारतीय संदर्भ में, जहां अधिसंख्य कार्मिकों को औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त नहीं है, एनएसक्यूएफ से सम्बद्ध एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है.  एनएसक्यूएफ उन व्यक्तियों, जिन्होंने जीवन, कार्य और स्वैच्छिक गतिविधियों के जरिए, अनौपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया है, के प्रशिक्षण को मान्यता प्रदान कराने में मदद करेगा. इसमें अर्जित ज्ञान और कौशल दोनों शामिल हैं:-

(क)औपचारिक प्रशिक्षण स्थितियों से बाहर प्राप्त ज्ञान.

(ख)कार्यस्थल, सामुदायिक स्तर और/या स्वयंसेवी क्षेत्र के जरिए अर्जित अनौपचारिक प्रशिक्षण.

(ग)सतत व्यवसाय विकास गतिविधियों से.

(घ)स्वतंत्र प्रशिक्षण से.

हितभागियों के कार्य/दायित्व:- एनएसक्यूएफ अनेक हितधारकों का संयुक्त दायित्व है और इसके विकास, कार्यान्वयन और रख-रखाव में प्रत्येक की अपनी-अपनी भूमिका है. प्रमुख हितधारकों की भूमिकाएं/दायित्व इस प्रकार हैं:-

(क) राष्ट्रीय कौशल विकास एजेंसी (एनएसडीए)

एनएसडीए को एनएसक्यूएफ के संचालन और प्रचालन का दायित्व सौंपा गया है, ताकि गुणवत्ता और मानक विशेष क्षेत्रीय जरूरतों को पूरा कर सकें. एनएसडीए मौजूदा व्यावसायिक प्रमाणन निकायों के अतिरिक्त ऐसे अन्य निकायों की स्थापना में भी मदद करेगा. उपरोक्त कार्यों का निष्पादन करते हुए एनएसडीए यह सुनिश्चित करेगा कि एनएसक्यूएफ एक गुणवत्ता आश्वासन फ्रेमवर्क के रूप में काम करे और क्षमता निर्माण में मदद करे.

(ख) क्षेत्रगत कौशल परिषदें (एसएससीज़)

क्षेत्रगत परिषदें उद्योग के नेतृत्व में राष्ट्रीय भागीदारी संगठन हैं, जो सभी हितधारकों को अपने-अपने क्षेत्रों में एकजुट करेंगी. सम्बद्ध क्षेत्र में उद्योगों की जरूरतों के आधार पर, एसएससीज द्वारा एनओएस और क्यूपीज़ विकसित किए जा रहे हैं, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में विभिन्न कार्यभूमिकाएं निभा सकें और एनएसक्यूएफ के समुचित स्तरों को समनुरूप बना सकें. वे उद्योग क्षेत्र के लिए मौजूदा व्यावसायिक प्रशिक्षण और शिक्षा प्रणाली के पूरक के रूप में काम करेंगी ताकि मात्रा एवं गुणवत्ता की दृष्टि से सभी स्तरों पर सतत एवं विकासशील आधार पर प्रशिक्षित कार्मिकों की जरूरत समुचित मूल्य शृंखला के लिए पूरी की जा सके.

(ग) केंद्रीय मंत्रालय

शीर्ष मुद्दे प्रशासनिक नियंत्रण में होने को देखते हुए केंद्रीय मंत्रालयों को नेतृत्व प्रदान करना पड़ेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कार्र्यक्रमों से सम्बद्ध सभी हितधारक एनएसक्यूएफ के तत्वावधान के अंतर्गत संस्थानों/निकायों द्वारा प्रस्तावित किए जा रहे कार्यक्रमों के अनुरूप काम करें.

(घ) राज्य सरकारें

सम्बद्ध राज्य सरकारें अपने नियंत्रण के अंतर्गत आने वाले संस्थानों/निकायों को प्रेरित करेंगी, कि वे अपने प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को एनएसक्यूएफ के अनुरूप बनाएं, क्योंकि इससे ऐसी योग्यताएं रखने वाले व्यक्तियों को अधिक गतिशीलता प्राप्त होगी. राज्य सरकारें ऐसे तौर-तरीके निर्धारित करने में भी मदद करेंगी, जो क्षेत्रीय अंतरों के लिए व्यवस्था करते हुए यह सुनिश्चित कर सकें कि एनएसक्यूएफ से सम्बद्ध गुणवत्ता आश्वासन की अनदेखी न हो.

(ङ) नियामक संस्थान

सभी वर्तमान नियामक संस्थान (जैसे यूजीसी, एआईसीटीई, एनसीवीटी, तकनीकी और स्कूल बोर्ड आदि) एनएसक्यूएफ स्तरों के संदर्भ में सक्षमताओं और योग्यताओं के प्रवेश और बहिर्गमन को परिभाषित करेंगी, ताकि सामान्य और व्यावसायिक शिक्षा दोनों में ही शीर्षवत प्रगति सुदृढ़ की जा सके और व्यावसायिक पासआउट डिग्री स्तरीय पाठ्यक्रमों सहित व्यावसायिक/ तकनीकी/सामान्य शिक्षा में उच्चतर शिक्षा के सम्बद्ध पोर्टलों में प्रवेश पा सकें.

(च) प्रशिक्षण प्रदाता/संस्थाएं/संस्थान

सभी प्रशिक्षण प्रदाताओं को अपने पाठ्यक्रमों/कार्र्यक्रमों का संचालन करना होगा ताकि एनएफक्यूएस स्तरों के साथ समनुरूपता सुनिश्चित की जा सके.

केंद्र सरकार के ड्रीम प्रॉजेक्‍ट 'ऊर्जा गंगा' के तहत देश की पहली गैस ग्रिड बनाने का काम विधिवत शुरू हो गया है। PM नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस होते हुए पश्चिम बंगाल के हल्दिया तक 2540 किलोमीट लंबी गैस ग्रिड से पाइप्‍ड नैचरल गैस (PNG) के साथ वाहनों के लिए CNG और फर्टिलाइजर कारखानों के लिए गैस की सप्‍लाई होगी।

गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया (GAIL) के डिप्टी जीएम एस.एन.यादव ने बताया कि इलाहाबाद के फूलपुर से बनारस और हल्दिया तक जाने वाली मेन गैस पाइप लाइन का काम शनिवार से शुरू कराया गया है। इसका सेंटर जौनपुर जिले को बनाया गया है। जौनपुर से फूलपुर और जौनपुर से बनारस तक के एरिया को दो हिस्सों में बांट एकसाथ ग्रिड की 30 इंच व्यास वाली पाइप लाइन बिछाने का काम शुरु होने से जल्‍द पूरा हो जाएगा।

अगले एक पखवाड़े के अंदर बनारस में PNG की पाइप लाइन बिछने लगेगी। बनारस-लखनऊ हाईवे के हरहुआ इलाके में सिटी गैस स्टेशन बनेगा तो शहरी इलाकों में वाहनों के लिए CNG स्टेशन खुलेंगे। मॉनिटरिंग के लिए बनारस में गेल का अस्थाई कार्यालय खोला गया है।

GAIL के डिप्टी जीएम के मुताबिक बनारस सिटी गैस स्टेशन के लिए काफी प्रयास के बाद हरहुआ में एक हेक्टेयर जमीन उपलब्ध हो गई है। इसका काम भी जल्द शुरू हो जाएगा। वाहनों को ईंधन सप्लाई के लिए तत्काल में दो CNG स्टेशन खोलने पर बातचीत चल रही है। पायलट प्रॉजेक्ट में महामना मदन मोहन मालवीय की बगिया काशी हिन्दू विश्वविद्यालय और डीजल रेल इंजन कारखाना कैंपस के एक हजार घरों में PNG सप्लाई देने की तैयारी है। इसके बाद शिवपुर इलाके में घर-घर पाइल के जरिए गैस पहुंचेगी।

जगदीशपुर से बनारस होते हुए पश्चिम बंगाल के हल्दिया तक गैस ग्रिड के जरिए 'ऊर्जा गंगा' परियोजना की शुरुआत बीते दिसम्बर महीने में PM मोदी ने बनारस में की थी। सूबे में अखिलेश यादव की सरकार के दौरान पाइप लाइन व गैस स्टेशन के लिए जमीन लेने से लेकर काम शुरू करने को प्रशासन, अग्निशमन, सिंचाई समेत अन्य विभागो से एनओसी तक में बाधाओं का पहाड़ खड़ा रहा। योगी आदित्यनाथ के सीएम बनते ही समस्याएं दूर भागने से परियोजना को पंख लगे हैं।

91वें एकेडमी अवार्ड में हापुड़ की बेटियों की पृष्ठभूमि पर बनी शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री ‘पीरियड: द एंड ऑफ सेंटेंस’ को ऑस्कर मिला है। इस फिल्म में मुख्य किरदार स्नेहा ने अदा किया है। उन्होंने अपने गांव काठी खेड़ा में सैनेटरी पैड बनाने वाली यूनिट में काम किया और बाकी लड़कियों को भी इसके लिए प्रेरित किया। इन लड़कियों के संघर्ष पर ही शॉर्ट फिल्म बनी थी। स्नेहा ने कहा कि उन्हें सैनेटरी पैड बनाने पर ताने सुनने को मिलते थे, लेकिन धीरे-धीरे सोच बदली और अब उनके गांव की 70% महिलाएं पीरियड्स पर बात करने में नहीं शर्मातीं। 

ऐक्‍टर इन ए लीडिंग रोल नॉमिनेशंस 
क्रिश्चियन बेले (वाइस) 
ब्रैडली कूपर (ए स्‍टार इज बॉर्न) 
विलियम डॉफो (ऐट इटरनिटी गेट) 
रामी मालेक (बोहेमियन रैप्सोडी) 
विगो मॉर्टसेन (ग्रीनबुक) 
विनर: रामी मालेक (बोहेमियन रैप्सोडी) 

बेस्ट फिल्‍म नॉमिनेशंस 
ब्लैक पैंथर 
ब्लैकक्लांसमैन 
बोहेमियन रैप्सोडी 
दी फेवरेट 
ग्रीन बुक 
रोमा 
अ स्टार इज बॉर्न 
वाइस 
विनर: ग्रीन बुक 

बेस्‍ट ऐक्‍ट्रेस नॉमिनेशंस 
जालिट्सा आपारिस्यो (रोमा) 
ग्लेन क्लोज (दी वाइफ) 
ओलिविया कोलमन (दी फेवरेट) 
लेडी गागा (अ स्टार इज बॉर्न) 
मेलिसा मैकार्थी (कैन यू एवर फॉरगिव मी) 
विनर: ओलिविया कोलमन (दी फेवरेट) 

बेस्‍ट फॉरन फिल्‍म नॉमिनेशंस 
कैपरनॉम (लेबनान) 
कोल्ड वॉर (पोलैंड) 
नेवर लुक अवे (जर्मनी) 
रोमा (मेक्सिको) 
शॉपलिफ्टर्स (जापान) 
विनर: रोमा (मेक्सिको) 

Oscars 2019 रेड कार्पेट का नजारा

  • अमेरिका, कैलिफॉर्निया के डॉल्‍बी थिअटर में आयोजित हुआ फिल्मी दुनिया का सबसे बड़े अवॉर्ड समारोह। Oscars 2019 के रेड कार्पेट का यहां देखिए नजारा।

  • Oscars 2019 रेड कार्पेट का नजारा

    ऑस्कर समारोह के रेड कार्पेट पर सबके आकर्षण का केन्द्र बने ऐक्टर-डायरेक्टर- सिंगर बिली पोर्टर, जिनकी ड्रेसिंग स्टाइल ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

  • Oscars 2019 रेड कार्पेट का नजारा

    ऐक्टर-डायरेक्टर बिली पोर्टर और ऐडम स्मिथ का अंदाज़ देखिए।

  • Oscars 2019 रेड कार्पेट का नजारा

    अमेरिकन ऐक्टर रामी मालेक को मिला बेस्ट ऐक्टर इन अ लीडिंग रोल के लिए ऑस्कर अवॉर्ड। (Pic courtesy: Twitter)

  • Oscars 2019 रेड कार्पेट का नजारा

    अमेरिकन ऐक्ट्रेस और सिंगर लॉरा मरानो यलो गाउन में काफी खूबसूरत दिख रही हैं यहां।

  • Oscars 2019 रेड कार्पेट का नजारा

    जब 30 साल के करियर में अमेरिकन फिल्म डायरेक्टर, प्रड्यूसर और राइटर स्पाइक ली को मिला पहला ऑस्कर अवॉर्ड। (Pic courtesy: Twitter)

  • Oscars 2019 रेड कार्पेट का नजारा

    अवॉर्ड मिलने की खुशी देखिए, सैमुअल जैक्सन की गोद में चढ़ गए स्पाइक ली। (Pic courtesy: Twitter)

  • Oscars 2019 रेड कार्पेट का नजारा

    लेडी गागा को 'शैलो' के लिए मिला पहला ऑस्कर अवॉर्ड। (pic: Twitter)

  • Oscars 2019 रेड कार्पेट का नजारा

    पर्पल गाउन में अमेरिकन टीवी पर्सनैलिटी शांगेला।

  • Oscars 2019 रेड कार्पेट का नजारा

    91वें अकैडमी अवॉर्ड्स में पहुंचीं अमेरिकन टेलिविजन होस्ट मरिया मेनॉनोस, जो यलो गाउन में दिखीं।

  • Oscars 2019 रेड कार्पेट का नजारा

    अकैडमी अवॉर्ड्स में इस साल यलो ड्रेसिंग का काफी चार्म नजर आया।

  • Oscars 2019 रेड कार्पेट का नजारा

  • अमेरिकन ऐक्ट्रेस सिंगर और ऐक्टिविस्ट जेनिफर लेविस (बाईं तरफ) और टेलिविजन पर्सनैलिटी शांगेला ऑस्कर के रेड कार्पेट पर इस अंदाज़ में नजर आईं।

  • Oscars 2019 रेड कार्पेट का नजारा

  • कम्पोज़र टेरेंस ब्लैंचर्ड और रॉबिन बर्जेस पहुंचे ऑस्कर समारोह में।

डायरेक्शन नॉमिनेशंस 
स्‍पाइक ली (ब्लैकक्लांसमैन) 
पावेल पॉवलीकोसकी (कोल्‍ड वॉर) 
योरगॉस लैंथीमॉस (द फेवरिट) 
अल्‍फांसो क्‍यूरॉन (रोमा) 
ऐडम (वाइस) 
विनर: अल्‍फांसो क्‍यूरॉन (रोमा) 

बेस्‍ट ऑरिजनल सॉन्ग नॉमिनेशंस 
ऑल दी स्टार्स (ब्लैक पैंथर) 
आई विल फाइट (आरबीजी) 
शैलो (अ स्टार इज़ बॉर्न) 
दी प्लेस व्हेयर लॉस्ट थिंग्स गो (मैरी पॉपिंस रिटर्न्स) 
व्हेन अ काउबॉय ट्रेड्स हिज़ स्पर्स फॉर विंग्स (दी बैलड ऑफ बस्टर स्क्रग्स) 
विनर: शैलो (अ स्टार इज़ बॉर्न) 

बेस्‍ट ऑरिजन स्‍क्रीनप्‍ले नॉमिनेशंस 
फर्स्ट रिफॉर्म्ड 
ग्रीन बुक 
रोमा 
द फेवरिट 
वाइस 
विनर: ग्रीन बुक 

बेस्ट सिनेमटॉग्रफी नॉमिनेशंस 
कोल्ड वॉर 
द फेवरिट 
नेवर लुक अवे 
रोमा 
अ स्टार इज बॉर्न 
विनर: रोमा 

बेस्ट सपॉर्टिंग ऐक्टर नॉमिनेशंस 
मेहरशाला अली (ग्रीन बुक) 
ऐडम ड्राइवर (ब्लैकलैंसमैन) 
सैम एलियट (अ स्टार इज़ बॉर्न) 
रिचर्ड. ई. ग्रांट (कैन यू एवर फॉरगिव मी) 
सैम रॉकवेल (वाइस) 
विनर: मेहरशाला अली (ग्रीन बुक) 

बेस्ट सपॉर्टिंग ऐक्ट्रेस नॉमिनेशंस 
ऐमी ऐडम्स (वाइस) 
मरीना दे तावीरा (रोमा) 
रेजिना किंग (इफ बील स्ट्रीट कुड टॉक) 
एमा स्टोन (द फेवरिट) 
रेचल वाइस (द फेवरिट) 
विनर: रेजिना किंग (इफ बील स्ट्रीट कुड टॉक) 

बेस्‍ट डायरेक्‍टर नॉमिनेशंस 
स्पाइक ली (ब्लैकक्लांसमैन) 
पावेल पाव्लिकोवस्की (कोल्ड वॉर) 
योरगोस लेंतिमोस (द फेवरिट) 
अलफॉन्ज़ो क्यूरॉन (रोमा) 
ऐडम मैके (वाइस) 
विनर: अलफॉन्ज़ो क्यूरॉन (रोमा) 

कॉस्ट्यूम डिजाइन नॉमिनेशंस 
मैरी जोफर्स (दी बैलड ऑफ बस्टर स्क्रग्स) 
रूथ कॉर्टर (ब्‍लैक पैंथर) 
सैंडी पॉवेल (मैरी पॉपिन्‍स रिटर्न्‍स) 
सैंडी पॉवेल ( द फेवरिट) 
अलेक्‍जेंडर बार्यन (मैरी क्‍वीन ऑफ स्‍कॉट्स) 
विनर: रूथ कॉर्टर (ब्‍लैक पैंथर) 

22 फरवरी 2017 को उच्चतम न्यायालय ने यह साफ कर दिया कि सतलुज यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के निर्माण की इजाजत देने वाले उसके फैसले को क्रियान्वित करना है। साथ ही, अंतरराज्यीय जल विवाद को लेकर 23 फरवरी को एक राजनीतिक पार्टी के प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर हरियाणा और पंजाब से ‘किसी भी कीमत पर’ कानून व्यवस्था कायम रखने को कहा है। हरियाणा की मुख्य विपक्षी पार्टी इंडियन नेशनल लोक दल (इनेलो) ने अपने कार्यकर्ताओं को गुरुवार को अंबाला में जमा होने और एसवाईएल नहर की खुदाई शुरू करने के लिए पंजाब के अंदर मार्च करने को कहा है।

न्यायमूर्ति पीसी घोष और न्यायमूर्ति अमिताव रॉय की सदस्यता वाली एक पीठ ने कहा, ‘हरियाणा और पंजाब को किसी भी कीमत पर कानून व्यवस्था कायम रखनी चाहिए। पंजाब और हरियाणा कानून के तहत कार्रवाई करेंगे. कानून व्यवस्था का किसी भी तरीके से उल्लंघन नहीं होना चाहिए।’ हरियाणा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान की दलील पर संज्ञान लेते हुए पीठ ने कहा कि नहर की इजाजत देने वाला शीर्ष न्यायालय का फैसला और आदेश को क्रियान्वित करना है और नहर का निर्माण करना है।

हालांकि, पीठ ने पंजाब का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी की दलीलों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों ओर के अच्छे लोगों को साथ बैठना चाहिए और मुद्दे का एक सौहार्द्रपूर्ण हल निकालना चाहिए। साथ ही कहा कि यह मौजूदा संभावनाओं में एक है। इसने केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलीसीटर जनरल रंजीत कुमार से कहा कि यदि दोनों पक्ष मामला सुलझाने को इच्छुक हैं तो केंद्र सरकार एक मध्यस्थ के तौर पर काम कर सकती है। अदालत ने कहा कि अगले आदेश तक यथास्थिति बनाए रखने का इसके पहले का अंतरिम आदेश कायम रहेगा। बहरहाल, मामले की अगली सुनवाई की तारीख दो मार्च तय की है। साथ ही, पंजाब की यह दलील फिर से खारिज कर दी कि मामला चुनाव नतीजों के बाद के लिए सूचीबद्ध किया जाए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण आवास योजना ‘ग्रामीण’ के क्रियान्वयन को अनुमति प्रदान कर दी है। इस योजना के तहत सभी बेघर और जीर्ण-शीर्ण घरों में रहने वाले लोगों को पक्का मकान बनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इस परियोजना के क्रियान्वयन हेतु 2016-17 से 2018-19 तक तीन वर्षों में 81975 रुपये खर्च होंगे।

यह प्रस्तावित किया गया है कि परियोजना के अंतर्गत वर्ष 2016-17 से 2018-19 के कालखंड में एक करोड़ घरों को पक्का बनाने के लिए मदद प्रदान की जाएगी। दिल्ली और चंडीगढ़ को छोड़ कर यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में पूरे भारत में क्रियान्वित की जाएगी। मकानों की क़ीमत केंद्र और राज्यों के बीच बांटी जाएगी।

क) प्रधानमंत्री आवास योजना की ग्रामीण आवास योजना- ग्रामीण का क्रियान्वयन। 

ख) ग्रामीण क्षेत्रों में एक करोड़ आवासों के निर्माण के लिए 2016-17 से 2018-19 तक तीन वर्षों में मदद प्रदान की जाएगी। 

ग) समतल क्षेत्रों में प्रति एकक 1,20,000 तक एवं पहाड़ी क्षेत्रों में 1,30,000 तक सहायता में बढ़ोतरी। 

घ) 21,975 करोड़ रुपए की अतिरिक्त वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से की जाएगी।

ड.) लाभान्वितों की पहचान के लिए सामाजिक-आर्थिक-जातीय जनगणना- 2011 का उपयोग। 

च) परियोजना के तहत लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी सहायता हेतु नेशनल टेकनिकल सपोर्ट एजेंसी का गठन।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ को मंजूरी दी जो किसानों के कल्याण के लिए लीक से हटकर एक अहम योजना है। किसान हितैषी सरकार का नया तोहफा:- 

(1). लोहिड़ी, पोंगल एवं बीहू जैसे त्यौहारों के शुभ अवसर पर किसान हितैषी सरकार ने किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के रूप में एक बड़ा तोहफा दिया। यह योजना खरीफ 2016 से लागू  है।

(2). किसानों के लिए बीमा योजनाएं समय-समय पर बनती रहीं हैं, किंतु इसके बावजूद अब तक कुल कवरेज 23 प्रतिशत हो सका है। 

(3). सभी योजनाओं की समीक्षा कर अच्छे फीचर शामिल कर किसान हित में और नए फीचर्स जोड़कर फसल बीमा योजना बनाई गई है। इस प्रकार यह योजना पुरानी किसी भी योजना से किसान हित में बेहतर है। (4). प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत फसल के अनुसार किसान द्वारा देय प्रीमियम राशि बहुत कम कर दी गई है जो निम्नानुसार हैः-

क्र. सं.             फसल किसान द्वारा देय अधिकतम बीमा प्रभार                     (बीमित राशि का प्रतिशत) 

1.                खरीफ                                                                               2.0% 

2.                रबी                                                                                   1.5% 

3.                वार्षिक वाणिज्‍यिक एवं बागवानी फसलें                                      5%

(5). वर्ष 2010 से प्रभावी Modified NAIS में प्रीमियम अधिक हो जाने की दशा में एक कैप निर्धारित रहती थी जिससे कि सरकार के द्वारा वहन की जाने वाली प्रीमियम राशि कम हो जाती थी, परिणामतः किसान को मिलने वाली दावा राशि भी अनुपातिक रूप से कम हो जाती थी। उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में धान की फसल के लिए 22 प्रतिशत Actuarial Premium था। किसान को 30 हजार रुपए के Sum Insured पर कैप के कारण मात्र 900 रुपए और सरकार को 2400 रुपए प्रीमियम देना पड़ता था। किंतु शतप्रतिशत नुकसान की दशा में भी किसान को मात्र 15 हजार रुपए की दावा राशि प्राप्त होती। 

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 30 हजार Sum Insured पर 22 प्रतिशत Actuarial Premium आने पर किसान मात्र 600 रुपए प्रीमियम देगा और सरकार 6000 हजार रुपए का प्रीमियम देगी। शतप्रतिशत नुकसान की दशा में किसान को 30 हजार रुपए की पूरी दावा राशि प्राप्त होगी अर्थात उदाहरण के प्रकरण में किसान के लिए प्रीमियम 900 रुपए से कम होकर 600 रुपए। दावा राशि 15000 रुपए के स्थान पर 30 हजार रुपए। 

(6). बीमित किसान यदि प्राकृतिक आपदा के कारण बोनी नहीं कर पाता तो यह जोखिम भी शामिल है उसे दावा राशि मिल सकेगी।

(7). ओला, जलभराव और लैण्ड स्लाइड जैसी आपदाओं को स्थानीय आपदा माना जाएगा। पुरानी योजनाओं के अंतर्गत यदि किसान के खेत में जल भराव (पानी में डूब) हो जाता तो किसान को मिलने वाली दावा राशि इस पर निर्भर करती कि यूनिट आफ इंश्योरेंस (गांव या गांवों के समूह) में कुल नुक्सानी कितनी है। इस कारण कई बार नदी नाले के किनारे या निचले स्थल में स्थित खेतों में नुकसान के बावजूद किसानों को दावा राशि प्राप्त नहीं होती थी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में इसे स्थानीय हानि मानकर केवल प्रभावित किसानों का सर्वे कर उन्हें दावा राशि प्रदान की जाएगी।

(8). पोस्ट हार्वेस्ट नुकसान भी शामिल किया गया है। फसल कटने के 14 दिन तक यदि फसल ख्रेत में है और उस दौरान कोई आपदा आ जाती है तो किसानों को दावा राशि प्राप्त हो सकेगी। 

(9). योजना में टैक्नोलॉजी का उपयोग किया जाएगा जिससे की फसल कटाई/नुकसान का आकलन शीघ्र और सही हो सके और किसानों को दावा राशि त्वरित रूप से मिल सके। रिमोट सेंसिंग के माध्यम से फसल कटाई प्रयोगों की संख्या कम की जाएगी। फसल कटाई प्रयोग के आंकड़े तत्कल स्मार्टफोन के माध्यम से अप-लोड कराए जाएंगे।

आर्थिक स्वतंत्रता के एक वार्षिक सूचकांक में भारत का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है और यह 143 के स्थान पर रहा है। एक अमेरिकी शोध संस्थान ‘द हेरिटेज फाउंडेशन’ की ‘इंडेक्स ऑफ इकनॉमिक फ्रीडम’ में भारत की रैकिंग उसके पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान समेत कई दक्षिण एशियाई देशों से पीछे है। इसका प्रमु़ख कारण भारत में बाजार को ध्यान में रखकर किए गए आर्थिक सुधारों से होने वाली प्रगति का ‘असमान’ होना बताया गया है।

इस रपट में कहा गया है कि भारत में पिछले पांच साल में औसतन सात प्रतिशत की दर से सतत वृद्धि हुई है लेकिन यह वृद्धि नीतियों में गहरे तक नहीं समाई है जिससे कि आर्थिक स्वतंत्रता का संरक्षण किया जा सके। इस कंजरवेटिव राजनीतिक विचारधारा के शोध समूह की रपट में भारत को ‘अधिकांशतया गैर-खुली’ अर्थव्यवस्था की श्रेणी में रखा गया है क्योंकि भारत में बाजार आधारित सुधारों से हुई प्रगति ‘असमान’ रही है।इसमें कहा गया है कि राज्य ने लोक उपक्रमों के माध्यम से कई क्षेत्रों में ‘अपनी एक व्यापक उपस्थिति बनाए रखी है’। इसके अलावा प्रतिबंधात्मक और भारी-भरकम नियामकीय वातावरण से उद्यमिता हतोत्साहित होती है। यदि यह ना हो तो निजी क्षेत्र का व्यापक प्रसार किया जा सकता है। इस सूचकांक में भारत ने कुल 52.6 अंक हासिल किए जो पिछले साल के मुकाबले 3.6 अंक कम है।

पिछले साल इस सूचकांक में भारत की रैंकिंग 123 थी।इस सूचकांक में हांगकांग, सिंगापुर और न्यूजीलैंड शीर्ष पर रहे हैं। दक्षिण एशियाई देशों में भारत से नीचे अफगानिस्तान 163 और मालदीव 157वें स्थान पर हैं, जबकि इस सूचकांक में नेपाल का स्थान 125, श्रीलंका का 112, पाकिस्तान का 141, भूटान का 107 और बांग्लादेश का 128 है। चीन ने इस सूचकांक में 57.4 अंक हासिल किए जो पिछले साल के मुकाबले 5.4 अंक ज्यादा है। इस साल उसका स्थान 111 वां रहा है। अमेरिका 75.1 अंक हासिल कर 17वें स्थान पर रहा है। इस सूचकांक में वैश्विक औसत 60.9 अंक रहा जो पिछले 23 साल में रिकॉर्ड उच्चस्तर है।

15 Feb. 2017 को भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने एक ही रॉकेट के माध्यम से रिकॉर्ड 104 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण करके इतिहास रच दिया है। इन उपग्रहों में भारत का पृथ्वी पर्यवेक्षण उपग्रह भी शामिल है। यह प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से किया गया है। किसी एकल मिशन के तहत प्रक्षेपित किए गए उपग्रहों की यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। ध्रुवीय अंतरिक्ष प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी37 ने सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लॉन्च पैड से सुबह नौ बजकर 28 मिनट पर उड़ान भरी।

इसने सबसे पहले काटरेसैट-2 श्रेणी के उपग्रह को कक्षा में प्रवेश कराया और इसके बाद शेष 103 नैनो उपग्रहों को 30 मिनट में प्रवेश कराया गया। इनमें 96 उपग्रह अमेरिका के थे। अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिए जाने पर मिशन कंट्रोल सेंटर के वैज्ञानिकों में खुशी की लहर दौड़ गई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष एएस किरण कुमार ने घोषणा की, ‘‘सभी 104 उपग्रहों को सफलतापूर्वक कक्षा में प्रवेश कराया गया। इसरो के पूरे दल को उनके द्वारा किए गए इस अद्भुत काम के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।’’ एक बार में सबसे ज्यादा उपग्रह प्रक्षेपित करने का श्रेय अब तक रूसी अंतरिक्ष एजेंसी के पास था। उसने एक बार में 37 उपग्रहों को प्रक्षेपित किया था। इसरो ने जून 2015 में एक मिशन में 23 उपग्रह प्रक्षेपित किए थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफल प्रक्षेपण